International Yoga Day 2023: क्या है अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम, क्यों है महत्वपूर्ण

 

International Yoga Day 2023 : हर साल 21 जून को दुनियाभर में इंटरनेशनल योग दिवस मनाया जाता है. इस दिन दुनियाभर के कार्यक्रमों को आयोजित कर योग को लेकर जागरूक किया जाता है. लोगों को योग से होने वाले फायदे बताए जाते हैं. योग कई सदियों से भारतीय संस्कृति की परंपरा रही है. पुरातन काल से ही ऋषि मुनि योग करते रहे हैं. भारत की पहल पर योग के महत्व को देखते हुए इसे अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाया गया है.

कब हुई अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत
27 सितंबर 2014 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में इंटरनेशनल योगा डे को मनाने के लिए प्रस्ताव रखा था. जिसके तहत साल में किसी भी एक दिन को योग दिवस के रूप में मनाने की मांग की गई. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया. जिसके बाद प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) के रूप में मनाने की घोषणा कर दी गयी. जिसके बाद 21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया. जिसके बाद से हर साल 21 जून को इंटरनेशनल योगा डे मनाया जाता है.

इस साल की थीम
इस साल 9वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है. इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत पर वन वर्ल्ड, वन हेल्थ रखी गई है. इस थीम को आयुष मंत्रालय द्वारा चुना गया है. योग करने के जीवन में कई फायदे होते हैं. यह आपको फिट रखता है. रोजाना योग करने से लोगों को कई बीमारियों से निजात मिलती है.

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का महत्व
इंटरनेशनल योगा डे मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों में योग को लेकर जागरुकता पैदा करना है. इस दिन योग के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है, इसके फायदे बताए जाते हैं. जिससे लोग रोजाना योगाभ्यास करने का समय निकाल सकें. योग करने से शरीर फिट और तंदरुस्त रहता है. नियमित योग करने से कई बीमारियां दूर रहती हैं.





क्या आप भी ज्यादा करती हैं गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल? हो जाएं सावधान, साइड इफेक्ट भी जानिए

Birth Control Pill Side Effects: आधुनिक समाज सेल्फ डिपेंडेंट हैं. चाहे पुरुष हो या महिला, अपना निजी जीवन अपने हिसाब से चलाते हैं. जब बच्चे की जरूरत महसूस होती है, तभी वे बच्चा करते हैं. यह विकल्प उसे आधुनिक विज्ञान ने दी है. विज्ञान के इस युग में गर्भनिरोध के कई साधन उपलब्ध हैं, जिनकी बदौलत महिलाएं अपनी प्रेग्नेंसी को रोक सकती हैं. कामकाजी महिलाओं के लिए खासकर इसकी जरूरत ज्यादा होती है. गर्भनिरोध का बेहतर साधन है गर्भनिरोधक गोलियां यानी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल. इस पिल को खाने के बाद महिलाओं को प्रेग्नेंसी नहीं होती. एनसीबीआई के मुताबिक अमेरिका में 25 प्रतिशत प्रजनन उम्र की महिलाएं अपनी इच्छा से गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करती हैं.

वर्तमान में तीन तरह की गर्भनिरोध गोलियां बाजार में मिलती है. एक है एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन का मिला हुआ रूप. दूसरा है सिर्फ प्रोजेस्ट्रॉन और तीसरा है एक्सटेंडेट पिल. तीनों का काम प्रेग्नेंसी को रोकना है लेकिन तरीका अलग-अलग है. पर क्या ये गोलियां पूरी तरह सुरक्षित है? क्या इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं है?

