देखने में छोटी पर काम में महागुणी, रोजाना एक-दो चबाने से ही मिल जाएंगे 3 बड़े फायदे

Benefits of Cardamom: यह देखने में बेहद छोटी होती है जिसके अंदर कई दाने होते हैं. लोग अक्सर इसे किचन मसाला ही समझ बैठते हैं लेकिन इलायची में कुदरती गुणों का खान है. इलायची कई बीमारियों से बचाव कर सकती है. इलाइची का फ्लेवर थोड़ा पुदीने की तरह होता है. आयुर्वेद में सदियों से इलायची का पानी और इलायची के तेल का इस्तेमाल कई बीमारियों को भगाने में किया जाता रहा है. इलायची में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर से फ्री रेडिकल्स को हटाने में मददगार है. यही कारण है कि इलायची कैंसर से बचाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इलायची में विटामिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, विटामिन-सी , मिनरल, आयरन, मैंगनीज, कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इलायची पौरुष शक्ति को बढ़ाने का भी काम करती है. इसके साथ ही इलाइची में एंटीऑक्सीडेंट और डाययूरेटिक (Diuretic ) गुण भी पाया जाता है. यानी यह पेशाब को साफ करने में भी मददगार है. आइए जानते हैं कि इलायची के सेवन से शरीर को क्या-क्या फायदे मिलते हैं.

इलायची के फायदे

1. डायबिटीज को कंट्रोल में-हेल्थलाइन की खबर के मुताबिक छोटी सी इलायची ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में माहिर है. चूहों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि जब चूहों को नॉर्मल डाइट के साथ इलायची का पाउडर दिया गया तो आश्चर्यजनक रूप से उसमें ब्लड शुगर कंट्रोल हो गया. यानी इलायची का सेवन डायबिटीज को कंट्रोल करने में बहुत मददगार है. अगर सुबह में इलायची के पानी को पीया जाए तो इससे लाभ मिलेगा.

2. बीपी लो करने में फायदेमंद- ब्लड शुगर की तरह ब्लड प्रेशर कम करने में इलायची का सेवन बहुत फायदेमंद है. 12 सप्ताह तक किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने 3 ग्राम इलायची के पाउडर का रोजाना सेवन किया, उसका ब्लड प्रेशर बहुत कम हो गया. साथ ही उनमें एंटीऑक्सीडेंट्स 90 प्रतिशत तक बढ़ गए. रिसर्च के मुताबिक इलायची ऑवरऑल हेल्थ की प्रोब्लम को सही करती है. इलायची में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण भी होता है जिसके कारण यह हार्ट के मसल्स में सूजन को नहीं होने देती है.

3. वजन कम करने में-इलायची का सेवन वजन भी कम कर सकता है. एनसीबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इलायची में कैलोरी न के बराबर होती है और इसमें भूख को घटाने की क्षमता होती है. इसमें कई सारे विटामिन और मिनिरलस् होते हैं जो वेट लॉस करने में मददगार होते हैं. इसके लिए इलायची को पानी में उबाल कर इसका पानी पीना चाहिए.

4. कैंसर से लड़ने की क्षमता-इलाइची में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स कैंसर से लड़ने की क्षमता रखते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक चूहों पर अध्ययन में पाया गया कि इलाइची के पाउडर में खास प्रकार का एंजाइम होते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं को मारने में सक्षम है. यह कोलोन और ब्रेस्ट कैंसर को रोकने में बेहद फायदा पहुंचाता है.

5. स्पर्म बढ़ाने में – रिसर्च के मुताबिक इलायची का नियमित सेवन स्पर्म की गुणवत्ता और संख्या को बढ़ा सकती है. इलायची से महिला और पुरुष दोनों में फर्टिलिटी बूस्ट होती है. हालांकि इसे लेकर अभी और रिसर्च की जरूरत होती है.




बैक पेन ने शरीर के अंग-अंग को बना दिया है पंगु? 30 मिनट करें सिर्फ एक काम, पलटकर नहीं आएगा पीठ का दर्द

Magic Cure Tips for Back Pain: आधुनिक लाइफस्टाइल में कमर दर्द (Back Pain) कामकाजी लोगों के लिए बहुत बड़ी समस्या है. अधिकांश लोग किसी न किसी वजह से बैक पेन के शिकार हो जाते हैं. बैक पेन से छुटकारा पाने के लिए लोग एर्गोनोमिक चेयर खरीदते हैं, ऑफिस में चेयर के पीछे बैक सपोर्ट लगाते हैं या स्टैंडिंग डेस्क मंगाते हैं. हालांकि सच्चाई यह है कि इन चीजों से भी बैक पेन पूरी तरह गायब हो जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है. पर यदि आप बैक पेन से छुटकारा पाना चाहते हैं तो इसके लिए बहुत ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है बल्कि इसके लिए 30 मिनट तक क्रॉस लेग यानी पैरों को एक-दूसरे पर चढ़ा कर बैठ जाए. इससे कमर दर्द से छुट्टी मिल जाएगी. यह बात मुंबई में एसएल रहेजा अस्पताल के ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. सिद्धार्थ शाह ने बताया है.

