अर्थराइटिस में असरदार है सहजन फली, 5 गजब के फायदे जान लें

सहजन की फली का सेवन त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद होता है.

लिवर को हेल्दी रखने में मददगार है सहजन फली का सेवन.

पोषक तत्वों से भरपूर सहजन की फली गुणों की खान है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर की कई बड़ी बीमारियों में बेहद असरदार साबित होते हैं. खासतौर पर हड्डियों से जुड़ी समस्याओं में सहजन फली का सेवन काफी लाभकारी होता है. अर्थराइटिस, किडनी स्टोन में भी सहजन फली काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. सहजन फली में मौजूद चमत्कारिक गुणों की वजह से इसे नियमित खाने की सलाह दी जाती है. स्किन और बालों के लिए भी सहजन फली का सेवन काफी फायदा पहुंचाता है.
गुणकारी सहजन फली को डाइट में शामिल कर लिवर को भी सुरक्षित रखा जा सकता है. मेडिकल न्यूज टुडे की खबर के मुताबिक सहजन फली में कई गुण छुपे हैं जो कि हेल्दी रखने में मदद करते हैं. आइए जानते हैं सहजन फली के 5 बड़े फायदे.

सहजन फली के 5 फायदे

1. अर्थराइटिस – रुमेटाइड अर्थराइटिस हड्डियों से संबंधित बेहद दर्दनाक बीमारी होती है. इसके अलावा जोड़ों में सूजन और दर्द की समस्या भी बेहद कॉमन है. इन सभी समस्याओं में सहजन फली का सेवन काफी लाभकारी होता है. सहजन फली में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो कि अर्थराइटिस की समस्या को बढ़ने से रोकने में मदद करता है.

2. त्वचा और बाल – स्किन और हेयर से जुड़ी समस्याएं बेहद कॉमन हैं. सहजन में मौजूद पोषक तत्व त्वचा और बालों के लिए बेहद फायदेमंद होता है. रिसर्च के मुताबिक सहजन के बीज से बना तेल स्किन के घावों को तेजी से भरने में मदद करता है. ऐसा ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कम होने की वजह से हो सकता है. इसके साथ ही मोरिंगा सीड्स ऑयल बालों की हेल्थ के लिए भी बेहद बढ़िया होता है.

3. लिवर – हमारे शरीर में लिवर एक बेहद महत्वपूर्ण अंग होता है. खाने के बेहतर डाइजेशन के लिए लिवर का हेल्दी होना बेहद जरूरी होता है. सहजन फली का नियमित सेवन लिवर को सुरक्षित रखने में मदद करता है. सहजन नॉनएल्कोहोलिकि फैटी लिवर डिजीज से भी बचाव करने में अहम भूमिका निभाती है.

4. कार्डियोवस्कुलर सिस्टम – सहजन की फली में प्रचुर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-इन्फ्लेमेटरी तत्व मौजूद होते हैं जो कि कार्डियोवस्कुलर हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं. सहजन फली में मौजूद Quercetin लिपिड और सूजन को बनने से रोकता है. इन दोनों की वजह से हार्ट डिजीज होने का रिस्क बढ़ जाता है.

5. किडनी स्टोन – किडनी स्टोनी की समस्या बेहद कॉमन है. किडनी में स्टोन होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. बता दें कि पारंपरिक नुस्खों में किडनी स्टोन की परेशानी से निजात पाने के लिए सहजन फली का इस्तेमाल किया जाता है. लेबोरेटरी टेस्ट में पाया गया कि सहजन का सत्व उन मिनरल्स को बनने से रोकता है जो कि किडनी में स्टोन की वजह बनते हैं.




ये 7 चीजें, आज से ही इन्हें कहें बाय

आइसक्रीम में बहुत अधिक मात्रा में शुगर और फैट होता है. इसमें मौजूद क्रीम इसे और अधिक एक्स्ट्रा कैलोरी से भर देता है.
वजन बढ़ाने के लिए पिज्जा का सेवन बहुत अधिक जिम्मेदार है.

मोटापा आज दुनिया की बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है. पूरी दुनिया मोटापे से पीड़ित है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक करीब 2 अरब लोगों का वजन बढ़ा हुआ है. मोटापा के कारण डायबिटीज, हार्ट डिजीज, किडनी प्रोब्लम, डाइजेशन आदि की समस्याएं होती है. अगर मोटापा बढ़ता ही जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है. मोटापे के लिए कई चीजें जिम्मेदार होती हैं लेकिन इसमें खान-पान का बहुत बड़ा हाथ होता है. आमतौर पर पर प्रोसेस्ड फूड यानी जी चीजें कुदरती चीजों से प्रोसेस होकर बनती हैं, उससे मोटापा बढ़ता है. यानी फास्ट फूड, जंक फूड, पैकेटबंद चीजें, मीठी चीजें, तली-भुनी चीजें इत्यादि से बेतहाशा वजन बढ़ता है.

