एक आंख से दिखने लगा धुंधला, जांच कराई तो निकला दुर्लभ कैंसर, फिर डॉक्‍टरों ने किया ऐसा कि..

फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट गुरुग्राम के डॉक्टरों की कुशल टीम ने 31 वर्षीय एक महिला की बायीं आंख से एक दुर्लभ और मैलिग्नेंट ट्यूमर – कोरोइडल मेलेनोमा को सफलतापूर्वक निकालकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इस तरह का कैंसर दुनियाभर में प्रति दस लाख की आबादी में केवल 5 से 7 मरीजों में ही होता है. हालांकि, कोरोइडल मेलेनोमा एक दुर्लभ किस्म का कैंसर है और यह मामूली होने पर भी शरीर के अन्य भागों में फैल जाता है, इसलिए इसका तत्काल इलाज करना जरूरी होता है.

भारत में फॉर्टिस अस्‍पताल में मरीज को पहली बार प्लाक ब्रेकीथेरेपी दी गई जो कि खास किस्म का रेटिनल आइ ट्यूमर उपचार है. यह पहला मामला है जबकि दिल्ली-एनसीआर के किसी प्राइवेट अस्पताल में इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया.

जानकारी के मुताबिक 31 साल की महिला मरीज को पिछले छह महीनों से बायीं आंख में धुंधला दिखाई देने की शिकायत थी, जबकि दायीं आंख में नॉर्मल विजन (6/6) था लेकिन बायीं आंख में विजन घटकर 6/18 रह गया था. जबकि मेडिकल जांच कराई तो पता चला कि बायीं आंख में स्‍टेज 1 का कैंसर था, जिसकी वजह से उनकी आंख में 6-7 डिस्क डायमीटर का घाव बन चुका था और यह मैक्यूला की तरफ बढ़ रहा था. ट्यूमर उनकी ऑप्टिक नर्व के नजदीक था और साथ ही, रेटिना के बाकी हिस्से में रेडिएशन एक्सपोजर होने की पूरी संभावना थी. इसलिए मरीज को प्लाक ब्रेकीथेरेपी दी गई. इस तकनीक में एक छोटे आकार की, सिल्वर-कवर्ड डिस्क-शेप डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है जो दरअसल, रेडियोएक्टिव स्रोत होती है और इससे सीधे ट्यूमर पर लक्षित कर रेडिएशन दिया जाता है, जिससे ट्यूमर का आसपास के टिश्यूज तक फैलाव कम से कम हो सके. यह तरीका काफी कारगर साबित हुआ क्योंकि इससे मरीज की दृष्टि को सुरक्षित किया जा सका साथ ही, ऑप्टिक नर्व के नजदीक स्थित ट्यूमर को भी हटाने में कामयाबी मिली.

इस बारे में डॉ. अनीता सेठी, डायरेक्टर एंड एचओडी, ऑप्थैलमोलॉजी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने बताया, ‘ हमने रेडियोएक्टिव वेस्ट से तैयार स्वदेशी नॉच्ड रूथेनियम 106 प्लाक का इस्तेमाल किया. इस जटिल प्रक्रिया के तहत हमने रेडियोएक्टिव प्लाक को आंख के अंदर ट्यूमर के ठीक ऊपर रखा, आमतौर पर यह जनरल एनेस्थीसिया देकर किया जाता है. इस प्लाक से बीटा रेडिएशन निकलता है जो आसपास के टिश्यूज को प्रभावित किए बगैर ही कैंसर कोशिकाओं पर हमला करता है.

दूसरा तरीका यह होता है कि सर्जरी कर आंख के प्रभावित हिस्से या पूरी आंख को निकाला जाता है, लेकिन इस प्रक्रिया का फायदा यह है कि इससे मरीज की नजर को बचाया जा सकता है. एक अन्य वैकल्पिक इलाज इन्युक्लिएशन भी है जिसमें आंख को निकाला जाता है लेकिन इससे न सिर्फ मरीज की दृष्टि पूरी तरह से चली जाती है बल्कि सर्जरी के बाद मरीज का चेहरा भी खराब लगता है. हमने प्लाक ब्रेकीथेरेपी को इसलिए चुना ताकि न सिर्फ ट्यूमर को कारगर तरीके से हटाकर इस युवती की आंखों की दृष्टि को बचाया जा सके बल्कि इलाज पूरा होने के बाद मरीज का चेहरा भी न बिगड़े.’

