यूरिक एसिड बढ़ा सकता है हार्ट अटैक का खतरा: यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी का दावा

Uric acid increase risk of heart attack: एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अगर यूरिक एसिड शरीर में बढ़ता है तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए यूरिक एसिड को कंट्रोल करना सबसे ज्यादा जरूरी है.

यूरिक एसिड का बढ़ेगा मीटर तो हार्ट अटैक का संकट गहराएगा, डॉक्टर से जानें कैसे.हार्ट अटैक का कारण यूरिक एसिड भी.

नई दिल्ली:
यूरिक एसिड को अब सिर्फ गठिया या किडनी की पथरी से जुड़ी समस्या नहीं माना जा सकता। यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी के हालिया अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि शरीर में हाई यूरिक एसिड हार्ट अटैक का खतरा गंभीर रूप से बढ़ा सकता है।

 यूरिक एसिड कैसे बनता है?

जब शरीर में प्रोटीन का मेटाबोलिज्म होता है, तो उससे प्यूरिन नामक तत्व बनता है। यह प्यूरिन टूटकर यूरिक एसिड में बदलता है, जो मुख्य रूप से किडनी और आंतों के माध्यम से शरीर से बाहर निकलता है।
लेकिन जब यूरिक एसिड की मात्रा अधिक हो जाती है —

  • महिलाओं में 6.0 mg/dL से ज्यादा,

  • पुरुषों में 7.0 mg/dL से ज्यादा,

तो यह रक्त वाहिकाओं की दीवारों को नुकसान पहुंचाने लगता है, जिससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, सूजन, और धमनियों में रुकावट जैसे घातक परिवर्तन हो सकते हैं।

1 पॉइंट यूरिक एसिड बढ़ा, खतरा दोगुना!

इटली में हुए एक व्यापक अध्ययन में 20,000 से अधिक मरीजों पर शोध किया गया।
नतीजे चौंकाने वाले थे —

सिर्फ 1 मिलीग्राम/डेसीलीटर यूरिक एसिड बढ़ने पर भी हार्ट डिजीज और समय से पहले मृत्यु का जोखिम बढ़ गया।


हाई यूरिक एसिड के आम लक्षण

  • जोड़ों में तेज़ दर्द (विशेषकर पैर के अंगूठे में)

  • सूजन, लालिमा, गर्माहट, और कोमलता

  • सुबह के समय या लंबे आराम के बाद जोड़ों की अकड़न

  • बाजू या पीठ में तेज दर्द

  • पेशाब में जलन, खून या बदबू

    • बिना दर्द के भी जोड़ों में झनझनाहट


      कैसे करें बचाव?

     परहेज करें

    • रेड मीट, समुद्री भोजन, अंग मांस, बियर

    • मीठे पेय, ज्यादा फ्रुक्टोज़ वाले फूड्स

    स्वस्थ आदतें अपनाएं

    • खूब पानी पिएं

    • शराब से बचें

    • वजन नियंत्रित रखें

    • नियमित व्यायाम करें

    • ब्लड प्रेशर व डायबिटीज को कंट्रोल में रखें

    नियमित जांच कराएं
    खासकर अगर पहले से गठिया, किडनी स्टोन या परिवार में इसका इतिहास रहा हो।

    क्यों जरूरी है सतर्क रहना?

    हाई यूरिक एसिड केवल मेटाबॉलिज्म की गड़बड़ी नहीं, बल्कि यह हार्ट अटैक की संभावनाओं को बढ़ाने वाला अहम कारक है।

    समय रहते इसकी पहचान, जांच और इलाज से हार्ट से जुड़ी कई जटिलताओं को रोका जा सकता है।
    विशेषज्ञ मानते हैं कि हृदय‑अनुकूल जीवनशैली ही इसका सबसे बड़ा समाधान है।



    अब समय आ गया है कि हम यूरिक एसिड को सिर्फ “जोड़ों के दर्द” तक सीमित न समझें। यह हमारे दिल की सेहत से भी सीधा जुड़ा हुआ है।

    “स्वस्थ हृदय के लिए स्वस्थ यूरिक एसिड स्तर बनाए रखना ज़रूरी है।”




घर का काम करने,”रोज़ाना की मेहनत बनेगी ढाल: शारीरिक गतिविधियां 13 तरह के कैंसर का खतरा घटाती है

नई दिल्ली। अगर आप घरेलू कामकाज, पैदल चलने या रोज़मर्रा की दौड़भाग को बोझ मानते हैं, तो अब नज़रिया बदलने का समय है। हाल ही में ब्रिटेन में 85,000 लोगों पर हुई एक बड़ी रिसर्च और दिल्ली एम्स के ऑन्कोलॉजिस्ट्स की राय इस बात की पुष्टि करती है कि नियमित शारीरिक गतिविधियां कई खतरनाक कैंसरों से सुरक्षा देती हैं।नई दिल्ली।
अगर आप घरेलू कामकाज, पैदल चलने या रोज़मर्रा की दौड़भाग को बोझ मानते हैं, तो अब नज़रिया बदलने का समय है। हाल ही में ब्रिटेन में 85,000 लोगों पर हुई एक बड़ी रिसर्च और दिल्ली एम्स के ऑन्कोलॉजिस्ट्स की राय इस बात की पुष्टि करती है कि नियमित शारीरिक गतिविधियां कई खतरनाक कैंसरों से सुरक्षा देती हैं।

घर का काम करने, पैदल चलने वालों को नहीं होता कैंसर? एम्स के डॉ. बोले- सबूत हैशारीर‍िक गत‍िव‍िध‍ि कैंसर के रिस्‍क को कम करती है.

