कोंडरवाड़ा पंचायत में सामुदायिक भवन पर विवाद: 25 लाख की योजना अटकी, अतिक्रमण बना विकास में बाधा

samudayik-bhavan

माखननगर। नर्मदापुरम जिले की जनपद पंचायत माखननगर की ग्राम पंचायत कोंडरवाड़ा में विकास की एक बड़ी योजना फिलहाल विवादों में घिर गई है। शासन द्वारा पंचायत को सामुदायिक भवन (samudayik-bhavan) निर्माण के लिए 25 लाख रुपये की स्वीकृति तो मिल चुकी है, लेकिन भवन निर्माण की निर्धारित भूमि पर अतिक्रमण का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने फिलहाल भूमि पूजन पर रोक लगा दी है।

ग्रामीणों की उम्मीदों को झटका

ग्राम कोंडरवाड़ा में लंबे समय से सामुदायिक भवन (samudayik-bhavan) की मांग की जा रही थी। पंचायत स्तर से लेकर जनपद तक कई बार प्रस्ताव भेजे जाने के बाद आखिरकार शासन से स्वीकृति प्राप्त हुई। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब गांव में एक ऐसी इमारत बनेगी जहां सामाजिक कार्यक्रम, ग्राम सभाएं और सरकारी बैठकें एक ही स्थान पर हो सकेंगी। लेकिन निर्माण शुरू होने से ठीक पहले भूमि विवाद ने इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

जेसीबी रोकने से बढ़ा विवाद

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भूमि (samudayik-bhavan) पूजन से एक दिन पहले पंचायत ने निर्माण स्थल की सफाई कराने के लिए जेसीबी मशीन भेजी थी। लेकिन जब जेसीबी वहां पहुंची तो ग्राम निवासी सतीश मीना ने मशीन चलाने से रोक दिया। उनका कहना था कि “यह जगह मेरी है, इस पर बिना अनुमति कोई काम नहीं होगा।” इस विवाद के बाद पंचायत प्रतिनिधियों को काम रोकना पड़ा।

भूमि (samudayik-bhavan) पर कोई अवैध कब्जा नहीं

देनवा पोस्ट से बातचीत में सतीश मीना ने बताया कि — “मैंने इस (samudayik-bhavan) भूमि पर कोई अवैध कब्जा नहीं किया है। मैंने इस जमीन का पट्टा आवेदन के माध्यम से शासन से मांगा है, लेकिन अभी तक मुझे कोई जवाब नहीं मिला है। जब तक पट्टे पर निर्णय नहीं होता, तब तक किसी को यहां काम नहीं करने दूंगा।”

सतीश मीना का कहना है कि वे सिर्फ अपने अधिकार की बात कर रहे हैं और प्रशासन यदि पट्टे को खारिज कर देता है तो वे विरोध नहीं करेंगे।

किसी के पास वैध दस्तावेज हैं तो प्रशासन उनकी जांच करे

ग्राम पंचायत कोंडरवाड़ा के सरपंच गुलाब सिंह ने बताया कि पंचायत को शासन से सामुदायिक भवन (samudayik-bhavan) निर्माण हेतु 25 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई है। इसके लिए शासकीय भूमि चिन्हित की गई थी।

“जब हम सफाई के लिए जेसीबी लेकर पहुंचे, तो सतीश मीना ने मशीन रुकवा दी और कहा कि यह मेरी जमीन है, मेरे पास पट्टे के कागज हैं। हमने उनसे कागज दिखाने को कहा, लेकिन उन्होंने कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया।”

सरपंच ने यह भी कहा कि यदि किसी के पास वैध दस्तावेज हैं तो प्रशासन उनकी जांच करे, लेकिन विकास कार्य किसी व्यक्ति विशेष के कारण नहीं रुकना चाहिए।

ग्रामीणों ने जताई नाराज़गी

ग्राम के कई लोगों ने इस घटना पर नाराज़गी जताई। ग्रामीण असीम दत्त ने देनवा पोस्ट को बताया — “ग्राम के विकास के लिए सामुदायिक भवन (samudayik-bhavan) जरूरी है। लेकिन कुछ लोगों की व्यक्तिगत स्वार्थ और प्रशासन की लापरवाही के कारण योजना ठप पड़ गई है। अगर प्रशासन समय रहते सीमांकन और भूमि सत्यापन कर लेता तो यह स्थिति नहीं बनती।”

ग्रामीणों का कहना है कि शासन की योजना जनता के हित के लिए होती है, इसलिए प्रशासन को जल्द ही भूमि विवाद का समाधान निकालना चाहिए ताकि निर्माण कार्य शुरू हो सके।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की सबसे बड़ी चुनौती भूमि विवाद और सीमांकन की अस्पष्टता बनती जा रही है। जनपद और तहसील स्तर पर अक्सर ऐसी शिकायतें आती हैं कि शासकीय भूमि का सीमांकन स्पष्ट नहीं होने के कारण योजनाएं रुक जाती हैं।

कोंडरवाड़ा का यह मामला भी उसी का उदाहरण है, जहां 25 लाख की स्वीकृति के बावजूद प्रशासनिक ढिलाई के कारण परियोजना शुरू नहीं हो पा रही है।

क्या है आगे की स्थिति

जनपद पंचायत माखननगर के अधिकारियों के संज्ञान में मामला आ गया है और राजस्व विभाग को सीमांकन एवं जांच के लिए पत्र भेजन की तैयारी है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि भवन (samudayik-bhavan) निर्माण कहां और कब शुरू किया जा सकता है।

अगर जांच में भूमि को शासकीय पाया गया तो प्रशासन सतीश मीना के दावे को निरस्त कर सकता है और सामुदायिक भवन (samudayik-bhavan) का भूमि पूजन दोबारा किया जाएगा। वहीं अगर भूमि विवादित पाई जाती है तो पंचायत को वैकल्पिक भूमि चिन्हित करनी पड़ सकती है।

विकास योजनाओं के लिए ज़रूरी है स्पष्टता

ग्राम स्तर पर विकास योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए भूमि की स्थिति और स्वामित्व की स्पष्टता बेहद आवश्यक है। कोंडरवाड़ा का यह मामला बताता है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड और सीमांकन अद्यतन नहीं हैं, तो शासन की लाखों की योजनाएं भी विवादों में फंस सकती हैं।

कोंडरवाड़ा पंचायत का सामुदायिक भवन फिलहाल विवाद के घेरे में है। ग्रामीण चाहते हैं कि गांव में जल्द से जल्द भवन निर्माण शुरू हो, ताकि विकास की राह में अड़चन न आए। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी तेजी से इस विवाद का समाधान निकालता है और 25 लाख की यह योजना कब धरातल पर उतरती है।

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