पिल कैसे असर करता है
एनसीबीआई के मुताबिक तीनों तरह की गोलियों से महिलाओं के शरीर में गर्भ ठहरने के लिए जिम्मेदार हार्मोन को कंट्रोल किया जाता है. इन गोलियों से अंडा बनने की प्रक्रिया रूक जाती है. इसका मतलब यह हुआ है कि स्पर्म और अंडा एक साथ नहीं आएगा जिससे प्रेग्नेंसी नहीं होगी. दरअसल, बर्थ कंट्रोल पिल के साइड इफेक्ट को जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि यह पिल काम कैसे करता है. जब महिला के शरीर में अंडा बनता है तो इससे पहले कई तरह की चीजों का निर्माण होता है जो काम कई तरह के हार्मोन करता है. प्रोजेस्ट्रोन का टैबलेट खाने के बाद यह गोनेडोट्रोपिन रिलीजिंग हार्मोन को कम कर देता है जिससे फॉलिकल्स स्टीमुलेटिंग हार्मोन नहीं बनता है. इसके अलावा अंडा बनाने के लिए एक और हार्मोन एलएच भी नहीं बनता है. अर्थात दवा खाने के बाद शरीर में कई तरह के हार्मोन का बनना बंद हो जाता है. यानी महिला के शरीर में जो कुदरती प्रक्रिया हो रही है, उसे रोका जाता है. जब कुदरती प्रक्रिया को रोका जाएगा तो जाहिर है इसके साइड इफेक्ट्स भी होंगे.

पिल के क्या हैं साइड इफेक्ट्स

1. पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग-मेडिकल न्यूज टूडे के मुताबिक गर्भनिरोधक गोलियों का सबसे बड़ा साइड इफेक्ट यह है कि इसे खाने से दो पीरियड्स के बीच में भी ब्लीडिंग होती रहती है. हालांकि यह पीरियड की तरह नहीं होता लेकिन लाइट ब्लीडिंग या ब्राउन डिस्चार्ज की समस्या बनी रहती है.

2. मतली-कुछ महिलाओं को पिल खाने के बाद जी मितलाने की समस्या हो सकती है. हालांकि यह बहुत ज्यादा नहीं होती और खाने के बाद सही भी हो जाती है.

3. ब्रेस्ट टेंडरनेस-बर्थ कंट्रोल पिल लेने से कुछ महिलाओं में ब्रेस्ट में खिंचाव जैसे महसूस होता है, खासकर तब जब दवा स्टार्ट की जाती है. चूंकि पिल से हार्मोन को रोका जाता है और इसका संबंध ब्रेस्ट से भी है, इसलिए इसमें टेंडरनेस होना स्वभाविक है.

4. सिर दर्द और माइग्रेन-कुछ महिलाओं को बहुत जल्दी-जल्दी सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या हो सकती है.

5. वजन बढ़ना-बर्थ कंट्रोल पिल से वजन बढ़ सकता है. हालांकि यह सब महिलाओं में हो, ऐसा जरूरी नहीं. ऐसा माना जाता है कि पिल लेने से शरीर में पानी धारण करने की क्षमता ज्यादा हो जाती है जिसे वाटर वेट कहा जाता है.

6. मूड चेंज-पिल का साइड इफेक्ट मूड और इमोशन में चेंज के रुप में आता है. यह ज्यादातर पिल लेने वाली महिलाओं में होती है.

7. मिस्ड पीरियड-कुछ महिलाओं में पीरियड्स बीच-बीच में रूक सकता है. इसलिए बेहतर है कि गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से करें.





क्या आपको भी आता है ज्यादा पसीना? हो सकते है डायबिटीज के लक्षण, न करें नजरअंदाज

Excessive Sweating early sign of Diabetes: डायबिटीज पूरी दुनिया में लोगों को परेशान करने लगा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक विश्व में 42.2 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं. डायबिटीज के कारण हर साल 15 लाख लोगों की मौत होती है. हालांकि हमारे लिए चिंता की बात यह है कि यह बीमारी हमारे यहां भी तेजी से पनपने लगी है. वर्तमान में करीब 8 करोड़ भारत के लोग डायबिटीज से पीड़ित है और अनुमान के तहत 2045 तक 13.5 करोड़ लोग यहां डायबेटिज से पीड़ित होंगे.

इसलिए भारत को डायबेटिक कैपिटल ऑफ वर्ल्ड कहा जाने लगा. डायबिटीज की शुरुआत में पहचान मुश्किल है. इसके लक्षण बहुत कम मामलों में ही दिखते हैं. हालांकि कुछ संकेतों से यह समझा जा सकता है कि डायबिटीज होने वाला है या प्री-डायबेटिक कंडीशन में कुछ संकेत दिखने लगते हैं. इन्हीं में पसीना आना पहला लक्षण माना जा सकता है.