हालांकि अधिकांश लोगों को पता होता है कि इन फूड से मोटापा बढ़ता है, इसके बावजूद वे इन चीजों से परहेज नहीं करते. कुछ लोगों को पता ही नहीं रहता कि वास्तव में किन चीजों को नहीं खाना चाहिए. यदि आपको भी नहीं पता कि किस चीज को ज्यादा खाने से वजन बढ़ता है, तो यहां दिए जा रही सूची से आपको फायदा होगा.

इन चीजों को ज्यादा खाएंगे तो हो जाएंगे मोटे

1.सोडा-हेल्थलाइन की खबर के मुताबिक सोडा में बहुत अधिक कैलोरी और शुगर होती है. इसके साथ ही इसमें विटामिन, मिनिरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भी नहीं होते. इसलिए यदि आप सोडा का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं तो इससे हमेशा वजन बढ़ने का खतरा रहेगा.

2.मीठी कॉफी-किसी चीज में एडेड शुगर होती है तो उससे वजन बढ़ता है. हालांकि कॉफी से कई सारे फायदे होते हैं लेकिन यदि आप इनमें चीनी डालकर पीते हैं तो यह शुगर और सोडा से ज्यादा कैलोरी वाला फूड बन जाता है. इससे वजन बढ़ने के साथ ही कई अन्य बीमारियां भी हो सकती है.

3.आइसक्रीम-अधिकांश आइसक्रीम में बहुत अधिक मात्रा में शुगर और फैट होता है. इसके साथ ही इसमें मौजूद क्रीम इसे और अधिक एक्स्ट्रा कैलोरी से भर देता है. जाहिर है, इससे वजन कम होगा ही.

4. पिज्जा-वजन बढ़ाने के लिए पिज्जा का सेवन बहुत अधिक जिम्मेदार है. पिज्जा से न सिर्फ वजन बढ़ता है बल्कि कई बीमारियां भी होती है. इसमें बहुत अधिक मात्रा में फैट, कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी होती है.

5.कुकीज और डोनट्स-कुकीज और डोनट्स प्रोसेस्ड फूड होते हैं. यह रिफाइंड आटा, फैट और चीनी से बनते हैं. उदाहरण के लिए एक बड़ा चॉकलेट चिप कुकीज में 220 कैलोरी होता है.

6.फ्रेंच फ्राई और पोटैटो चिप्स-स्नैक्स में लोगों का पसंदीदा फूड फ्रेंच फ्राई और आलू चिप्स होता है. लेकिन इसमें बहुत अधिक मात्रा में नमक, बहुत अधिक फैट होता है जो मोटापे को बढ़ाता है.

7. चॉकलेट-डार्क चॉकलेट से कई सारे फायदे होते हैं लेकिन जब यह ज्यादा मात्रा में खाई जाए तो इससे बहुत जल्द मोटापा बढ़ जाता है.




नसों में ब्लड फ्लो को जेट की तरह तेज कर देते हैं ये 3 फूड, ब्लॉकेज की समस्या भी हो जाती है दूर,

बैरीज में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होता है जिसका ब्लड फ्लो पर सकारात्मक असर होता है. यह ब्लड वैसल्स को डैमेज होने से बचाता है

प्याज में मौजूद नाइट्रिक एसिड तुरंत ब्लड वैसल्स को चौड़ा कर देता है जिसके कारण ब्लड फ्लो बढ़ जाता है.

खून हमारी नस-नस में दौड़ता रहता है. अगर खून हमारी नसों में नहीं दौड़ेगा तो हम जिंदा नहीं रह सकते. खून ही हमारे शरीर के अंग-अंग में ऑक्सीजन और आवश्यक पोषक तत्व पहुंचाता है और नस-नस की गंदगी को बाहर निकालता है. इसलिए खून हमारे पूरे शरीर का ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम बनाता है. हमारी शरीर में 96 हजार किलोमीटर का परिवहन तंत्र है जिसमें खून दौड़ता रहता है. अगर खून का फ्लो अंगों तक नहीं पहुंचे तो हमें पेरिफेरल आर्टरी डिजीज, डायबिटीज, मोटापा आदि की बीमारी हो सकती है. वहीं हार्ट में अगर खून का फ्लो सही से न हो तो कई तरह की हार्ट की बीमारियां हो सकती है.

अच्छी बात यह है कि कई ऐसे फूड हैं जिनका नियमित सेवन करने से खून को फ्लो बढ़ जाता है. यह हार्ट हेल्थ के लिए अच्छा है. आइए जानते हैं कि वे कौन से फूड हैं जिनका सेवन करने से बॉडी में बहुत जल्द ब्लड को फ्लो बढ़ जाता है.

