सर्दियों के लिए लड्डू : जानें गोंद के लड्डू बनाने की विधि

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सर्दियों के लिए लड्डू: सर्दियां आ गई हैं और इसी के साथ कई बीमारियां आपको अपना शिकार बना सकती हैं। ऐसे में डाइट में कुछ इम्यूनिटी बूस्टर फूड्स को शामिल करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। ऐसा ही कुछ है ये लड्डू। दरअसल, गांव-घर में इस लड्डू को बनाकर पूरी ठंडी रखा जाता है। ये सर्दी-जुकाम को कम करने में मददगार है। साथ ही ये फेफड़ों की मजबूती देने के साथ हड्डी की सेहत के लिए फायदेमंद है। साथ ही इस लड्डू की खास बात ये है कि इसे शेल्फ लाइफ लंबी है तो आप इसे बनाकर लंबे समय तक रख सकते हैं। जानते हैं इसकी रेसिपी।

गोंद के लड्डू बनाने की विधि-Gond ke laddu recipe in hindi

खाने वाला गोंद लें

आटा लें
देसी घी लें
पिसी चीनी लें
ड्राई फ्रूट्स लें।

gond ke laddu

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gond ke laddu

गोंद के लड्डू बनाने की विधि

गोंद के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले कड़ाही में घी डालकर गर्म होने दें।
जब घी पिघल जाए तो गोंद डालकर मीडियम आंच पर फ्राई करें।
जब गोंद का कलर गोल्डन ब्राउन हो जाए उसके बाद गैस बंद कर दें।
फिर गोंद को निकाल लें और कुछ देर ठंडा होने दें।
थोड़ा ठंडा होने के बाद गोंद को कूट लें या फिर मिक्सी में दरदरा पीस लें।
अब कड़ाही में घी को दोबारा गर्म करें और उसमें आटा डालकर कर हल्का-हल्का सुनहरा कर लें।
आटे का रंग जब बदलने लगे तो इसमें गोंद और बाकी ड्राई फ्रूट मिला लें।
अच्छे से मिलाकर गैस बंद कर दें, अब इस मिश्रण को कड़ाही से निकालें और ठंडा होने दें।
अब आटा और गोंद के इस मिश्रण में पिसी चीनी को मिला दें।
मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाएं और अब लड्डू बांधना शुरू करें।

तो, इस प्रकार से तैयार हो गई आपके गोंद की लड्डू। इसे आप एयर डाइट कंटनेर में भरकर रख लें। इसके बाद आराम से धीमे-धीमे इसका सेवन रहें। ये आपकी सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद होगी।




Carrot Juice Benefits : सर्दियों में रोज पिएं एक गिलास गाजर का जूस

Carrot

सर्दियों के मौसम में अपने आहार का ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है. यह एक समय होता है जब हमारे शरीर को गर्मी की तलाश होती है, और सर्दियों में सही प्रकार के आहार से हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए मदद मिलती है.

Carrot

गाजर का जूस एक ऐसा पौष्टिक पेय है जो सर्दियों में यूरिक एसिड को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है. रोजाना एक गिलास गाजर का जूस जरूर पियें.

Carrot

गाजर, एक सुपरफूड है जिसमें पोषक तत्वों का भरपूर मात्रा में पाया जाता है. यह विटामिन, खनिज, और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं.

Carrot Juice

गाजर में विटामिन A के अलावा विटामिन C, विटामिन K, विटामिन B6, विटामिन E, पोटेशियम, मैग्नीशियम, कॉपर और फॉस्फोरस भी होता है, जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है.

Carrot

गाजर का जूस पीने या कच्ची गाजर खाने से कब्ज की परेशानी खत्म हो जाती है. यह पीलिया की प्राकृतिक औषधि है. इसका सेवन ब्लड कैंसर और पेट के कैंसर में भी लाभदायक है.

Carrot Salad

ठंड के मौसम में गाजर खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है. रहती है. इसमें मौजूद बीटा कैरोटिन आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करता है.




सुदर्शन है कमाल औषधि… बुखार, सर्दी-जुकाम के लिए रामबाण, दूर कर दे वर्षों पुराना जोड़ों का दर्द

बदलते मौसम के साथ ही सर्दी-जुकाम, बुखार और डेंगू जैसे वायरल संक्रमण में तेजी से इजाफा हो रहा है. इससे बचने के लिए आप कई औषधि का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. जिनसे शरीर संक्रमण मुक्त और स्वस्थ रहेगा. आज हम आपको एक ऐसी औषधि के बारे में बताने जा रहे हैं जो जोड़ों में दर्द और सर्दी, जुकाम और बुखार का रामबाण इलाज है. इस औषधि का नाम सुदर्शन है और इसका काम भी इसके नाम जैसा ही है.