ज्यादा पसीना के कारण
वेरीवेलहेल्थ वेबसाइट के मुताबिक अगर बहुत ज्यादा गर्मी या बहुत ज्यादा शारीरिक श्रम की वजह से पसीना आता है तो कोई चिंता की बात नहीं है लेकिन अगर बिना वजह अक्सर पसीना आता है तो यह डायबिटीज या प्री-डायबिटीज के संकेत हो सकते हैं. रिसर्च के मुताबिक डायबिटीज पीड़ित लगभग 84 प्रतिशत लोगों को ज्यादा पसीना आने की परेशानी होती है. इन लोगों में अधिकांश को गर्दन के नीचे ज्यादा पसीना आता है. दरअसल, डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर बहुत तेजी से उपर-नीचे होता है, इस कारण जब शुगर बहुत डाउन हो जाता है तो पसीना अपने आप निकलने लगता है.

वहीं जो लोग डायबेटिक होते हैं वे मीठा खाना एकदम छोड़ देते हैं. यही कारण है कि शरीर में तेजी के साथ शुगर या ग्लूकोज की कमी होने लगती है. जब ग्लूकोज की कमी होती है तो शरीर में ज्यादा पसीना आता है. हालांकि खाने-पीने के बाद जब शुगर लेवल थोड़ा बढ़ता है तो फिर स्थिति सही हो जाती है. इसके अलावा भी पसीना आने के बहुत से कारण हैं.

डायबिटीज के अन्य लक्षण

 

1. ज्यादा प्यास लगना-मायो क्लिनिक के मुताबिक प्री-डायबेटिक कंडीशन में प्यास ज्यादा लगती है.
2.जल्दी-जल्दी पेशाब होना-अगर किसी को डायबिटीज होने वाला होता है या डायबिटीज हो जाता है तो उसे बहुत जल्दी-जल्दी पेशाब लगता है. पेशाब को वह बर्दाश्त नहीं कर पाता है.
3.भूख लगना-डायबेटिक कंडीशन में भूख भी बहुत लगती है.
4.थकान-प्री-डायबेटिक कंडीशन में बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी हो जाती है.
5.दिखाई कम देना-डायबिटीज मरीजों को आंखों की भी परेशानी हो जाती है.
6.हाथ-पैर में झुनझुनी-डायबिटीज के मरीजों के हाथ और पैरों में झुनझुनी और सुन्नापन की शिकायत रहती है.

7. इंफेक्शन-डायबिटीज मरीजों का जल्दी-जल्दी इंफेक्शन लग जाता है.





आप की लापरवाही आपको बना रही है डायबिटीज के मरीज, इन्हें छोड़ने के लिए अपनाएं ये ट्रिक, शुगर रहेगी कंट्रोल में

 

Bad Habits Increase Blood Sugar Level: हम सब जानते हैं कि डायबिटीज के लिए हमारा खराब लाइफस्टाइल और खान-पान जिम्मेदार हैं. इसके बावजूद हम अपनी गलत आदतों में सुधार नहीं करते हैं. दरअसल, जब हम भोजन से अतिरिक्त चीजों की प्राप्ति करते हैं और उसका सदुपयोग नहीं करते तो यह हमारे शरीर में जहर की तरह घुलने लगता है. सदुपयोग तब होगा, जब हम अपने शरीर में हरकत लाएंगे. लेकिन आजकल का जो समय हैं, उसमें हम आरामपसंद काम करते हैं जिसमें शरीर के अंगों से मेहनत कम होती है. नतीजा यह होता है कि हमारा शिथिल जीवन हमें कई बीमारियों की सौगात देता है. डायबिटीज भी इन्हीं में से एक है.

डायबिटीज में ब्लड शुगर को ऊर्जा में बदलने के लिए जरूरी हार्मोन इंसुलिन का उत्पादन कम होता है या होता ही नहीं है. इससे खून में शुगर की मात्रा बढ़ती जाती है. यह शुगर आंख, किडनी से लेकर हार्ट तक की नसों को प्रभावित करती है और इससे कई बीमारियों को जन्म देती हैं. ऐसे में हमें यह जानना जरूरी है कि डायबिटीज के लिए आखिर हमारी वो कौन सी गंदी आदतें जिम्मेदार हैं.