कैसे होती है यह थेरेपी?
डॉ सेठी ने बताया कि प्लाक ब्रेकीथेरेपी को दो चरणों में किया जाता है. पहली सर्जरी में प्लाक इंसर्शन किया जाता है और अगली सर्जरी में इस प्लाक को हटाया जाता है. प्लाक कितनी देर तक ट्यूमर के संपर्क में रहेगा यह डोसीमीट्री (विज्ञान जिसके अनुसार, माप और गणना के आधार पर अवधि तय की जाती है) से निर्धारित होता है. डोसीमीट्री को रेडिएशन फिजिसिस्ट द्वारा ट्यूमर के आकार और प्लाक की रेडियोएक्टिविटी के आधार पर किया जाता है. इस मामले में हमने नॉच्ड रूथेनियम 106 प्लाक का इस्तेमाल किया और दोनों प्रक्रियाओं को करीब 75 घंटों में पूरा किया गया.

इस सर्जरी में थी बड़ी चुनौती
अस्‍पताल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट महिपाल सिंह भनोत का कहना है कि ट्यूमर की लोकेशन आंख के अंदर होने की वजह से यह मामला काफी चुनौतीपूर्ण था. हमारी प्राथमिकता इस ट्यूमर को निकालने के साथ-साथ मरीज की नजर सुरक्षित रखने की थी. अस्पताल के कुशल डॉक्‍टरों, डॉ अनीता सेठी, डॉ नीरज संदूजा, डॉ अमल रॉय चौधरी, डायरेक्टर – रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, प्लाक ब्रेकीथेरेपी का इस्तेमाल कर अपनी मरीज की विजन को सुरक्षित रखा. यह मामला कुशल और अनुभवी मेडिकल प्रोफेशनल्स तथा अत्याधुनिक टैक्नोलॉजी की मदद से हाई क्वालिटी केयर उपलब्ध कराने की फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.’




ये गुटखा नहीं, मौत की दुकान है, पाउच में बिक रहा है कैंसर, मरीजों के आंकड़े देखकर उड़ जाएंगे होश

अलवर. गुटखा जानलेवा है. तंबाकू से फैल रही घातक बीमारियां तेजी से लोगों को अपनी जकड़ में ले रही हैं. राजस्थान का अलवर शहर गुटखों की राजधानी बनता जा रहा है. यहां गुटखे के सेवन के कारण मरीजों की संख्या भी रोंगटे खड़े कर देने वाली है.

अलवर में गुटखे का धुआंधार कारोबार चल रहा है. रोज नये गुटखे मार्केट में आने से इसकी लत भी लोगों को लग गयी है. गुटखा की लत बढ़ने से गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या में भी भारी इजाफा हुआ है. बीमारी के आंकड़े चौंकाने वाले आए हैं. अगर आपको भी इसकी लत है तो इन आंकड़ों पर आपको जरूर नजर डालनी चाहिए.

कैंसर के ठेले
अलवर का शायद ही कोई चौक चौराहा बचा हो जहां आपको गुमटी और ठेले लगे न दिखें. इनमें से ज्यादातार पान और गुटखों के हजारों पाउच लटके देखे जा सकते हैं. ये पाउच सीधे सीधे कैंसर परोस रहे हैं. कहीं भी गुमटी खोली हो वहां गुटखे का धंधा जोरों पर ही चलेगा. ग्राहकों में हर उम्र के लोग रहते हैं. खासतौर से युवा पीढ़ी को भी इस जहर की लत तेजी से लग रही है.

रोंगटे खड़े करने वाले आंकड़े
पीएमओ डा. सुनील चौहान ने बताया गुटखा खाने से सबसे ज्यादा मुंह के कैंसर और जीभ का कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो जाती हैं. साथ ही सिस्टमिक बीमारी भी हो जाती है. अलवर में ही नहीं देश में इससे बच्चे से लेकर वृद्ध तक ग्रस्त हैं. अलवर शहर के राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में आंकड़ों पर नजर डालें तो यह आंकड़ा हर साल बढ़ता जा रहा है.

