किडनी पर आ गई है आफत? इन 3 नेचुरल हर्ब्स से करें गुर्दे की सफाई, दवाई से ज्यादा कारगर होंगे ये नुस्खे

Herbs That Cleaned Kidneys: किडनी हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है. ये पेट के अंदर दोनों तरफ लटकी रहती है. हमारे शरीर के अंदर विभिन्न प्रक्रियाओं के दौरान हमेशा टॉक्सिन बनता रहता है. किडनी इन टॉक्सिन को छानकर शरीर से पेशाब के रास्ते फ्लश आउट कर देती है. इस प्रकार किडनी शरीर में लिक्विड को बैलेंस भी करती है. अगर किडनी के फंक्शन में खराबी आती है तो हमारे शरीर का पूरा केमिकल बैलेंस बिगड़ जाता है. जब शरीर में अनहेल्दी फूड जाता है तो उससे बने केमिकल से बहुत ज्यादा टॉक्सिन बनने लगते हैं. जब टॉक्सिन बहुत ज्यादा होने लगता है तब किडनी इसे निकालने में असमर्थ होने लगती है. इससे किडनी का फंक्शन खराब होने लगता है.

आधुनिक लाइफस्टाइल में हमारा खान-पान जिस तरह से केमिकल से भरा होता है, उसमें हमारी किडनी पर बहुत ज्यादा बोझ होने लगा है. इसलिए समय-समय पर किडनी की सफाई करना जरूरी है. यदि समय-समय पर कुछ हर्ब्स का इस्तेमाल करते रहेंगे तो आपकी किडनी नेचुरली साफ होती रहेगी और यह दवाई से ज्यादा स्थायी और असरदार होंगे.

इन हर्ब्स से करें किडनी की सफाई

1. उवा उर्सी-किडनी की सफाई के लिए उवा उर्सी हर्ब्स बहुत फायदेमंद है. टीओआई की खबर के मुताबिक उवा उर्सी को बेयर बेरी कहा जाता है. यह जंगली पौधा है. उवा उर्सी में एंस्ट्रिग्नेंट गुण होता है शरीर से हानिकारक टॉक्सिन को बाहर करता है. इसके साथ ही किडनी में इंफेक्शन फैलाने वाले बैक्टीरिया को खत्म करता है. उवा उर्सी की पत्तियों से चाय बनाकर पी जाती है.

2. पार्सले-पार्सले भी जंगली पौधा होता है. यह धनिया और अजवाइन के पत्ते की तरह ही होता है. इसे अजमोद भी कहा जाता है. पार्सले में ल्यूटियोलीन नाम का एंटीऑक्सीडेंट्स पाया जाता है. यह नेचुरल डाययूरेटिक हर्ब्स है जो किडनी को नेचुरली सफाई करता है. पार्सले की भी चाय बनाकर पी जाती है. इसे आप सलाद में भी मिलाकर खा सकते हैं.

3. ग्रेवेल रूट-ग्रेवेल रूट को कई नामों से जाना जाता है. इसे पर्पल बोनसेट, दोई पये, क्वीन ऑफ दे मीडो भी कहा जाता है. ग्रेवेल रूट यानी इस पौधा की जड़ में डाययूरेटिक गुण पाया जाता है. ग्रेवेल रूट मूत्र संबंधी तमाम दिक्कतों को दूर करता है.

4. होर्सेटेल-होर्सेटेल एक प्रकार की घास है. इसमें डाययूरेटिक गुण होता है. ये किडनी में मौजूद हानिकारक टॉक्सिन को बाहर निकालने में माहिर है. इसमें कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो किडनी में मौजूद हर तरह के हानिकारक बैक्टीरिया को मार देते हैं.




