3 राज्यों में फैला कोरोना का नया वैरिएंट JN.1, देश में 21 केस मिले, जानें एक्सपर्ट की राय

देश भर में कोविड मामलों में बढ़ोतरी के बीच, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वीके पॉल ने बुधवार को कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है. उन्‍होंने कहा कि सतर्कता जरूरी है. इससे पहले केंद्र सरकार और कुछ राज्‍य सरकारों ने कोरोना को लेकर एडवाइजरी जारी की थी. इसमें कहा गया था कि बच्‍चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और लंबे समय से बीमार लोगों को भीड़- भाड़ से बचना चाहिए. ऐसे लोगों को मास्‍क लगाने को कहा गया था. लोगों को सलाह दी गई थी कि वे पर्याप्‍त हवादार जगहों पर ही रहें.

सामान्‍य वैरिएंट… खतरनाक नहीं आईसीएमआर के कोविड टास्‍क फोर्स के चेयरमेन रहे और अब भारत के नेशनल टैक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्‍यूनाइजेशन (NTAGI) के चीफ डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा कि पैनिक करने की बिल्‍कुल जरूरत नहीं है. यह सामान्‍य वैरिएंट है. यह खतरनाक नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना का ये नया वेरिएंट खतरनाक नहीं है लेकिन सर्दी, जुकाम, वायरल में जैसे सावधानियां बरतते हैं और परिवार में एक के होने पर दूसरे लोग इसकी चपेट में न आएं, ऐसे बचाव करते हैं, वैसे करते रहें. हाथों को साबुन से धोएं, भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्‍क पहनें.

JN.1 क्‍या है जो सबसे तेजी से फैलने वाले वायरस में से एक बना दरअसल कोरोना वैरिएंट ओमिक्रॉन वंश का वंशज, JN.1 पिछले कुछ हफ्तों में सबसे तेजी से फैलने वाले वायरस में से एक बन गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने JN.1 को एक अलग ‘वैरीअंट ऑफ इंटरेस्ट’ के रूप में वर्गीकृत किया है. इसका सबसे पहला केस अगस्त में लक्जमबर्ग में पाया गया. इसके बाद यह धीरे-धीरे 36 से 40 देशों में फैल गया.

देश भर में कोरोना अलर्ट, निगरानी और रिपोर्ट करने को कहा नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वीके पॉल ने राज्यों को कोविड की तैयारी बढ़ाने, परीक्षण बढ़ाने और अपनी निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया. इस बीच, केंद्र ने देश भर में कोविड के मामले बढ़ने के कारण राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सतर्क रहने को कहा है. सलाह में राज्यों को नियमित आधार पर सभी स्वास्थ्य सुविधाओं में जिलेवार इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी और गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी के मामलों की निगरानी और रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया.




Wrinkles : ये घरेलू नुस्खे कभी नहीं आने देंगे कभी झुर्रियां, जानिए नुस्खे और आज़मा कर देखें

ये घरेलू नुस्खे कभी नहीं आने देंगे कभी झुर्रियां, जानिए नुस्खे और आज़मा कर देखें

उम्र बढ़ने के कारण त्वचा पर झुर्रियां (Wrinkles) नजर आना आम समस्या है। लेकिन, झुर्रियां कम उम्र में ही पड़ने लगें तो चिंता होने लगती है। दरअसल, खराब जीवनशैली की आदतें, सही तरह से स्किन केयर ना करना और खानपान में पोषक तत्वों की कमी होने पर भी माथे पर झुर्रियां (Forehead Wrinkles) नजर आने लगती हैं। ऐसे में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखकर इस दिक्कत से निजात पायी जा सकती है। साथ ही, कुछ एंटी-एंजिंग टिप्स और घरेलू नुस्खे भी आपके बेहद काम आएंगे। ऐसे में आइए जान लें, घरेलू उपचार।

ब्यूटी एक्सपर्ट्स की मानना है कि, रोज रात में सोने से पहले चेहरे पर नारियल का तेल (Coconut Oil) या फिर बादाम का तेल लगाएं। इससे त्वचा को एंटी-एजिंग गुणों के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट्स भी मिल जाते हैं।

केले के इस्तेमाल से भी आप ‘झुर्रियां’ (Wrinkles) से निजात पा सकते हैं। क्योंकि, केला में मॉइस्चराइजिंग गुण पाए जाते हैं। जो झुर्रियों को कम करने में मददगार है। इसके लिए, आप एक बाउल में पके केले को मैश कर लें, इसके बाद चेहरे पर मसाज करें, करीब 15 मिनट बाद पानी से धो लें।

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एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर शहद स्किन के लिए काफी फायदेमंद होता है। अगर आप झुर्रियों से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो चेहरे पर शहद लगाएं, इसे एक पतली परत की तरह फैला दें। करीब 20-30 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद गुनगुने पानी से धो लें।