इन फूड से तुरंत बढ़ जाता है ब्लड फ्लो

1. अनार-जब भी लोग बीमार होते हैं, उन्हें अनार का जूस पिलाया जाता है. दरअसल, अनार बहुत जल्द शरीर में खून को बढ़ा देते हैं और इससे ब्लड फ्लो बढ़ जाता है. अनार में पोलीफेनॉल एंटीऑक्सीडेंट्स और नाइट्रेट होता है. इन चीजों में वेसोडायलेटर गुण होता है जो ब्लड वैसल्स को चौड़ा करता है. इससे ब्लड फ्लो बढ़ जाता है. हेल्थलाइन की खबर के मुताबिक एक अध्ययन में जब कुछ लोगों को काम करने के 30 मिनट पहले 1000 मिलीग्राम अनार का पाउडर दिया गया, तो इसके बाद उसमें ब्लड फ्लो आश्चर्यजनक रूप से बढ़ गया.

2.प्याज-प्याज सिर्फ सब्जियों को टेस्टी बनाने के लिए नहीं है बल्कि इसमें मौजूद नाइट्रिक एसिड तुरंत ब्लड वैसल्स को चौड़ा कर देता है जिसके कारण ब्लड फ्लो बढ़ जाता है. प्याज में ही फ्लेवेनोएड एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो हार्ट हेल्थ के लिए भी गुणकारी होता है. इसके साथ ही प्याज में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होता है जो खून की धमनियों और नसों में सूजन होने के जोखिम को कम करता है.

3. लहसुन-लहसुन के औषधीय गुणों से हम सब वाकिफ हैं. लहसुन ब्लड सर्कुलेशन और हार्ट की हेल्थ को लिए बेहतरीन हर्ब्स है. लहसुन में एलीसिन कंपाउड होता है जो ब्लड फ्लो को तेज करता है और ब्लड प्रेशर को कम कर देता है. इससे ब्लड वैसल्स को रेलेक्स होने में मदद मिलती है.

4.चुकंदर-चुकंदर जिस तरह देखने में लाल होता है, उसी तरह यह लाल खून को भी बढ़ा देता है. यही कारण है कि ज्यादातर एथलीट पहले चुकंदर का जूस पीते हैं, इससे ब्लड फ्लो तेज हो जाता है जिसके कारण खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी बेहतर हो जाता है. चुकंदर में हाई नाइट्रेट होता है जो शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड में बदल जाता है. यह ब्लड वैसल्स में ब्लड फ्लो को तेज कर देता है.

5. बैरीज-बैरीज ऐसा फ्रूट है जो हार्ट हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद है. बैरीज में स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, जामुन इत्यादि फ्रूट आते हैं. बैरीज में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होता है जिसका ब्लड फ्लो पर सकारात्मक असर होता है. यह ब्लड वैसल्स को डैमेज होने से बचाता है और ब्लड प्रेशर को कम करता है. इससे सर्कुलेशन से संबंधित दिक्कतें दूर हो जाती है.




पेट के लिए रामबाण है हींग का पानी, 5 फायदे देख दंग रह जाएंगे आप

Benefits Of Heeng Water: हींग सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है. हींग का इस्तेमाल खाने में स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है. हींग के इस्तेमाल से आप अपने डाइजेशन को भी मजबूत कर सकते हैं. यह वजन कम करने में भी मददगार है. हेल्थलाइन में छपी एक खबर के मुताबिक गंभीर सूजन, हार्ट डिजीज, कैंसर और टाइप 2 डायबिटीज़ में भी हींग असरकारक हो सकती है. हींग का कई तरह से सेवन किया जा सकता है. आमतौर पर हींग को पानी मे मिलाकर पिया जाता है. आइए आज हम आपको हींग पानी को बनाने का तरीका और इसके फायदे बताते हैं.

ऐसे बनाएं हींग पानी
हींग पानी बनाने के लिए सबसे पहले एक गिलास पानी को गर्म कर लें. इसके बाद गर्म पानी में हींग को मिला लें. अब हींग को पानी में अच्छी तरह घोल लें. जब हींग अच्छी तरह से घुल जाए तो आप इसका सेवन कर सकते हैं. यह पाचन शक्ति को मजबूत करने में मददगार है.

हींग के स्वास्थ्य को होने वाले फायदे

1.एंटी-ऑक्सीडेंट्स से है भरपूर: हींग एंटी-ऑक्सीडेंट्स का अच्छा सोर्स मानी जाती है. फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को हींग कम करती है. इसके साथ ही गंभीर सूजन, हार्ट डिजीज, कैंसर और टाइप 2 डायबिटीज से भी बचाव करती है.