डॉक्टर की पर्ची में लिखे OD-BD-TDS का मतलब क्या होता है? यहां जानें कोड वर्ड

How to Read Code word in Doctor’s Prescription: हर इंसान कभी न कभी बीमार जरूर पड़ता है. हल्की-फुल्की तकलीफ में लोग खुद दवा दुकान से दवाई खरीद लेते हैं और जितनी डोज बताई जाती है, उतनी खरीद लेते हैं. कभी-कभी तकलीफ ज्यादा बढ़ जाती है तो डॉक्टरों के पास जाना होता है. डॉक्टर आवश्यक जांच कर मरीज को दवा लिखते हैं. डॉक्टरों की पर्ची पर दवा की खुराक के लिए कोड वर्ड में लिखा रहता है. हालांकि डॉक्टरों की कोशिश होती है कि दवा की खुराक को मरीज ठीक से समझ जाएं लेकिन इस कोड को समझना इतना आसान भी नहीं है. जैसे डॉक्टर दवा के आगे अगर BID या BD लिख दें तो किसे इसकी समझ होगी. जाहिर तौर पर बहुत कम लोगों को यह जानकारी होती है.

वैरीवेल वेबसाइट के मुताबिक दरअसल, दवा के आगे खुराक से संबंधित जो कोड में वर्ड लिखे होते हैं उनमें से अधिकांश शब्द लैटिन शब्द से आए हैं और लैटिन शब्द जिस तरह लिखा होता है, उसे ही शॉर्ट फॉर्म में लिख दिया जाता है. मसलन बीआईडी का लैटिन में फुल फॉर्म है-“bis in die” बिस इन डाइ. लैटिन में बिस इन डाइ का मतलब होता है दिन में दो बार. डॉक्टर सिर्फ BID से काम चला लेते हैं. खुराक से संबंधित इस तरह के कई कोड वर्ड है जिन्हें जानना हर इंसान के लिए जरूरी है.

शुरू से समझें इन कोर्ड वर्ड को

डॉक्टर सबसे पहले Rx लिखते हैं. लैटिन में Rx का मतलब प्रीसक्रिप्शन से है. प्रीसक्रिप्शन यानी आपको जांच के बाद ये सलाह दी जाती है या आप बीमारी खत्म करने के लिए ये दवाइयां, परहेज और सलाह मानें. इसके आगे नंबर से दवा का नाम लिखा होता है. उसके आगे या फिर नीचे दवाइयों की कितनी खुराक लेनी चाहिए, इसके बारे में कोड वर्ड में लिखा होता है. इन वर्ड को आप ऐसे समझ सकते हैं.

1. BID या BD- (bis in die)”twice a day”- यानी दिन में दो बार.
2. TID-TDS-(ter in die)”three times a day” यानी दिन में तीन बार.
3. QD- (quaque die) यानी रोज इसे लेना है.
4. OD-(Π Bis in die) once in a day यानी दिन में एक बार.
5. SOS-(“Si Opus Sit.”) If Necessary यानी इमरजेंसी की स्थिति में.
6. HS (hora somni) “at bedtime” यानी रात में सोने से पहले.
7. BBF-(Before break fast) यह अंग्रेजी शब्द से लिया गया.
8. PC-(post cibum) means “after meals” यानी खाने के बाद.
9. Ac-(ante cibum) means “before meals” यानी खाने से पहले.
10. q3h (quaque 3 hora) means “every three hours” यानी हर तीन घंटे पर.
11. qid (quater in die) means “four times a day” यानी हर चार घंटे पर.
12. po (per os) means “by mouth” यानी मुंह से खानी है.
13. od (oculus dexter) means “right eye” यानी दाईं आंख में,
14. os (oculus sinister) means “left eye” यानी बाईं आंख में.




एक अनार के कितने फायदे? बीपी कंट्रोल से लेकर एंटी-कैंसर वाला गुण भी

Anar Ke Fayde: अनार को लेकर एक नकारात्मक कहावत है कि एक अनार सौ बीमारी. लेकिन वास्तव में एक अनार के सैकड़ों फायदे हैं. विज्ञान भी यह प्रमाणित कर चुका है कि अगर एक अनार का सेवन नियमित तौर पर किया जाए तो इससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या कम होगी, हार्ट डिजीज का जोखिम घट जाएगा और यहां तक कि अनार कैंसर के खतरे को भी कम कर देगा. अनार के इतने फायदे हैं कि रोजना अगर इसका सेवन किया जाए तो डॉक्टर के पास जाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी. अनार ब्लड प्रेशर, डाइजेशन और याददाश्त को भी दुरुस्त करता है. अनार खून में आयरन की कमी को पूरा करता है और एनीमिया जैसी बीमारी से छुटकारा दिलाता है.