एलोवेरा और अंडे को मिलाकर आप एंटी-एंजिंग फेस पैक (Face Pack) बना सकती हैं। इस फेस पैक को बनाने के लिए 2 चम्मच एलोवेरा जैल और एक अंडे का सफेद हिस्सा लें। इसे चेहरे पर 10 से 15 मिनट लगाए रखने के बाद धोएं। हफ्ते में एक बार इस फेस पैक को बनाकर लगाया जा सकता है।

एक्सपर्ट्स की मानें तो, झुर्रियों से निजात पाने के लिए अपने खानपान में बदलाव करें। ब्लूबेरीज, टमाटर, स्ट्रॉबेरी और फलों व सब्जियों का जूस अपनी डाइट में शामिल करें।




आंखों के नीचे भद्दे काले घेरों ने जमा लिया है डेरा? आज़माएं ये घरेलू नुस्खे मिनटों में दूर होंगे डार्क सर्कल

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आंखों के नीचे आए डार्क सर्कल आपके चेहरे की रौनक बिगाड़ देते हैं। इन काले दाग-धब्बों की वजह से चेहरा बेजान लगने लगता है। कई बार लोग इन डार्क सर्कल को छिपाने के लिए मेअकप की सहायता लेते हैं। लेकिन यह उपाय अस्थाई है। जैसे ही मेकअप हटा आपके डार्क सर्कल फिर से दिखाई देने लगते हैं। डार्क सर्कल किसी भी उम्र में और कई कारणों से हो सकते हैं। जैसे – नींद पूरी न होना, देर रात तक जगना, थकान या फिर जेनेटिक्स भी इसकी वजह हो सकते हैं। सूरज की यूवी किरणें भी स्किन को डैमेज करती हैं। आंखों के नीचे अगर काले घेरे या सूजन की वजह से चेहरा कई साल बड़ा दिखता है। ऐसे में अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो इन कुछ उपायों से काले दाग धब्बों से आप छुटकारा पा सकते हैं।

काले घेरों के लिए ये उपाय आजमाएं

  • खीरा और आलू : खीरे की ठंडी स्लाइस को अपनी आंखों पर 10-15 मिनट के लिए रखने से इस समस्या को कम किया जा सकता है। साथ ही अगर आपकी आँखों का डार्क सर्कल ज़्यादा बढ़ गया है तो अपनी आंखों पर आलू की स्लाइस काट कर लगाएं। ऐसा करने से आपके डार्क सर्कल कम हो जाएंगे।

  • गुलाब जल: गुलाब जल स्किन पर कूलिंग इफेक्ट देता है। यह आंखों के आसपास की सूजन और काले घेरे को कम करने में बेहद असरदार है। गुलाब जल को आंखों पर 10-15 मिनट के लिए लगाएं और फिर ठंडे पानी से आंखों को धोएं।
  • ठंडे पानी से करें सेकाई: डार्क सर्कल और आंखों के आसपास की सूजन को कम करने के लिए ठंडे पानी को बाउल में डालें और उसमे अपना चेहरा डुबोएं। ऐसा करने से आपकी स्किन सॉफ्ट होगी और डार्क सर्कल से भी छुटकारा मिलेगा।
  • ठंडा दूध: सबसे पहले एक बाउल में थोड़ा ठंडा दूध लें और इसमें दो कॉटन बॉल्स को भिगोएं. कॉटन बॉल्स को आंखों के ऊपर इस तरह रखें कि ये डार्क सर्कल्स को कवर कर ले. इन्हें 20 मिनट के बाद हटा दें। ताजे पानी से आंखों को धोएं। डार्क सर्कल हटाने के लिए दूध का इस्तेमाल करने का ये सबसे आसान तरीका है।
  • संतरे का पाउडर: संतरे में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाएत है. इसके छिलकों को 3 से 4 दिन तक धूप में सुखा लें और पीसकर जार में रख लें। अब एक चम्‍मच पाउडर में थोड़ा सा दूध मिलाकर पेस्‍ट बना लें. पेस्ट को आंखों के नीचे हल्के हाथों से लगाएं. हफ्ते में 2 से 3 बार इसे लगाएं। 2 हफ्ते में आपको फर्क दिखेगा।




क्या कोरोना का फिर टूटेगा कहर ? महामारी की आहट से सहमी दुनिया, देश में भी बढ़ी निगरानी

JN.1 variant in India

कोविड को लेकर निगरानी के लिए एडवाइजरी

Corona JN.1 variant in India : कोविड संक्रमण के मामलों में वृद्धि और देश में नए जेएन-1 वेरिएंट के पहले मामले का पता चलने के बीच केंद्र ने कोविड को लेकर निगरानी के लिए एडवाइजरी जारी की है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को अलर्ट रहने को कहा है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने देश में कोविड-19 सहित श्वसन संबंधी बीमारियों में वृद्धि के मद्देनजर तैयारियों की समीक्षा के लिए बुधवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक बुलाइ है