विस्फोटक है स्थिति
साल 2021 में अस्पताल में कैंसर के 1067 मरीज आए. साल 2022 में यह संख्या बढ़कर 2883 हो गई. 2023 में आंकड़ा चौंकाने वाला रहा. जहां गुटखा खाने से होने वाली बीमारी से ग्रसित मरीजों की संख्या 9129 हो गई. एक तरह से इसे ब्लास्टिंग कंडीशन कहा जाता है. अलवर के राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में कैंसर विशेषज्ञ इन मरीजों को परामर्श दे रहे हैं. साथ ही कीमो थेरेपी के साथ मरीज का इलाज किया जा रहा है. कुछ पेशेंट को जयपुर और बड़े सेंटर्स पर भी रेफर किया जाता है.




Indor News : आईआईटी इंदौर ने जांच की कि पेट के बैक्टीरिया अल्जाइमर रोग का कारण बन सकते हैं

iit indore investigated Stomach bacteria can cause Alzheimer’s Disease

खोज करने वाली टीम।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर (IIT INDORE) ने चोइथराम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर इंदौर के सहयोग से गट-ब्रेन एक्सिस डिसरप्शन और न्यूरोइन्फ्लेमेशन में सबसे प्रचलित गट बैक्टीरिया, हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (एच. पाइलोरी) की संभावित भूमिका की जांच की है। मस्तिष्क विकार के साथ इस जीवाणु संक्रमण के सह-संबंध पर एक नई खोज की गई है।

ऐसा संभव है कि गट माइक्रोबियल स्राव सबसे लंबी नसों में से एक के माध्यम से मस्तिष्क में प्रवेश कर सकते हैं, जो आंत को मस्तिष्क से जोड़ते हैं और न्यूरो-संबंधी बीमारियों को बढ़ने में मदद करते हैं और आगे जाकर, ये गट-ब्रेन एक्सिस को बदलते हैं। वहीं, गट-ब्रेन एक्सिस (जीबीए) में सेंट्रल और एंटरिक नर्वस सिस्टम के बीच बायडायरेक्शनल कम्युनिकेशन होता है, जो मस्तिष्क के भावनात्मक और संज्ञानात्मक केंद्रों को पेरिफेरल इंटेस्टाइन फंक्शन से लिंक करता है। यह अध्ययन जर्नल विरुलेंस में प्रकाशित हुआ था और इस शोध का नेतृत्व आईआईटी इंदौर में बायोसाइंसेज और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हेम चंद्र झा और इंदौर के चोइथराम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के डॉ. अजय कुमार जैन ने किया है।

इस समूह ने अल्जाइमर रोग और सिग्नल ट्रांसड्यूसर और ट्रांसक्रिप्शन 3 (STAT3) के एक्टिवेटर से जुड़े न्यूरोपैथोलॉजी में मोलेकुलर से संबंधित खास जानकारी का पता लगाया, जो एच. पाइलोरी सेक्रेटोम के कारण होने वाली न्यूरोइन्फ्लेमेशन का माध्यम बनता है। STAT3 एक ऐसा ट्रांसक्रिप्शन कारक है जो मनुष्यों में STAT3 जीन द्वारा एन्कोड होता है। अध्ययन के अनुसार, यह पाया गया है कि एच. पाइलोरी संक्रमण आंत में सूजन को बढ़ाता है और STAT3 और इसके डाउनस्ट्रीम अणुओं की गतिविधि को बदल देता है। यह सूजन और अल्जाइमर रोग से जुड़ी विशिष्टता के लिए एक ट्रांसक्रिप्शनल रेगुलेटर के रूप में कार्य कर सकता है, इस प्रकार अल्जाइमर रोग से संबंधित न्यूरोडीजेनेरेशन से जुड़े आणविक संकेत दे सकता है।