रिसर्च के नतीजे
ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, जो लोग हल्की, मध्यम या जोरदार शारीरिक गतिविधियों में शामिल रहते हैं, उनमें कैंसर का खतरा उन लोगों के मुकाबले काफी कम पाया गया है जो निष्क्रिय जीवनशैली अपनाते हैं। शोध में यह भी पाया गया कि रोज़ाना छोटे-मोटे घरेलू काम करने वालों में भी 13 तरह के कैंसर की संभावना कम हुई है।

महिलाओं में 50 फीसदी तक कम जोखिम
दिल्ली एम्स के डॉक्टर भी इस अध्ययन की पुष्टि करते हैं। एम्स (डॉ. बीआरएआईआरसीएच) में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शंकर बताते हैं कि शारीरिक गतिविधियां कैंसर को पूरी तरह रोक तो नहीं सकतीं, लेकिन इससे जोखिम 50 फीसदी तक घटाया जा सकता है
भारतीय महामारी विज्ञान के आंकड़े दर्शाते हैं कि जो महिलाएं रोज़ाना 5–6 घंटे तक जोरदार घरेलू कामों में जुटी रहती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा उन महिलाओं की तुलना में आधा होता है जो 3 घंटे से भी कम समय सक्रिय रहती हैं।

शहरी महिलाओं पर असर
शहरी जीवनशैली में भी यदि महिलाएं मध्यम या उच्च स्तर की शारीरिक गतिविधियां करती हैं तो उनमें कैंसर का रिस्क लगभग 19 फीसदी कम देखा गया है। अध्ययन में यह भी स्पष्ट हुआ कि उच्च स्तर की शारीरिक गतिविधियां ब्रेस्ट, लंग, कोलन, गैस्ट्रिक और लिवर कैंसर जैसे गंभीर कैंसरों की संभावना को घटाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

कैंसर मरीजों के लिए भी फायदेमंद
रिसर्च में 13 तरह के कैंसर से पीड़ित 2,633 मरीजों का औसतन 5.8 साल तक फॉलोअप किया गया। नतीजा यह निकला कि जिन मरीजों ने इस दौरान नियमित शारीरिक मेहनत की, उनमें कैंसर दोबारा होने का खतरा 26 फीसदी कम रहा।

राष्ट्रीय रणनीति की ज़रूरत
विशेषज्ञ मानते हैं कि इन नतीजों से एक स्पष्ट संदेश निकलता है—कैंसर रोकथाम की राष्ट्रीय रणनीति में पैदल चलना, घरेलू काम करना, साइकिल चलाना, सक्रिय आवागमन और मनोरंजक गतिविधियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

कुल मिलाकर, रोज़मर्रा के घरेलू काम या पैदल चलना केवल थकावट या बोझ नहीं, बल्कि शरीर को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाने वाला प्राकृतिक कवच है। अब यह हम पर है कि हम इसे बोझ मानें या जीवन बचाने वाला सहज उपाय।




Mosquito Borne Diseases in Monsoon | बरसात में बढ़ा मच्छरों का प्रकोप, इन बीमारियों से रहें सावधान

भोपाल। बरसात के मौसम में जलभराव के कारण मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। नतीजतन, मच्छरजनित रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के बाद अगर किसी स्थान पर पानी जमा रह जाए, तो वह मच्छरों के प्रजनन का आदर्श स्थल बन जाता है। यही वजह है कि इस मौसम में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफलाइटिस और फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ जाती है।

डेंगू: दिन में काटने वाला घातक मच्छर

डेंगू एक वायरल रोग है जो एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर दिन के समय काटता है।
लक्षण: तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में सूजन, शरीर पर चकत्ते।
गंभीर मामलों में हेमरेजिक फीवर हो सकता है, जिससे प्लेटलेट्स की संख्या घटती है और आंतरिक रक्तस्राव होता है। इलाज लक्षणों के आधार पर होता है, और समय पर उपचार से मरीज एक-दो सप्ताह में ठीक हो सकता है।

मलेरिया: रात में हमला करने वाला मच्छर

मलेरिया एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, जो मुख्य रूप से रात के समय सक्रिय होता है।
लक्षण: ठंड के साथ बुखार, पसीना आना, सिरदर्द, उल्टी, थकावट।
यह रोग लिवर और किडनी को भी प्रभावित कर सकता है। इलाज एंटी-मलेरियल दवाओं से संभव है, लेकिन देर से इलाज जानलेवा हो सकता है।

चिकनगुनिया: जोड़ों को करता है निशाना

यह भी डेंगू की तरह एडीज मच्छर से फैलता है।
लक्षण: तेज बुखार, जोड़ों में सूजन और अत्यधिक दर्द, जो हफ्तों या महीनों तक बना रह सकता है।
इसका कोई विशिष्ट इलाज नहीं है; लक्षण आधारित उपचार ही इसका समाधान है।

जापानी इंसेफलाइटिस: बच्चों के लिए घातक

यह एक वायरल ब्रेन इंफेक्शन है जो क्यूलिक्स मच्छर से फैलता है।
लक्षण: सिरदर्द, उल्टी, मानसिक भ्रम, बेहोशी।
यह मच्छर अधिकतर धान के खेतों और गंदे पानी वाले क्षेत्रों में पनपता है। बच्चों में इसके मामले अधिक देखने को मिलते हैं।

फाइलेरिया: दीर्घकालिक रोग

यह रोग लिम्फ नोड्स और त्वचा को प्रभावित करता है और संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है।
लक्षण: सूजन, त्वचा में बदलाव, अंगों का असामान्य आकार।
यह बीमारी वर्षों तक शरीर में बनी रह सकती है।

कैसे करें मच्छरों से बचाव?

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, मच्छरों से बचाव ही इन बीमारियों से बचने का सर्वोत्तम तरीका है:

घर और आसपास पानी जमा न होने दें।

कूलर, टंकी, गमले आदि की सफाई नियमित करें।

मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाली क्रीम/स्प्रे का प्रयोग करें।

शाम के समय पूरी बाजू के कपड़े पहनें।

बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता की आवश्यकता होती है।

यदि बुखार या कोई लक्षण नजर आएं तो तुरन्त डॉक्टर से परामर्श लें।




वीनस विलियम्स: अमेरिकी टेनिस स्टार की यूटेरिन फाइब्रॉयड बीमारी.