राज्‍य, जिला स्तर तक निरंतर निगरानी

केन्द्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निरंतर निगरानी बनाए रखने के लिए कहा है. एडवाइजरी में कहा गया है कि राज्‍य, जिला स्तर तक कोविड की स्थिति पर निरंतर निगरानी बनाए रखें

केरल जैसे कुछ राज्यों में कोविड -19 मामलों की संख्या में वृद्धि

हाल ही में केरल जैसे कुछ राज्यों में कोविड -19 मामलों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है. आने वाले दिनों में त्‍योहार के मौसम को ध्यान में रखते हुए राज्यों को बीमारी के प्रसार के खतरे को कम करने के लिए अपेक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय और अन्य व्यवस्थाएं करने की सलाह दी गई है.

सुनिश्चित करें निगरानी और रिपोर्टिंग

परामर्श में राज्यों से कहा गया है कि वे मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति का शीघ्र पता लगाने के लिए सभी स्वास्थ्य केन्‍द्रों में इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी आईएलआई और श्वास संबंधी गंभीर बीमारी एसएआरआई के जिलेवार मामलों की निगरानी और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें

आरटी-पीसीआर और एंटीजन परीक्षण

राज्यों को यह भी सलाह दी गई कि वे सभी जिलों में कोविड-19 परीक्षण दिशा-निर्देशों के अनुसार पर्याप्त परीक्षण सुनिश्चित करें और आरटी-पीसीआर और एंटीजन परीक्षणों की निर्धारित संख्‍या बनाए रखें.

केरल में पाया गया JN.1 सब-वैरिएंट BA.2.86 का पहला मामला

भारत में JN.1 सब-वैरिएंट BA.2.86 का पहला मामला हाल ही में केरल में पाया गया था. कोविड-19 सब-वेरिएंट जेएन-1 (जिसे पिरोला के नाम से भी जाना जाता है) का एक नया सब-वैरिएंट है. यह तेजी से फैलने वाला ओमीक्रॉन वैरिएंट का एक ऑफ-शूट है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह अधिक प्रतिरक्षा प्रतिरोधी होता है. नवंबर में WHO वैज्ञानिकों द्वारा इसे वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट के रूप में पहचाना गया. JN.1 संस्करण संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और सिंगापुर में भी रिपोर्ट किया गया है.

कोविड-19 टीकों से जेएन.1 के खिलाफ सुरक्षा की उम्मीद

सरकार के अनुसार, वर्तमान में प्रसारित अन्य वेरिएंट की तुलना में जेएन.1 से बढ़ी गंभीरता या सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए इसके सबवेरिएंट से उत्पन्न जोखिम का कोई संकेत नहीं है. सरकार का कहना है कि कोविड-19 टीकों से जेएन.1 के खिलाफ सुरक्षा बढ़.ने की उम्मीद है,




Narmadapuram : सर्दी में इस तरीके से बुजुर्गों का रखें ख्याल, ठंड में भी रहेगा चंगा हाल, डॉक्टर ने बताया रामबाण उपाय

नर्मदापुरम/ दीपक शर्मा : बदलते मौसम और बढ़ती ठंडी में बुजुर्गों को स्वास्थ्य संबंधित परेशानी का सामना करना पड़ता है. ऐसे में जिला अस्पताल के एम डी डॉ राजेश धाकड़ ने सर्दियों में बुजुर्गों के देखभाल के लिए जरूरी सुझाव दिए हैं.जिससे कि सर्दियों में अच्छी तरह सेहतमंद रहा जा सकता है.

डॉ राजेश धाकड़ ने देनवापोस्ट को बताया कि सर्दियों में बढ़ती ठंड न केवल बुजुर्गों की सेहत को प्रभावित करती है बल्कि स्वास संबंधित परेशानी जैसे सांस की तकलीफ अस्थमा, जोड़ों में दर्द, और दिल का दौरा जैसी समस्या उत्पन्न होती है.

इन उपाय से रहे सुरक्षित• सांस की तकलीफ होने पर : बुजुर्ग ज्यादातर इनडोर सुरक्षित तरीके से घर पर रहे और सुबह मॉर्निंग वॉक से बचे धूप निकलने के बाद ही टहलने की कोशिश करें और दिन में दो बार सुबह और रात को सोने से पहले गर्म पानी में नमक डालकर गागल करें और नियमित व्यायाम करें.• गठियावाद जोड़ों के दर्द होने पर: जोड़ों के दर्द और गठियावाद से पीड़ित बुजुर्गों को डॉ अरविंद सलाह दी है.दर्द वाले हिस्सों पर तेल गर्म कर पानी से नियमित सकने पर दर्द से राहत मिलता है.इसके साथ ही कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर चीजों का सेवन करें.ताकि शरीर की इम्युनिटी बनी रहे और शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े.• दिल की समस्या : ठंडी में बुजुर्गों को दिल से जुड़ी समस्या जैसे रक्तचाप में अनियमित रूप से बड़ या घट सकती है.ऐसे में खानपान पर विशेष ध्यान दें कम तेल, कम नमक और ज्यादा पोषण वाले आहार का सेवन करें और अनियमित थकान और स्ट्रेस से बचे और स्वास्थ्य संबंधित परेशानी होने पर तुरंत स्वास्थ्य जांच कराए.