इस पर, डॉ. हेम चंद्र झा ने कहा, हमारी टीम ने ब्रेन फिजियोलॉजी पर रोगाणुरोधी-प्रतिरोधी (एएमआर) एच. पाइलोरी स्ट्रेन के प्रभाव का आकलन किया। अब हमारे पास पेट के बैक्टीरिया को न्यूरोलॉजिकल स्थितियों से जोड़ने वाला एक संभावित तंत्र है। यह अध्ययन पहले के एच. पाइलोरी संक्रमण के साथ-साथ न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं वाले रोगियों के उपचार को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। साथ ही, STAT3 को रोकना न्यूरोइन्फ्लेमेशन और अल्ज़ाइमर रोग से जुड़ी रोग स्थितियों से बचाव के लिए एक संभावित रणनीति के रूप में भी उभरता है।




ब्‍लड कैंसर-डिसऑर्डर्स के लिए फोर्टिस ने लांच किया अलग अस्‍पताल, इस एडवांस थेरेपी से होगा इलाज

Fortis Healthcare news : फोर्टिस हैल्थकेयर ने फोर्टिस इंस्टीट्यूट ऑफ ब्लड डिसॉर्डर्स लॉन्च करने की घोषणा की है. इस एडवांस फैशिलिटी को ब्लड कैंसर और रक्त संबंधी अन्य बीमारियों के विशेष उपचार के मकसद से शुरू किया गया है. यह पहल रक्त संबंधी विकारों के इलाज के लिए स्पेश्लाइज्‍ड इंस्टीट्यूट है जहां पीडियाट्रिक और जेरियाट्रिक केयर के अलावा एडवांस ट्रांसप्लांट और हेमोपैथोलॉजी जैस सुविधाओं को भी एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराया गया है.

इंस्टीट्यूट में मॉडर्न CAR-T सैल थेरेपी, NexCAR19™ (Actalycabtagene autoleucel) को भी उपलब्ध कराया गया है जिसे मोहाली, दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, मुंबई और बेंगलुरु स्थित बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेंटर्स में भी पेश किया गया है. फोर्टिस हैल्थकेयर ने यह पहल आईआईटी-बॉम्बे द्वारा स्थापित ImmunoACT के सहयोग से शुरू की है, जो कि भारत में पहली पूर्ण रूप से स्वदेशी और कमर्शियल जीन-मोडीफाइड सैल थेरेपी है. इससे 15 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों में बी-सैल लिंफोमा और बी-एक्यूट लिंफोब्लास्टिक ल्यूकीमिया के उपचार की उम्मीद जगी है. जबकि इन मरीजों को इलाज के अन्‍य विकल्‍पों से सीमित लाभ मिल पाता है.

इस बारे में डॉ आशुतोष रघुवंशी एमडी और सीईओ, फोर्टिस हैल्थकेयर ने कहा कि फोर्टिस इंस्टीट्यूट ऑफ ब्लड डिसार्डर्स में मरीजों को सुप्रीम स्‍तर पर सटीक मेडिकल फेशिलिटी और ब्रॉड हेल्‍थकेयर सॉल्‍यूशन प्रदान किया जाएगा. इस इंस्टीट्यूट को भारत समेत सार्क क्षेत्र में बोन मैरो ट्रांसप्लांट और ब्लड डिसॉर्डर उपचारों के सबसे बड़े केंद्रों में से एक के तौर पर मान्यता दी गई है. यहां 20 से ज्‍यादा अनुभवी हिमेटोलॉजिस्ट, हिमेटो ओंकोलॉजिस्ट और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्‍ट की टीम अभी तक 2500 से अधिक सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट प्रक्रियाओं को अंजाम दे चुकी है और इस दौरान दुनियाभर 18 से अधिक देशों के मरीजों का उपचार किया गया है.

डॉ राहुल भार्गव, प्रिंसीपल डायरेक्टर एंड चीफ बीएमटी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने कहा कि भारत में ब्लड कैंसर के मामलों में हो रही बढ़ोतरी के मद्देनजर ये इंस्टीट्यूट इसके उपचार के क्षेत्र में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए तैयार है. CAR-T सैल थेरेपी इसमें काफी फायदेमंद होने जा रही है.




महिलाओं को ज्यादा सब्जियां खानी चाहिए या पुरुषों को?

