मध्यप्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारियों पर लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार जारी

मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। लगभग हर दूसरे दिन प्रदेश के किसी न किसी जिले में रिश्वत लेते हुए अधिकारी-कर्मचारी रंगेहाथों पकड़े जा रहे हैं। इसके बावजूद रिश्वतखोरी पर लगाम नहीं लग पा रही है। ताजा मामला नरसिंहपुर जिले का है, जहां सहकारिता निरीक्षक संजय दुबे को 3 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने रंगेहाथों गिरफ्तार किया है।
वेतन जारी करने के नाम पर मांगी रिश्वत
8 दिसंबर को गोटेगांव तहसील के गांव सिमरिया निवासी देवी प्रसाद तिवारी, जो समिति प्रबंधक हैं, ने लोकायुक्त जबलपुर के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि अक्टूबर और नवंबर माह का वेतन रुका हुआ था। इस संबंध में जब वह सहकारिता निरीक्षक संजय दुबे से मिले, तो उन्होंने वेतन जारी करने के बदले 3,000 रुपये की रिश्वत की मांग की।
फरियादी की शिकायत को लोकायुक्त टीम ने प्राथमिक जांच में सही पाया, जिसके बाद निरीक्षक को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया।
जाल बिछाकर की गई कार्रवाई, निरीक्षक गिरफ्तार
11 दिसंबर, गुरुवार को लोकायुक्त की टीम ने फरियादी देवी प्रसाद को निर्धारित रकम के साथ नरसिंहपुर डीआर ऑफिस भेजा। जैसे ही निरीक्षक संजय दुबे ने रिश्वत के 3 हजार रुपये स्वीकार किए, मौके पर सादे कपड़ों में मौजूद लोकायुक्त टीम ने उन्हें रंगेहाथों पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद लोकायुक्त ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
लगातार हो रही कार्रवाई, रिश्वतखोरी पर भी नहीं लग रही लगाम प्रदेश में लगातार कार्रवाई के बावजूद रिश्वत मांगने और लेने वालों का सिलसिला थम नहीं रहा है। लोकायुक्त की टीम ने हाल के दिनों में कई जिलों में ऐसे मामलों में पकड़-दकड़ की है।
इस ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि लोकायुक्त भ्रष्टाचार के मामलों पर कड़ी नजर रखे हुए है और शिकायत मिलते ही तुरंत कार्रवाई कर रही है।