दुनिया का तीसरा सबसे महंगा मसाला है यह हरी चीज, शरीर को इंफेक्शन से बचाए, बेहतरीन एंटीसेप्टिक, 4000 साल पुराना है इतिहास

Green Cardamom Health Benefits: अधिकतर लोग यह मानते हैं कि हरी इलायची (Green Cardamon) मात्र माउथ फ्रेशनर है और इसका उपयोग भोजन में सुगंध पैदा करने के लिए किया जाता है. लेकिन यह बड़ी गलतफहमी है. इस छोटी सी इलायची को ‘मसालों की रानी’ माना जाता है. असल में हरी इलायची एंटिसेप्टिक तो है ही, शरीर को इन्फेक्शन से भी बचाती है. डाइजेशन सिस्टम को दुरुस्त रखने में इसका जवाब नहीं है. यह भी माना जाता है कि अगर आप डिप्रेशन के शिकार हैं, या उससे बचना चाहते हैं तो इलायची का सेवन करें.

केसर व वेनिला के बाद हरी इलायची दुनिया का सबसे महंगा मसाला है. गर्व की बात यह है कि इसकी उत्पत्ति का केंद्र भारत ही है. भारतीय किचन में तो इसकी सम्मानजनक मौजूदगी तो है ही साथ ही देश के सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यों में भी इलायची का उपयोग हजारों वर्षों से हो रहा है. ‘औषधीय पौधे’ नामक पुस्तक के लेखक व बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (BSI) के निदेशक रहे डॉ. सुधांशु कुमार जैन के अनुसार इलायची औषधी भी है. यानी इलायची मनुष्य जीवन के शारीरिक व आत्मिक सिस्टम से भी जुड़ी हुई है. तभी तो मसाला प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले व भारत की एग्मार्क लेब के संस्थापक निदेशक जीवन सिंह प्रुथी ने अपनी पुस्तक ‘Spices And Condiments’ में हरी इलायची को ‘मसालों की रानी’ कहा है.

हरी इलायची के 4 बड़े फायदे

1. जानी मानी डायटिशियन अनीता लांबा के अनुसार हरी इलायची में बड़ा गुण है कि यह एंटिसेप्टिक है और शरीर को इन्फेक्शन से भी बचाती है. अगर आप मुंह और सांसों की दुर्गंध से परेशान हैं तो इलायची लाभकारी है. यह मसूड़ों की बीमारी और कैविटी का कारण बनने वाले बैक्टीरिया से भी लड़ने में कामयाब है. यह बैक्टिरिया व फंगल को रोकने में कारगर है. असल में यह फाइटोकेमिकल्स (कीटाणुओं, फंगस से बचाव वाला तत्व) से भरपूर मानी जाती है, इसलिए दांत व मसूड़ों के इन्फेक्शन संक्रमण, गले की समस्याओं में लाभकारी लायची एक शक्तिशाली एंटीसेप्टिक, रोगाणुरोधी है जो सांसों की दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया को मारने में भूमिका अदा करती है.

2. इलायची में विटामिन, खनिज, के अलावा पॉलीफेनोल्स और फ्लेवोनोइड्स (विशेष प्रतिरोधक योगिक) भी पाए जाते हैं जो डाइजेशन सिस्टम को दुरुस्त रखने में कारगर हैं. ये योगिक पेट के ऊपरी हिस्से में एसिडिटी के लक्षणों से राहत देते हुए डाइजेशन सिस्टम में सुधार करते हैं. रिसर्च बताते हैं कि इलायची का सेवन मतली, उल्टी और बेचैनी से राहत देता है. यह सारी समस्याएं तभी आती हैं, जब डाइजेशन सिस्टम गड़बड़ होता है. असल में इलायची लिवर को भी विषाक्तमुक्त करती है, जो पाचन सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है. ऐसा भी माना जाता है कि इलायची के चबाने से निकलने वाला अर्क पेट के अल्सर से बचाव करता है. इलायची में एक घटक मेथनॉलिक (प्रतिरोधी) भी होता है, जिससे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं जैसे अम्लता, पेट फूलना, अपच और पेट दर्द को कम करने में मदद करती है.