2.पाचन शक्ति को मजबूत करे: हींग का नियमित सेवन डाइजेशन सिस्टम को बेहतर करने में मदद करता है. हींग खाने से अपच, पेट में मरोड़, गैस जैसी समस्याओं से राहत मिलती है. इसका नियमित इस्तेमाल इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) को भी कम करने में मदद कर सकता है. इसके रोजाना उपयोग से पेट अच्छे से साफ होता है.

3.वजन कम करे: हींग पानी के नियमित सेवन से वजन कम होता है. हींग पाचन क्रिया को दुरुस्त कर बढ़े हुए पेट को कम करती है. मोटापा से ग्रसित लोग इसका सेवन कर सकते हैं.

4.ब्लड शुगर कंट्रोल करे: हींग का नियमित इस्तेमाल ब्लड शुगर को कंट्रोल कर सकता है. रोजाना सुबह हींग पानी पीने से ब्लड सुगर कंट्रोल रहेगा.

5.स्किन के लिए फायदेमंद: हींग का सेवन केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि यह स्किन के लिए भी बहुत फायदेमंद है. इसका लेप चेहरे पर लगाने से स्किन काफी ग्लोइंग हो जाती है. हींग का इस्तेमाल रिंकल्स, पिंपल्स जैसी समस्याओं से निजात दिला सकता है.




हाई कोलेस्ट्रॉल चुटकियों में हो जाएगा छूमंतर, अपनाएं 2 घरेलू नुस्खे

कोलेस्ट्रॉल अगर अत्यधिक बढ़ जाए, तो हार्ट अटैक की वजह बन सकता है.
कोलेस्ट्रॉल को अलसी के बीजों से काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.

Natural Remedies For High Cholesterol: कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर में पाया जाने वाला एक मोम जैसा पदार्थ होता है, जो सामान्य से ज्यादा हो जाए, तो हार्ट अटैक की वजह बन सकता है. हमारे शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) और बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) पाया जाता है. गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ना अच्छा संकेत होता है, लेकिन अधिकतर लोगों का बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है. एलडीएल बढ़ने से हार्ट हेल्थ बुरी तरह प्रभावित होती है. शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 50 mg/dL से ज्यादा होनी चाहिए. बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 100 mg/dL से कम होनी चाहिए और टोटल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 200 mg/dL से कम होनी चाहिए. जो लोग हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने की जरूरत होती है, ताकि हार्ट हेल्थ सही बनी रहे.

आज के समय में अनहेल्दी लाइफस्टाइल और गलत खान-पान की वजह से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या तेजी से बढ़ रही है. हर उम्र के लोग कोलेस्ट्रॉल का शिकार हो रहे हैं. बिना फिजिकल एक्टिविटी वाली लाइफस्टाइल भी कोलेस्ट्रॉल का मरीज बना सकती है. जानकारों की मानें तो कोलेस्ट्रॉल हद से ज्यादा बढ़ जाए, तो हार्ट अटैक समेत कई हार्ट डिजीज की वजह बन सकता है. कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए बेहतर लाइफस्टाइल और संतुलित खानपान के साथ कुछ कारगर घरेलू नुस्खे भी अपनाए जा सकते हैं. ये नुस्खे आपकी किचन में रखी चीजों से तैयार होंगे और सेहत के लिए वरदान साबित हो सकते हैं.

अलसी के बीज और दालचीनी से होगा कमाल

यूपी के प्रेम रघु आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर अभिनव राज के मुताबिक हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या को कंट्रोल करने के लिए आयुर्वेद में अलसी के बीज (Flaxseed) और दालचीनी (Cinnamon) को रामबाण माना जाता है. इन दोनों चीजों का खाली पेट सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल लेवल तेजी से कंट्रोल हो सकता है. इससे डाइजेस्टिव सिस्टम भी बूस्ट हो जाता है और पेट से जुड़ी कई समस्याएं दूर हो जाती हैं. अलसी के बीज और दालचीनी में कई पोषक तत्व होते हैं, जो ओवरऑल हेल्थ को बेहतर कर सकते हैं. अलसी के बीजों को सलाद या दही में मिलाकर खाया जा सकता है.

अलसी के बीज और दालचीनी का ऐसे करें सेवन

अलसी के बीजों को सुखाकर अच्छी तरह पीस लें और इसका मिक्सचर बना लें. इस चूर्ण को एक चम्मच खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लें. इससे आपके शरीर में जमा कोलेस्ट्रॉल पिघलकर बाहर निकल जाएगा. अलसी में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो कोलेस्ट्रॉल कम करने के साथ पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है. दालचीनी की बात करें, तो आप इस मसाले को पीसकर चूर्ण बना लें और रोज सुबह खाली पेट एक चुटकी चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें. ऐसा करने से जल्द ही कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल हो सकता है. दोनों ही चीजों का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल स्तर कम हो सकता है.




अगले कुछ दिनों में इन बीमारियों का बढ़ेगा कहर ! अभी हो जाएं सावधान।

मच्छरों के काटने से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं.
घर के आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखकर मच्छरों से बचा जा सकता है.

