
उज्जैन । महाकाल की नगरी उज्जैन आज एक बार फिर आस्था और नवाचार का केंद्र बन गई। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को महाकाल लोक ( mahakal lok) परिसर में कई नई योजनाओं और सांस्कृतिक पहलों की शुरुआत की। इनमें लाइट एंड साउंड शो, महाकालेश्वर बैंड, और श्री अन्न (मिलेट्स) से बने लड्डुओं को महाकाल प्रसाद में शामिल करने की घोषणा प्रमुख रही। इन पहलों ने न केवल भक्तों में उत्साह भर दिया बल्कि उज्जैन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक रंगों से जोड़ने का संदेश भी दिया।
“प्रधानमंत्री मोदी ने श्री अन्न का महत्व बताया, मध्यप्रदेश उसे अपनाएगा” — सीएम मोहन यादव
सीएम मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे विश्व में श्री अन्न (मिलेट्स) को “सुपरफूड” के रूप में पहचान दिलाई है।
अब मध्यप्रदेश इसे पूरी तरह अपनाने की दिशा में अग्रसर है।
उन्होंने कहा —“श्री अन्न हमारे देश की प्राचीन आहार परंपरा का हिस्सा रहा है। आज हम इसे फिर से महाकाल ( mahakal lok) के प्रसाद के रूप में लौटा रहे हैं। यह न केवल सेहत के लिए लाभकारी है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करेगा।”
अब प्रसाद में मिलेंगे श्री अन्न से बने पौष्टिक लड्डू
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले महाकाल मंदिर ( mahakal temple) में बेसन के लड्डू प्रसाद के रूप में दिए जाते थे।
कई भक्त उपवास के दौरान बेसन नहीं खाते, जिससे उन्हें असुविधा होती थी।
इसी को ध्यान में रखते हुए अब प्रसाद में रागी, कोदो-कुटकी और ज्वार-बाजरा जैसे अनाजों से तैयार किए गए ‘श्री अन्न लड्डू’ वितरित किए जाएंगे।इन लड्डुओं में प्रोटीन, फाइबर और विटामिन भरपूर मात्रा में होंगे।
साथ ही यह बदलाव आदिवासी किसानों और लघु अनाज उत्पादकों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा।
सीएम ने कहा कि “यह सिर्फ प्रसाद नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और भारतीय परंपरा का संगम है।”महाकालेश्वर बैंड: शंख, नगाड़े और घड़ियाल की ध्वनि से गूंजा परिसर
उद्घाटन समारोह का दूसरा बड़ा आकर्षण रहा ‘महाकालेश्वर बैंड’ की स्थापना।
यह बैंड पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों — शंख, नगाड़े, घड़ियाल, ढोल और बांसुरी — से सुसज्जित है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा —“प्राचीन भारत में शंख और नगाड़े न केवल संगीत के उपकरण थे, बल्कि धार्मिक संदेश और ऊर्जा के प्रतीक भी थे। आज महाकाल ( mahakal lok ) के दरबार में इन ध्वनियों की वापसी हुई है।”यह बैंड हर उत्सव, धार्मिक सवारी और विशेष आयोजन में भोलेनाथ की महिमा का संगीत रूप में गुणगान करेगा।
इसके संगीत में शिवपुराण के मंत्र, महाकाव्यात्मक धुनें और लोक वाद्यों की लय का समावेश किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को एक अलौकिक अनुभव प्राप्त होगा।महाकाल लोक (mahakal lok) में शुरू हुआ लाइट एंड साउंड शो: शिवपुराण की कथाओं से सजी आस्था की रात
उज्जैन के महाकाल लोक ( mahakal lok) परिसर में अब प्रतिदिन भव्य लाइट एंड साउंड शो आयोजित होगा।
इस शो में भगवान शिव की कथाओं, शिवपुराण, और प्राचीन अवंतिका नगरी (उज्जैन) के गौरवशाली इतिहास को अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।शो के दौरान प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर लाइट्स, ध्वनि प्रभाव और सांस्कृतिक संगीत का ऐसा संयोजन किया गया कि पूरा परिसर शिवमय हो उठा। शिव की तांडव कथा, सृष्टि की उत्पत्ति, और काल भैरव की लीला जैसे प्रसंगों को दृश्य रूप में दिखाया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध रह गए।