किसी भी प्रकार का बुखार हो उसे जड़ से खत्म करने में यह औषधि सुदर्शन चक्र का काम करती है. इस औषधि को ज्वर नाशक के नाम से भी जानते हैं. तमाम बीमारियों को जड़ से खत्म करने में आयुर्वेदिक पद्धति काफी कामयाब सिद्ध होती है. इसकी पत्तियां स्वस्थ मानव जीवन में बड़ा ही महत्वपूर्ण योगदान रखती है. इसका प्रयोग ज्वर के साथ-साथ कान में दर्द, जोड़ों में दर्द, बवासीर, पेट के कीड़े तथा स्क्रीन से संबंधित तमाम बीमारियों में किया जाता है.

इन रोगों के इलाज में आता हैं काम
सुदर्शन के फूल के औषधीय गुणों के आधार पर आयुर्वेद में रोगों के उपचार के तौर पर सुदर्शन का प्रयोग किया जाता है. सुदर्शन कान दर्द, जोड़ों का दर्द, बुखार, सर्दी, जुकाम और बवासीर जैसे बीमारियों के लिए फायदेमंद सिद्ध होता है. चलिए जानते हैं कि सुदर्शन और कितने फायदे स्वास्थ्य के दृष्टि से गुणकारी हैं. सुदर्शन ऐसा जड़ी बूटी है जो कई तरह के रोगों के लिए फायदेमंद सिद्ध होता है.

बवासीर के दर्दनाक कष्ट से मिलेगा छुटकारा
वन क्षेत्राधिकारी मदन सिंह बिष्ट बताया कि अगर दांत दर्द के कारण या ठंडे लगने के वजह से कान में दर्द हो रहा है तो 1-2 बूंद सुदर्शन के पत्ते के रस को कान में डालने से कान का दर्द कम हो जाता है. बवासीर के दर्दनाक कष्ट से आराम दिलाने में सुदर्शन काम आता है. सुदर्शन के शल्क कंद को पीसकर अर्श या बवासीर के मस्सों में लेप करने से लाभ होता है. और जोड़ो पर लेप करने से आमवात के दर्द से राहत दिलाने में मदद करती है. जोड़ो के दर्द से परेशान हैं तो सुदर्शन का इस तरह से इस्तेमाल करने पर बहुत लाभ मिलता है. पुराना घाव नहीं सूख रहा है तो सुदर्शन के कंद को पीसकर घाव पर लगाने से ठीक होता है . सुदर्शन के पत्ते के रस से सिद्ध तेल को लगाने से त्वचा संबंधी रोगो से छुटकारा मिलती है. आयुर्वेद में सुदर्शन के पत्ते तथा शल्ककन्द का प्रयोग औषधि के लिए किया जाता है.

ऐसे करें सुदर्शन की जड़ का सेवन
वन क्षेत्राधिकारी मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि सुदर्शन की जड़ को पीसकर संधियों यानि जोड़ो पर लगाने से संधिवात का दर्द कम होता है तथा सूजन पर लगाने से सूजन कम होती है. जोड़ो के दर्द तथा वेदनायुक्त रोगों में सुदर्शन की पत्तियों से स्वेदन करने से या पत्तों को पीसकर गुनगुना कर लेप करने से लाभ होता है. आप इस पौधे की जड़ों का काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं जिससे बुखार, खांसी और जोड़ों में दर्द जैसी समस्या से निजात मिलता है.




Gujarat News : गरबा खेलते दिल का दौरा पड़ने से अबतक छह की मौत, स्वास्थ्य मंत्री ने हृदय विशेषज्ञों के साथ की बैठक

health minister chairs hearts experts meet after 22 heart attack

heart attack

गुजरात में पिछले कुछ दिनों में दिल का दौरा पड़ने से 22 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें से छह मौतें तो सिर्फ गरबा पंडाल में हुई हैं। मौतों को लेकर गुजरात प्रशासन अलर्ट हो गया है। इसे लेकर सरकार ने हृदय विशेषज्ञों से बात की। गुजरात की पूर्व सीएम ने भी मौतों पर चिंता जाहिर की थी।