Mosquito Borne Diseases: बेमौसम बारिश से मौसम में भी तेजी से बदलाव आया है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है. सर्दी-गर्मी की वजह से भी हेल्थ काफी प्रभावित हो रही है. बारिश की वजह से मच्छरों का प्रकोप भी काफी बढ़ गया है. ऐसे में कोल्ड, बुखार, गले में खराश, पेट में दर्द, उल्टी, दस्त, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस A समेत कई बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. डॉक्टर्स की मानें तो आने वाले कुछ सप्ताह में ये सभी बीमारियां कहर बरपा सकती हैं. आज डॉक्टर से यह जानने की कोशिश करेंगे कि बदलते मौसम में इन बीमारियों से कैसे बचा जा सकता है.

डॉक्टर आर एस मीणा कहते है कि बारिश की वजह से मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाएगा और आने वाले कुछ दिनों में कॉमन कोल्ड, फ्लू, गले में खराश, पेट में दर्द, सीजनल फ्लू, उल्टी-दस्त, हाथ-पैरों में दर्द, वीकनेस, बुखार जैसी समस्याएं लोगों को तेजी से घेर सकती हैं. बारिश की वजह से हाइजीन प्रभावित होती है और लोग अनहेल्दी चीजों का सेवन कर लेते हैं. इससे पेट से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं. मौसम में भी इन दिनों तेजी से बदलाव आ रहा है, जो फ्लू को ट्रिगर कर सकता है. इसलिए सावधानी बेहद जरूरी है. लापरवाही करने से हालत बिगड़ सकती है और अस्पताल जाने की नौबत आ सकती है.

इस मौसम में बीमारियों से बचाएंगे 5 तरीके

– घर में बारिश का पानी न जमा होने दें. घर के आसपास सफाई रखें. मच्छर पैदा न होने दें.
– मच्छरों से बचने की हर संभव कोशिश करें. मच्छरदानी या अन्य चीजों का इस्तेमाल करें.
– खाने-पीने को लेकर सावधानी बरतें. साफ पानी पीएं और हेल्दी डाइट जरूर लें.
– प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तक एक्सरसाइज करें और इम्यूनिटी को मजबूत बनाएं.
– फ्लू वैक्सीन लगवाएं और किसी भी तरह की परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें.

इन बातों का जरूर रखें ध्यान

अगर कोई व्यक्ति फ्लू या अन्य किसी बीमारी से जूझ रहा है, तो उससे दूरी बनाएं. भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और साफ-सफाई का ध्यान रखें. बीमारियों से बचने के लिए अच्छी लाइफस्टाइल अपनाएं और फल-सब्जियों से भरपूर डाइट लें. इम्यूनिटी को मजबूत रखने के लिए विटामिन सी से भरपूर फूड्स खाएं और फिजिकली एक्टिव रहें. बुखार या सर्दी होने पर डॉक्टर से मिलकर इलाज करवाएं.




दूध और अलसी के फायदे: मांसपेशियां में आएगी जान, जब दूध में मिलाकर पिएंगे ये बीज | Alsi seeds with milk in hindi

milk_with_alsi- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK
milk_with_alsi

दूध और अलसी के फायदे: अलसी के बीज किसी सुपरफूड से कम नहीं हैं। इन बीजों में एक साथ कई गुण हैं जो कि शरीर की अलग-अलग स्थितियों के अनुसार काम आ सकते हैं। पर आज हम अलसी के बीजों को दूध में मिलाकर लेने की बात करेंगे। जी हां, दूध और अलसी के फायदे (alsi seeds with milk) कई हैं। ये आपके दिमाग में ही नहीं शरीर में भी जान फूंकते हैं। क्यों और कैसे, जानते हैं। पर उससे पहले दूध और अलसी के बीजों का सेवन कैसे करें।

दूध और अलसी के बीजों का सेवन कैसे करें-How to have flaxseed with milk

दूध और अलसी के बीजों के सेवन के दो तरीके हैं। पहला तरीका है आप अलसी के बीजों को दूध में रातभर भिगोकर रख दें। इसके बाद सुबह इन दोनों को मिक्सर में चला लें और फिर इसका सेवन करें। इसके अलावा आप इन बीजों को भून कर और इसे पीस कर दूध में मिला कर हर रात ले सकते हैं।

flex_seeds

Image Source : FREEPIK

flex_seeds

दूध और अलसी के फायदे-Flaxseed with milk benefits

1. स्टैमिना बूस्टर है

दूध और अलसी के बीजों का सेवन स्टैमिना बूस्टर है जो कि शरीर में एनर्जी बैलेंस करता है। दूध और असली दोनों ही प्रोटीन से भरपूर हैं तो, अलसी के बीजों में ओमेगा-3 है। इन दोनों का एक साथ सेवन आपको कई समस्याओं से बचाव में मदद कर सकता है।