डायबिटीज के लिए जिम्मेदार गंदी आदतें

1.ज्यादा रिफाइंड फूड खाना-इंडिया टूडे की खबर में एम्स में डिपार्टमेंट ऑफ एंडोक्राइनोलॉजी के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. राजेश खगावत के हवाले से बताया गया है कि खाने की चीजों में रिफाइंड कार्बोहाइड्रैट का सेवन डायबिटीज के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है. रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट खाने से शरीर में इंसुलिन ज्यादा बनाने के लिए उकसाता है जिससे इंसुलिन ज्यादा बनने लगता है. इससे ज्यादा भूख लगती है और अंततः जब जरूरत होती है तो इंसुलिन कम बनने लगता है. ब्रेड, बिस्कुट, चिप्स, रिफाइंड आटा, मैदा, सूजी इत्यादि में ज्यादा कार्बोहाइड्रैट होता है. इनकी जगह आप ब्राउन राइस, साबुत अनाज, ओटमील का सेवन करें.

2. दिन भर बैठे रहना-आजकल का जो कामकाज हो गया है, उसमें लोग ज्यादातर बैठे हुए काम करते हैं. इसमें शारीरिक श्रम की जरूरत नहीं होती है. इस कारण शरीर में डायबिटीज की बीमारी होती है. डॉ. खगावत कहते हैं कि सप्ताह में कम से कम 150 मिनट का शारीरिक श्रम जरूरी है.

 

3. देर रात जागना-आधुनिक लाइफस्टाइल में कुछ लोगों की शिफ्ट देर रात तक चलती है. वहीं अधिकांश लोग आजकल बिस्तर पर जाकर स्क्रीन से चिपके रहते हैं. इससे देर रात तक नींद नहीं आती है और शरीर का हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाता है जिससे इंसुलिन का उत्पादन भी कम होने लगता है. इसलिए जल्दी सोएं और जल्दी उठने का तरीका सबसे बेहतर तरीका है.

4. ज्यादा तनाव-आज के जमाने में लोगों के पास काम का बोझ बहुत रहता है. ऑफिस हो या धंधा हर काम में लोग तनाव ज्यादा लेने लगे हैं. इस तनाव से कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ने लगता है जो इंसुलिन के उत्पादन को रोकता है. इसलिए तनाव न लें. अगर तनाव है तो उसका उचित प्रबंधन करें. योग, मेडिटेशन से तनाव को दूर किया जा सकता है.

 

5. ब्रेकफास्ट नहीं करना-हम में से अधिकांश लोग सुबह में ब्रेकफास्ट नहीं करते. अति व्यस्तता के कारण लोग सुबह के नाश्ते को टाइम टेकिंग मानने लगे हैं. लेकिन इस कारण वे बाद में ज्यादा खाते हैं जो डायबिटीज की वजह बन सकती है. इसलिए कभी भी सुबह के नाश्ते को न छोड़ें.





Eyesight बढ़ाने के लिए आज से ही खाना शुरू कर दें ये 5 फूड

5 Best Foods for Eye Health: आजकल बड़ों के साथ-साथ बच्चों की भी स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गई है. लगातार लैपटॉप, मोबाइल, टीवी देखने के कारण आंखों से धुंधला दिखना, पानी आना, जलन, चुभन, ड्राई आई, रेडनेस आदि की समस्याओं से अक्सर लोग परेशान रहते हैं. कम उम्र में ही लोगों की आंखों की रोशनी कमजोर हो (Weak Eyesight) रही है. कई बार ये सभी समस्याएं हेल्दी डाइट ना लेने के कारण भी होती हैं. पोषक तत्वों की कमी होने से आंखों की रोशनी कमजोर हो सकती है. बेहतर है कि समय रहते ही आप उन चीजों को खाना शुरू कर दें जो आंखों के लिए हेल्दी होने के साथ ही आंखों की रोशनी बढ़ाने में फायदमेंद होती हैं.

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हरी पत्तेदार सब्जियां- मेडिकलन्यूजटुडे में छपी एक खबर के अनुसार, आंखों की रोशनी कमजोर होने पर हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना बेस्ट होता है. ये सब्जियां ल्यूटेन और zeaxanthin नामक कम्पाउंड से भरपूर होती हैं. साथ ही ये सब्जियां विटामिन सी से भी भरपूर होती हैं. आप डाइट में पालक, केल आदि को शामिल करें और इनका नियमित सेवन करके अपनी आंखों को रोशनी को बढ़ाएं. Image-canva