हड्डियों और जोड़ों में लचीलापन

इंडियन एक्सप्रेस की खबर में डॉ. सिद्धार्थ शाह बताते हैं कि रीढ़ की हड्डी को मजबूत, लचीलापन और पॉश्चर को सही करने के लिए बस फर्श पर 30 मिनट के लिए क्रॉस लेग कर एक ही स्थिति में बैठ जाइए. क्रॉस लेग का सीधा सा मतलब है फर्श पर पालथी मारकर बैठ जाइए. एक तरह से योगा पोज बना लीजिए. फर्श पर क्रॉस लेग करके बैठने से पीठ, कूल्हों और पैरों की मांसपेशियों में खिंचाव होता है जिससे हड्डियों के जोड़ों में लचीलापन आता है. इससे रीढ़ की हड्डियों में जो नेचुरल कर्व होता है, उसमें लोच लाता है और शरीर की मुख्य मांसपेशियों की ताकत में सुधार लाता है. डॉ. सिद्धार्थ ने बताया कि यदि आप कुछ दिनों तक लगातार ऐसा करेंगे तो जब आप चलेंगे तो इसमें बेहतर संतुलन कायम रहेगा. मरीजों पर किए गए प्रयोगों में यह साबित हो चुका है कि क्रॉस लेग स्थिति में बैठने से रीढ़ की हड्डियों में खून का प्रवाह बढ़ जाता है जिससे इसकी क्षमता में वृद्धि होती है.

तन के साथ मन को भी राहत

डॉ. सिद्धार्थ शाह के मुताबिक क्रॉस लेग बैठने से पीठ के मसल्स, हिप्स और पैरों में लचीलापन आता है जिससे रोजाना के मूवमेंट में बहुत मदद मिलती है. इससे हड्डियों में फ्रेक्चर का जोखिम कम हो जाता है. क्रॉस लेग स्थिति में बैठने से पॉश्चर सही से बन पाता है. अधिकांश लोगों की खराब पॉश्चर के कारण पीठ में इतना तेज दर्द होता है. इससे कोर मसल्स मजबूत होता है. क्रॉस लेग स्थिति पूरे शरीर में ब्लड फ्लो को बढ़ाता है जिससे ऑक्सीजन की सप्लाई सही से हो पाती है. सबसे अच्छी बात यह है कि कुछ दिनों तक क्रॉस लेग पोजिशन का अभ्यास करने के बाद पूरा शरीर सहज होने लगता है जिससे बेहद रिलेक्स महसूस होता है. इससे किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है. इसके अलावा तनाव और एंग्जाइटी दूर होती है. लगातार इसका अभ्यास करने से मन-शरीर और आत्मा में संतुलन कायम होता है.




Deficiency of Haemoglobin : बिना बताए शरीर की नस-नस को तोड़ देती है इस चीज की कमी, खून बनने लगता है पानी, नहीं संभले तो एक साथ कई मुश्किलें

कुछ लोगों को अक्सर शरीर में इतनी कमजोरी रहती है कि वह कुछ भी करने में असहाय महसूस करने लगते हैं. हालांकि शरीर में कमजोरी के कई कारण होते हैं लेकिन अगर कोई बीमारी नहीं है तो इस बात की संभावना ज्यादा रहती है कि उसे हीमोग्लोबिन की कमी है. आप जानते होंगे कि खून हमारे शरीर के सर्कुलेटरी सिस्टम का मुख्य आधार है. खून वह चीज है जो शरीर के हर एक हिस्से में जीवन के लिए जरूरी ऑक्सीजन और अन्य पोषक तत्व पहुंचाता है और वहां से अपशिष्ट पदार्थ को खींचकर ले आता है. शरीर के हर हिस्से में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम खून में मोजूद हीमोग्लोबिन ही करता है.

इसलिए जब हीमोग्लोबिन की कमी होती है तो धीरे-धीरे यह शरीर की नस-नस को पंगु बनाने लगती है. चिंता की बात यह है कि बिना खून जांच कराए पता भी नहीं चलता कि शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो गई है. हालांकि अगर कुछ लक्षणों पर ध्यान दिया जाए तो यह पता चल सकता है कि शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो गई लेकिन अधिकांश लोग इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसे में आपको उन लक्षणों को जानना चाहिए जिनसे शरीर इस तरह से पंगु बनने लगता है.

शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के संकेत

  • 1. जब शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होती है तब पूरे शरीर में अक्सर थकान रहती है. तन-बदन टूटने लगता है.
  • 2. शरीर इतना कमजोर हो जाता है कि कुछ भी काम सही से नहीं हो पाता. हर काम में आलस होने लगता है.
  • 3. हीमोग्लोबिन की कमी होने पर हल्का सा भारी काम करने पर सांस फूलने लगती है.
  • 4. शरीर का रंग हल्का पीला या मटमैला होने लगता है. यह काली और भूरी स्किन की तुलना में गोरी स्किन पर बहुत ज्यादा दिखता है.
  • 5. हीमोग्लोबिन की कमी होने पर धड़कनें अनियमित होने लगती है.
  • 6. अगर हीमोग्लोबिन की कमी ज्यादा होने लगती है तो छाती में दर्द भी करने लगता है.
  • 7. गंभीर स्थिति में सिर में दर्द और चक्कर भी आने लगता है.
  • 8. हाथ और पैर ठंडे होने लगते हैं.
  • 9. अक्सर सिर दर्द होता है.

इन स्थितियों में डॉक्टर के पास जाना जरूरी

मायो क्लिनक के मुताबिक अगर आप बहुत अधिक थकान महसूस करते हैं. कुछ भी काम करने का मन नहीं करता है और सांसें लेने में दिक्कत हो रही है तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. यह नहीं समझना चाहिए कि यह मामूली चीज है. हीमोग्लोबिन की कमी के कारण धीरे-धीरे शरीर के अंग खराब होने लगेंगे. यह शुरुआत में एनीमिया बीमारी से शुरू होती है जो बढ़ने पर ज्यादा खराब होने लगती है. इससे महिलाओं को प्रेग्नेंसी में भारी दिक्कत हो सकती है जबकि हार्ट प्रोब्लम का खतरा बढ़ सकता है.

कैसे बढ़ाएं हीमोग्लोबिन

हीमोग्लोबिन की कमी के कई कारण है. इनमें पोषक तत्वों का अभाव और विटामिन बी 12 की कमी प्रमुख है. इसके लिए आयरन, फॉलेट, विटामिन सी युक्त डाइट लेनी चाहिए. इसके लिए कलरफुल ग्रीन बेजिटेबल, ड्राई फ्रूट्, साबुत अनाज, हरी मटर, राजमा, बींस, फ्रूट जूस, अनार का जूस, मीट, डेयरी प्रोडक्ट, शिमला मिर्च, संतरा, टमाटर, साइट्रस फ्रूट, तरबूज, स्ट्रॉबेरी आदि का सेवन करना चाहिए।




Lifestyle: इन घरेलू नुस्खों से एक दिन में दूध की तरह सफ़ेद हो जाएंगे आपके पीले मटमैले दांत

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मुस्कान हमारे चेहरे की रौनक में चार चांद लगाते हैं। लेकिन कई बार लोग लोग पीले और गंदे दांतों की वजह से खुलकर मुस्कुरा भी नहीं पाते हैं। गंदे और पीले दांत न सिर्फ चेहरे की खूबसूरती को बिगाड़ते है, बल्कि इस वजह से आपके दांत कमजोर होने लगते हैं और आपको कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए डॉक्टर्स दांतों की साफ-सफाई के लिए दिन में दो बार ब्रश करने की सलाह देते हैं। इससे आपके दांत मजबूत और चमकदार बने रहते हैं। हालांकि 2 बार ब्रश करने के बाद भी कुछ लोगों के दांत पीले ही रहते हैं। ऐसे में दांतों के पीलापन से छुटकारा पाने के लिए आप इन घरेलू नुस्खों को करें ट्राय।

पीले दांतों के लिए इन घरेलू नुस्खों को आज़माएं

  • पीले दांतों के लिए नारियल का तेल बेहद असरदार है। नारियल के तेल को आप दांतों पर लगा लें और फिर हाथों से अच्छी तरह दांतों को साफ़ करें। फिर गुनगुने पानी से कुल्ला करें। ऐसा करने से आपके पीले दांत सफ़ेद हो जायेंगे।
  • हल्दी में नारियल तेल मिलाकर दांतों पर मल लीजिए, इससे आपके पीले दांत सफेद हो जाएंगे। इससे मुंह से आ रही बदबू दूर होगी और दांत पर जमी पीली परत भी धीरे-धीरे हट जाएगी।
  • बेकिंग सोडा, नारियल तेल और हल्दी मिलाकर दांतों पर मलने से आपके पीले दांत सफेद हो जाएंगे। आप इसको 15 दिन तक कर लेते हैं तो फिर आपके दांत की चमक दोबारा से वापस आ जाएगी
  • हल्दी में एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो दांत में चिपके बैक्टीरिया को खत्म कर देते हैं। इसलिए हल्दी में पुदीना का रस मिलाकर दांतों को ब्रश करें। इससे आपके दांत स्वस्थ रहेंगे और दांतों के दर्द से भी छुटकारा मिलेगा।
  • पीले दांतों से छुटकारा दिलाने में संतरे का छिलका बेहद असरदार है। संतरे के छिलके को सूखा लें और फिर उसे क्रश कर उसका पाउडर बना लें। अब उस पाउडर से दांतों की सफाई करें। ऐसा करने से आपके पीले दांत दूध की तरह सफेद हो जायेंगे।