Venus Williams Uterine Fibroids: अपने समय की दिग्गज टेनिस स्टार वीनस विलियम्स को गर्भाशय से जुड़ी बीमारी यूटेरिन फाइब्रॉयड हो गई है. आखिर क्या है यह बीमारी. अगर सामान्य लोगों में यह हो जाए तो क्या करना चाहिए.

टेनिस स्टार वीनस विलियम्स को हुआ यूटरिन फाइब्रॉयड, क्या है ये बीमारी? जानिए
हाइलाइट्स

  • वीनस विलियम्स को यूटेरिन फाइब्रॉयड हुआ है. यह गंभीर बीमारी है.
  • फाइब्रॉयड्स गर्भाशय में गांठें होती हैं, जो कैंसर नहीं होतीं.
  • फाइब्रॉयड्स के लक्षणों में भारी पीरियड्स, दर्द और खून की कमी शामिल हैं.
Venus Williams Uterine Fibroids: अमेरिकी टेनिस स्टार वीनस विलियम्स को यूटेरिन फाइब्रॉयड नाम की बीमारी हो गई है. यह बीमारी बच्चेदानी की होती है जिसमें छोटे-छोटे ट्यूमर हो जाते हैं. इससे गर्भाशय की दीवाल में भारी दिक्कत होने लगती है. इस कारण बहुत ज्यादा दर्द होता है. हाल में वीनस ने अपने इस दर्द को बयां किया है. आपको जानकर हैरानी होगी कि लक्षण दिखने के बाद डॉक्टरों ने सालों तक इस बीमारी को नजरअंदाज किया. उन्हें कहा गया कि यह कोई बड़ी बीमारी नहीं है लेकिन वीनस इस खतरनाक बीमारी के कारण पूरी तरह टूट गई और यह दर्द उसके पूरे जिंदगी की गुणवत्ता को प्रभावित किया. जरा सोचिए अगर कोई आम महिला इस बीमारी को नजरअंदाज करे तो उस पर इसका कितना खतरनाक असर होगा.

क्या-क्या परेशानियां हुईं
वीनस ने एनबीसी न्यूज को बताया, मैं सालों से इस बीमारी से परेशान थी. मुझे पेट में अक्सर क्रैंप रहता था, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती थी. घंटों तक टॉयलेट में बैठी रहती थी. मतली और उल्टी भी होती रहती थी. सबसे बड़ी बात कि मैं हमेशा खून की कमी की शिकार रहती थीं. शुरू में लगता था कि यह मामूली है, डॉक्टर भी यही कहते थे लेकिन मैं इस बीमारी के कारण टूट गई. हालांकि मुझे पता था कि यह बीमारी फाइब्रॉयड है. मैं आपको बता नहीं सकती कि मेरे शरीर से कितना खून निकलता था. डॉक्टर भी कहा करते थे कि यह नॉर्मल है.

फाइब्रॉइड क्या है

यूटेरीन यानी गर्भाशय फाइब्रॉइड्स गर्भाशय में होने वाले गांठें हैं. ये आमतौर पर प्रेग्नेंसी के योग्य या बच्चे को जन्म देते समय होती हैं. गर्भाशय फाइब्रॉइड्स कैंसर नहीं होता और ये लगभग कभी भी कैंसर में नहीं बदलते. इनका गर्भाशय में किसी अन्य प्रकार के कैंसर के खतरे से भी कोई संबंध नहीं होता. इन्हें लीयोमायोमा या मायोमा भी कहा जाता है. फाइब्रॉइड्स की संख्या और आकार अलग-अलग होते हैं. किसी के गर्भाशय में एक फाइब्रॉइड हो सकता है या एक से अधिक भी हो सकते हैं. कुछ फाइब्रॉइड्स इतने छोटे होते हैं कि आंखों से देखे नहीं जा सकते. कुछ इतने बड़े हो सकते हैं कि अंगूर के आकार या उससे भी बड़े हो जाते हैं. यदि कोई फाइब्रॉइड बहुत बड़ा हो जाए तो वह गर्भाशय के अंदर और बाहर की संरचना को बिगाड़ सकता है. कुछ गंभीर मामलों में फाइब्रॉइड्स इतने बड़े हो जाते हैं कि वे पूरे पेल्विस या पेट के हिस्से को भर देते हैं. इससे महिलाएं गर्भवती जैसा दिखाई देने लगती है.

फाइब्रॉइड के लक्षण
बहुत से लोगों को गर्भाशय में फाइब्रॉइड्स होते हैं, पर उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते. जिनमें लक्षण होते हैं उनमें यह फाइब्रॉइड्स के स्थान, आकार और संख्या पर निर्भर करते हैं. अगर किसी को गर्भाशय फाइब्रॉइड्स होते हैं उसमें पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा खून निकलने लगता है. पीरियड्स बहुत हैवी होता है.पीरियड्स लंबे समय तक चलने वाला या जल्दी-जल्दी हो जाता है. पेल्विक एरिया में भारीपन और दर्द महसूस होता है. बार-बार पेशाब या पेशाब करने में कठिनाई होती है. पेट का आकार बढ़ जाता है. हमेशा कब्ज की शिकायत रहती है. पेट के निचले हिस्से या पीठ में दर्द रहता है और सेक्स के दौरान भी दर्द होता है. कभी-कभी,जब कोई फाइब्रॉइड ब्लड सप्लाई से अधिक बड़ा हो जाता है तो वह अचानक और गंभीर दर्द का कारण बन सकता है.

डॉक्टर को कब दिखाएं

अगर आपको पेल्विक एरिया में लगातार दर्द होता है और मासिक धर्म बहुत भारी या दर्दनाक हो रहा और इसके कारण आप परेशान रहते हैं तो आपको तुरंत डॉक्टर से दिखाना चाहिए. इसके अलावा पीरियड्स के बीच में खून आ रहा हो, पेशाब करने में कठिनाई हो या ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं होता हो या लगातार थकान और कमजोरी महसूस हो, खून की कमी हो, योनि से अत्यधिक रक्तस्राव हो या अचानक तेज दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए.




आपके आस पास लगा मोबाइल टावर आपके लिए है कितना नुकसान दायक है ?