अनुसंधान के निर्देश

सूत्रों की मानें तो, गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री रुशिकेश पटेल ने सोमवार को यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर के शीर्ष हृदय विशेषज्ञों और डॉक्टरों के साथ बैठक की। पटेल ने विशेषज्ञों को अनुसंधान के निर्देश दिए। बता दें, पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने रविवार को लगातार दिल का दौरा पड़ने से हो रही मौतों पर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से कारणों की तलाश करने का आग्रह किया था।

कोविड वैक्सीन नहीं है मौतों का कारण

आनंदी बेन पटेल ने पाटन में समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि नवरात्रि के दौरान गरबा खेलते समय कई युवाओं को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई। हमें कारणों का पता लगाना चाहिए और मौतों का विश्लेषण करना चाहिए। मैं स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह करती हूं कि पता लगाएं कि राज्य में पिछले एक साल में दिल का दौरा पड़ने से कितने लोगों की मौत हुई है। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि इन मौतों का कारण कोविड-19 वैक्सीन बिल्कुल नहीं है।




120 को पार कर गया है ब्लड शुगर? इस विटामिन की गोली खाना शुरू कर दीजिए, आगे नहीं बढ़ेगा डायबिटीज, रिसर्च में हुआ प्रूव

Vitamin D Suppliment Prevent Diabetes : डायबिटीज का एग्जेक्ट कारण किसी को नहीं पता लेकिन माना जाता है कि डायबिटीज के लिए शिथिल दिनचर्या और गलत खान-पान जिम्मेदार होता है. लेकिन अब एक रिसर्च की मानें तो इसके लिए विटामिन डी की कमी भी जिम्मेदार हो सकती है क्योंकि रिसर्च में यह बात सामने आई है कि यदि ब्लड शुगर 120 भी पार कर गया है और उस स्थिति में आप विटामिन डी सप्लीमेंट लेना शुरू कर दिया है तो कुछ ही महीनों में ब्लड शुगर पूरी तरह कंट्रोल हो सकता है. इसके लिए शोधकर्ताओं ने तीन ट्रायल किए गए और तीनों के परिणााम सकारात्मक आए. अगर ऐसा है तो यह करोड़ों लोगों के लिए खुशी की बात क्योंकि आज 45 करोड़ लोग डायबिटीज के शिकार हैं, इनमें अकेले भारत से 8 करोड़ लोग शामिल हैं. ग्लोबल डायबेट्स कम्युनिटी के मुताबिक विटामिन डी सप्लीमेंट प्री डायबेटिक कंडीशन को टाइप 2 में जाने से रोक सकता है. गौरतलब है कि डायबिटीज से पहले प्री-डायबिटीज होता है.

हैरान करने वाली रिसर्च

विटामिन डी हमारे शरीर के लिए अत्यंत जरूरी है. यह वसा में घुलता है. शरीर में यह कैल्शियम के अवशोषण को सुलभ बनाता है और फॉस्फेट को नियंत्रित करता है. यह कैल्शियम और फॉस्फोरस को हमारे शरीर में स्टोर कर रखता है. रिसर्च में पहले से यह साबित हो चुका है कि शरीर में यदि पर्याप्त विटामिन डी है तो यह कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है. इसके अलावा यह इंफेक्शन और इंफ्लामेशन को भी रोकता है. अध्ययन में शोधकर्ताओं ने तीन क्लिनिकल ट्रायल का विश्लेषण किया. तीन साल के दौरान अध्ययन में शामिल होने वाले लोगों को विटामिन डी सप्लीमेंट दिया गया जबकि कुछ लोगों को प्लेसिबो यानी बिना असर वाली दवा दी गई. विटामिन डी का सेवन करने वालों में 77 प्रतिशत को टाइप 2 डायबिटीज नहीं हुआ. यह हैरान करने वाली बात थी. हालांकि 22.7 प्रतिशत को विटामिन डी सप्लीमेंट लेने के बावजूद टाइप 2 डायबिटीज हो गया. दिलचस्प बात यह थी कि जिन लोगों को प्लेसिबो दिया गया था उनमें भी 25 प्रतिशत को टाइप 2 डायबिटीज हो गया.