2. मांसपेशियों में जान फूंक देता है

दूध और अलसी के बीजों को एक साथ खाना, मांसपेशियों में ताकत भरने का काम करता है। इसके फैटी ऑयल मांसपेशियों को हेल्दी रखते हैं और इसकी रिकवरी में मदद करते हैं। साथ ही दूध के साथ प्रोटीन आपकी मासंपेशियों को हेल्दी रखने में मददगार है।

हाई यूरिक एसिड वालों को जरूर खाना चाहिए ये साग, जानें रेसिपी और अन्य फायदे

इतना ही नहीं, यो दोनों हड्डियों के लिए भी फायदेमंद है। ये कैल्शियम अवशोषण को बढ़ाते हैं और हड्डियों को स्वस्थ रखने में मददगार हैं। तो, इन तमाम कारणों से आपको इन दोनों को एक साथ लेना चाहिए।

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए हैकिसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)




शुगर के मरीजों के लिए ताजा अंजीर है फायदेमंद या ड्राई, किस तरह खाने से मिलता है ज्यादा फायदा, जानें सबकुछ

हाइलाइट्स

अंजीर में बहुत अधिक मात्रा में कैल्शियम और फॉस्फोरस भी पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूती देता है.
ताजा अंजीर डायबिटीज के मरीजों के लिए हेल्दी स्नैक्स के रूप में काम कर सकता है.

Which Type of Fig is Best Fresh or Dried: डायबिटीज बहुत ही गंभीर बीमारी है जो कई बीमारियों को शरीर में घर बनाने के लिए पनाह देती है. डायबिटीज में ब्लड शुगर की मात्रा बढ़ जाती है जिसके कारण डायबिटीज के मरीजों को खान-पान पर बहुत ध्यान देना होता है. खान-पान में थोड़ा सा इधर-उधर होने पर शुगर का लेवल बढ़ जाता है. डायबिटीज के मरीजों को हमेशा मीठा खाने की चाहत होती है. हालांकि चीनी से बनी चीजें शुगर को बहुत जल्दी बढ़ा देती है. इसलिए फ्रूट पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है लेकिन सभी फ्रूट डायबिटीज मरीजों के लिए अच्छा नहीं है. अंजीर ऐसा फ्रूट है जिसे खाने से ब्लड शुगर नहीं बढ़ता है. पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि अंजीर को खाएं कैसे.

कुछ लोगों को मानना है कि ताजे अंजीर के फ्रूट को खाना चाहिए जबकि कुछ लोगों का मानना है कि ड्राइड अंजीर शुगर के मरीजों के लिए फायदेमंद है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि डायबिटीज के मरीजों को कौन सा अंजीर खाना चाहिए.

अंजीर शुगर को करता है
अंजीर मलवरी कुल का पौधा है जिसमें लगे अंजीर के फल आमतौर पर सब्जी की तरह ही दिखता है. अंजीर में बहुत ही शक्तिशाली पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसमें बहुत अधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो पाचन शक्ति को मजबूत करता है. इससे पेट से संबंधित समस्याएं गैस, ब्लॉटिंग और कॉन्स्टिपेशन को दूर किया जा सकता है. अंजीर गुड बैक्टीरिया को भी बढ़ाता है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर में डायटीशियन गरिमा गोयल ने बताया है कि अंजीर में सॉल्यूबल फाइबर होता है जो प्रोबायोटिक की तरह काम करता है. इसे पेटे से संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि अंजीर से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम किया जा सकता है. यह ब्लड शुगर को भी बहुत कम करता है. दरअसल, अंजीर में एब्सीसिक एसिड, मेलिक एसिड और क्लोरोजेनिक एसिड पाया जाता है जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है.

ताजा अंजीर ज्यादा फायदेमंद
अंजीर में बहुत अधिक मात्रा में कैल्शियम और फॉस्फोरस भी पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूती देता है. पोटैशियम होने के कारण यह ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि डायबिटीज मरीज इसे किस तरह से खाएं. हालांकि ताजा अंजीर और ड्राइड अंजीर दोनों हाई कैलोरी से भरपूर उच्च पोषक तत्वों से भरा है. दोनों में शुगर की सघनता ज्यादा होती है. लेकिन विटामिन ए और विटामिन सी ड्राइड अंजीर में नहीं पाया जाता है. गरिमा गोयल बताती हैं कि ताजे अंजीर में शुगर और कैलोरी दोनों कम होती है. इसलिए ताजा अंजीर डायबिटीज के मरीजों के लिए हेल्दी स्नैक्स के रूप में काम कर सकता है. इससे शुगर भी कंट्रोल रखने में मदद करेगा. इसके साथ ही ताजे अंजीर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है. इसलिए डायबिटीज के मरीजों को ताजा अंजीर ही खाना चाहिए.