Health Desk : आपने अपने आस पास मोबाइल के बड़े बड़े टावर देखे होंगे क्या आपको पता है की ये हमारे स्वस्थ को कितना नुकसान करता है वैसे मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन दो प्रकार के होते हैं एक आयनकारी रेडिएशन है जो एक्स-रे के लिए होता है और दूसरा गैर-आयनकारी रेडिएशन है जो मोबाइल फोन रेडिएशन, लैपटॉप रेडिएशन, डेस्कटॉप रेडिएशन, टैबलेट रेडिएशन, स्मार्ट टीवी रेडिएशन, वाई-फाई राउटर, नेटवर्क बूस्टर आदि का रेडिएशन और हमारे घरों और ऑफिस के आसपास मोबाइल टावरों से होने वाले हानिकारक रेडिएशन है। आयनीकरण रेडिएशन उच्च रेडिएशन है जो कैंसर का कारण बनता है। दूसरी ओर, कम फ्रीक्वेंसी वाला गैर-आयनीकरण रेडिएशन भी हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरा है। यह कैंसर और ब्रेन ट्यूमर जैसी स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का कारण भी बन सकता है जब मानव शरीर लंबे समय तक इसके संपर्क में रहता है।

रेडिएशन के उल्टे प्रभाव

इसके अलावा, कैंसर विशेषज्ञ (ऑन्कोलॉजिस्ट) वैज्ञानिकों और अन्य डॉक्टरों को भी मोबाइल के रेडिएशन और मोबाइल टॉवर के रेडिएशन के खतरों के बारे में कोई संदेह नहीं है। वे सभी सेल फोन, सेल फोन के टावर और संचार के लिए उपयोग किए जाने वाले अन्य सभी वायरलेस गैजेट्स के साथ साथ वाई-फाई गैजेट्स द्वारा निकलने वाले रेडिएशन के उल्टे प्रभाव के लिए सहमत हैं।मोबाइल टावर रेडिएशन के कारण होने वाले स्वास्थ्य खतरे न केवल कैंसर बल्कि मोबाइल रेडिएशन के अन्य हानिकारक प्रभाव जैसे कम शुक्राणु संख्या, जन्म दोष, दिल के दौरे का खतरा बढ़ना।

मोबाइल फोन और मोबाइल टावरों से निकलने वाले विद्युत चुम्बकीय रेडिएशन ( Electromagnetic Radiation) के डायरेक्ट लंबे परिणाम हैं। जैसे-जैसे मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वालो की संख्या बढ़ी, मोबाइल टावरों की स्थापना में भी वृद्धि देखी गई ताकि अधिकांश मोबाइल इस्तेमाल करने वाले की जरूरतों को पूरा किया जा सके। कनेक्टिविटी की आवश्यकता को देखते हुए, मोबाइल फोन अब हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन गए हैं। हमारे घरों और ऑफिस पर, हमें विभिन्न कामों के लिए मोबाइल फोन की आवश्यकता होती है। इस वायरलेस डिवाइस के साथ 24/7 हमारे साथ रखना हमें लगातार रेडियोफ्रीक्वेंसी विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र के संपर्क में लाती है और परिणाम उच्च तनाव और थकान, जलन, खराब नींद की गुणवत्ता, सिरदर्द और कई अन्य समस्याएं हैं।बायोमेडिकल एंड लाइफ साइंसेज जर्नल लिटरेचर, यूएसए में प्रकाशित शोध बताता है कि आरएफ-ईएमएफ का “शुक्राणु  पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है जो कोशिकीय चयापचय (metabolism) और अंतःस्रावी तंत्र में काइनेस की भूमिका को प्रभावित करता है, और जीनोटोक्सिसिटी, जीनोमिक अस्थिरता और ऑक्सीडेटिव तनाव पैदा करता है।”

भारत की स्थिति क्या है?

भारत वह देश है जो दुनिया की आबादी के लगभग पांचवें हिस्से की मेजबानी करता है, जो भारत में मोबाइल फोन इस्तेमाल के विशाल आधार के पीछे का कारण है। ये मोबाइल फोन एक कनेक्टिविटी नेटवर्क बनाते हुए देश भर में फैले मोबाइल टावरों से संकेतों को प्रसारित और प्राप्त करते हैं। मोबाइल टावर हानिकारक विद्युत चुम्बकीय रेडिएशन का उत्सर्जन करते हैं और रेडिएशन स्तर की विश्व स्तर पर अनुमेय सुरक्षित सीमा 0.5 मिलीवाट प्रति मीटर वर्ग है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में यह सीमा बुरी तरह से पार कर 2013 में 900 गुना अधिक हो गई थी।

अगर हम भारत के वर्तमान मोबाइल टॉवर रेडिएशन स्तर की बात करें, तो हमारे पास 9.2 वाट प्रति मीटर वर्ग की रेडिएशन जोखिम सीमा है जो अभी भी चीन (0.4 डब्ल्यू/वर्ग मीटर) और रूस (0.2 डब्ल्यू/वर्ग मीटर) जैसे देशों से अधिक है।

मनुष्यों में घातक बीमारियों का कारण बन सकता है

भारतीय न्यायपालिका ने मोबाइल टॉवर रेडिएशन को गंभीरता से लिया जिसमे की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारी स्वामित्व वाली दूरसंचार कंपनी BSNL को उस मोबाइल नेटवर्क टावर को हटाने के लिए कहा, जिससे ग्वालियर शहर के एक निवासी को कैंसर हो गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला तब सुनाया जब ग्वालियर में एक घरेलू सहायक, कैंसर रोगी हरीश चंद रावत ने मोबाइल टॉवर को हटाने का अनुरोध किया क्योंकि उन्होंने दावा किया कि यह उनकी बीमारी का कारण था। वह जिस घर में काम कर रहे थे, वहां से 20 मीटर से भी कम दूरी पर मोबाइल टावर लगाया गया था। भारत में यह पहली बार था जब सर्वोच्च न्यायपालिका ने स्वीकार किया कि मोबाइल टावरों से कम फ्रीक्वेंसी वाला विद्युत चुम्बकीय रेडिएशन (ईएमआर) वास्तव में मनुष्यों में घातक बीमारियों का कारण बन सकता है।

एक रिपोर्ट में ऐसी ही एक अन्य घटना में, 2003 में जयपुर में सी-स्कीम लक्जरी अपार्टमेंट के पड़ोस में तीन मोबाइल टावर लगाए गए थे। सबसे पहले, पास के एक क्षेत्र के दो भाइयों को मस्तिष्क कैंसर का पता चला था। 2011 में, अंतर-मंत्रालयी समिति ने विद्युत चुम्बकीय रेडिएशन के जोखिम को 450 मेगावाट/वर्ग मीटर तक कम करने की सिफारिश की। अब तक, जयपुर के रेडिएशन प्रभावित पड़ोस में रहने वाले सात लोगों को कैंसर का पता चला है।

हम मोबाइल टावर रेडिएशन से खुद को कैसे बचा सकते हैं?