इंसुलिन रेजिस्टेंस से बचाव

अध्ययन का विश्लेषण करने पर पाया गया कि दुनिया भर में 37.4 करोड़ प्री-डायबेटिक लोग हैं. इनमें से करीब 1 करोड़ लोगों में विटामिन डी सप्लीमेंट देकर टाइप 2 डायबिटीज होने से बचया जा सकता है. विटामिन डी को कैल्सिफेरॉल कहा जाता है. यह विटामिन सिर्फ वसा में घुलनशील है. जब यह गोली आंत में पचती है तो इससे शरीर में सूजन या इंफ्लामेशन को कम करती है. इसके साथ ही विटामिन डी कोशिकाओं की वृद्धि, इम्यूनिटी और ग्लूकोज मेटाबोलिज्म को बूस्ट करता है. शोधकर्ताओं द्वारा विटामिन डी और डायबिटीज के बीच लंबे समय से संबंधों की पड़ताल की जा रही थी. हालांकि अब तक यह पता नहीं था कि विटामिन डी ग्लूकोज को अवशोषण को तेज कर सकता है. नई रिसर्च से यह साबित हो गया कि विटामिन डी इंसुलिन के प्रतिरोध को कम कर देता है जिसके कारण शुगर को अवशोषण आसानी से हो जाता है.




1.28 अरब लोगों को है हाई बीपी, आधे को पता भी नहीं, शरीर पर हो घातक असर, इससे पहले शुरू कर लें ये 5 काम

How to Lower High Blood Pressure: खून का सर्कुलेशन होना जरूरी है. इसी कारण हार्ट शरीर के अंग-अंग में खून पहुंचाता है जिससे आवश्यक पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचती है. इसके लिए खून की धमनियों का फ्लेक्सिबल और हेल्दी होना जरूरी है. पर बदलते लाइफस्टाइल के कारण आज हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है. दुनिया भर में करीब 7 अरब आबादी में 1.28 अरब आबादी हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हैं. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक हैरान कर देने वाली बात यह है कि इनमें से 46 प्रतिशत लोगों को पता भी नहीं है कि उन्हें हाई ब्लड प्रेशर है.

हाई ब्लड प्रेशर ऐसी बीमारी है जिसमें तुरंत कुछ रता नहीं चलता. यानी शरीर में कुछ लक्षण दिखाई नहीं देता. लेकिन यह दिमाग, आंखें, हार्ट, किडनी और धमनियों पर गंभीर असर डालता है. इसके कारण अचानक कभी हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट या स्ट्रोक हो सकता है जो बेहद घातक साबित हो सकता है. चूंकि अधिकांश लोगों को पता नहीं है कि उन्हें हाई ब्लड प्रेशर है, इसलिए हर वयस्क को कुछ महीनों के अंतराल पर ब्लड प्रेशर की जांच जरूरी करानी चाहिए. यदि आपका ब्लड प्रेशर 130/90 है तो आपको अभी से तुरंत सतर्क होने की जरूरत है. इसके लिए हार्वर्ड मेडिकल हेल्थ ने कुछ आसान उपाय बताए हैं.

हाई ब्लड प्रेशर के संकेत

हालांकि हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण आमतौर पर नहीं दिखते लेकिन यदि ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा हो गया है तो इन स्थितियों में सिर दर्द, चक्कर आना, थकान और सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें हो सकती हैं.

हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के टिप्स

1. सबसे पहले बीपी चेक कराएं-हार्वर्ड मेडिकल हेल्थ के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर से बचना है तो सबसे पहले ब्लड प्रेशर की सटीक जांच कराएं. इसके लिए डॉक्टर के पास जाएं. बीपी जांच कराने से एक घंटा पहले कठिन एक्सरसाइज, स्मोकिंग, इटिंग न करें, चाय कॉफी, अल्कोहल आदि न लें. अगर बीपी ज्यादा है तो इसके बाद अब अपने जीवन में कुछ चीजों को अभी से सुधार लें.

2. एयरोबिक एक्सरसाइज-अब से अपने जीवन में रोजाना एयरोबिक एक्सरसाइज की आदत डाल लें. यानी हर रोज तेज वॉक करें, रनिंग करें या साइक्लिंग, स्विमिंग करें. वॉक करने के समय चलने की रफ्तार 6 किलोमीटर प्रति घंटे से कम न हो.

3. नमक और अल्कोहल ज्यादा नहीं-अगर आप अपने भोजन में ज्यादा नमकीन खाने की आदत रखते हैं तो तुरंत छोड़ दें. इससे ब्लड प्रेशर और ज्यादा बढ़ जाएगा. इसके साथ ही शराब को बिल्कुल हाथ न लगाएं. स्मोकिंग करते हैं तो उसे भी छोड़ दें. तनाव और चिंता भी बीपी को बढ़ा सकते हैं.