3. इलायची में एक बेहद शानदार गुण है कि यह मूड को फ्रेश करती है और डिप्रेशन को रोकती है. अगर डिप्रेशन की आशंका से घबराए हुए हैं तो इलायची खाएं. ऐसा लगेगा कि दिमाग हलका हो रहा है. इसको चबाने के बाद मुंह में जो खुशबू निकलती है, वह सीधे दिमाग पर ट्रिगकर करती है और उसे कूल रखने में मदद करती है. इलायची में विटामिन सी और थायमिन (नर्वस सिस्टम में कारगर तत्व) की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है, जिसे न्यूरो-डेवलपमेंट और दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है. थियामिन दिमाग में पॉजिटिविटी भी पैदा करता है. इसमें दिमाग को प्रफुल्लित करने वाले गुण भी पाए जाते हैं. सीधी सी बात है कि इलायची की सुगंधित शक्ति डिप्रेशन में घिरे बंदे को ठीक कर सकती है और मानसिक तनाव से निपटने और उससे लड़ने में मदद कर सकती है. चाय में इलायची का सेवन करेंगे तो आप पाएंगे कि दिमाग चुस्त दुरुस्त व फ्रेश महसूस कर रहा है.

4. इलायची का बड़ा गुण है कि यह हार्ट के फंक्शन को स्मूद रखती है, साथ ही ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल रखने में मदद करती है. हरी इलायची हार्ट रोगों के जोखिम कारकों को कम करके उसे स्वस्थ रखने में मदद करती है. यह एथेरोस्क्लेरोसिस यानी धमनियों की ब्लॉकेज और थक्कों को रोकती है, जो फेट के कारण पैदा होते हैं. इसका लाभ यह भी होता है कि बेड कोलेस्ट्रॉल पैदा होने के कारण कम हो जाते हैं. यह ट्राइग्लिसराइड्स (हार्ट को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व) की भी रोकथाम करती है. हरी इलायची अपने में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गतिविधियों के माध्यम से बीपी को कम करने की क्षमता रखती है. माना जाता है कि इलायची की चाय का सेवन हाई बीपी को कम करता है. इलायची का नियमित सेवन मधुमेह के खिलाफ भी प्रभावी माना जाता है. इसमें मौजूद विशेष योगिक सूजन और कई पुरानी बीमारियों का ‘दुख’ कम करने में भी प्रभावी माने जाते हैं. श्रीलंका एक्सपोर्ट डेवलेपमेंट बोर्ड के अनुसार इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण बढ़ रहे हैं कि हरी इलायची के एंटीऑक्सिडेंट, रोगाणुरोधी, सूजन-रोधी और कैंसर-रोधी गुण शरीर के लिए लाभकारी हैं.

हरी इलायची का इतिहास और सफर

अदरक परिवार की हरी इलायची परफ्यूम व सुगंधित तेलों को बनाने में भी काम आती है. फूड हिस्टोरियन्स का कहना है कि हरी इलायची का उत्पत्ति स्थल दक्षिण भारत है. इसका उपयोग करीब 4 हजार वर्ष से किया जा रहा है. प्राचीन भारतीय ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में इसके गुणों का वर्णन किया गया है. भारतीय इलायची के औषधीय गुणों का उल्लेख यूनानी विद्वान व आधुनिक चिकित्सा के जनक हिप्पोक्रेट्स (ईसा पूर्व 460 शती) के लेखन में भी मिलता है. उन्होंने इलायची को पाचन के लिए कारगर बताया है. विश्वकोष Britanica के अनुसार अब ज्यादातर इलायची की खेती भारत, श्रीलंका और ग्वाटेमाला में की जाती है. हरी इलायची भारत से चलकर अरब के रास्ते रोमन और यूनान तक पहुंची थी. पूरी दुनिया में भारत की इलायची की खासी मांग रहती है.




Bhopal News : चीन में बढ़ती बीमारी से एमपी में अलर्ट, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए दिशा निर्देश

MP News: Alert in MP due to increasing disease in China, Health Department issued guidelines

चीन में नई संक्रामक बीमारी, एमपी में अलर्ट
– फोटो : social media

मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, सिविल सर्जनों को चीन में छोटे बच्चों में हो रही श्वशन संबंधी बीमारी को लेकर सर्तक किया है। विभाग ने बच्चों में निमोनिया और इन्फ्लूएंजा फ्लू बीमारी के लक्षण पर नजर रखने को कहा है। केंद्र सरकार के बाद राज्य सरकार ने भी सभी जिलों को निगरानी बढ़ाने को कहा है। हालांकि प्रदेश में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन सावधानी और सुरक्षा के मद्देनजर अस्पतालों में तैयारी की समीक्षा और मरीजों की निगरानी के दिशा निर्देश जारी किए गए है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्य प्रदेश की मिशन संचालक प्रियंका दास की तरफ से जारी दिशा निर्देशों में जिलों को अस्पतालों को तैयारी की समीक्षा करने को कहा है। इसमें अस्पतालों में मेन पॉवर, बिस्तर, जांच एवं परीक्षण, दवा एवं कंज्यूमेब्लस के साथ अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