How Much Veggies To Eat Per Day: अक्सर कहा जाता है कि स्वस्थ रहने के लिए महिलाओं को खाने-पीने का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए. हालांकि सभी लोगों को इस नियम का पालन करना चाहिए, ताकि बीमारियों से बचा जा सके. सब्जियां हमारी डाइट का अहम हिस्सा होती हैं और प्रतिदिन सब्जियों का खूब सेवन करना चाहिए. सब्जियों में मौजूद पोषक तत्व शरीर को फिट रखते हैं और बीमारियों से बचाव करते हैं. यही कारण है कि सभी को सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है.

क्या आप जानते हैं कि प्रतिदिन महिला और पुरुषों को कितनी मात्रा में सब्जियां खानी चाहिए? अधिकतर लोगों को यह बात पता नहीं होती है. यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA) का सुझाव है कि सभी वयस्क महिलाओं को प्रतिदिन 2.5 से 3 कप सब्जियां खानी चाहिए. जबकि वयस्क पुरुषों को प्रतिदिन 3 से 4 कप सब्जियां खानी चाहिए. इससे ज्यादा खाएंगे तो फायदे में रहेंगे. कम खाने से सेहत बिगड़ सकती है.

इतना ही नहीं, 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को रोज 2 से 3 कप सब्जियां खानी चाहिए. जबकि इस उम्र के पुरुषों को प्रतिदिन 2.5 से 3.5 कप सब्जियां खानी चाहिए. इस लिहाज से देखें तो महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को ज्यादा सब्जियां खाने की जरूरत होती है. बच्चों की बात करें, तो उन्हें रोजाना 1-2 कप सब्जियां खानी चाहिए. कम सब्जियां खाने से शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. आप अपनी डाइट में हरी सब्जियों समेत अपनी पसंदीदा सब्जियां शामिल कर सकते हैं.

अक्सर लोगों के मन में एक सवाल और भी उठता है कि सब्जियां खाने की जरूरत क्यों होती है? हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट की मानें तो फल और सब्जियां खाने से हमारे शरीर के सभी अंगों को फायदा मिलता है और जरूरी मात्रा में पोषक तत्व मिल जाते हैं. सब्जियां ब्लड प्रेशर कम कर सकती हैं और हार्ट डिजीज से बचा सकती हैं. ब्लड शुगर कंट्रोल करने में सब्जियां मददगार होती हैं.

स्ट्रोक और कैंसर का खतरा कम करने के लिए सब्जियां जरूर खानी चाहिए. डाइजेस्टिव सिस्टम और आंखों के लिए भी सब्जियों को बेहद लाभकारी माना जाता है. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि सब्जियां ओवरऑल हेल्थ को इंप्रूव करने में मदद करती हैं और आपको स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाती हैं. सभी लोगों को प्रतिदिन खूब फल और सब्जियां खानी चाहिए.




Mp News : भोपाल में मिले पांच कोरोना संक्रमित, एक्टिव मरीजों की संख्या पहुंची 7

MP News: Five corona infected found in Bhopal, number of active patients reaches 7

कोरोना . प्रतीकात्मतक तस्वीर
– फोटो : istock

मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार सामने आ रहे है। राजधानी भोपाल में शुक्रवार को पांच कोरोना संक्रमित मिले। वहीं, एक व्यक्ति डिस्चार्ज हुआ। सभी नए संक्रमित वैक्सीनेटेड है और उनको हल्के लक्षण है। पांचों संक्रमितों को होम आईसोलेशन में भर्ती कराया गया है। शहर में अब कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़कर सात पहुंच गई है। दिसंबर 2023 से अब तक शहर में 779 जांच में 23 संक्रमित मिल चुके है। इनमें से 16 को डिस्चार्ज किया गया है।




कोविड-19 सब-वैरिएंट JN.1 के 196 मामले, यहां सार्वजनिक स्थानों पर सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनना अनिवार्य

कोविड-19 के सब-वैरिएंट JN.1 (Covid-19 JN.1) के देश में अब तक कुल 196 मामले सामने आये हैं. साथ ही ओडिशा उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां कोरोना वायरस के इस सब-वैरिएंट की मौजूदगी का पता चला है. यह जानकारी इंडियन सार्स सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) द्वारा सोमवार को जारी किये गए आंकड़े से मिली. नये वैरिएंट की एंट्री से देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी आई है. इधर कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लेह में सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है.