Yoga Session: रोज करें मेरुदंड के ये अभ्‍यास, शरीर की अकड़न-जकड़न होगी दूर, कमर भी होगी मजबूत

हाइलाइट्स

अपनी क्षमता के अनुसार ही योगाभ्‍यास करें.
आती-जाती सांसों पर ध्‍यान केंद्रित करें.

Yoga Session With Sanju : योग हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. योग और आसन की मदद से हमारी मेंटल और फिजिकल सेहत अच्‍छी रहती है और हम लंबी उम्र तक फिट रह पाते हैं. अगर आप नियमित रूप से योगाभ्‍यास करें तो इससे आपके शरीर पर जमा चर्बी भी घटेगी और इंटरनल ऑर्गन भी बीमारियों से दूर रहेंगे. ऐसे में आज न्यूज़18 हिंदी के यूट्यूब लाइव सेशन में योगाचार्या सविता यादव (Savita Yadav) ने कुछ ऐसे ही योगाभ्‍यास का अभ्‍यास कराया, जो मेरुदंड को घुमाकर किया जाता है और इसके नियमित अभ्‍यास से आप रिलैक्‍स भी महसूस करते हैं.

स्‍ट्रेचिंग और ध्‍यान
सबसे पहले मैट पर पद्मासन या किसी भी मुद्रा में बैठें. अब अपने दोनों हाथों की उंगलियों को इंटरलॉक करते हुए ऊपर उठाएं और बॉडी को स्‍ट्रेच करें. गहरी सांस लें और होल्‍ड करें. फिर शरीर को ढीला करें और हाथों को नीचे करें. अब ध्‍यान की मुद्रा बनाएं और गहरी सांस लेते हुए आंखों को बंद कर आती जाती सांसों पर ध्‍यान केंद्रित करें. ओम शब्‍द का उच्‍चारण करें और प्रार्थना कर सकते हैं. इसके बाद कुछ सूक्ष्‍मयाम करें. आप वीडियो लिंक पर विस्‍तार से देख सकते हैं.

पहला अभ्‍यास
मैट पर पेट के बल लेट जाएं. अब दोनों बाजुओं को साइड में फैलाकर लें. अब दाहिने पैर को पीछे से उठाते हुए बाईं ओर जमीन पर पैरों से टच करें और वापिस सीधा कर लें. अब बाएं पैर से ये प्रकिया करें. यह प्रकिया 10 बार करें. फिर रिलैक्‍स करें.

दूसरा अभ्‍यास
पेट के बल में लेट कर हाथों को आगे की तरफ स्‍ट्रेच करें और प्रणाम की मुद्रा बनाएं. पैरों को नीचे की तरफ और हाथों को ऊपर की तरफ स्‍ट्रेच करें. फिर पैरों को थोड़ा सा फैलाएं और पंजों को बाहर की तरफ स्‍ट्रेच करें. अब कंधों के दोनों तरफ हथेली रखें.अब इन्‍हेल करते हुए कमर से ऊपर के हिस्से को उठाएं. अब दाई तरफ मुड़ते हुए बाएं तरफ के पैर को देखें. फिर रिलैक्‍स कर लेट जाएं. अब दूसरे तरफ बॉडी को घुमाएं और यह प्रक्रिया 10 बार करें.

तीसरा अभ्‍यास
पीठ के बल लेट जाएं. अब हाथों को ऊपर और पैरों को नीचे की तरफ स्‍ट्रेच करें. कंधों के बराबर में हाथों को फैला लें. अब पैरों को घुटनों से मोड़कर दाई तरफ झुकाएं और बाईं तरफ देखें. गहरी सांस लेते रहें. यह प्रक्रिया आप दोनों दिशा में करते जाएं. कमर दर्द के लिए बहुत ही अच्‍छा अभ्‍यास है. पूरा अभ्‍यास आप  वीडियो लिंक पर देख सकते हैं.




बार-बार ऊपर-नीचे क्यों हो जाता है ब्लड शुगर, आपकी ये 5 गलतियां हैं जिम्मेदार, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से लें जानकारी

हाइलाइट्स

डायबिटीज के मरीज सही समय पर दवा नहीं लेते हैं. इसके कारण ब्लड शुगर का लेवल तेजी से उपर-नीचे हो जाता है.
डायबिटीज के मरीज यदि कम नींद लें तो भी ब्लड शुगर उपर नीचे बहुत तेजी से हो जाता है.