गर्मी में अनार शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. इतना ही नहीं यह बॉडी की ड्राईनेस दूर करने में भी माहिर है. अनार के सेवन से चेहरे पर ग्लो आता है. इंडियन एक्सप्रेस ने क्लीनिकल डायटीशियन जी सुषमा के हवाले से बताया है कि अनार में कई तरह के कंपाउड जैसे कि एंटीऑक्सीडेंट्स और पोलीफिनॉल्स होते हैं जो दिमाग में रक्षात्मक असर को बढ़ाते हैं. ये कंपाउंड ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लामेशन को कम करते हैं जिसके कारण दिमाग तंदुरुस्त और शांत रहता है. अनार अल्जाइमर के जोखिम को भी कम करता है.

अनार में न्यूट्रिशन वैल्यू
250 ग्राम अनार से 150 कैलोरी ऊर्जा मिलती है. इसके साथ ही 38 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 11 ग्राम डायट्री फाइबर, 26 ग्राम शुगर, 2 ग्राम प्रोटीन, 2.5 ग्राम फैट, 28 मिलीग्राम विटामिन सी, 46 माइक्रोग्राम विटामिन के, 107 माइक्रोग्राम फॉलेट, 533 मिलीग्राम पोटाशियम पाया जाता है. इतना ही इन बेशकीमती तत्वों के अलावा इसमें कई सारे अन्य विटामिंस और मिनिरल्स जैसे कि विटामिन ई, विटामिन बी 6, थियामिन, राइबोफ्लाविन, नियासिन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस भी पाया जाता है.

अनार के फायदे

1. हार्ट हेल्थ-अनार में कई सारे एंटीऑक्सीडेंट्स, पॉलीफिनॉल्स मौजूद रहते हैं जो इंफ्लामेशन को कम कर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का खत्म करने में मदद करते हैं. दोनों कंपाउंड हार्ट डिजीज से बचाने में भी मदद करते हैं. अनार के जूस से हाई ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल किया जा सकता है. इससे कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कम होता और यह ऑवरऑल हार्ट हेल्थ को मजबूत बनाता है और हार्ट से संबंधित बीमारियों से बचाता है.

2. एंटी-कैंसर गुण-अनार में इलाजिटेनिंस और पुनिकेलाजिंस नाम का कंपाउड पाया जाता है जिसमें एंटी-कैंसर गुण मौजूद है. कई अध्ययनों में यह बात साबित हो चुकी है. ये कैंसर सेल्स की वृद्धि को रोक देते हैं, खासकर ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर के मामले में.

3.ब्रेन हेल्थ-कुछ अध्ययनों में दावा किया गया है कि अनार में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स दिमाग में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को नहीं होने देता है और दिमाग में किसी प्रकार की सूजन को होने से रोकता है. यही कारण है अनार ब्रेन की हेल्थ के लिए वरदान है.

4. डायबिटीज में कैसा असर-जी सुषमा बताती हैं कि अनार में नेचुरल शुगर की मात्रा ज्यादा होती है. इसलिए डायबिटीज के मरीज अनार का सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें तो फायदा होगा. अगर बैलेंस डाइट के साथ अनार की कम मात्रा में सेवन किया जाए तो इससे कोई नुकसान नहीं है.

अन्य फायदे
अनार शरीर में फैट को कंट्रोल कर वजन बढ़ने से रोकने में मदद करता है. अनार में भरपूर मात्रा में फाइबर भी रहता है जो पाचन शक्ति को मजबूत करता है. यह शरीर को फ्री रेडिकल्स के प्रभाव से बचाता है. फ्री रेडिकल्स के कारण स्किन समय से पहले मुरझाने लगती है. यानी यह एंटी-एजिंग गुण से भी भरपूर है. इस तरह अनार स्किन को फायदा पहुंचाता है. अनार में एंटी-बैक्टीरियल गुण भी मौजूद है जो पेट की समस्याओं जैसे दस्त, पेचिश और हैजा आदि से बचाता है. अनार खून में ऑक्सीजन लेवल को इम्प्रूव करता है. अनार एंटी-बैक्टीरियल भी है यानी यह मुंह में प्लाक जमने से रोकता हैं.