निगरानी के लिए यह दिशा निर्देश

विभाग ने किसी भी प्रकार की सांस संबंधी बीमारी, इन्फ्लूएंजा के रोगियों की निगरानी भारत सरकार के स्वास्थ्य सूचना पोर्टल दर्ज कराने को कहा है। इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों के नाक और गले के स्वाब का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाएगा। यदि इन बीमारियों की पुष्टि होती है तो जांच दल संबंधित इलाके की जांच करेगा और उसकी निगरानी बढ़ाई जाएगी।

यह है चीन में फैल रहे बीमारी के लक्षण

इस बीमारी ने खांसी, गले में दर्द या खराश, बुखार, फेफड़े में सूजन और सांस नली में सूजन की दिक्कत आ रही हैं। यह बीमारी चीन में एक शहर से दूसरे शहर फैल रही है। इसको लेका डब्ल्यूएचओ ने भी चिंता जाहिर की है और चीन से रिपोर्ट मांगी है।




Health Tips : ठंड में सांस की तकलीफ के साथ हार्टअटैक का खतरा, रखना होगा ख्याल

Heath & Lifestyle : नवंबर महीने के अंतिम सप्ताह में ठंड शुरू हो गई है। सुबह-शाम के साथ अब दिन में भी लोग गर्म कपड़े पहने नजर आने लगे हैं। ठंड के इस मौसम में सांस की तकलीफ के साथ हार्ट अटैक और लकवा का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को दवाइयों का नियमित सेवन करना चाहिए। थोड़ा सा भी लक्षण समझ आने पर डॉक्टर के पास तुरंत जाएं। लोगों को अपनी जीवनशैली और खान-पान में भी बदलाव करने का समय आ चुका है। इसलिए ऐसे खाने का सेवन करें जो आपके शरीर को सर्दी से बचाने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता तैयार करें। यह बातें मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ राजेश धाकड़ ने देनवापोस्ट से अपनी विशेष बातचीत में कही है। पेश हैं

बातचीत के अंश:

ठंड में कौन सी बीमारियों का खतरा रहता है?

शीत लहर या तेज ठंड बढ़ने पर सर्दी, जुकाम, बुखार के साथ ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, लकवा, सांस की तकलीफ की समस्या बढ़ सकती है। हार्ट फेल्यूअर का खतरा भी अधिक रहता है।

लोग कैसे जानेंगे कि उन्हें ठंड लग गई?

हर बीमारी के सामान्य लक्षण पहले दिखने लगते हैं। सीने में जकड़न और दर्द, मांसपेशियों में दर्द, बुखार, सांस लेने में दिक्कत, खांसी जुकाम, हाथ पैर में ठंड और घबराहट, चक्कर आने पर समझे कि बीपी बढ़ा हुआ है।

ठंड के समय किस तरह की डाइट लेनी चाहिए?

ठंड के समय जहां तक डाइट का सवाल है तो लिक्विड आहार भी लेना चाहिए। दिन में दो बार की जगह चार बार डाइट लें। फास्ट फूड से दूरी बनाने के साथ प्रोटीन के लिए दाल, पनीर को प्राथमिकता दें। नॉनवेज वाले अण्डे का सेवन जरूर करें।

इस समय छोटे बच्चों और बुजुर्गों का ख्याल कैसे रखें?

छोटे बच्चों को इस समय बिल्कुल भी ठंडी चीज नहीं देनी चाहिए। बच्चों को अधिक से अधिक सूप का सेवन करवाना चाहिए। बुजुर्गों को संतुलित भोजन लेना चाहिए। ज्यादा खाना खाने से दिक्कत हो सकती है। भोजन में नमक की मात्रा कम करें। ठंड के समय में बच्चों और बुजुर्गों को पर्याप्त कपड़े पहनकर बाहर निकलना चाहिए।

क्या ठंड और शीतलहर के प्रकोप से किसी की जान भी जा सकती है?

तेज ठंड में ब्लड प्रेशर नियंत्रण की क्षमता कम हो जाती है, तब अचानक से बीपी बढ़ जाता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक के कारण जान जाने का खतरा भी बढ़ जाता है।

ठंड के समय शुगर, बीपी मरीजों को क्या करना चाहिए?

शुगर मरीजों में ठंड के समय न्यूरोपैथी की समस्या ज्यादा रहती है। बीपी अनियंत्रित हो जाता है। बीपी, शुगर मरीजों को दवाइयां नियमित रूप से लेना चाहिए। तेज ठंड पड़ने से पहले मरीजों को अपना चेकअप कराने के साथ चिकित्सक को दिखा लेना चाहिए। किसी भी हालत में दवाई के सेवन करने से गैप न करें।




सेहत के लिए शानदार है गांठ गोभी, रोगों से लड़ने में कारगर है

Kohlrabi health benefits for Blood Pressure and Sugar: भारत में सर्दी का मौसम धीरे-धीरे उठान पर है. शाकाहारियों के लिए यह मौसम स्वर्ग सरीखा है. उसका कारण यह है कि इस मौसम में साग के अलावा पत्ते वाली सब्जियां भी खूब दिखाई देती हैं. इनमें से एक कथित रूप से नई सब्जी भी मार्केट में दिखाई देगी, जिसे गांठ गोभी कहा जाता है. इसे शरीर के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है. गांठ गोभी में सामान्य रोगों से लड़ने की क्षमता है और इसे हार्ट के लिए भी स्मूद माना जाता है. यह विदेशी सब्जी है, लेकिन पिछले एक दशक से भारतीय किचन में यह अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी है.