कोरोना के बढ़ते मामले से लेह प्रशासन अलर्ट

कोविड-19 के मामलों में बढ़ातरी के मद्देनजर लेह जिला प्रशासन ने सोमवार को कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के लिए मास्क लगाना अनिवार्य होगा. लेह में पिछले सप्ताह कोविड-19 के 11 मामले सामने आये. लोगों को कार्यालयों, कार्यस्थलों और सार्वजिनक स्थानों एवं सार्वजनिक परिहवनों में अनिवार्य रूप से मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया गया है. इस आदेश में लोगों से कार्यालयों एवं सार्वजनिक स्थानों पर आपस में दूरी बनाकर भी रखने को कहा गया है.

दस राज्यों में कोरोना के नये सब वैरिएंट की एंट्री

अब तक देश के दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना वायरस के जेएन.1 उप-स्वरूप के मामले सामने आये हैं. INSACOG के अनुसार, ये राज्य हैं केरल (83), गोवा (51), गुजरात (34), कर्नाटक (आठ), महाराष्ट्र (सात), राजस्थान (पांच), तमिलनाडु (चार), तेलंगाना (दो) ओडिशा (एक) और दिल्ली (एक) हैं. आईएनएसएसीओजी के आंकड़े से पता चला है कि दिसंबर में देश में सामने आये कोविड के कुल मामलों में 179 जेएन.1 के थे, जबकि नवंबर में ऐसे मामलों की संख्या 17 थी.

WHO ने कोरोना के सब वैरिएंट को वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ करार दिया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना वायरस के ‘जेएन.1’ स्वरूप के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच इसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ करार दिया है. डब्यूएचओ ने साथ ही कहा कि इससे वैश्विक जनस्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरा नहीं है.

कोरोना के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई केंद्र की चिंता

कई देशों से जेएन.1 के मामले सामने आते रहे हैं और वैश्विक स्तर पर इसका प्रसार तेजी से बढ़ा है. देश में कोविड मामलों की संख्या में वृद्धि और जेएन.1 उप-स्वरूप का पता चलने के बीच केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निरंतर निगरानी बनाए रखने को कहा है.




Mp Corona Update : राजधानी भोपाल में दो नए संक्रमित मिले, एक्टिव केस बढ़कर 10 हुए

MP CORONA UPDATE: Two new infected people found in the capital Bhopal, active cases increased to 10.

Corona became deadly again
– फोटो : social media

मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग को 32 लोगों की जांच में दो कोरोना संक्रमित मिले। दोनों मरीज वैक्सिनेटेड हैं। दोनों में कोई गंभीर लक्षण नहीं है।

भोपाल में कोरोना संक्रमितों की संख्या अब 11 पर पहुंच गई है। इसमें एक मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुका है। अभी 10 सक्रिय केस हैं। इनमें से दो मरीज अस्पताल में भर्ती हैं।

दिसंबर माह में स्वास्थ्य विभाग ने करीब 100 लोगों की जांच की है। इसमें 10 प्रतिशत संक्रमित मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने दूसरी बीमारी से पीड़ित मरीजों को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह दी है। साथ ही भीड़भाड़ वाले इलाके में नहीं जाने की सलाह दी है।




इन विटामिन की कमी से हो जाती है स्किन की दुर्गति, मुंहासों से भर जाता है चेहरा; इन फूड्स से दूर होगी कमी

skin problem- India TV Hindi

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skin problem

बिनाधब्बे उभरने लगते हैं। चलिए आपको बताते हैं किन विटामिन की कमी से दाग धब्बे चेहरे पर आने लगते हैं।