डायबिटीज के मरीजों के लिए खुशखबरी ! आ गया इस काले फल का मौसम, खूब करें सेवन

डायबिटीज के मरीजों के लिए जामुन बेहद लाभकारी हो सकता है.
जामुन का सेवन करने से हार्ट डिजीज का खतरा भी कम होता है.

Jamun May Reduce Blood Sugar: स्वाद और पोषक तत्वों से भरपूर जामुन का मौसम शुरू हो गया है. अगले कुछ सप्ताह में बाजार में जगह-जगह जामुन नजर आने लगेंगे. गर्मियों के मौसम में इस फल को खाना बेहद लाभकारी माना जाता है. जामुन एंटीऑक्सीडेंट, कैल्शियम, फास्फोरस और फ्लेवोनोइड्स का अच्छा स्रोत है. इसमें तमाम पोषक तत्व भी होते हैं. जामुन को कई बीमारियों से राहत दिलाने के लिए बेहद कारगर माना जाता है. डायबिटीज, स्किन डिजीज, इंफेक्शन, अस्थमा, पेट दर्द समेत कई परेशानियों से राहत पाने के लिए इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है. आज आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानेंगे कि जामुन किस तरह डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है.

यूपी के अलीगढ़ आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की असोसिएट प्रोफेसर डॉ. सरोज गौतम कहती हैं कि जामुन को आयुर्वेद में भी बेहद लाभकारी फल माना गया है. प्राचीन काल से जामुन का इस्तेमाल आयुर्वेदिक उपचार में किया जाता रहा है. जामुन पोषक तत्वों का खजाना होता है. जामुन में कई औषधीय गुण होते हैं और कई बीमारियों के इलाज के लिए आयुर्वेद में इसकी सिफारिश की जाती है. डायबिटीज के मरीजों के लिए इसे बेहद फायदेमंद माना जाता है. जामुन आपके दिल को स्वस्थ रखने और बीमारियों को दूर रखने में भी फायदेमंद होता है. जामुन में डाइटरी फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट की भरपूर मात्रा होती है. इसका सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कंट्रोल किया जा सकता है.

डॉ. सरोज गौतम के अनुसार आयुर्वेद में डायबिटीज को मैनेज करने के लिए जामुन को बेहद लाभकारी माना गया है. जामुन में मौजूद पोषक तत्व इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर करते हैं और ब्लड शुगर को कम करने में मदद करते हैं. जामुन बार-बार पेशाब आने और प्यास लगने जैसे डायबिटीज के लक्षणों को कम करता है. अब तक कई रिसर्च में भी यह बात सामने आ चुकी है कि रक्त शर्करा के स्तर को कम करने के लिए जामुन का सेवन बेहद असरदार है. जामुन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिसकी वजह से शुगर के मरीज बेफिक्र होकर इसका सेवन कर सकते हैं. शुगर के रोगियों के लिए आमतौर पर इसे सेफ माना जाता है. हालांकि जिन लोगों का ब्लड शुगर हद से ज्यादा है, उन्हें जामुन खाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.




वजन कम करने वाले ड्राई फ्रूट |

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वेट लॉस ड्राई फ्रूट्स: वजन घटाना कोई एक दिन का काम नहीं है। ये एक ऐसी चीज है जिसमें आपको लंबे समय तक लगे रहने की जरुरत है। तो, इसी काम में ये दो ड्राई फ्रूट्स (Weight Loss Dry Fruits) आपकी मदद कर सकते हैं। खास बात ये है कि आप इन दो ड्राई फ्रूट्स को गर्मियों में भी खा सकते हैं और आपको इस बात की भी चिंता नहीं होगी कि ये आपके पेट की गर्मी बढ़ा रहे हैं। तो, आइए जानते हैं इन ड्राईफ्रूट्स के बारे में और साथ ही जानेंगे इनके सेवन का तरीका।