गांठ गोभी (knol khol/kohlrabi) एक अलग ही तरह की सब्जी है. यह गोल बल्ब सरीखी दिखती है, जैसे प्याज दिखाई देती है. यह हरे और जामुनी रंग में उगती है, चुकंदर जैसी दिखने के बावजूद इसका इससे कोई संबंध नहीं है. ऐसा लगता है कि यह जंगली पत्ता गोभी है, लेकिन उसका साइज छोटा ओर ठस हो गया है. देखने में ऐसा लगता है कि यह जड़ीली है, लेकिन वास्तव में यह इस तरह की नहीं है. इसका स्वाद पत्ता गोभी और ब्रोकोली का मिक्सचर है, जो बहुत हलका और मीठा भी होता है. भारत में इसे सामान्य सब्जी की तरह (जैसे गोभी या पत्ता गोभी पकाई जाती है) ही खाया जाता है, लेकिन कई पश्चिमी देशों में इसकी कई प्रकार की डिशेज बनाई जाती है और नॉनवेज की निगेटिविटी कम करने के लिए उसमें इसका विभिन्न तरीके से खूब उपयोग किया जाता है.

आयुर्वेद में गांठ गोभी के फायदे

1. यह विदेशी सब्जी और भारत में करीब एक दशक से इसका प्रचार-प्रसार इसलिए बढ़ रहा है, क्योंकि यह शरीर के लिए बेहद लाभकारी है. फूड हिस्टोरियन मानते हैं कि 15वीं शताब्दी में इसकी उत्पत्ति उत्तरी यूरोप में हुई और धीरे-धीरे पूरी दुनिया की किचेन में इसने अपनी जगह बना ली. गांठ गोभी की ऑस्ट्रिया, जर्मनी, इंग्लैंड, स्पेन और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में व्यापक रूप से खेती हो रही है और अब यह भारत के लिए अजनबी नहीं है. आयुर्वेद ने भी गांठ गोभी को विशेष माना है. भारतीय जड़ी-बूटियों, फलों व सब्जियों पर व्यापक रिसर्च करने वाले जाने-माने आयुर्वेद विशेषज्ञ आचार्य बालकिशन के अनुसार गांठ गोभी मधुर, शीत, गुरु, बलकारक, रुचिकर, ग्राही तथा शीतल होती है. यह कफ, कास (खांसी), प्रमेह (Gonorrhea) व श्वास में लाभप्रद तथा वात व पित्त प्रकोपक होती है.

2. वनस्पतिशास्त्र ने भी गांठ गोभी को विशेष माना है. लेखक व भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिश्वजीत चौधरी ने अपनी पुस्तक ‘VEGETABLES’ में बताया है कि गांठ गोभी की उत्पत्ति उत्तरी यूरोप के तटीय देशों में हुई. इसकी कई किस्में हैं लेकिन भारत में इसकी दो किस्में ही उगाई जाती हैं. यह ठंडे मौसम की फसल है. उनका कहना है कि 100 ग्राम गांठ गोभी में फाइबर डेढ़ ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 4 ग्राम, फेट न के बराबर, कैलोरी 27, कैल्शियम 20 मिलीग्राम, मैग्नीशियम 18 एमजी, फास्फोरस 35 एमजी, सोडियम 112 एमजी, विटामिन सी 85 एमजी के अलावा अन्य विटामिन्स व मिनरल्स भी पाए जाते हैं. विश्वकोश ब्रिटेनिका (Britannica) ने माना है कि कुछ क्षेत्रों में यह किचन गार्डन की सब्जी के रूप में लोकप्रिय है. यूरोप में इसे स्टॉक फीड के लिए भी उगाया जाता है और नई कोमल पत्तियों को साग के रूप में खाया जा सकता है.

3. इन्हीं पोषक तत्वों ने गांठ गोभी को विशेष बना दिया है. जानी मानी डायटिशियन अनीता लांबा के अनुसार विशेष विटामिन्स व मिनरल्स के चलते गांठ गोभी सामान्य रोगों से शरीर को बचाती है. यानी यह सब्जी विभिन्न वायरल और बैक्टीरियल संक्रमणों से लड़ते हुए शरीर को विभिन्न बीमारियों से भी बचाती है. गांठ गोभी में विटामिन सी की मौजूदगी श्वेत रक्त कोशिकाओं के कामकाज और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करती है.

