
माखन नगर में इस बार शिवरात्रि का मेला इतिहास रच गया है—लेकिन ऐसे नहीं, जैसे लोग याद रखना चाहें। वर्षों से लगने वाला सात दिवसीय मेला इस बार परीक्षा की आड़ में प्रशासनिक बेरुखी का शिकार होता नजर आया।
हालांकि कागजों में सब ठीक-ठाक रहा—15 फरवरी को मेले का औपचारिक उद्घाटन भी हो गया—पर हकीकत में उद्घाटन का पता न तो जनता को चला, न मेले को।
नगर में हर साल लगने वाला मेला इस बार “झूलों तक सिमटकर” रह गया है। दुकानें नदारद हैं, रौनक गायब है और श्रद्धालु सोच में पड़ गए हैं कि यह मेला है या प्रशासनिक अभ्यास।
दिलचस्प बात यह है कि पास के नर्मदापुरम और सोहागपुर में मेले पूरे ठाठ से लगे—वहां परीक्षाएं भी थीं, और मेले भी। लेकिन माखन नगर में परीक्षा ऐसी आई कि मेला ही पास नहीं हो पाया।
मेला देखने पहुंचे चिरौंजी लाल कहते हैं “बरसों से मेला देख रहे हैं, ऐसा पहली बार हुआ कि मेला मजबूरी में लगाया गया। लगता है प्रशासन ने मेला इसलिए लगाया कि कोई यह न कह दे कि लगाया ही नहीं।”
सीएमओ जी.एस. राजपूत ने देनवापोस्ट को बताया कि “20 तारीख से मेला पूरे रूप में लगेगा। अभी सिर्फ झूले हैं, दुकानें आ रही हैं। दुकानदार समय पर नहीं पहुंचे, इसलिए मेला लेट हो गया।”