मोबाइल फोन की तरह, मोबाइल टावर भी हमारे स्वास्थ्य के लिए उतने ही हानिकारक हैं। कम फ्रीक्वेंसी वाला विद्युत चुम्बकीय रेडिएशन लगातार हमारे स्वास्थ्य को नष्ट कर रहा है और हमें अधिक स्वास्थ्य जोखिमों के लिए उजागर कर रहा है। अगर हम मोबाइल टॉवर रेडिएशन से खुद को बचाना चाहते हैं, तो हमें कुछ एहतियाती उपायों के साथ-साथ उपचारात्मक उपायों को भी अपनाने की आवश्यकता है।उस जगह से एक सुरक्षित दूरी से परे मोबाइल टावर की स्थापना करें, आमतौर पर घर और कार्यालय जहां आप अपना अधिकांश समय बिताते हैं। अध्ययनों के अनुसार, 400 मीटर की सीमा के भीतर मोबाइल फोन टावर मानव स्वास्थ्य पर गहरे प्रभाव डाल सकते हैं।

वायरलेस रूप से जुड़ी दुनिया में तकनीकी आवश्यकताओं को देखते हुए, हमारे पास कभी-कभी यह विकल्प नहीं हो सकता है कि मोबाइल टॉवर कहाँ स्थापित किया जाना चाहिए। इसलिए, हम सही मानक द्वारा प्रमाणित रेडिएशन संरक्षण उत्पादों जैसे कुछ सही तत्काल समाधानों का सहारा ले सकते हैं। एनविरोचिप और एनविरोग्लोब अद्वितीय और विश्वसनीय उत्पाद हैं जो हमें मोबाइल टावर रेडिएशन से चौतरफा सुरक्षा प्रदान करते हैं। इन उत्पादों में लागू रेडिएशन संरक्षण तकनीक विद्युत चुम्बकीय रेडिएशन की प्रकृति को निरंतर रूप से स्वतंत्र तरंग रूप में बदल देती है जिससे रेडिएशन मानव स्वास्थ्य के लिए कम नुकसान हो जाता है।




Health Tips : शरीर के अंदर जमी गंदगी को निकालती है बाहर, एलर्जी में भी कारगर

बिच्छू डूबूटी सेहत के लिए बहुत उपयोगी है. यह सचमुच बड़े काम की वानस्पतिक औषधि है। सर्दियों में इसके इस्तेमाल से शरीर में गुनगुनी गर्माहट का प्रवाह रहता है। यह जोड़ों के सूजन को कम करता है और रक्त में शर्करा को नियंत्रण करता है।

पहाड़ी इलाकों में उगने वाली बिच्छू डूबूटी या बिछुआ में अनेकों आयुर्वेदिक गुण पाए जाते हैं। ये एक ऐसी पारंपरिक औषधीय जड़ी-बूटी है, जो अपनी पत्तियों में उगे डंकों या अदृश्य कांटों के लिए बदनाम है। जंगलों में घास के बीच उग आने वाली इस जड़ी बूटी की पत्तियों पर जब गलती से हमारे शरीर का कोई हिस्सा छू जाता है, तो दर्दनाक डंक जैसा एहसास होता है। लेकिन यह बिच्छू डूबूटी सेहत के लिए बहुत उपयोगी है। यह सचमुच बड़े काम की वानस्पतिक औषधि है। सर्दियों में इसके इस्तेमाल से शरीर में गुनगुनी गर्माहट का प्रवाह रहता है। यह जोड़ों के सूजन को कम करता है और रक्त में शर्करा को नियंत्रण करता है। जिन लोगों को मूत्र करने में परेशानी हो, उन्हें इसका इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि इससे मूत्र प्रवाह बेहतर होता है।

बिच्छू बूटी के फायदे आयुर्वेदिक डॉक्टर किशन लाल ने लोकल 18 को एक इंटरव्यू में बताया कि बिच्छू बूटी की पत्तियों में विटामिन ए, विटामिन सी के साथ-साथ आयरन, प्रोटीन और कई तरह के खनिज पदार्थ पाये जाते हैं। इसका चाय बनाकर पीने से गुनगुनी सर्दियों में शरीर को बहुत राहत मिलती है और हम शुरुआती सर्दी के संक्रमण से बचे रहते हैं। इसका इस्तेमाल त्वचा की एलर्जी कम करता है। इसके नियमित चाय पीने से शरीर का डिटॉक्सीफिकेशन होता है। इसके अलावा इसके बीज और अर्क के इस्तेमाल से शरीर में सेरोटोनिन बढ़ता है, जिससे ऊर्जा मिलती है। बिच्छू बूटी के कटीले पत्तों का दरदरा लेप बनाकर अगर सूजे हुए जोड़ों में लगाया जाए, तो जोड़ों के दर्द में कमी होती है। बिच्छू बूटी में एंटी-अस्थेमेटिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाये जाते हैं, जो अस्थमा रोगियों की परेशानियों को कम करते हैं।