4. ताजे फल और सब्जियां-अब से नियमित रूप से अपने भोजन में हरी पत्तीदार सब्जियों और ताजे फल का सेवन बढ़ा दें. प्रोसेस्ड फूड, पैकेज्ड फूड, फास्ट फूड आदि को अपनी डाइट से हमेशा के लिए निकाल दें.

5. वजन कंट्रोल करें-हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए वजन को भी कंट्रोल करना जरूरी है. वजन कम करने के लिए नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव रहित जीवन जरूरी है.




किडनी पर आने वाली हर आफत को मिटा देंगे ये 5 नुस्खे, फायदे भी दिखेगा जल्द

Home Remedies for Healthy Kidney: किडनी हमारे शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण अंग है. किडनी मुख्य रूप से हमारे लिए जरूरी आवश्यक चीजों को छानकर बेकार की चीजों को शरीर से बाहर कर देती है. किडनी से हमारी मूत्र प्रणाली जुड़ी होती है. इसमें मूत्राशय, यूरेथ्रा और यूटेरस और प्रजनन अंग शामिल होते हैं. इन सबको मिलाकर मूत्र प्रणाली कहा जाता है. यूरोलॉजिकल हेल्थ की सही होना हमारे लिए जरूरी है. क्योंकि अगर इन अंगों में खराबी हुई तो शरीर में जहर की मात्रा बढ़ने लगेगी. दूसरी ओर इन अंगों में किसी तरह के इंफेक्शन से पूरा शरीर प्रभावित हो जाएगा. इसलिए किडनी और किडनी से जुड़े अंगों का हेल्दी होना जरूरी है. खराब लाइफस्टाइल और खान-पान के कारण आज हमेशा हमारी किडनी पर आफत की आशंका बनी रहती है, लेकिन यदि आप इन 5 घरेलू नुस्खों को अपनाएंगे तो निश्चित रूप से आप अपनी किडनी और यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम से मुक्त रह सकते हैं.

पेशाब की दिक्कतों को दूर करने के टिप्स

    • फाइबरयुक्त सब्जियों का सेवन-यूरोलॉजीस्पेशलिस्ट की वेबसाइट के मुताबिक, किडनी की सफाई के लिए फाइबर युक्त सब्जियों को अपनी डाइट में नियमित रूप से शामिल करें. इससे यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम नहीं होगी. इसके लिए पालक, गाजर, लौकी, केले, फूलगोभी, बंदगोभी, कैबेज, बींस, मसूर की दाल आदि का सेवन करें. इसके अलावा साबुत अनाज का सेवन करें. ये सारी चीजें किडनी को डिटॉक्सीफाई करने में बहुत मदद करती है. इन हरी सब्जियों से ऑवरऑल हेल्थ सही रहेगी.
    • बेरीज का सेवन-किडनी की सफाई के लिए बेरीज का सेवन बहुत फायदेमंद होता है. ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, रस्पबेरी, जामुन आदि यूरोलॉजिकल हेल्थ के लिए बेहतर विकल्प है. इसके अलावा आप ताजे फल का सेवन नियमित रूप से करें.
    • पर्याप्त पानी पीएं-किडनी और मूत्र प्रणाली को सेहतमंद रखने के लिए रोज पर्याप्त पानी का सेवन करें. पानी नहीं पीएंगे तो किडनी और यूरोलॉजिकल संबंधी कई समस्याएं अक्सर परेशान करती रहेगी. इसलिए रोजना दो से तीन लीटर पानी पीएं.
    • नमक का सेवन कम करें-ज्यादा नमक न सिर्फ किडनी बल्कि हार्ट और लिवर के लिए भी नुकसानदेह है. किडनी को सही से काम करने के लिए सोडियम और पोटैशियम के अच्छे संतुलन की जरूरत होती है. ज्यादा सोडियम ब्लड प्रेशर को बढ़ा देता है जिससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. इससे किडनी में स्टोन का भी खतरा रहता है.
    • रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड- किडनी की तंदुरुस्ती के लिए प्रोसेस्ड फूड और रेड मीट का सेवन न करें तो बेहतर है. इसके अलाव ग्लूटेन वाले फूड से भी बचें. ग्लूटेनयुक्त फूड पेशाब में जलन को बढ़ा देगा. नियमित रूप से ऐसा करेंगे तो किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है.