वजन कम करने वाले ड्राई फ्रूट

1. वेट लॉस के लिए मखाना के फायदे-Makhana for weight loss

मखाना फाइबर और प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत है, जो वेट लॉस में तेजी लाती है। फाइबर सिंपल कार्बोहाइड्रेट की तुलना में बहुत धीमी गति से पचता है और कैलोरी बर्न करता है। साथ ही इसका फाइबर भी पानी को अवशोषित करता है और पेट और आंतों में फूल जाता है, जिससे आप भरा हुआ महसूस करते हैं और अपनी भूख कंट्रोल में रहती है। इसके साथ जब आप वजन कम करते हैं तो प्रोटीन की जरुरत भी होती है और मखाना मांसपेशियों के नुकसान को रोकने में मददगार है। तो,  वेट लॉस के लिए दूध में मखाना मिलाकर खाएं या फिर मखाने की खिचड़ी खाएं।

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2. वेट लॉस के लिए किशमिश-Raisins for weight loss

वेट लॉस के लिए किशमिश (Kishmish for weight loss) कई प्रकार से फायदेमंद है। किशमिश आपकी भूख को दबाती है और इसका लेप्टिन कंपाउंड भूख कम करने वाला गुण रखता है। ये आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है। इसके अलावा लेप्टिन (leptin) थर्मोजेनेसिस प्रक्रिया को बढ़ाकर फैट सेल्स में कमी ला सकता है। साथ ही ये हार्मोनल गड़बड़ियों पर भी लगाम लगाता है और वेट लॉस में तेजी लाता है। तो, किशमिश को रात में पानी में भिगोकर रखें और फिर सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। इसके अलावा मीठे की क्रेविंग होने पर भी आप इस ड्राई फ्रूट का सेवन कर सकते हैं।

तो, अगर आप वेट लॉस करना चाहते हैं तो आपको इन दो ड्राई फ्रूट्स का सेवन करना चाहिए। ये वजन घटाने में तो मददगार हैं ही बल्कि, ये पाचनतंत्र को तेज करने के साथ कब्ज से बचाव में मददगार हैं।

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए हैकिसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)




ज्येष्ठ मास में भोजन थाली गर्मी में कैसी होनी चाहिए जानें

Jyeshtha Month : पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ साल का तीसरा महीना होता है. इस साल ज्येष्ठ मास की शुरुआत 6 मई 2023 से हो चुकी है जोकि 4 जून 2023 को समाप्त होगी. ज्येष्ठ मास ग्रीष्म ऋतु का ऐसा समय होता है, जिसमें प्रचंड गर्मी पड़ती है.

ज्येष्ठ महीने में ही नौतपा की भी शुरुआत होती है और पूरे नौ दिनों तक लोगों को भयंकर गर्मी का अहसास होने लगता है. शास्त्रों में ज्येष्ठ मास को लेकर कई नियम बताए गए हैं, जोकि स्वास्थ्य के लिए अनुकूल माने गए हैं. इन्हीं में एक है आहार ग्रहण करने के नियम. शास्त्रों और भारतीय परंपरा में ऋतु अनुसार आहार ग्रहण करने यानी खाने-पीने के नियमों के बारे में बताया गया है. जन कवि घाघ हर मास व ऋतु के अनुसार आहार ग्रहण करने को लेकर कहते हैं-

चैते गुड़ बैसाखे तेल जेठे मिर्च, आषाढ़ बेल।
सावन साग भादो मही क्वांर करेला कार्तिक दही।।
अगहन जीरा पूस धना माघै मिश्री फाल्गुन चना।
जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहिं धरै।।

इस दोहे का अर्थ है कि, चैत महीने में गुड़, वैशाख में तेल, जेठ में मिर्च-मसाला, आषाढ़ में बेल, सावन में साग, भादो में दही, क्वार में दूध, कार्तिक में दही, अगहन में जीरा, पूस में धनियां, माघ में मिश्री और फागुन महीने में चने का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है. इसलिए शास्त्रों में ऋतुचर्या के अनुसार आहार ग्रहण की बात कही गई है. ऋतु क अनुसार भोजन ग्रहण करने से शरीर स्वस्थ रहता है और खतरनाक बीमारियों दूर रहती हैं.