पहाड़ी क्षेत्र और मैदानों में उगती है यह औषधियह औषधि पहाड़ी और मैदानी जंगलों में अपने आप उगती है। लेकिन कई इलाकों में इसकी खेती भी अच्छी तरह से होती है। इसके आयुर्वेदिक गुणों के कारण अब इसका उपयोग बढ़ गया है। इसे पंसारियों की दुकान से जड़ी बूटी के रूप में और इसके इस्तेमाल से बनी तमाम औषधियों को आयुर्वेदिक दवा स्टोरों से खरीदा जा सकता है। यह शरीर से अच्छी तरह से विषाक्त पदार्थों को निकलता है। इसलिए इसका इस्तेमाल डिटॉक्सीफिकेशन के तौर पर भी होता है। इसके इस्तेमाल से हमारी पाचन क्षमता बेहतर होती है और स्वास्थ्य रक्षा प्रणाली मजबूत बनती है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है। यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं। इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें। Denvapost किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।




अमेज़न ग्रेट इंडियन फेस्टिवल सेल 2024 स्मार्टफोन डील्स 20000 रुपये से कम बैंक ऑफर नो कॉस्ट EMI सभी विवरण

Amazon Great Indian Festival Sale 2024: अमेजन की ग्रेट इंडियन फेस्टिवल सेल आज से प्राइम मेंबर्स (Prime members) के लिए शुरू हो चुकी है और आज मध्यरात्रि 12 बजे से सेल सभी के लिए लाइव होगी। फिलहाल इसकी समाप्ति की तारीख का खुलासा नहीं किया गया है। हर साल की तरह इस साल भी अमेजन अपनी ग्रेट इंडियन फेस्टिवल सेल में स्मार्टफोन पर भारी डिस्काउंट (Massive discounts on smartphones) लेकर आया है। सेल के दौरान लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, टैबलेट, ईयरबड्स समेत अन्य गैजेट्स पर भी भारी डिस्काउंट दिए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, यहां हम कुछ बेस्ट स्मार्टफोन डील्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें आप 20,000 रुपये के अंदर खरीद सकते हैं।
बता दें कि Amazon Great Indian Festival Sale के दौरान स्मार्टफोन की कीमतों पर छूट तो मिल ही रही हैं, साथ ही ग्राहक SBI बैंक के क्रेडिट या डेबिट कार्ड या Amazon Pay ICICI Bank क्रेडिट कार्ड के जरिए बड़ा कैशबैक भी हासिल कर सकते हैं, जो डील को और आकर्षक बनाने का काम करता है। इसके अलावा, यदि आप अपने पुराने फोन को एक्सचेंज करते हैं, तो आपको और अतिरिक्त छूट मिल सकती है। यदि आप किस्तों में स्मार्टफोन खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो चुनिंदा प्रमुख बैंक No-Cost EMI ऑप्शन भी दे रहे हैं। चलिए बिना देरी किए Amazon Great Indian Festival Sale में Rs. 20,000 से कम कीमत में मिलने वाली स्मार्टफोन डील्स पर नजर डालते हैं।

Amazon Great Indian Festival Sale 2024: Smartphone deals under Rs. 20,000

iQOO Z9 5G
iQOO Z9 5G के 8GB रैम और 128GB स्टोरेज वेरिएंट को 18,499 रुपये में लिस्ट किया गया है। SBI बैंक कार्ड के जरिए इस स्मार्टफोन की खरीद पर नॉन-EMI ट्रांजेक्शन पर 2,500 रुपये और EMI ट्रांजेक्शन पर 2,750 रुपये तक की एक्स्ट्रा छूट मिल रही है, जिससे इसकी इफेक्टिव कीमत 15,999 रुपये तक हो जाती है।

OnePlus Nord CE4 Lite 5G
खबर लिखते समय तक OnePlus Nord CE4 Lite 5G का 8GB + 128GB स्टोरेज वेरिएंट 19,998 रुपये में लिस्ट किया गया है। कूपन के जरिए 1,000 रुपये का एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिलेगा, जिसके बाद इसकी इफेक्टिव कीमत 18,998 रुपये हो जाती है। बैंक ऑफर में SBI क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर 250 रुपये का एक्स्ट्रा इंस्टेंट डिस्काउंट मिल सकता है। इतना ही नहीं, ग्राहकों को सीमित समय के लिए Nord CE4 Lite 5G की खरीद पर 1,299 रुपये की मूल कीमत वाले OnePlus Bullets Z2 भी फ्री मिलेंगे।

Poco X6 5G
Poco X6 5G का 12GB रैम और 512GB स्टोरेज वेरिएंट 18,999 रुपये में लिस्ट किया गया है। SBI क्रेडिट या डेबिट कार्ड के जरिए EMI या नॉन-EMI ट्रांजेक्शन करने पर 1,500 रुपये तक का डिस्काउंट दिए जाने का दावा किया गया है, जिसके बाद इस वेरिएंट की इफेक्टिव कीमत 17,499 रुपये हो जाती है।

Redmi Note 13 5G
Redmi Note 13 5G का 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट 18,999 रुपये में लिस्ट किया गया है। Poco के समान ही SBI कार्ड के जरिए खरीदारी करने पर एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिलेगा। स्मार्टफोन के इस टॉप-ऑफ-द-लाइन वेरिएंट पर 1,000 रुपये की एक्स्ट्रा छूट दी जा रही है, जो इसकी इफेक्टिव कीमत को 17,999 रुपये पर ले आता है।

iQOO Z9s 5G
इसके बेस 8GB रैम और 128GB स्टोरेज वेरिएंट को 19,998 रुपये में लिस्ट किया गया है। अमेजन Great Indian Festival Sale के दौरान 500 रुपये का कूपन डिस्काउंट भी दे रहा है, जो इसकी इफेक्टिव कीमत को 19,498 पर ले जाता है। वहीं, SBI कार्ड के जरिए इस वेरिएंट पर 1,500 रुपये का मैक्सिमम डिस्काउंट हासिल किया जा सकता है, जो इसकी कीमत को आगे और घटाकर 17,998 कर देता है।