हो गया साइंटिफिक कंफर्म, रोजाना चलें सिर्फ इतने कदम, समय से पहले छू भी नहीं पाएगी मौत, बीमारियां भी डर कर भागेंगी

How to Stop Premature Death: हर इंसान की मौत तय है. पर यह कब आ जाए, कोई नहीं जानता. इंसान अगर पूरी उम्र जीकर इस दुनिया से विदा ले तो यह सबके लिए अच्छा है. पर अगर समय से पहले चला जाए तो अपने परिवार में दुखों का पहाड़ छोड़ जाता है. हर कोई चाहता है कि वह इस दुनिया को तभी अलविदा कहे जब वह इसे पूरी तरह जी लें. लेकिन इसका कोई फॉर्मूला है? कई सालों से वैज्ञानिक इस गुत्थी को सुलझाने में लगे हैं. हाल ही के दिनों में इसे लेकर कई रिसर्च हुई हैं. कुछ में दावा किया गया कि रोजाना 10 हजार कदम समय से पहले मौत के जोखिम से बचाएगा. पर अब एक नई साइंटिफिक रिसर्च में दावा किया जा रहा है कि 10 हजार कदम नहीं बल्कि 8 हजार कदम ही पर्याप्त है.

10 हजार कदम का वैज्ञानिक आधार नहीं

साइंसडेली की एक रिपोर्ट ने इंटरनेशनल स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि 8 हजार कदम समय पूर्व मौत के जोखिम से बचने के लिए पर्याप्त है. अधिकतम लोगों को 8 हजार कदम से ही लाभ मिलेगा. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पहले की रिसर्च में 10 हजार कदम चलने की बात का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. अध्ययन में कहा गया कि धीरे-धीरे चलने की तुलना में तेज चलना अपेक्षाकृत बेहतर है. आप जितनी तेजी से चलेंगे, समय पूर् मौत का जोखिम उतना ही कम होगा. यह अध्ययन स्पेन में ग्रेनाडा यूनिवर्सिडैड के नेतृत्व में किया गया है. इसमें नीदरलैंड और अमेरिका के शोधकर्ता भी शामिल थे. इस अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने वैज्ञानिक रूप से निर्धारित किया कि प्रत्येक दिन कितने कदम उठाने की आवश्यकता है जिससे मौत का जोखिम कम हो सके. संबंधित पेपर अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के जर्नल में प्रकाशित किया गया है. अध्ययन में कहा गया कि रोजाना 10 हजार कदम चलने संबंधी आइडिया पहली बार 1960 के आसापस जापान से आया लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.

चलने की स्पीड का बहुत अधिक महत्व

शोधकर्ताओं ने कहा कि अगर हम हार्ट संबंधी बीमारियों से होने वाली मौत के जोखिम को कम करने पर ध्यान दें तो यह 7000 कदम ही पर्याप्त है. अगर हम ऑवरऑल हेल्थ की बात करें तो यह 800 कदम पर्याप्त है. शोधकर्ताओं ने 1.1 लाख से अधिक प्रतिभागियों को शामिल करते हुए 12 अंतर्राष्ट्रीय अध्ययनों के डेटा का विश्लेषण किया. रिसर्च के मुताबिक प्रतिदिन लगभग आठ हजार कदम चलने से शीघ्र मृत्यु का जोखिम काफी हद तक कम हो सकता है. इसमें एक कदम की माप पुरुषों के लिए 76 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया जबकि महिलाओं के लिए 67 सेंटीमीटर रखा गया. हालांकि आप कितनी स्पीड से चल रहे हैं, यह काफी मायने रखता है. धीरे-धीरे चलने की तुलना में तेज गति से चलने का अतिरिक्त लाभ मिलता है. अध्ययन के मुताबिक हर दिन आपके द्वारा उठाए जाने वाले कदमों की संख्या में थोड़ी सी वृद्धि करने से उल्लेखनीय लाभ हो सकते हैं. उदाहरण के लिए, जो लोग कम व्यायाम करते हैं, उनके लिए लगभग 500 का प्रत्येक अतिरिक्त कदम उनके स्वास्थ्य में और सुधार कर सकता है.