लाल मूली: सूजन-दर्द का करती सफाया, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, ब्लड शुगर को रखती कंट्रोल में

Red Radish health benefits for diabetics and liver problem: सर्दियां आने को है और बाजारों में हरी व जड़ीली सब्जियों ने दस्तक देना शुरू कर दी है. इनमें मूली लोगों को बेहद प्रिय होती है. आजकल तो लाल मूली भी खूब आने लगी है. इसे आम मूली से ज्यादा स्वादिष्ट व पौष्टिक माना जाता है. यह एंटीऑक्सीडेंट तो है ही, इसका सेवन ब्लड शुगर को कंट्रोल रखता है, साथ ही शरीर की विषाक्तता (Detoxified) को भी बाहर निकाल देता है. रोचक है लाल मूली का इतिहास.

लाल मूली है बाहर से लाल लेकिन अंदर से सफेद

लाल मूली (Red Radish) को लेकर लोगों का रुझान बढ़ने लगा है. यह देखने में सामान्य मूली से अधिक आकर्षक व खूबसूरत नजर आती है. यह आम मूली की तरह लंबी या शलजम की तरह गोल भी होती है. इसकी स्किन चिकनी, कोमल और पतली होती है, जिसका रंग चमकदार लाल, लाल-गुलाबी होता है. विशेष बात यह है कि इसके अंदर का गूदा सफेद, स्टफी, पानी से भरा लेकिन कुरकुरा हेाता है. जब यह एकदम कच्ची होती है तो इसका स्वाद हलकी सी मिठास लिए हुए होता है, उसके बाद तीखा व चटपटा हो जाता है. लाल मूली के पत्ते भी आम मूली से अधिक स्वादिष्ट होते हैं और उनमें पौषक तत्व भी आम मूली से अधिक होते हैं. आप देखेंगे कि अब सब्जी मंडी में सफेद मूली के साथ लाल मूली की आमद भी खूब होने लगी है, क्योंकि इसके गुणों को लोग पहचान चुके हैं.

पूरी दुनिया में उगाई जाती है लंबी व गोल लाल मूली

ऐसा माना जाता है कि मूली की पैदावार हजारों सालों से हो रही है और इसके प्राथमिक जुड़ाव भारत व चीन से है. अमेरिकी भारतीय वनस्पति विज्ञानी सुषमा नैथानी ने इसके दो उत्पत्ति केंद्र वर्णित किए हैं, जिनमें से एक चीन व दक्षिण पूर्वी एशिया है, जिनमें चीन, ताइवान, थाइलैंड, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम आदि देश है. दूसरा उत्पत्ति स्थल इंडो-बर्मा उपकेंद्र है, जिसमें भारत और म्यांमार शामिल हैं. भारत में हजारों वर्ष पूर्व लिखे गए आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में भी मूली (मूलकं) का वर्णन है. इसके त्रिदोषनाशक (कफ-वात-पित्त) बताया गया है. दूसरी ओर ऐसा कहा जाता है कि प्राचीन युग में भी लाल मूली कायम थी लेकिन इसकी विशेष खेती नहीं की जाती थी. यह शलजम, चुकंदर की खेती के साथ ही कुछ लाल मूली भी उग जाती थी. फूड हिस्टोरियन मानते हैं कि आधिकारिक रूप से लाल मूली की उत्पत्ति 16वीं शताब्दी में डच और इतालवी किसानों ने शुरू की. उसके बाद यह उत्तरी अमेरिका, मैक्सिको और कैरेबियन पहुंची. आज लाल मूली की किस्में दुनिया भर में उगाई जाती हैं.

ICAR ने इसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर माना है

लाल मूली को शरीर के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) का कहना है कि लाल मूली सलाद ड्रेसिंग के लिए तो लाजवाब है ही, इसमें सामान्य मूली की तुलना में एंटीऑक्सीडेंट का स्तर 80-100 प्रतिशत अधिक है. इसका अर्थ है कि लाल मूली शरीर की कोशिकाओं (Cell) की मरम्मत करने में ज्यादा लाभकारी है. संस्थान के अनुसार लाल मूली में एंथोसायनिन (Anthocyanin) भी पाया जाता है, जिसमें ब्ल्ड शुगर को कंट्रोल करने के गुण होते हैं. इसमें फेनोलिक्स (Fenolax) भी मौजूद होता है, जो सूजन व दर्द को कम करने में भूमिका अदा करता है.

