ग्रामीणों की सतर्कता से शिक्षा व्यवस्था पर दबाव, जांच के लिए पहुंचे बीआरसी

माखन नगर। ग्राम सेंदरवाड़ा में शासकीय स्कूलों में शिक्षकों की अनियमित उपस्थिति को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब संगठित मुहिम का रूप ले चुका है। समय पर विद्यालय नहीं पहुंचने वाले शिक्षकों के खिलाफ ग्रामीणों ने स्वयं निगरानी शुरू कर दी है और प्रतिदिन स्कूल जाकर स्थिति का जायजा लिया जा रहा है।

ग्रामीणों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, गांव के लोग रोजाना निर्धारित समय पर स्कूल पहुंचते हैं और जो शिक्षक समय पर शाला नहीं आते, उनकी लिखित शिकायत तैयार कर पंचनामा बनाते हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दी जाती है। इसी कड़ी में 29 जनवरी 2026 को भी ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कार्रवाई न होने से नाराज़ ग्रामीणों ने शिकायतों का सिलसिला जारी रखा।

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद बीआरसी श्याम सिंह पटेल शासकीय एकीकृत शाला सेंदरवाड़ा में जांच के लिए पहुंचे। जांच के दौरान सामने आया कि स्कूल में पदस्थ पांच शिक्षकों में से केवल दो शिक्षक ही उपस्थित थे।
जांच में यह भी सामने आया कि
ललित सोनी एवं पूरन सिंह मीणा बीएलओ (BLO) कार्य का हवाला देकर विद्यालय नहीं पहुंचे थे। अभिलाषा राजपूत मेडिकल अवकाश पर पाई गईं।

केवल दो शिक्षक ही समय पर विद्यालय में मौजूद मिले।

बीआरसी श्याम सिंह पटेल ने देनवापोस्ट को जानकारी देते हुए बताया कि सभी शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे समय पर विद्यालय पहुंचें और उपस्थिति मोबाइल ऐप के माध्यम से अनिवार्य रूप से दर्ज करें। साथ ही भविष्य में लापरवाही पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

वहीं ग्राम की जागरूक ग्रामीण भगवती पटेल ने कहा कि जब तक स्कूल की व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तब तक ग्रामीण प्रतिदिन सुबह 11 बजे विद्यालय पहुंचकर निरीक्षण करेंगे। जो भी शिक्षक अनुपस्थित मिलेगा, उसका पंचनामा बनाकर उच्च अधिकारियों को सूचित किया जाएगा।

ग्रामीणों का साफ कहना है कि बच्चों की शिक्षा के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनका यह भी कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो वे इस मुद्दे को जिला स्तर तक ले जाएंगे।

ग्रामीणों की इस पहल ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब निगरानी व्यवस्था मौजूद है, तो फिर शिक्षकों की अनियमितता पर समय पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है।

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