फ्लू आने से पहले 10 बार सोचेगा, अगर करेंगे अमृत समान इन हर्ब्स का सेवन, सर्दी-जुकाम पर भी लगेगा ब्रेक

Diet to Keep Flu Away: सर्दी का मौसम आ गया है. अब लोगों को फ्लू होना भी शुरू हो गया है. सर्दी में फ्लू होने से शरीर में कई तरह की परेशानियां होने लगती है. इससे बहुत असहज स्थिति हो जाती है और ऑफिस में जा रहे हैं तो अन्य लोगों को भी हो जाती है. जब सर्दी आती है तब तापमान में कमी की वजह से हवा में नमी ज्यादा होने लगती है. इससे सूक्ष्म जीवों के तेजी से फैलने की आशंका ज्यादा हो जाती है. ये सूक्ष्मजीव इंसान के शरीर में घुसकर इम्यून सिस्टम को कमजोर करने लगते हैं. फ्लू के वायरस शरीर में तभी घुसते हैं जब शरीर की इम्यूनिटी कमजोर होती है. इम्यूनिटी कमजोर होने पर वायरल फ्लू का खतरा ज्यादा रहता है. इसलिए अगर आप इम्यूनिटी बूस्टर वाले फूड को अपनी डाइट में शामिल करेंगे तो फ्लू के वायरस शरीर में घुसने से पहले 10 बार सोचेगा.

ये फूड रखेंगे फ्लू से दूर

1. अदरक-बहुत से लोगों का मानना है कि अदरक खाने से क्या होगा, यह तो हम अक्सर खाते ही हैं. लेकिन ऐसा सोचना गलत है. टीओआई की खबर के मुताबिक यदि आप अदरक का इस मौसम में रोजाना सेवन करेंगे तो फ्लू के वायरस का शरीर में पहुंचना मुश्किल है. अदरक एंटी-वायरल, एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स गुणों से भरपूर होता है जो शरीर में हर तरह के इंफेक्शन को होने से रोकता है. अदरक को आप चाय, सूप या स्मूदी में मिलाकर सेवन कर सकते हैं या अदरक और शहद को एक साथ खा सकते हैं.

2. साइट्रस फ्रूट्स-सर्दी में संतरे, चकोतरा, पाइन एप्पल, नींबू, किनू आदि प्रचूरता से मिलने लगते हैं. ये सब साइट्रस फ्रूट है. इस खट्टे-मीठे फलों में प्रचूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है. विटामिन सी की प्रचूरता शरीर में इम्यूनिटी को बढ़ाती है. इसलिए सर्दी में साइट्रस फ्रूट का भरपूर सेवन करना चाहिए. हालांकि कुछ लोगों को मानना है कि साइट्रस फ्रूट से सर्दी या फ्लू हो जाता है जो बिल्कुल गलत है. साइट्रस फ्रूट सिर्फ फ्लू से ही नहीं बचाता बल्कि यह कई बीमारियों से दूर रखता है.

3. हल्दी-हल्दी शरीर को कई बीमारियों से बचाती है. हालांकि यह हर भारतीय घरों के किचन में मौजूद रहती है लेकिन इसका सही तरीके से सेवन जरूरी है. हल्दी को यदि आप दूध में मिलाकर सेवन करते हैं तो इसका फायदा ज्यादा मिलेगा. हल्दी में एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं. हल्दी शरीर में इम्यूनिटी बूस्ट करती है जिसके कारण यह शरीर को सूक्ष्मजीवों से बचाती है.

4. शहद-हालांकि हमेशा हेल्दी रहने के लिए रोजाना एक चम्मच शहद का सेवन करना बहुत फायदेमंद है लेकिन सर्दी में निश्चित रूप से शहद का सेवन करना चाहिए. इसका कारण है कि शहद की तासीर गर्म होती है और इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लामेटरी गुण हमें बीमारियों से दूर रखता है. यह सर्दी-खांसी का रामबाण इलाज है. इससे इम्यूनिटी बूस्ट होता है. कच्चा शहद बेहद गुणकारी है. इसमें नेचुरल एंजाइम होते हैं. इसलिए कोशिश कीजिए कि कच्चा और शुद्ध शहद आपको प्राप्त होगा




कमर तक लंबे और घने हो जाएंगे आपके बाल, बस ऐसे आज़माएं मेथी दाने के ये देसी उपाय

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खूबसूरत लंबे बालों की चाहत किसे नहीं होती, लंबे और घने बाल पाने के लिए लोग न जाने कितना नुस्खे आज़माते हैं। अगर आप भी उनमे से एक हैं जो लम्बे बालों की चाहत हर तरह के नुस्खेः आज़मा चुके हैं तो एक बार आप मेथी दाने (Fenugreek Seeds) का यह नुस्खा भी ज़रूर आज़माएं। दरअसल, मेथी के दानों में फॉलिक एसिड, विटामिन ए, विटामिन के और विटामिन सी बेहतरीन मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा मेथी के दानों (Fenugreek Seeds) में एंटी-ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं जो बालों को लंबा और घना बनाने में असरदार साबित होते हैं। चलिए हम आपको बताते हैं कि किन मेथी के दानों को किन तरीकों से आप आज़माकर अपने बालों को खूबसूरत और घने बना सकते हैं।