पीलिया के लक्षणों को दूर कर सकती है

फूड एक्सपर्ट व होमशेफ सिम्मी बब्बर का कहना है कि लाल मूली को भी लिवर के लिए गुणकारी माना जाता है. यह पीलिया के लक्षणों को दूर कर सकती है. चूंकि इसमें एडिबल फाइबर होता है, इसलिए पाचन सिस्टम को भी दुरुस्त रखती है और कब्ज से बचाए रखती है. लाल मूली में लाल मूली न केवल सलाद के कटोरे में स्वाद जोड़ती है बल्कि यह भूख को भी शांत करने में मदद करती है. इसमें फेट नहीं होता और कैलोरी व कार्बोहाइड्रेट सीमित होता है, जिसके चलते यह शरीर का वजन नहीं बढ़ने देती. सामान्य तौर पर लाल मूली का कोई साइड इफेक्ट नहीं है, लेकिन बेहतर होगा कि इसे रात के भोजन में कच्चे सलाद के रूप में शामिल करने से बचा जाए. रात को नियमित सेवन से यह कफ बना सकती है.




World Mental Health Day : जीवन जीने के ये 7 सिंपल सूत्र बहुत आएंगे काम, नहीं होगी मानसिक परेशानी

जिंदगी में अगर आप खुश रहना सीख लिए हैं तो आपको शायद ही कोई मानसिक परेशानी होगी. लेकिन जिंदगी की तमाम परेशानियां जिंदगी को अक्सर कुछ न कुछ उलझन में डाल कर रखती है. इस कारण सबसे ज्यादा तनाव आता है. तनाव शरीर में 1200 से ज्यादा केमिकल उथल-पुथल शुरू कर देता है और इससे मानसिक परेशानियों का अंबार खड़ा होने लगता है. दरअसल, खुश रहना एक कला है और इस कला को सीखने में डेडिकेशन की जरूरत होती है. अगर आपने इसे सीख लिया तो आपकी जिंदगी भी खुशगवार होने लगेगी. तो आइए जानते हैं कि जीवन में खुश रहने के लिए कौन-कौन से सिंपल सूत्र हैं.

खुद को ऐसे रखें खुश

1. हेल्दी डाइट-मायो क्लिनिक के मुताबिक जीवन में खुश रहने के लिए हेल्दी डाइट का बहुत महत्व है. हेल्दी डाइट का मतलब है भोजन में ताजे फल, हरी सब्जियों, लीन प्रोटीन और साबुत अनाज का बैलेंस. यानी इन सभी चीजों को संतुलित मात्रा में लेना ही हेल्दी डाइट है. इसके लिए हरी पत्तीदार सब्जियां, कलरफुल सब्जियां, फूलगोभी, दालें, बींस, डेयरी प्रोडक्ट और साबुत अनाज का सेवन करें. इसके साथ ही प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, फास्ट फूड, ज्यादा तेल, ज्यादा नमक, ज्यादा चीनी का सेवन न करें.

2. पर्याप्त नींद-जीवन में खुश रहने के लिए रात में पर्याप्त नींद की जरूरत होती है. रोजाना 7 से 8 घंटे की रात की नींद जरूरी है. नींद की कमी से कई शारीरिक बीमारियां होती है और इससे अंततः मानसिक परेशानियां बढ़ती है. नींद की कमी से नकारात्मकता आती है.

3. आर्थिक प्रबंधन-जीवन में परेशानियों का एक बड़ा कारण आर्थिक स्थिति है. लेकिन इसका समुचित प्रबंधन इन परेशानियों से निजात दिला सकता है. इसके लिए आपकी जितनी आमदनी है, उसी में अपना बजट बनाएं. अन्य किसी स्रोत से कोई उम्मीद न करें. जरूरत की पूर्ति के लिए हमेशा सकारात्मक सोच रखें और मेहनत से इन चीजों को प्राप्त करने की कोशिश करें. अगर कोई चीज पहुंच से दूर है तो उसके लिए लालच न करें. जितना है उसी में खुश रहे. लोभ, ईर्ष्या आदि से बचें. सकारात्मक रुख अपनाएं.

4. तनाव से बचें-जीवन में खुश रहने के लिए तनाव से बचना बहुत जरूरी है. हर इंसान के जीवन में तनाव है लेकिन उसका कुशल प्रबंध जरूरी है. तनाव से बचने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज, योग, मेडिटेशन बहुत मददगार है. हमेशा सकारात्मक सोच रखें.