ज्येष्ठ महीने में कैसी होनी चाहिए भोजन की थाली

    • ज्येष्ठ के महीने में खाने-पीने के नियमों का पालन करना बहुत जरूरी होता है. क्योंकि इस दौरान कुछ भी खा-पी लेना स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है. इसलिए इस महीने खासकर गरिष्ठ भोजन से दूर रहना चाहिए. ज्येष्ठ मास में अत्यधिक तेल-मसाले वाला भोजन, तला-भुना आदि से दूरी बनाना की हितकर है.
    • ज्येष्ठ के महीने में भोजन के विषय में महाभारत में कहा गया है कि- ‘ज्येष्ठामूलं तु यो मासमेकभक्तेन संक्षिपेत्। ऐश्वर्यमतुलं श्रेष्ठं पुमान्स्त्री वा प्रपद्यते।‘ यानी ज्येष्ठ मास में दिन में एक ही समय भोजन करें. इससे व्यक्ति निरोगी रहता है और धनवान बनता है.
    • ज्येष्ठ महीने में आप अपने भोजन में मौसमी फल और हरी सब्जियों को शामिल करें. साथ ही सत्तू और बेल से बनी चीजों का सेवन करना चाहिए.
    • इस महीने हो सके तो ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों (दही, छाछ, लस्सी, जूस आदि) को आहार में शामिल करें. क्योंकि मसालेदार भोजन से आपको चक्कर आ सकती है या घबराहट हो सकती है.
    • ज्येष्ठ के महीने में बैंगन को अपने आहार में शामिल बिल्कुल न करें. इससे स्वास्थ प्रभावित होता है और गठिया रोग की संभावना बढ़ती है. शास्त्रों में कहा गया है कि, ज्येष्ठ मास में बैंगन खाने से संतान को भी कष्ट होता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि denvapost.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.




Remedies for Earwax: कहीं आप भी तो नहीं करते तीली से कान की सफाई?

कान में ज्यादा ईयरवैक्स होने पर सुनाई कम देता है.
ईयरवैक्स निकालने के लिए कॉटन के उपयोग से बचें.

Remedies for Earwax: कान के मैल साफ करने को लेकर बेहद सावधानी बरतनी होनी होती है. इसमें जरा सी लापरवाही बहुत भारी पड़ सकती है. समय-समय पर ईयरवैक्स की सफाई ना करने पर सुनने में भी परेशानी पैदा कर सकता है. कान में मैल होने से कान के पर्दे और अंदरूनी भाग सुरक्षित रहते है, लेकिन ज्यादा मैल होने से भी परेशानी हो सकती है .ऐसे में ये जानना बेहद जरूरी है कि कान से मैल को सेफ तरीके से कैसे साफ करें. ईयरवैक्स को साफ करने के लिए नॉर्मली लोग कॉटन का उपयोग करते हैं. कई बार यह खतरनाक साबित हो सकता है. इससे बचना चाहिए. कान में मैल को साफ करने के कई उपाय हैं, जिनसे आसानी से कानों को साफ किया जा सकता है. हम आपको कान में ज्यादा मैल होने के लक्षण और इसे साफ करनें के तरीके बताते हैं.

कान में ज्यादा ईयरवैक्स होने के लक्षण
1. ज्यादा ईयरवैक्स होने पर कान से सुनाई कम देगा.
2. हल्की रिंगिंग और सांय-सांय की आवाज आती रहेगी.
3. कानों में खुजली हो सकती है.
4. इर्रिटेशन लग सकता है.

इयरवैक्स साफ करने के तरीके

1.बेकिंग सोडा: हेल्थ लाइन में छपी एक खबर के अनुसार, ईयरवैक्स निकालने के लिए बेकिंग सोडा का इस्तेमाल कर सकते हैं. उसके लिए आधा टी स्पून बेकिंग सोडा को लगभग आधे कप गुनगुने पानी में मिलाकर एक ड्रॉपर बोतल में रख लें. एक टाइम में 5 से 10 ड्रॉप कान में डाल सकते हैं और एक घंटे बाद साफ पानी से कान को धो लें.

2. ईयरवैक्स ड्रॉप: ईयरवैक्स को हटाने के लिए जरूरी है कि उसे पहले सॉफ्ट करना चाहिए. इसके लिए ईयरवैक्स ड्रॉप का उपयोग करें. बाजार में कई ईयरवैक्स ड्रॉप मिल जाएंगे. इसे कम से कम 5-7 दिन डालिए. इससे कान में जमी गंदगी साफ हो जाएगी और कई बार ये खुद से निकल भी जाती है.