लंबे और घने बालों के लिए इन तरीकों से करें मेथी का इस्तेमाल

  • मेथी दानों को रात भर पानी में भिगोएं और फिर उसे पीस लें अब इस पेस्ट में गुड़हल के फूल और पत्तियों को भी मिलाएं और एक बार फिर से इन्हें पीसें। अब इस पेस्ट को बालों में 30 मिनट तक रखें और उसके बाद धुल दें। ऐसा करने से आपके बाल कुछ ही दोनों में लम्बे और घने हो जाएंगे।
  • लंबे और घने बालों के लिए आप यह तरीका भी आज़मा सकते हैं। दो-तीन चम्मच मेथी के दाने रात में भिगो दें। सुबह पानी में इसका पेस्ट बनायें फिर उसमें एक से दो चम्मच कोकोनट मिल्क मिलाकर बालों की जड़ों में लगाएं, इससे बाल बहुत तेजी से बढ़ते हैं।

इन परेशानियों में भी है कारगर

  • हेयर फॉल: मेथी का पेस्ट हेयर फॉल कम करने में असरदार है। मेथी दानों को रात भर पानी में भिगोकर रखें। अगले दिन भिगोये हुए दानों का पेस्ट बनाकर उसमें थोड़ा शहद मिलाएं और फिर उन्हें बालों की जड़ों में लगाएं।
  • बालों को बनाएं जड़ से मजबूत: मेथी दाने का पानी बालों में लगाने से स्कैल्प का ब्लड अच्छे से सर्कुलेट होता है।जिस वजह से बाल जड़ से मजबूत होते हैं। मेथी दाने के पानी को स्प्रे बोतल में भरकर इसका इस्तेमाल हेयर टोनर की तरह करें।
  • कमजोर बालों के लिए: अगर आपके बाल कमजोर है तो उन्हें मजबूत बनाने के लिए मेथी दानों को रात भर पानी में भिगोएं और अगले दिन उबालकर इसका पानी छान लें। ठंडा होने के बाद मेथी दानों के पानी को बालों में लगाना है। इससे बाल मजबूत होंगे।




सर्दी में डायबिटीज मरीज करें इन 5 चीजों का सेवन, कड़ाके की ठंड में भी हर खतरे से रहेंगे महफूज

Winter food for Diabetes patients: सर्दी के मौसम में तापमान में गिरावट के साथ ही मेटाबोल्म की प्रक्रिया धीमी होने लगती है. दूसरी ओर सर्दी में नमी के बढ़ने से बैक्टीरिया, वायरस, फंगस के पनपने का जोखिम भी बढ़ जाता है. इन सबसे लोग वायरल सर्दी-जुकाम, बुखार, इंफेक्शन आदि से पीड़ित होने लगते हैं. ऐसे में यदि पहले से बीमारी लोगों को अगर ये सब परेशानी हो जाए तो मुसीबतें और बढ़ जाती है. खासकर अगर मरीज डायबेटिक है तो उनके साथ दिक्कतों का पहाड़ खड़ा हो जाता है. डायबेटिक मरीज में मेटाबोलिज्म का धीमा होना ज्यादा खतरनाक है. लेकिन सर्दी आने से पहले अगर डायबेटिक मरीज कुछ खास एहतियात बरतने शुरू कर दें तो इन दिक्कतों से निजात मिल सकती है. दरअसल, डायबिटीज मरीजों की डाइट में उन चीजों का शामिल करना ज्यादा जरूरी है जिनसे शुगर न बढ़े और इम्यूनिटी बूस्ट हो ताकि कोई अन्य बीमारी न लगे. तो आइए जानते हैं कि सर्दी के मौसम में वे कौन-कौन से फूड हैं जिनका सेवन करने से डायबिटीज मरीजों की परेशानियां कम हो जाती है.

डायबिटीज मरीजों के लिए डाइट

1. पंपकिन सीड्स-पंपकिन सीड्स या कद्दू के बीज सुपर फूड है जिसमें कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो इम्यूनिटी को बूस्ट कर कई बीमारियों से लड़ने के लिए शरीर में रक्षा कवच बनाता है. हेल्थलाइन की खबर के मुताबिक एक कप कद्दू के बीज में कार्बोहाइड्रेट न के बराबर होता है. इसलिए यह ब्लड शुगर को बढञने नहीं हेता है. वहीं पंपकिन सीड्स में हेल्दी फैट्स ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है जिसकी तासीर गर्म होती है. यह सर्दी में शरीर को गर्म रखने के साथ ही हार्ट के मसल्स को भी मजबूत और लचीला बनाता है.