5. अच्छे लोगों के साथ संपर्क-नकारात्मक प्रवृति, हमेशा दूसरे की बुराई करने वाले लोगों के संगत में न रहें. हमेशा खुशमिजाज और अच्छे लोगों की मंडली में रहें. इन लोगों के साथ सामाजिकता कायम करें. जिस चीज में आपकी रुचि है, इसी तरह की रुचि वाले लोगों के साथ दोस्ती कायम करें.

6. दूसरों के बारे में अच्छी सोच रखें-अगर जीवन में खुश रहना है तो दूसरों के बारे में हमेशा अच्छी सोच रखें. दूसरे की बुराई कभी न करें. हर रोज किसी अजनवी की आंखों में देखें और उसकी मदद करने की कोशिश करें. इससे बहुत खुशी मिलेगी और आपके अंदर सकारात्मकता आएगी.

7. आत्मसम्मान को जगाएं-अपने बारे में सोचना और आत्म सम्मान को जगाना अच्छी बात है. खुद को कभी भी नीचे न देखें. इसके लिए हमेशा दूसरों के प्रति इमानदार रहें. अगर आप यह सोचते हैं कि आपको अच्छी नौकरी नहीं है या आपके पास पैसा नहीं है तो इससे आत्मसम्मान को ठेस लगेगा. इन चीजों से उपर उठें और सकारात्मक सोच के साथ समय का इंतजार करें.




सावधान! क्या आपका बच्चा भी देखता है मोबाइल? खतरनाक है इसकी लत, एक्सपर्ट से जानिए नुकसान

मोबाइल फोन आज के समय में इंसान की बहुत बड़ी जरूरत बन चुका है. लेकिन इसके दुष्प्रभाव से भी बचना आवश्यक है. विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखना अभिभावकों के लिए बेहद जरूरी है. क्योंकि छोटे बच्चों को मोबाइल देखने से कुछ खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं. एक्सपर्ट की माने तो छोटे बच्चे कार्टून व गेम यदि अधिक समय तक देखते हैं, तो यह बच्चों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.

सहारनपुर के नेत्र रोग विशेषज्ञ मनु तनेजा ने बताया कि दो घंटे से अधिक मोबाइल को देखना सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है. उन्होंने बताया कि बच्चे, व्यस्क या उम्र दराज सभी लोगों पर यह बात लागू होती है कि स्वस्थ रहने के लिए मोबाइल का प्रयोग कम समय के लिए ही करें. लगातार दो घंटे से अधिक मोबाइल देखना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन से निकलने वाली तरंगें मनुष्य ही नहीं बल्कि अन्य जीव जंतुओं के लिए भी शारीरिक रूप से दुष्प्रभावी होती है.

दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे की पहुंच से मोबाइल रखें दूर

जिला अस्पताल में नियुक्त आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर मनु तनेजा ने बताया कि दो वर्ष के बच्चे को तो मोबाइल किसी कीमत पर भी ना दिखाएं. उन्होंने बताया कि यदि किसी कारण से बच्चा मोबाइल देखने की जिद करता है, तो उसे अन्य चीजों के लिए प्रोत्साहित करें. चिकित्सक ने बताया कि जैसे किसी पार्क में घूमने के लिए, बाजार में घूमने के लिए, बच्चों को ललायित करें. जिससे कि उसके मन में दूसरी चीजों के लिए जगह बनी रहे. उन्होंने बताया कि मोबाइल देखने का  टाइम को हर हाल में कम करना बच्चों के स्वास्थ्य व सेहत के लिए बेहद जरूरी है.

अभिभावक बच्चों के प्रति रहे सतर्क

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मनु तनेजा ने बताया कि बच्चों में मोबाइल देखने की लत बहुत ज्यादा देखी जा रही है. लेकिन अभिभावकों को इस और ध्यान देना होगा और बच्चे की स्क्रीनिंग टाइम को कम करना होगा. उन्होंने बताया कि इसके अलावा माता-पिता अपने बच्चों की समय-समय पर आंख की जांच कराते रहें. क्योंकि अत्यधिक मोबाइल देखने से बच्चों के निकट की दृष्टि में परेशानी देखने में आ रही है. इसलिए अपने बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखें और समय-समय पर आंखों की जांच व चश्मा का नंबर की जांच करते रहे.