3.नजदीकी डॉक्टर के पास जाएं: अगर आपका ईयरवैक्स नॉर्मल तरीके अपनाने पर नहीं निकल रहा तो नजदीकी डॉक्टर के पास जाना चाहिए. वो कई आसान तरीकों से आपके कान को साफ कर देंगे.




डायबिटीज में रामबाण है कलौंजी,कोलेस्ट्रॉल भी होगा कम, 4 तरह से करें सेवन

सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है कलौंजी के बीज.
कलौंजी के बीज से कंट्रोल में रहता है डायबिटीज.

Health Benefits Of Kalonji: कलौंजी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती है. इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं. कलौंजी हार्ट से लेकर लिवर तक लिए बहुत लाभकारी है. इसे सही तरीके से उपयोग करने पर स्वास्थ्य संबंधी कई लाभ हो सकते हैं. कलौंजी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. रोजाना कलौंजी के सेवन से बैड कोलेस्ट्रॉल घटता है. हेल्थलाइन में छपी एक खबर के मुताबिक, डायबिटीज के मरीजों के लिए कलौंजी रामबाण है. इसके नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है. आइए आज हम बताते हैं कि कलौंजी का सही से लाभ पाने के लिए इसे कैसे उपयोग करें.

1.दही के साथ: कलौंजी के बीजों को दही के साथ खाना स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है. शुगर लेवल को कम करता है. दिन में दही में कलौंजी मिलाकर खाने से डायबिटीज कंट्रोल में रहता है.

2. कलौंजी पानी: कलौंजी पानी डायबिटीज के साथ वजन कम करने के लिए भी बेहद फायदेमंद है. इसके लिए एल गिलास पानी मे कलौंजी को डालकर उबाल लें. जब पानी अच्छे से उबल जाए तो उसे किसी दूसरे गिलास में छानकर पी लें. यह डायबिटीज के लिए फायदेमंद है ही साथ ही वजन भी कम करने में लाभकारी है.

3. कलौंजी पाउडर: कलौंजी को कूटकर पानी के साथ भी लिया जा सकता है. इसके लिए कलौंजी को अच्छे से कूट लें. जब वह पाउडर मि तरह बन जाए तो इसे एक गिलास पानी के साथ पी लें. यह डायबिटीज के लिए बेहद लाभकारी होगा.

4. कलौंजी-नींबू: डायबटीज के मरीजों के लिए कलौंजी और नींबू का सेवन वरदान साबित हो सकती है. इस ड्रिंक को पीने से डायबिटीज कंट्रोल रहता है. इसके लिए पानी में नींबू निचोड़कर उसमें कलौंजी के बीजों को मिला लें. इसके सेवन से शुगर कंट्रोल रहेगा. इसके नियमित सेवन से हार्ट भी हेल्दी रहता है. स्वस्थ शरीर के लिए आप नियमित कलौंजी का सेवन कर सकते हैं. यह स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है.




चाय में नमक डालने के फायदे: चाय में चुटकीभर कालाय नमक कर सकता है कई कमाल |

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चाय में नमक डालने के फायदे:  चाय में नमक डालकर पीना, सुनकर ही कुछ चाय प्रेमियों को गुस्सा दिला सकता है। लेकिन, गुस्सा न हों और धैर्य रखते हुए अपनी सेहत के बारे में सोचें। जी हां, आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि कुछ खास प्रकार की चाय में जब आप काला नमक मिलाकर पीते हैं तो ये पेट का मेटाबोलिक रेट बढ़ाता है और इम्यूनिटी बढ़ाकर कई समस्याओं से बचाता है। तो, आइए जानते हैं किस चाय में आपको इस नमक की मिलावट करनी है।

इन 3 चाय में डालें चुटकीभर काला नमक-black salt in tea

1. ग्रीन टी में मिलाएं काला नमक-black salt in green tea

ग्रीन टी में काला नमक मिलाकर पीने से आप इसके एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ डाइजेस्टिव गुणों को भी बढ़ावा दे सकते हैं।  जी हां, अगर आप वेट लॉस कर रहे हैं तो ग्रीन टी में काला नमक मिलाकर पीना आपके पेट की कई समस्याओं जैसे कि अपच, एसिडिटी और बदहजमी को कम कर सकता है।