2. दालचीनी-दालचीनी बेहद गर्म तासीर की औषधि है. सर्दी के मौसम में दालचीनी का सेवन करने से शरीर गर्म रहता है और मेटाबोलिज्म की प्रक्रिया तेज होती है. यदि आप शुगर के मरीज हैं तो रोजाना दालचीनी का पानी आपके लिए बेहद फायदेमंद है. इसे आप चाय बनाकर पी सकते है. सुबह-सुबह इसका सेवन करने से दिन भर ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा कम हो जाएगा. दालचीनी में कई एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो ब्लड शुगर को कम करने में मदद करते हैं. .

3. स्प्रॉउट- डायबिटीज मरीजों को फाइबर का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि फाइबर शरीर में शुगर को बहुत धीमे-धीमे पचाता है जिससे खून में अचानक शुगर नहीं बढ़ती है. इस प्रकार स्प्रॉउट ब्लड शुगर को तेजी से कम करता है. एक कप स्प्राउट्स में सिर्फ 14 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है. इसके अलावा इसमें 6 ग्राम डाइट्री फायबर होता है जो पाचन शक्ति को मजबूत करता है.

4. शकरकंद- शकरकंद जितना स्वादिष्ट होता है उतना ही औषधिवर्धक है. यह डायबिटीज मरीजों के लिए रामबाण की तरह काम करता है. शकरकंद में मौजूद कार्बोहाइड्रेट लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाता है. शकरकंद में फोटो केमिकल बीटा कैरोटीन होता है जो विटामिन ए में बदल जाता है. इसलिए यह आंख और स्किन के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है.

5. काजू- हालांकि काजू सबसे लिए फायदेमंद है. इसकी तासीर गर्म होती है इसलिए सर्दी में यह ज्यादा फायदेमंद है. लेकिन यह डायबिटीज मरीजों के लिए भी बहुत बेहतरीन ड्राई फ्रूट है. काजू ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है. काजू में कार्बोहाइड्रेट कम और हेल्दी फैट ज्यादा होता है जो बॉडी को हेल्दी रखता हैं।




लड़क‍ियां समय से पहले हो रही जवान, क्‍या इसका पॉल्यूशन से है कोई कनेक्‍शन?

हर साल बढ़ता वायु प्रदूषण दुनिया में न केवल लाखों लोगों की जान ले रहा है बल्कि अनगिनत बीमारियों की वजह भी बन रहा है और इसी को लेकर एक स्टडी में बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें हैरान करने वाली जानकारी सामने आ रही है। इसमें यह पता चला है कि वायु प्रदूषण के चलते बच्चों में समय से पहले ही युवा होने के लक्षण सामने आ रहे हैं जो काफी चिंताजनक है।

वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक अध्ययन किया था और इस बात का खुलासा हुआ है की वायु प्रदूषण के संपर्क में आने में और माहवारी की शुरुआत होने में एक कनेक्शन है। यह अध्ययन एमोरी और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है और इस स्टडी के आंकड़े यह दर्शाते हैं क‍ि जो बच्चियां बचपन में ही ऐसी जगह पर रह रही हैं। जहां हवा में प्रदूषण के महीन कर्ण देखे गए हैं और जहां पर शुरू से ही प्रदूषण का स्तर ज्यादा रहा है. वहां उनमें कम उम्र में ही महावारी की शुरुआत हुई है।

यह स्टडी 5200 से ज्यादा बच्चियों के बारे में प्राप्त जानकारी पर आधारित है।इन लड़क‍ियों की उम्र में 10 से 17 वर्ष के बीच थी और उनमें से कुछ बच्चियों को जल्द ही महावारी की शुरुआत हो गईं थीं। इस अध्ययन में इस बात की जानकारी मिली है क‍ि जिन भी बच्चियों में पहली बार माहवारी का अनुभव हुआ. उनकी उम्र 12 साल की उम्र में हुआ।जो भी बच्चियां जन्म से पहले या बचपन में चार माइक्रोग्राम प्रति मीटर से ज्यादा अतिरिक्त पीएम कर्णों के संपर्क में आई थी, उन्हें समय से पहले इस दिक्कत का सामना करना पड़ा था और इसकी उनमें ज्यादा से ज्यादा संभावना भी पाई गई थी।

शोध में इस बात का भी पता चला है कि जिन बच्चियों में उम्र से पहले ही युवा होने के लक्षण सामने आए हैं उनमें बड़े होने पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा होने की कुछ ज्यादा ही आशंका रहती है।इसी वजह से बच्चों में आगे चलकर हृदय रोगी सब लोगों मधुमेह और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

