
उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर (mahakaleshwar) मंदिर में एक बार फिर अनुशासन और मर्यादा को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है। मंगलवार सुबह भस्म आरती के दौरान गर्भगृह में सेवा दे रहे एक महंत और पुजारी के बीच तीखी बहस हो गई, जो देखते ही देखते गाली-गलौज और धक्का-मुक्की तक पहुँच गई। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद मंदिर प्रशासन और महाकाल(mahakaleshwar) मंदिर समिति हरकत में आ गई है।
विवाद का कारण: ड्रेस कोड और पगड़ी पहनने को लेकर मतभेद
जानकारी के मुताबिक यह पूरा विवाद ड्रेस कोड और पगड़ी पहनने को लेकर हुआ। बताया गया कि सुबह की भस्म आरती के दौरान एक पुजारी ने दूसरे महंत के पोशाक पर आपत्ति जताई। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों के बीच तीखी नोकझोंक और अपशब्दों का प्रयोग शुरू हो गया।
गर्भगृह में भगवान महाकाल(mahakaleshwar) की पूजा के समय उपस्थित भक्तों और सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह दोनों को अलग किया। हालांकि, इस दौरान कई श्रद्धालु इस दृश्य को देखकर असहज और निराश नजर आए।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि “भस्म आरती के समय जब पूरा माहौल भक्तिभाव में डूबा हुआ था, तभी अचानक आवाज़ें तेज़ होने लगीं। हमें लगा कोई आपात स्थिति है, लेकिन बाद में पता चला कि यह महंत-पुजारी का विवाद है। यह दृश्य देखकर सभी भक्त हैरान रह गए।”
गर्भगृह का पवित्र वातावरण और मर्यादा पर सवाल
महाकालेश्वर(mahakaleshwar)मंदिर के गर्भगृह को अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। यहां केवल कुछ चुनिंदा पुजारी और सेवादार ही प्रवेश कर सकते हैं। इसीलिए गर्भगृह के भीतर इस तरह का विवाद मंदिर की मर्यादा और अनुशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि जहां भगवान महाकाल की पूजा हो रही थी, वहीं कुछ सेकंड तक धक्का-मुक्की और ऊँची आवाज़ें सुनाई दीं। वीडियो के सामने आने के बाद कई लोगों ने इसे “महाकाल की मर्यादा का अपमान” बताया है।
प्रशासन हरकत में: दोनों पक्षों से जवाब-तलब, जांच शुरू
घटना सामने आने के बाद महाकाल(mahakaleshwar)मंदिर प्रबंध समिति ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया। समिति के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “गर्भगृह जैसे पवित्र स्थान पर इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है। दोनों पक्षों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
अधिकारी ने यह भी कहा कि मंदिर में सेवा दे रहे सभी पुजारियों और सेवादारों के लिए ड्रेस कोड और अनुशासन संबंधी नियम पहले से निर्धारित हैं। कोई भी व्यक्ति चाहे वह महंत हो या पुजारी, यदि इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
पहले भी उठ चुका है ड्रेस कोड का मुद्दा
महाकाल(mahakaleshwar)मंदिर में ड्रेस कोड और पगड़ी पहनने को लेकर पहले भी विवाद हो चुके हैं। कुछ महीने पहले भी कुछ पुजारियों के बीच इसी मुद्दे पर मतभेद हुआ था। प्रशासन ने उस समय स्पष्ट किया था कि गर्भगृह में सेवा देने वालों को केवल निर्धारित पारंपरिक वस्त्र ही पहनने होंगे और किसी भी प्रकार की नई या भव्य पोशाक की अनुमति नहीं है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह व्यवस्था श्रद्धा, एकरूपता और शुचिता बनाए रखने के लिए की गई है। किंतु बार-बार इस तरह के विवाद सामने आने से ऐसा लगता है कि नियमों के पालन में ढिलाई बरती जा रही है।