Why Blood Sugar Levels Fluctuate: हम सब जानते हैं कि डायबिटीज कितनी खराब बीमारी है. डायबिटीज होने की मुख्य वजह हमारा गलत लाइफस्टाइल और गलत खान-पान है. फिजिकल एक्टिविटी की कमी और फास्ट फूड, जंक फूड, पैकेटबंद फूड आदि पर ज्यादा निर्भरता ने डायबिटीज की बीमारी को तेजी से बढ़ा रहा है. यही कारण है कि भारत में करीब 8 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित है. अनुमान है 2045 तक भारत में 13.5 करोड़ लोग डायबिटीज के शिकार होंगे. इसलिए भारत को डायबेटिक कैपिटल ऑफ वर्ल्ड कहा जाने लगा है. डायबिटीज में शुगर की मात्रा खून में आवश्यकता से अधिक बढ़ने लगती है जिसके कारण किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. जब खून में शुगर की मात्रा ज्यादा होने लगेगी तो यह हार्ट, किडनी के अलावा शरीर के कई अंगों को प्रभावित करने लगेगा. जिसे डायबिटीज की बीमारी है, उसे डॉक्टर शुगर कम करने की दवा देते हैं. इसके अलावा लाइफस्टाइल और खान-पान को सही करने की सलाह भी देते हैं. लेकिन कुछ लोगों में दवाई खाने के बावजूद अक्सर ब्लड शुगर बहुत उपर नीचे हो जाता है.

आखिर किस वजह से डायबिटीज मरीजों में दवा लेने के बावजूद भी शुगर लेवल बहुत उपर नीचे हो जाता है. इसी सवाल पर हमने मैक्स अस्पताल, गुड़गांव में डायबिटीज एक्सपर्ट और कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. पारस अग्रवाल से बात की. उन्होंने कहा कि अगर किसी डायबिटीज मरीज में दवाई लेने के बाद भी ब्लड शुगर लेवल बहुत ज्यादा उपर-नीचे हो जाता है, तो इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं.

शुगर लेवल ज्यादा उपर-नीचे के कारण

1. दवा की टाइमिंग में गलतियां-डॉ. पारस अग्रवाल ने बताया कि कई बार डायबिटीज के मरीज सही समय पर दवा नहीं लेते हैं. इसके कारण ब्लड शुगर का लेवल तेजी से उपर-नीचे हो जाता है. कुछ दवाइयां जो खाने से पहले दी जाती है वह खाने के बाद खा लेते हैं तो कुछ खाने के बाद वाली खाने से पहले ले लेते हैं. वहीं कभी-कभी दवाइयों की खुराक में मरीज कम-ज्यादा कर लेते हैं. इन वजहों से ब्लड शुगर लेवल उपर नीचे हो जाता है.

2. रोजाना के दिनचर्या में परिवर्तन-जब मरीज अपने डेली रूटीन में अचानक से परिवर्तन करते हैं तो ब्लड शुगर लेवल तेजी से उपर नीचे होता है. यानी एक दिन बहुत तेज चल लेना और दूसरे दिन कुछ भी नहीं चलना. कभी बहुत ज्यादा खाना खा लेना तो कभी बहुत कम भोजन करना या ब्रेकफास्ट नहीं करना या खाना कम ज्यादा करना. इसी तरह किसी दिन बहुत अधिक मेहनत कर लेना किसी दिन बिल्कुल नहीं करना. किसी दिन बहुत सुबह वॉक पर निकलना तो किसी दिन शाम में वॉक पर निकलना. इन सभी कारणों से ब्लड शुगर का लेवल आगे-पीछे होना सामान्य बात है.

3. तनाव लेना-अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं और आप कितनी भी दवाई क्यों न खा लें लेकिन यदि आप ज्यादा तनाव लेंगे या अक्सर तनाव लेंगे तो ब्लड शुगर लेवल में लगातार उतार चढ़ा होता रहेगा.

4. बीमारियों में-कुछ बीमारियों की स्थिति में भी ब्लड शुगर लेवल उपर नीचे होता रहता है. जैसे यदि पेट खराब हो जाए या बुखार आ जाए या कुछ अन्य बीमारियां हो तो इस स्थिति में ब्लड शुगर लेवल का उपर नीचे होना स्वभाविक है.

5. कम नींद-डायबिटीज के मरीज यदि कम नींद लें तो भी ब्लड शुगर उपर नीचे बहुत तेजी से हो जाता है.

कैसे करें कंट्रोल
डॉ. पारस अग्रवाल ने कहा कि इन स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करें. डॉक्टर आपके प्रोफेशन को देखकर आपके लिए दिनचर्या बनाएंगे. इसके साथ ही सही वक्त पर भोजन, सही वक्त पर एक्सरसाइज, सही वक्त पर ब्रेकफास्ट करें. लाइफस्टाइल में एकरूपता लाएं. समय पर भोजन करें और समय पर नियत दवाई खाएं. नियमित एक्सरसाइज, योगा, मेडिटेशन का सहारा लें. मोबाइल पर कम समय व्यतीत करें. पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस न आएं, इसके लिए योगा, मेडिटेशन करें.