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खट्टे फल- खट्टे फलों में विटामिन सी की मात्रा सबसे अधिक होती है. विटामिन ई की तरह विटामिन सी भी एक एंटीऑक्सीडेंट है, जो उम्र बढ़ने के कारण आंखों को होने वाले नुकसान से बचाता है. आप डाइट में विटामिन सी से भरपूर फलों को शामिल करके अपनी आंखों को हेल्दी रख सकते हैं. इसके लिए आप नींबू, संतरा, अंगूर आदि का सेवन खूब करें. Image-Canva

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मछली- कई मछलियों में कुछ ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो आंखों के लिए बेस्ट और जरूरी होते हैं. मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स पाए जाते हैं. यह पोषक तत्व आंखों को हेल्दी रखने के लिए बेहतरीन है. ऑयली फिश वो होती हैं, जिनके पेट और शरीर के टिशू में ऑयल होता है. ऐसे में इन्हें खाने से भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 फिश ऑयल की प्राप्ति होती है. आप ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए सैल्मन, टूना, सार्डिन्स आदि मछलियों का सेवन कर सकते हैं. इससे आपकी आंखों की रोशनी तेज होगी, साथ हीसेहत को कई अन्य फायदे भी होंगे. Image-Canva

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बीज या सीड्स- कई बीजों के सेवन से आंखों की सेहत दुरुस्त रहती है. मछली, नट्स, फलियों की तरह बीजों को खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है. इन बीजों में भी ओमेगा-3 फैटी एसिड्स पाए जाते हैं. साथ ही ये विटामिन ई के भी मुख्य स्रोत होते हैं. आंखों को हेल्दी रखने के लिए आप डेली डाइट में चिया सीड्स, अलसी के बीज, हेम्प सीड्स को शामिल कर सकते हैं. Image-Canva

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गाजर- इसमें विटामिन ए, बीटा कैरोटीन हाई मात्रा में होते हैं. बीटा कैरोटीन से ही गाजर को नारंगी रंग प्राप्त होता है. विटामिन ए आंखों की दृष्टि को सुधारने में एक आवश्यक भूमिका निभाता है. यह रोडोप्सिन नामक प्रोटीन का एक घटक है, जो रेटिना को प्रकाश को अवशोषित करने में मदद करता है. शरीर को विटामिन ए बनाने के लिए इस पोषक तत्व की आवश्यकता होती है. गाजर का सेवन करके आप आंखों को हेल्दी रख सकते हैं. Image-Canva





अनार का जूस पेट के कोने-कोने में जमी गंदगी को साफ कर देगा, नसों में भर देगा खून, कोसों दूर रहेंगी कई बीमारियां

फल और हरी सब्जियों का सेवन सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. फल और सब्जियों में कई पोषक तत्व और विटामिंस पाए जाते हैं जो शरीर को स्वस्थ और तंदरुस्त रखते हैं. फलों के जूस का सेवन करने से स्वास्थ्य को कई फायदे होते हैं. अनार का जूस हेल्थ के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है. अनार में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बीमारियों से शरीर की रक्षा करते हैं. अनार के जूस में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, आयरन, विटामिन सी, पोटैशियम, फॉस्फोरस जैसे कई पोषक तत्व होते हैं. आइए आज हम आपको अनार का जूस पीने के फायदे बताते हैं.

1.हार्ट को रखे हेल्दी: हेल्थलाइन में छपी एक खबर के मुताबिक अनार का जूस हार्ट के लिए बेहद फायदेमंद होता है. इसके नियमित सेवन से हार्ट हेल्दी रहता है. इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो हार्ट के स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होते हैं.

2.पाचनतंत्र को मजबूत रखे: रोजाना अनार का जूस पीने से पाचनतंत्र मजबूत होता है. यह कब्ज, गैस, ब्लोटिंग जैसी समस्याओं को दूर करता है. अनार जूस के नियमित सेवन पेट अच्छे से साफ होता है.

3.एनीमिया से राहत: अनार के जूस का नियमित सेवन करने से एनीमिया से राहत मिलती है. अनार के जूस में भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है. यह हीमोग्लोबिन को बूस्ट करता है और शरीर में रेड ब्लड सेल्स को बढ़ाता है.

4.ब्लड प्रेशर करे कंट्रोल: अनार के जूस का नियमित सेवन करने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है. ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए यह बेहद लाभकारी है. ब्लड प्रेशर के मरीज नियमित अनार का जूस पीकर अपनी सेहत को दुरुस्त कर सकते हैं.