श्रद्धालुओं में नाराज़गी और आक्रोश
इस घटना ने उज्जैन के धार्मिक माहौल में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। श्रद्धालुओं ने कहा कि गर्भगृह जैसे पवित्र स्थल में इस तरह की हरकतें आस्था को ठेस पहुँचाने वाली हैं।
एक स्थानीय श्रद्धालु ने लिखा – “जहां भगवान स्वयं विराजमान हैं, वहां झगड़ा और अपशब्द शर्मनाक हैं। प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए।”
दूसरे भक्त ने कहा – “महाकाल की नगरी में इस तरह की घटनाएँ उज्जैन की छवि को धूमिल करती हैं। मंदिर में अनुशासन सर्वोपरि होना चाहिए।”
प्रशासन की सफाई और आगे की कार्रवाई
महाकाल (mahakaleshwar) मंदिर प्रबंधन समिति ने बताया कि प्रारंभिक जांच शुरू हो चुकी है। CCTV फुटेज और वायरल वीडियो की सत्यता की भी जांच की जा रही है। समिति ने दोनों संबंधित पुजारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह साबित हुआ कि उन्होंने गर्भगृह में अनुशासन भंग किया या आपसी विवाद को सार्वजनिक किया, तो उन्हें सेवा से निलंबित भी किया जा सकता है।
इसके साथ ही प्रशासन ने मंदिर में आचार संहिता के पालन को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अब हर पुजारी और महंत को गर्भगृह में प्रवेश से पहले निर्धारित ड्रेस कोड, पहचान पत्र और समयबद्ध ड्यूटी सूची के अनुसार ही सेवा देनी होगी।
महाकाल मंदिर की गरिमा बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी
महाकालेश्वर(mahakaleshwar)मंदिर न केवल उज्जैन बल्कि पूरे भारत की आस्था का केंद्र है। हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में गर्भगृह में किसी भी तरह का विवाद या अनुशासनहीनता सीधे तौर पर भक्तों की भावनाओं को आहत करती है।
धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि मंदिरों में सेवा करने वाले पुजारी और महंत संयम, विनम्रता और आचरण के प्रतीक माने जाते हैं। यदि वही आचार संहिता का उल्लंघन करें तो यह परंपरा के लिए भी नुकसानदायक है। उज्जैन के एक धर्माचार्य ने कहा – “महाकाल(mahakaleshwar)मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि हिंदू धर्म की मर्यादा का प्रतीक है। यहां सेवा देना पुण्य का कार्य है, परंतु अनुशासन तोड़ना पाप के समान है। सभी पक्षों को आत्मचिंतन करना चाहिए।”
सरकार और मंदिर समिति की सख्त नीति की मांग
घटना के बाद से ही कई धार्मिक संगठनों और स्थानीय भक्त मंडलों ने सरकार से सख्त नियंत्रण व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि मंदिर में नियमित रूप से होने वाले झगड़े और विवाद मंदिर की अंतरराष्ट्रीय छवि को खराब करते हैं।
सुझाव दिया गया है कि मंदिर में CCTV निगरानी, अनुशासन परिषद और साप्ताहिक आचार समीक्षा बैठकें अनिवार्य की जाएँ ताकि ऐसे विवाद दोबारा न हों।
महाकालेश्वर(mahakaleshwar)मंदिर में मंगलवार को हुआ यह विवाद भले ही एक छोटे से मतभेद से शुरू हुआ हो, लेकिन इसने अनुशासन और मर्यादा की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है।
अब सबकी निगाहें मंदिर प्रबंधन समिति की जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। श्रद्धालु चाहते हैं कि दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएँ और गर्भगृह जैसे पवित्र स्थल की गरिमा भविष्य में किसी भी कीमत पर आहत न हो।
महाकाल(mahakaleshwar)की नगरी उज्जैन से निकला यह विवाद एक चेतावनी है – कि श्रद्धा के स्थान पर केवल पूजा ही नहीं, अनुशासन भी परम आवश्यक है।