इस स्टडी में यह भी सामने आया है कि इस पर अधिक शोध करने की आवश्यकता है कि कैसे प्रदूषण बच्चों में समय से पहले माहवारी की शुरुआत की वजह बन सकते हैं साथ ही अपने अध्ययन में शोधकर्ताओं ने केवल प्रदूषण के महीन कर्ण करने पर ध्यान दिया है, लेकिन वायु प्रदूषण के कई प्रकार होते हैं उसे पर भी इस पर कई अध्ययन करने की जरूरत है।




शरीर को भारी नुकसान पहुंचाने लगता है हाई कोलेस्ट्रॉल, साइलेंट किलर है यह बीमारी, चौकन्ना रहेंगे तो फायदे में रहेंगे

High Cholesterol Bad Effects on Body: कोलेस्ट्रॉल एक प्रकार के फैट यानी वसा है जो मोम की तरह चिपचिपा होता है. यह खून के माध्यम से प्रोटीन के साथ शरीर के हर हिस्से तक पहुंचता है. इसलिए कोलेस्ट्रॉल को लाइपोप्रोटीन कहा जाता है. कोलेस्ट्रॉल हेल्दी सेल्स को बनाता है, इसलिए यह हमारे लिए बेहद जरूरी है लेकिन जब यह ज्यादा होने लगे तो ब्लड वैसल्स में चिपचिपा होकर जमा होने लगता है. इससे ब्लड वैसल्स जाम होने लगता है और खून का प्रवाह कम होने लगता है. अगर खून का प्रवाह कम होता है तो हार्ट शरीर के हर हिस्से तक खून पहुंचाने में कमजोर पड़ने लगता है. जैसे-जैसे कोलेस्ट्रॉल खून की नलियों या धमनियों में ज्यादा जमा होने लगता है, तकलीफ उतनी ही बढ़ जाती है. कभी-कभी ब्लड वैसल्स में यह इतना जमा हो जाता है कि ब्लड वैसल्ट फट जाता है या ब्लड वैसल्स में ही क्लॉट होने लगता है. इस स्थिति में हार्ट अटैक या स्ट्रोक आ जाता है.

हाई कोलेस्ट्रॉल से शरीर को नुकसान

मायो क्लिनिक के मुताबिक जब हाई कोलेस्ट्रॉल होता है तो खून का प्रवाह कम हो जाता है. खून का प्रवाह कम होने से शरीर के अंगों में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंचेगी. यहां तक कि पोषक तत्व भी कम पहुंचता है. इस कारण कमजोरी और थकान बढ़ने लगती है. हालांकि यह इतना कम होता है कि इसका पता बहुत बाद में चलता है. हाई कोलेस्ट्रॉल आमतौर पर ब्लड वैसल्स में ही चिपक बैठने लगता है जिसके कारण ब्लड वैसल्स और धमनियां कमजोर होने लगती है जिसका खामियाजा हार्ट अटैक और स्ट्रोक के रूप में अचानक भुगतना पड़ता है. इसलिए हाई कोलेस्ट्रॉल को साइलेंट किलर बीमारी कहा जाता है.

चौकन्ना रहना जरूरी

चूंकि हाई कोलेस्ट्रॉल होने पर शरीर में बमुश्किल ही लक्षण दिखते हैं, इसलिए इसे लेकर हमेशा चौकन्ना रहना बहुत जरूरी है. आमतौर पर हाई कोलेस्ट्रॉल जब बहुत बढ़ जाता है और जब इसका इलाज नहीं होता है तो धमनियों में कोलेस्ट्रॉल के जमा होने से हार्ट खून को पंप नहीं कर पाता है. इस स्थिति में चेस्ट पेन, हार्ट अटैक या स्ट्रोक का आना तय हो जाता है. ऐसे में हाई कोलेस्ट्रॉल से बचने के लिए हर इंसान को चौकन्ना रहना बहुत जरूरी है. चूंकि इस बीमारी का पता सिर्फ खून टेस्ट से ही चल पाता है, इसलिए 25 साल के बाद हर इंसान को एक या दो साल में एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर कराना चाहिए. 60 साल के बाद हर साल लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूरी है. इसके साथ ही हाई कोलेस्ट्रॉल से बचने के लिए वजन पर कंट्रोल रखना होगा. नियमित एक्सरसाइज हाई कोलेस्ट्रॉल से बचाएगा. इसके साथ ही अनहेल्दी डाइट जैसे कि प्रोसेस्ड फूड, अल्कोहल, सैचुरेटेड फैट, रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड भी हाई कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है. वहीं स्मोकिंग से भी दूर रहना होगा.