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2. नींबू की चाय में मिलाएं काला नमक-black salt in lemon tea

नींबू की चाय में काला नमक मिलाकर पीना कब्ज की समस्या को दूर कर सकता है। ये चाय पेट का मेटाबोलिक रेट बढ़ाती है और फिर आंतों के काम काज की गति में तेजी लाती है। इससे आप जो भी खाते हैं वो तेजी से पचने लगता है और बॉवेल मूवमेंट तेज हो जाता है। इससे पेट साफ हो जाता है और शरीर खुद को डिटॉक्स कर लेता है।

3. ब्लैक टी में मिलाएं काला नमक-salt in black tea

ब्लैक टी में काला नमक की मिलावट सेहत के लिए कारगर तरीके से काम कर सकती है। पहले तो ये वेट लॉस में तेजी ला सकती है। दूसरा, काला नमक की खास बात ये है कि ये पेट में डाइजेस्टिव एंजाइम्स को बढ़ावा देता है जिससे खाना तेजी से पचता है, चर्बी कम होती है और मोटापा कम करने में मदद मिलती है।

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए हैकिसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य ले )




तरबूज ! खाते वक्त कभी न करें यह गलती, वरना डायबिटीज के मरीजों को हॉस्पिटल पहुंचा सकता है

तरबूज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स हाई है, जो शुगर के मरीजों के लिए नुकसानदायक है.
डायबिटीज के मरीजों को तरबूज का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए.

गर्मियों के मौसम में तरबूज की दीवानगी सिर चढ़कर बोलती है. अधिकतर लोग इस रसीले फल का जमकर आनंद उठाते हैं. तरबूज को कोई काटकर खाना पसंद करता है, तो कई लोग तरबूज का शेक बनाकर पीना पसंद करते हैं. तरबूज पोषक तत्वों से भरपूर फल होता है, जो शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी भी देता है. इसे हाइड्रेशन के लिए काफी अच्छा माना जाता है. भले ही तरबूज स्वस्थ लोगों के लिए फायदेमंद हो, लेकिन डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन सोच-समझकर ही करना चाहिए. ज्यादा मात्रा में तरबूज खाना शुगर के मरीजों को हॉस्पिटल पहुंचा सकता है. आप सोच रहे होंगे कि भला तरबूज खाने से शुगर के मरीजों को क्या परेशानी हो सकती है. इस बारे में चौंकाने वाली बातें जान लीजिए.

खाने-पीने की चीजों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) ब्लड ग्लूकोज लेवल को प्रभावित करता है. अगर किसी फूड का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा है, तो शुगर तेजी से ब्लड स्ट्रीम में जाएगी और ब्लड शुगर तेजी से बढ़ जाएगा, जबकि कम इंडेक्स वाले फूड्स से शुगर लेवल पर ज्यादा असर नहीं होता. ग्लाइसेमिक इंडेक्स 1 से 100 के स्केल पर मापा जाता है. मेडिकल न्यूज़ टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक तरबूज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स करीब 72 होता है. जानकारों की मानें तो 70 या इससे अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स को हाई जीआई वाली कैटेगरी में रखा जाता है. तरबूज में शुगर की मात्रा भी काफी होती है. 286 ग्राम तरबूज में करीब 17.7 ग्राम शुगर होती है. अगर आप एक कप तरबूज खाएंगे, तो उसमें करीब 10 ग्राम शुगर की मात्रा होती है.

शुगर के मरीज कम ही खाएं तरबूज

डायबिटीज के मरीज कम मात्रा में तरबूज का सेवन कर सकते हैं, क्योंकि तरबूज में पानी की काफी मात्रा होती है और इससे ग्लाइसेमिक लोड कम होता है. तरबूज हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला फल है और इसका ज्यादा सेवन करने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. ऐसे में तरबूज का सेवन कम से कम मात्रा में ही करना चाहिए. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है और शुगर लेवल तेजी से बदलता है, उन्हें तरबूज का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. अगर आप पूरी तरह फिट हैं, तब आप इसका भरपूर मात्रा में सेवन कर सेहत लाभ उठा सकते हैं.