Samsung Galaxy M55s 5G
Samsung Galaxy M55s 5G का बेस 8GB रैम और 128GB स्टोरेज वेरिएंट सेल के दौरान 19,999 रुपये में बेचा जा रहा है। यदि आप अमेजन द्वारा प्रोडक्ट पेज पर दिया जा रहा 2,000 रुपये का कूपन अप्लाई करते हैं, तो इसकी इफेक्टिव कीमत 17,999 रुपये हो जाती है। हालांकि, इस स्मार्टफोन पर किसी प्रकार का बैंक डिस्काउंट नहीं मिल रहा है। लेकिन यदि आप Amazon Pay ICICI Bank क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हुए फुल स्वाइप पर इसे खरीदते हैं, तो आपको 5% का फ्लैट कैशबैक मिलेगा। इसके अलावा, ग्राहक इसे 2,222 रुपये से शुरू होने वाली No-Cost EMI पर खरीद सकते हैं।

Realme Narzo 70 Pro 5G
Realme Narzo 70 Pro 5G का 8GB RAM और 256GB स्टोरेज वेरिएंट 18,998 रुपये में लिस्ट किया गया है। SBI कार्ड के जरिए खरीदारी करने पर 1,500 रुपये तक का एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है, जिसके बाद इसकी इफेक्टिव कीमत 17,498 रुपये हो जाएगी।




पैरासिटामॉल समेत 50 से ज्यादा दवाएं क्वालिटी टेस्ट में हुईं फेल, देखें पूरी लिस्ट

बुखार में खाई जाने वाली पैरासिटामॉल टैबलेट क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गई है। इसके अलावा, कैल्शियम, विटामिन डी, एंटी डायबिटीज की कई दवाएं भी इस लिस्ट में शामिल हैं। यह लिस्ट इंडियन ड्रग्स रेग्युलेटर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड की है, जोकि अगस्त महीने की है। इसमें बताया गया है कि 50 से ज्यादा दवाएं हैं, जोकि स्टैंडर्ड क्वालिटी के हिसाब से नहीं हैं। इससे पहले भी जून में भी ऐसी ही लिस्ट जारी की गई थी, जिसमें भी पैरासिटामॉल समेत 52 दवाओं का नाम था।
क्वालिटी चेकिंग के लिए हर महीने रैंडमली विभिन्न राज्यों से दवाओं के सैंपल्स लिए जाते हैं और फिर उनकी जांच की जाती है। विटामिन सी और डी3 की टैबलेट्स शेल्कल, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स और विटामिन सी सॉफ्टजेल, एंटीएसिड पैन-डी, पैरासिटामॉल की गोलियां आईपी 500 एमजी, डायबिटीज की दवा ग्लिमेपिराइड, हाई ब्लड प्रेशर की दवा टेल्मिसर्टन आदि समेत 53 दवाए हैं, जोकि क्वालिटी टेस्ट में पास नहीं हो सकी हैं।
इन दवाओं का मैन्युफैक्चर एल्कम हेल्थ साइंस यूनिट-2, मेज लाइफसाइंसेंस, मेसर्स प्योर एंड क्योर हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स स्कॉट एडिल लिमिटेड जैसी कंपनियां करती हैं। सरकारी डेटा में दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर, प्रोडक्ट नाम आदि की डिटेल्स दी गई हैं। पैरासिटामॉल टैबलेट्स आईपी 500 एमजी, जिसका निर्माण मेसर्स कर्नाटक एंटीबॉयोटिक्स एंड फार्मा ने किया है, उसे भी गुणवत्ता जांच में विफल पाया गया है।
इसके अलावा, कोलकाता की एक दवा-परीक्षण प्रयोगशाला ने एल्केम हेल्थ साइंस की एंटीबायोटिक्स क्लैवम 625 और पैन डी को नकली माना है। इसी प्रयोगशाला ने हैदराबाद स्थित हेटेरो के सेपोडेम एक्सपी 50 ड्राई सस्पेंशन की पहचान की है, जो गंभीर जीवाणु संक्रमण वाले बच्चों के लिए निर्धारित है, इसे घटिया बताया है।



वाकई देश बदल रहा है! मेडिकल टूरिज्म में हो रही छप्पड़ फाड़ कमाई, रिकॉर्ड 73 लाख विदेशियों का भारत में इलाज 

Medical Tourism Boom: देश बदल रहा है. यह कोई नारा नहीं है बल्कि सचमुच ऐसा हो रहा है. बदलाव की इस चिंगारी के छींटे बेशक हर इंसान के जीवन तक न पहुंचे हों लेकिन कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां बदलाव की सुगबुगाहट महसूस की जा रही है. मेडिकल टूरिज्म ऐसा ही क्षेत्र है जहां पिछले कुछ दशकों से देश में जबर्दस्त जोश देखा जा रहा है. दुनिया के लोगों का भारत के डॉक्टरों में भरोसा बढ़ रहा है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक इस साल भारत में रिकॉर्ड 73 लाख विदेशियों का भारत में इलाज होना है. 2023 में भी विदेश से भारत में इलाज के लिए 61-लाख लोग आए थे. आखिर क्या वजहें कि भारत के डॉक्टरों के प्रति दुनिया के लोगों में भरोसा बढ़ रहा है.

10-अरब डॉलर का मेडिकल टूरिज्म
फॉर्चून मार्केट इंटेलीजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का मेडिकल टूरिज्म 10.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. उम्मीद है कि 2034 तक भारत का मेडिकल टूरिज्म बढ़कर 50.68 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा. मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में 46 ग्लोबल डेस्टिनेशन में भारत का 10वां स्थान है. क्रिसिल के मुताबिक भारत में जितने कॉरपोरेट अस्पताल हैं उनके राजस्व का 10-12 प्रतिशत हिस्सा विदेशी मरीजों से आता है. कुछ अस्पताल इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती लोकप्रियता का लाभ उठाने के लिए लक्षित देशों में अपना पार्टनर दफ्तर खोल दिया है.