5.इम्युनिटी बूस्ट करे: अनार के जूस में भरपूर मात्रा में विटामिन C मौजूद होता है. यह इम्युनिटी को बूस्ट करता है. इसके रोजाना सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. एनीमिया से ग्रसित लोगों को रोजाना अनार का जूस पीना चाहिए. यह उनके लिए रामबाण इलाज है.




रात को किस करवट सोने से मिलता है फायदा? प्रेग्नेंट महिलाओं को किस ओर सोना चाहिए

 

Best Position while sleeping at night: हर इंसान के लिए सुकून की नींद महत्वपूर्ण है. अगर सुकून की नींद न आए तो कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. हालांकि, कुछ लोग अक्सर नींद न आने की शिकायत करते हैं, जबकि कुछ लोग जब सोने के बाद सुबह उठते हैं तो पूरे शरीर में थकान और कमजोरी सी महसूस होती है. दरअसल, इन सबके पीछे सोने के पैटर्न का बहुत बड़ा रोल है. हमारा सोने का पैटर्न क्या है, हम कितनी देर सोते हैं, हमारी नींद की गुणवत्ता कैसी है, इन सब बातों में लिए सोने की करवट का महत्वपूर्ण योगदान है. सबसे बड़ी बात यह है कि सोने की करवट से पाचन तंत्र का भी सीधा संबंध है. ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि किस करवट सोने से हमारी हेल्थ सही रहेगी और किस करवट सोना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है?

करवट लेकर सोना क्यों है फायदेमंद?
हॉपकिंस मेडिकल यूनिवर्सिटी के मुताबिक, युवा उम्र तक सोने की करवट से शरीर को कोई खास नुकसान नहीं होता है. इसका कारण है कि इस उम्र तक पाचन तंत्र बहुत मजबूत रहता है और इम्यूनिटी भी बूस्ट रहती है. हालांकि, यदि इस उम्र में भी पाचन संबंधी परेशानियां हैं या बैक पेन संबंधी समस्याएं हैं तो सोने की करवट से इन परेशानियों पर फर्क पड़ सकता है. इसलिए रिपोर्ट में कहा गया है कि टीनएज से ही यदि हम करवट लेकर सोएं तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बेहतर है. करवट लेकर सोना हर हाल में पेट के बल सोने से कहीं ज्यादा फायदेमंद है. वहीं अगर पीठ पीछे कर यानी पीठ बिस्तर की तरफ हो, तो वो करवट भी हेल्थ के लिए बेहतर है. अब अगर करवट में किस करवट सोना ज्यादा फायदेमंद है, यह जानना भी जरूरी है.

बाईं करवट सोने से ज्यादा फायदा
हेल्थलाइन की खबर के मुताबिक, बाईं करवट सोना हेल्थ के लिए हर हाल में सही है. सोने की पोजीशन का सीधा संबंध हमारी हेल्थ से है. हम किस करवट सो रहे हैं, यह सीधे हमारे दिमाग से लेकर हमारी आंत तक को प्रभावित करती है. विज्ञान भी मानता है कि बाईं करवट सोने से कई तरह के फायदे हैं. ऊपर से हमारी बॉडी सुव्यवस्थित दिखाई देती है, लेकिन अंदर से हमारे शरीर के अंग इतने सुव्यवस्थित नहीं रहते, इसलिए हम अपने शरीर को किस तरह से रखते हैं, इसका असर हमारे पूरे शरीर पर पड़ता है. सबसे ज्यादा असर पेट के मूवमेंट पर पड़ता है. जिन लोग पेट से संबंधित परेशानियां हैं, उनके लिए सोने की करवट बहुत मायने रखती है. जब आप रात में लेफ्ट करवट सोते हैं तो गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से आंत का मूवमेंट नीचे की तरफ होता है और इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर का वेस्ट आसानी से बाहर आ जाता है.

लेफ्ट साइड सोने के फायदे

 

1.डाइजेशन होता है मजबूत-लेफ्ट साइड सोने से डाइजेशन में बहुत मदद मिलती है. इसमें छोटी आंत आसानी से भोजन को पचाकर बड़ी आंत में पहुंचा देती है. नेचर जर्नल में छपी एक रिसर्च में दावा किया गया कि साइड की तरफ करवट लेकर सोने से हार्टबर्न की समस्या नहीं होती है और अगर होती भी है तो करवट लेकर सोने से जल्दी कम हो जाता है.