मुख्यमंत्री ने कहा —“यह शो सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि ज्ञान और आस्था का संगम है। इससे आने वाली पीढ़ियाँ भी हमारी सनातन संस्कृति को जान सकेंगी।”
महाकाल लोक(mahakal lok) में दीपों की रोशनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दिव्य संगम
कार्यक्रम के दौरान पूरा महाकाल लोक परिसर दीपों की श्रृंखला और आतिशबाजी से जगमगा उठा।
शिव आरती, नृत्य नाटिका, और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने आयोजन को दिव्यता का रूप दे दिया।
देशभर से आए श्रद्धालुओं ने इस पल को कैमरे में कैद किया।मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी भक्तों को दीपावली की शुभकामनाएँ दीं और कहा — “बाबा महाकाल की कृपा से उज्जैन आज एक नई पहचान के साथ विश्व मंच पर स्थापित हो रहा है। महाकाल लोक सिर्फ एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बन चुका है।”
महाकाल लोक (mahakal lok) : धर्म, पर्यटन और अर्थव्यवस्था का संगम
महाकाल लोक (mahakal lok) परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना और राज्य सरकार के समन्वय से तैयार की गई है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही है।
यहाँ रोज़ाना हजारों श्रद्धालु आते हैं, जिससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और खाद्य उद्योगों को भी लाभ मिल रहा है।सीएम मोहन यादव ने कहा कि आने वाले समय में महाकाल लोक (mahakal lok) को “विश्व स्तर के तीर्थ अनुभव केंद्र” के रूप में विकसित किया जाएगा।इसके लिए स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, सांस्कृतिक हेरिटेज ज़ोन, और डिजिटल गाइड सिस्टम की योजनाएँ भी तैयार की जा रही हैं।
श्री अन्न से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
सीएम ने कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के “श्री अन्न मिशन” से देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषक कल्याण, और पोषण सुरक्षा को नई गति मिली है। मध्यप्रदेश सरकार अब हर ज़िले में मिलेट्स मिशन लागू करेगी।
उन्होंने बताया कि महाकाल मंदिर के प्रसाद से इसकी शुरुआत करना प्रतीकात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है — क्योंकि यह आस्था और आत्मनिर्भरता का संगम है।श्रद्धालुओं में खुशी, बोले — यह नवाचार महाकाल की महिमा बढ़ाएगा
महाकाल लोक में मौजूद श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक इस पहल से बेहद उत्साहित दिखे।
उज्जैन निवासी रितेश शर्मा ने कहा, “महाकालेश्वर बैंड और लाइट शो ने पूरे माहौल को भक्ति और गौरव से भर दिया। ऐसा लगा जैसे महाकाल स्वयं उपस्थित हैं।”वहीं एक महिला श्रद्धालु ने कहा कि “अब प्रसाद में मिलने वाले श्री अन्न लड्डू न केवल स्वादिष्ट होंगे बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी। यह एक दूरदर्शी निर्णय है।”
महाकाल लोक (mahakal lok) में परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम
उज्जैन का महाकाल लोक (mahakal lok)अब सिर्फ एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत प्रतीक बन गया है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ये पहलें न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास को भी जोड़ती हैं।
जहाँ एक ओर लाइट एंड साउंड शो से श्रद्धालु शिवपुराण और अवंतिका के इतिहास से परिचित होंगे, वहीं दूसरी ओर श्री अन्न लड्डू और महाकालेश्वर बैंड जैसी पहलें नवाचार के साथ भारतीय परंपरा को पुनर्जीवित करेंगी।उज्जैन की यह पहल पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकती है — कि आस्था और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं, विरोधी नहीं।