वर्ल्ड क्लास हेल्थकेयर सुविधा

सबसे पहली बात तो यह है कि भारत पेशेवर और उच्च गुणवत्ता से लैस प्रशिक्षित डॉक्टरों की कोई कमी नहीं है. इसके अलावा अन्य तरह के मेडिकल प्रोफेशन हैं. भारत की ओर आकर्षित होने की एक प्रमुख वजह अन्य देशों की तुलना में यहां का सस्ता इलाज है. भारत में हेल्थकेयर सुविधाओं ओर अस्पतालों का सुदृढ़ श्रृंखला बन गई है. यहां उच्च मानक वाले कई अत्याधुनिक अस्पतालें हैं जो देश और दुनिया से मान्यता प्राप्त हैं. इन सब कारणों से यहां मरीजों को वर्ल्ड क्लास हेल्थकेयर सुविधाएं मिल जाती है. वहीं यहां के अस्पतालों में एक से बढ़कर एक अत्याधुनिक मेडिकल मशीनें भी उपलब्ध हैं.

भारत में इलाज कराना है इतना सस्ता
भारत में अन्य देशों की तुलना में इलाज कराना बहुत कम खर्च होता है.अगर कोई विदेशी मरीज अमेरिका में एंजियोप्लास्ट कराना चाहता है तो उसे 57 हजार डॉलर खर्च करना पड़ेगा, वहीं कोरिया में 15200 डॉलर, सिंगापुर में 13,000 डॉलर, थाइलैंड में 3788 डॉलर खर्च करना होगा. लेकिन यदि कोई विदेशी भारत में एंजियोप्लास्टी कराना चाहता है तो उसे यहां 3,300 डॉलर ही खर्च करना होगा. इसी तरह यदि हिप रिप्लेसमेंट का खर्च अमेरिका में 50 हजार डॉलर है तो भारत में सिर्फ 7000 डॉलर में यह काम हो जाएगा. हार्ट की बायपास सर्जरी के लिए अमेरिका में 1.44 लाख डॉलर खर्च करना होगा. यानी 1.20 करोड़ रुपये खर्च करना होगा लेकिन यदि बायपास सर्जरी यदि भारत में होगी तो यहां सिर्फ 5,200 डॉलर खर्च करना होगा. यानी 4.37 लाख में सारा काम हो जाएगा.

उच्च प्रशिक्षित मेडिकल प्रोफेशनल

भारत में हमेशा से बेहद काबिल डॉक्टर रहे हैं. यहां उच्च प्रशिक्षत डॉक्टरों की भी कोई कमी नहीं है. अमेरिका, लंदन जैसे देशों में भी भारतीय डॉक्टरों की संख्या बहुत अधिक है. सबसे बड़ी बात कि भारतीय डॉक्टरों की दुनिया भर में प्रतिष्ठा हैं. ये डॉक्टर दुनिया के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों से शिक्षा ग्रहण करते हैं. वहीं भारत में भी कई वैश्विक मेडिकल कॉलेज हैं जहां से मेडिकल डिग्रियां ये डॉक्टर लेते हैं.

भाषा की दिक्कत नहीं

भारत के लगभग सभी डॉक्टर अंग्रेजी बोलते हैं और अंग्रेजी भाषा को दुनिया भर के लोग समझ लेते हैं. इसलिए भारत के डॉक्टरों और मरीजों में भाषा की दीवार नहीं है. हर तरह बातचीत उनकी भाषा में हो जाती है.

भारत में आने की सुविधा
भारत ने मेडिकल टूरिज्म को प्रोत्साहित करने के लिए ई-मेडकल वीजा की सुविधा दी है. इतना ही नहीं मरीज के तीमारदारों के लिए भी भारत ने ई मेडिकल एटेंनडेंट वीजा की सुविधा दी है. 167-देशों के लिए भारत ने यह सुविधा दी हुई है. इसलिए भारत में इलाज के लिए विदेशियों को आने में कोई दिक्कत नहीं होती है.




बदलता मौसम बच्चों के लिए बन रहा खतरनाक, जानें डॉक्टर की सलाह

बदलता मौसम छोटे बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है. यही कारण है कि सहारनपुर जिला अस्पताल में रोजाना सैकड़ों की संख्या में बच्चे बीमार होकर पहुंच रहे हैं. वहीं डॉक्टर का कहना है कि इस बदलते मौसम में बच्चों को मच्छरों से बचा कर रखें. साथ ही बुखार होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में दिखाएं. बच्चों को बुखार होने पर तेजी से प्लेटलेट्स गिर रहे हैं. वहीं जिला अस्पताल का बच्चा वार्ड इस वक्त फुल हो चुका है. डॉक्टर का कहना है कि बारिश हो रही है और उसके बाद तुरन्त धूप निकल रही है. ठंडा गर्म मौसम बच्चों को काफी नुकसान पहुंचा रहा है. बच्चों को बुखार, नजला, जुकाम, खांसी, लूज मोशन की समस्या आ रही है. जिला अस्पताल में पहुंच रहे सभी बच्चों के लिए पर्याप्त मेडिसिन उपलब्ध हैं. साथ ही सभी जांच अस्पताल से ही कराई जा रही हैं.

बदलते मौसम में बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए करें यह उपाय

डॉक्टर बिरेंद्र भट्ट का कहना है कि बदलते इस मौसम में बरसात के बाद तुरंत धूप निकल जाती है. ठंडा गर्म मौसम बच्चों को काफी नुकसान पहुंचाता है. वहीं पानी जमा होने से मच्छर पनप रहे हैं. अपने बच्चों को मच्छरों से बचाने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें. बच्चों को फुल बाजू के कपड़े पहनाकर रखें. बच्चों को बासी खाना, कटे हुए फल ना खाने दें. बीमारियों से बचने के लिए अधिक पानी का सेवन करें. बच्चों को रोजाना ओआरएस का घोल पिलाएं. बच्चों को फास्ट फूड खाने से दूर रखें. बच्चों को खाने में हरी सब्जी, ताजा फल दें, साथ ही डॉक्टर का कहना है कि अस्पताल में आने वाले सभी बच्चों की ब्लड जांच कराई जा रही है. लेकिन अभी तक डेंगू, मलेरिया का कोई भी केस सामने नहीं आया है. हालांकि टाइफाइड के कुछ मरीज सामने आए हैं.