  • विटामिन दूर होते हैं। ऐसे में विटामिन सी की कमी को दूर करने के लिए संतरा, मौसंबी, आंवला, नींबू जैसे फलों का सेवन करना बेहद असरदार होता है।
  • विटामिन D की कमी: विटामिन डी की कमी से सिर्फ हड्डियां कमजोर नहीं होती हैं, बल्कि इससे चेहरे की रंगत पर भी काफी प्रभाव पड़ता है। विटामिन डी की कमी को दोर्र करने के लिए दूध, अंडा, मछली और मीट का सेवन करना चाहिए। इसलिए अगर आप चाहती हैं कि आपकी स्किन ग्लोइंग दिखे तो अपनी डाइट में विटामिन डी से जुड़े फूड्स शामिल करें।
  • विटामिन B12: विटामिन बी 12 की कमी से चेहरे पर पिगमेंटेशन की समस्या होने लगती है। धीरे धीरे पिगमेंटेशन दाग धब्बों के र्रोप में बदल जाते हैं। इसलिए इन्हें दूर करने के लिए अपनी डाइट में दूध, दही जैसे डेयरी प्रॉडक्ट और हरी सब्जियों को शामिल करें। इस तरह से हम स्किन प्रॉब्लम से छुटकारा पा सकते हैं।
  • विटामिनधब्बों की परेशानी दूर हो जाएगी।



मास्क पहनें और कोरोना वायरस की जांच के लिए जाएं, आईसीएमआर की सलाह

कोरोना के मामले देश में एक बार फिर से बढ़ने लगे हैं। देश भर में ऐक्टिव केसों की संख्या 2600 से ज्यादा हो गई है और इनमें से 2000 केस तो अकेले केरल में ही पाए गए हैं। ऐसे में एक बार फिर से कोरोना को लेकर टेंशन बढ़ गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कोरोना के नए सब-वैरिएंट JN.1 को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि कई देशों इससे सांस संबंध परेशानी लोगों को हो सकती है। यही नहीं इस सब-वैरिएंट ने कोरोना को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और एडवाइजरी का दौर भी लौट आया है। कर्नाटक से लेकर चंडीगढ़ तक सरकारों ने मास्क लगाने की सलाह दी है।

इस बीच कोरोना पर लंबी स्टडी करने वाले संस्थान ICMR ने भी नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इसमें बताया गया है कि जिन लोगों में कोरोना के लक्षण पाए जाएं, वे तुरंत अलग हो जाएं और आइसोलेशन में रहें। इसके अलावा कोरोना के लक्षण वाले 60 साल से अधिक आयु के लोगों की पहले टेस्टिंग की जाए। वहीं डायबिटीज, हाइपरटेंशन, लंग्स और किडनी की बीमारी के शिकार और मोटापे से पीड़ित लोगों को भी लक्षण पाए जाने पर तत्काल टेस्टिंग की सलाह दी गई है। ICMR का कहना है कि बचाव के लिए यह जरूरी है कि टेस्टिंग प्राथमिकता के आधार पर हो ताकि नए वैरिएंट को फैलने से रोका जा सकता है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि खांसी, बुखार, गले में खराश, स्वाद और महक न आना, सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को गंभीरता से लें और टेस्ट कराएं। गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को टेस्टिंग में प्राथमिकता दी जाए। इस बीच केरल और गोवा जैसे राज्यों में कोरोना के केसों में तेजी से इजाफा हुआ है। वहीं एनसीआर की बात करें तो गाजियाबाद और गुरुग्राम में नए मामले मिले हैं। केरल में तो ऐक्टिव केसों की संख्या 2,341 हो गई है, जहां बुधवार को ही आंकड़ा 2 हजार के पार पहुंचा था। गुरुवार सुबह आए आंकड़ों में केरल में 300 नए केस मिले हैं और तीन लोगों की कोरोना से मौत हुई है। वहीं 211 लोगों को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया है।

एक्सपर्ट्स बोले- कोरोना से सावधान रहना जरूरी, वरना आगे भी खतरा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही कोरोना का नया वैरिएंट JN.1 बहुत खतरनाक नहीं है और इससे जान का खतरा भी अन्य वैरिएंट्स से कम है। लेकिन मास्क लगाने जैसी सावधानियां अपनानी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसकी वजह यह है कि कोरोना का असर शरीर में लंबे अरसे तक रहता है और इसके चलते दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों हेल्थ मिनिस्टर ने भी कहा था कि कोरोना से पीड़ित लोगों को कुछ साल तक बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी चाहिए।