बाग मुगालिया में दशहरा उत्सव: अज्ञात बदमाशों ने सुबह-सुबह रावण के पुतले में लगा दी आग, पुलिस जांच में जुटी

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भोपाल: भोपाल के बाग मुगालिया इलाके में दशहरा (dussehr) के पावन पर्व पर एक शर्मनाक और अजीबोगरीब घटना ने सामुदायिक उत्सव की रौनक को बिगाड़ कर रख दिया। अटल दशहरा (dussehr) उत्सव समिति द्वारा आयोजित होने वाले रावण दहन के कार्यक्रम को एक बड़ा झटका तब लगा, जब गुरूवार सुबह कुछ अज्ञात शरारती तत्वों ने मैदान में खड़े रावण के विशाल पुतले में आग लगा दी। यह घटना इतनी तेजी से अंजाम दी गई कि मौके पर मौजूद लोग कुछ कर नहीं पाए।

सुबह की नींद में खलल डालती आग

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह असामान्य घटना सुबह लगभग 6 बजे की है, जब पूरा इलाका अभी सुबह की नींद में ही था। तभी अचानक बिना नंबर प्लेट वाली एक नई लाल रंग की कार मैदान के पास पहुंची। कार में तीन युवक और एक युवती सवार थे। गाड़ी रुकते ही उनमें से एक युवक तेजी से कार से उतरा और दौड़ता हुआ रावण के पुतले के पास पहुंचा। उसने पहले से तैयार सामग्री का इस्तेमाल करते हुए पुतले में आग लगा दी।

आग लगाते ही वह युवक वापस उसी कार में बैठा और उसके साथी उसे लेकर तेज रफ्तार में वहां से फरार हो गए। इस पूरी घटना में मात्र कुछ सेकंड का समय लगा। इस दौरान, रावण का पुतला धू-धू कर जलने लगा और उसमें लगी आतिशबाजी के भड़ाके की आवाज से आसपास के लोग चौंक गए।

स्थानीय निवासियों और समिति में रोष

घटना को देखने वाले एक स्थानीय निवासी रामकुमार यादव ने बताया, “यह सब इतनी जल्दी हुआ कि हम समझ ही नहीं पाए कि क्या हो रहा है। सुबह का समय था, हमने एक कार को तेजी से आते और जाते देखा, और अगले ही पल रावण का पुतला जलता हुआ नजर आया। किसी को कुछ करने का मौका ही नहीं मिला।”

अटल दशहरा (dussehra)उत्सव समिति के सदस्य आदित्य दुबे ने इस घटना पर गहरा अफसोस और क्रोध जताया। उन्होंने कहा, “हमने महीनों की मेहनत से इस कार्यक्रम की तैयारी की थी। आज शाम को यहां हजारों लोगों के जुटने की उम्मीद थी। धूमधाम से रावण दहन होना था, लेकिन इन अज्ञात युवकों ने सुबह ही पुतले में आग लगाकर न सिर्फ हमारी मेहनत पर पानी फेर दिया, बल्कि समुदाय की religious feelings के साथ खिलवाड़ किया है।”

पुलिस ने शुरू की जांच, कार का पता लगाने में जुटी

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, अटल दशहरा (dussehra) उत्सव समिति ने मिसरोद थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस मामले की तहकीकात में जुट गई है।

मिसरोद थाने के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमने घटनास्थल का मुआयना किया है। आसपास के CCTV फुटेज को एकत्रित और जांचा जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए गए हैं। फिलहाल, हमारी टीम उस लाल रंग की कार को ढूंढने में जुटी है, जिसका वर्णन गवाहों ने किया है। कार के बिना नंबर होने से जांच में थोड़ी चुनौती है, लेकिन हम अन्य रास्तों से भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।”

पुलिस का मानना है कि आसपास के CCTV कैमरों से कार के रूट और शक्सियतों के बारे में कुछ सुराग मिल सकते हैं। साथ ही, कार में मौजूद युवती का विवरण भी एक अहम सुराग हो सकता है।

सामाजिक प्रतिक्रिया: संस्कृति के लिए दुर्भाग्यपूर्ण कृत्य

दशहरा (dussehra) जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व पर हुई इस घटना ने पूरे इलाके में नाराजगी और निराशा फैला दी है। स्थानीय लोग इस घटना को न सिर्फ एक शरारत, बल्कि समाज और संस्कृति के प्रति एक अशोभनीय हमला मान रहे हैं।

एक सामाजिक कार्यकर्ता सीमा शर्मा ने कहा, “यह सिर्फ एक पुतले को जलाने की घटना नहीं है, बल्कि हमारे सामूहिक उत्सव और आस्था पर एक प्रहार है। ऐसे युवा जो ऐसे कृत्यों को अंजाम देते हैं, उन्हें समाज और कानून दोनों की सजा मिलनी चाहिए। यह हम सभी के लिए एक सबक है कि युवाओं को सही दिशा देने की कितनी आवश्यकता है।”

उत्सव पर गहरा धब्बा

बाग मुगालिया की यह घटना एक सुनियोजित शरारत लगती है, जिसने न केवल एक सामुदायिक आयोजन को बर्बाद किया, बल्कि शहर के सांस्कृतिक माहौल को भी प्रभावित किया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से उम्मीद है कि जल्द ही दोषियों का पता चल जाएगा। हालांकि, शाम को होने वाले मुख्य कार्यक्रम को समिति ने रद्द कर दिया है, जिससे सैकड़ों परिवारों की खुशी और उमंग पर पानी फिर गया है। यह घटना एक कड़वी याद के रूप में इतिहास में दर्ज हो गई है और सामुदायिक सद्भाव को बनाए रखने की चुनौती को भी रेखांकित करती है।

Disclaimer: यह खबर स्थानीय गवाहों, पुलिस रिपोर्ट और आयोजन समिति के सदस्यों के बयानों पर आधारित है। घटना की और अधिक जानकारी मिलने पर इसे अपडेट किया जाएगा।

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