2.ब्रेन हेल्थ हेल्दी-अगर आप साइड करवट लेकर सोएंगे तो ब्रेन हेल्थ में मजबूत रहेगा. रिसर्च के मुताबिक साइड करवट लेकर सोने से दिमाग में बने टॉक्सिन शीघ्रता से बाहर निकल जाता है.

3.खर्राटे से राहत-साइड की तरफ सोने से जीभ गले की तरफ नहीं फिसलती, जिसके कारण एयर को पास होने में दिक्कत नहीं होती. अगर करवट लेकर सोने से भी खर्राटा कम नहीं हो रहा है तो इसका मतलब है कि आपको गंभीर दिक्कत है. इसके लिए डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए.

4. ज्वाइंट पर जोर नहीं पड़ता-साइड की तरफ करवट करके सोने से हड्डियों के जोड़ पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता, जिससे बाद में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्याओं का जोखिम कम हो जाता है.

 

इन लोगों को करवट लेकर सोने से होता है फायदा
1.प्रेग्नेंट महिलाओं को साइड करवट लेकर सोने से फायदा होता है.
2.जिन लोगों को एसिड रिफ्लक्स की समस्या है, उन्हें साइड स्लीपिंग से फायदा होगा.
3.बैक-पेन की समस्या से भी राहत मिलती है.
4.बुजुर्गों को साइड करवट सोने से फायदा मिलेगा.





देश में नासूर बन रही डायबिटीज, क्या आप भी कर रहे हैं ये गलती तो हो जाइए सावधान, जानें मधुमेह के लक्षण

Diabetes Risk and Symptoms: डायबिटीज की बात करें तो यह स्लो पॉइजन की तरह लोगों को निगल रही है. आधे लोग तो ऐसे हैं, जो ये मानने को ही तैयार नहीं हैं कि उन्हें डायबिटीज है. आधे लोग जागरूक ही नहीं हैं, लेकिन यह बीमारी धीरे-धीरे दिल, पेट, लिवर, किडनी, आंख और ब्रेन तक को प्रभावित कर रही है और लोगों को अपना शिकार बना रही है. डायबिटीज़ एक महामारी बनती जा रही है. इससे एक बड़ी आबादी को खतरा हो सकता है. इस बीमारी के कारण भारत में स्थिति खराब होती जा रही है. भारत में यह बीमारी महामारी का रूप लेती हुई दिख रही है. देश में 10 करोड़ से ज्यादा लोग इस बीमारी की चपेट में हैं. हाल ही में आईसीएमआर की स्टडी में यह खुलासा हुआ है.

कोरोनाकाल के बाद यह देखा गया है कि लोग लाइफस्टाइल संबंधित बीमारियों से परेशान हैं, क्योंकि पिछले कुछ साल में लोगों ने वर्क फ्रॉम होम को ज्यादा तवज्जो दिया है. आज भी कई लोग ऐसे हैं, जो घर से काम कर रहे हैं, जिसके चलते उनका ज्यादातर वक्त ऑनलाइन स्क्रीनिंग के बीच बीत रहा है. इस वजह से ऐसे लोगों की फिजिकल एक्टिविटी बहुत कम हो गई है.

लोग क्यों हो रहे हैं डायबिटीज से ग्रस्त?
न्यूज़ 18 से बातचीत में डॉ. नीलम बिष्ट ने कहा कि सबसे पहले तो यह समझना बहुत जरूरी है कि डायबिटीज़ लोगों को अपना शिकार क्यों बना रही है? लाइफस्टाइल संबंधित कई बीमारियां हैं, जो धीरे-धीरे लोगों को अपना शिकार बना रही हैं. डॉ. नीलम ने बताया कि यह आंकड़े अपने आप में बहुत खतरनाक हैं. ये आंकड़े ये बता रहे हैं कि देश की आबादी किस खतरे की तरफ पहुंच रही है. 10 करोड़ लोगों को डायबिटीज होना अपने आप में बता रहा है कि जिस तरीके से हम लोग मशीन पर डिपेंडेंट हैं और फिजिकल वर्क नहीं करते, बाहर के खानपान, प्रोसेस्ड फूड पर निर्भर हैं, इन्हीं वजहों से लोगों को यह दिक्कत हो रही है. सबसे बड़ी बात यह है कि जो लोग डायबिटिक हैं, उन्हें यह बात पता ही नहीं है कि वह डायबिटीज के शिकार हो चुके हैं, क्योंकि रेगुलर तौर पर चेकअप नहीं कराते हैं. अगर डायबिटीज लेवल बढ़ा जाता है तो ये लोग इस बात को एक्सेप्ट नहीं करना चाहते की उन्हें यह बिमारी हो गई है.