4. गांठ गोभी में कैलोरी कम और पाचन फाइबर अधिक होता है. इसलिए इसका सेवन लंबे समय तक तृप्त रख सकता है. इसका लाभ यह होता है कि गांठ गोभी मोटापे को शरीर से दूर रखती है. इसे एंटीऑक्सिडेंट से भी भरपूर माना जाता है. अगर इसका नियमित सेवन किया जाए तो यह शुगर और हाई बीपी को कंट्रोल रखने में सहायता करती है. इसमें पोटेशियम भी पर्याप्त पाया जाता है जो ब्लड की धमनियों को सुचारू बनाए रखता है. इसमें ग्लूकोसाइनोलेट्स भी पाया जाता है, जिसे हार्ट के लिए लाभकारी माना जाता है. उसका कारण है कि यह यौगिक रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करने, सूजन को दूर करने और धमनियों में प्लाक के निर्माण को रोकने में सहायक है.

एनीमिया में लाभकारी, पाचन सिस्टम को बनाए बेहतर

इस सब्जी की एक अन्य विशेषता है कि यह यह एनीमिया व आयरन की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए बेहद लाभकारी है. इसमें पाए गए मिनरल्स हड्डियों को मजबूत रखने में योगदान देते हैं और उसे लगातार स्वस्थ बनाए रखते हैं. इसे पेट और पाचन सिस्टम के लिए भी बेहतर माना जाता है. उसका कारण यह है कि उसका कारण यह है कि इसमें पाया जाने वाला फाइबर भोजन को आसानी से पचाता है और आंतों की क्रिया को सुचारू बनाए रखता है.




खून से शुगर को चूस लेगा लाल रंग का यह दुर्लभ पत्ता, डायबिटीज हमेशा रहेगा कंट्रोल में

Red Spinach Lower Sugar Spike: डायबिटीज के मरीज जब भी ज्यादा ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजें खाते हैं, तुरंत ब्लड शुगर बहुत बढ़ जाता है. इसलिए डॉक्टर हमेशा डायबिटीज के मरीजों को खान-पान में परहेज की सलाह देते हैं. दरअसल, डायबिटीज लाइफस्टाइल से संबंधित बीमारी है, इसलिए लाइफस्टाइल को सही कर के ही इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है. ऐसे में अगर आप कुछ औषधि वर्धक चीजों का सेवन करते हैं तो निश्चित रूप से आपका ब्लड शुगर कंट्रोल में रहेगा. लाल पालक ऐसी ही सब्जी है जो ब्लड शुगर को तेजी से सोख लेता है. लाल पालक इंसुलिन के नेचुरल उत्पादन को बढ़ाने में मदद करते हैं. लाल पालक हरी सब्जी की श्रेणी में आता है जो पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसमें कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो कई बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. लाल पालक में एंथोसायनिन एंटीऑक्सीडेंट्स होता है जिसके कारण पालक का रंग लाल हो जाता है.इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होता है.

इस तरह करता है ब्लड शुगर कम

इंडियन एक्सप्रेस की खबर ने डॉक्टरों के हवाले से बताया है कि लाल पालक में कई अतिरिक्त कंपाउड होते हैं जो तेजी से शुगर को अवशोषित कर लेते हैं. इसमें डायट्री फाइबर बहुत ज्यादा होता है जिसके कारण यह ग्लूकोज के अवशोषण को बहुत धीमा कर देता है और ब्लड शुगर को सोख लेता है. इसके अलावा लाल पालक में फ्लेवोनॉएड्स जैसे प्लांट केमिकल होता है जिसमें एंटी-डायबेटिक गुण होता है. केयर हॉस्पिटल भुवनेश्वर के सीनियर डायटीशियन गुरु प्रसाद दास ने बताया कि लाल पालक शुगर के एब्जोर्ब्शन को धीमा करता है जिसके कारण यह खून में बहुत धीरे-धीरे पहुंचता है. इससे खून में अचानक शुगर की मात्रा नहीं बढ़ती.

लाल पालक के अन्य फायदे

लाल पालक में विटामिन ए भी प्रचूर मात्रा में होता है जिसके कारण यह आंखों के लिए बहुत फायदेमंद है. वहीं लाल पालक में विटामिन सी भी होता है जिससे शरीर की इम्यूनिटी बढ़ती है लाल पालक पर्याप्त मात्रा में आयरन होता है जिसके कारण यह हेल्दी ब्लड सेल्स को बनाता है और इससे शरीर में एनर्जी की कमी नहीं होती. लाल पालक में एंटीऑक्सीडेंट्स की मौजूदगी के कारण यह फ्री रेडिकल्स को कम करता है जिसके कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है और इससे कई क्रोनिक बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. लाल पालक में डाइट्री फाइबर के कारण यह डाइजेशन को बूस्ट करता है.