क्या है डायबिटीज बढ़ने की वजह?
डॉ. नीलम ने बताया कि डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसका सीधा असर लाइफस्टाइल पर पड़ता है. आजकाल लोग ज्यादातर तनाव में जीते हैं. रोटी दाल, सब्जी और पोषण से भरपूर खाने के अलावा, लोग पिज्जा, बर्गर जैसी चीजों पर निर्भर हैं. यही धीरे-धीरे उनके लिए जहर बनता जा रहा है. ऐसे ही लोग लापरवाह रहेंगे तो इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर भी पड़ सकता है. बाहर का खाना, मसालेदार, तली हुई चीजों का सेवन आजकल लोगों की डाइट में शुमार हो गया है, जिसके चलते कई बीमारियां होती जा रही हैं. फिजिफल एक्टिविटी ना के बराबर है. लोग टहलते नहीं हैं.

क्या हैं डायबिटीज के लक्षण?
इसके लक्षणों की बात की जाए तो आमतौर पर कोई ऐसे लक्षण नहीं नजर आते. जब शुगर लेवल 300-400 तक रहने लगे, तब आपको लक्षण महसूस होते हैं. ज्यादा नींद आना, थकान महसूस करना, सिर में दर्द रहना, चिड़चिड़ापन होना आदि डायबिटीज के मुख्य लक्षण हैं.

क्या करें, क्या ना करें?
सबसे जरूरी है कि आप अपना वेट कंट्रोल में रखें. हेल्दी और पौष्टिक डाइट लें. डाइट में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट इन सबका एक राइट अमाउंट शामिल हो. योग और एक्सरसाइज करें. शारीरिक रूप से एक्टिव रहें.





भारत में डायबिटीज का विस्फोट! 10 करोड़ से अधिक लोग Diabetes के शिकार, ICMR की स्टडी रिपोर्ट में खुलासा

 

 यूके मेडिकल जर्नल ‘लैंसेट’ में प्रकाशित आईसीएमआर के एक स्टडी के मुताबिक इस वक्त भारत में 101 मिलियन से अधिक लोग डायबिटीज के शिकार हो चुके हैं. जबकि साल 2019 में यह आंकड़ा 70 मिलियन के करीब था. स्टडी में बताया गया कि कुछ राज्यों में आंकड़े स्थिर हो गए हैं. वहीं कई राज्यों में तेजी से बढ़ रहे हैं. स्टडी में बताया गया है कि जिन राज्यों में तेजी से डायबिटीज के मामले बढ़ रहे हैं, वहां इसे रोकने की बहुत जरूरत है.

देश के 15 फीसदी लोग प्री-डायबिटीज के मरीज
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक स्टडी में बताया गया है कि कम से कम 136 मिलियन लोग, यानी कि 15.3 फीसदी लोग आबादी को प्रीडायबिटीज है. गोवा (26.4%), पुडुचेरी (26.3%) और केरल (25.5%) में डायबिटीज का सबसे  उच्चतम प्रसार देखा गया. डायबिटीज का राष्ट्रीय औसत 11.4 फीसदी है. हालांकि स्टडी अगले कुछ वर्षों में यूपी, एमपी, बिहार और अरुणाचल प्रदेश जैसे कम प्रसार वाले राज्यों में डायबिटीज के मामलों के विस्फोट की चेतावनी देता है.

यूपी में प्री-डायबिटीक के मरीज ज्यादा
मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष और अध्ययन के पहले लेखक डॉ रंजीत मोहन अंजना ने कहा, “गोवा, केरल, तमिलनाडु और चंडीगढ़ में मधुमेह के मामलों की तुलना में प्री-डायबिटीज के मामले कम हैं. पुडुचेरी और दिल्ली में, वे लगभग बराबर हैं और इसलिए हम कह सकते हैं कि बीमारी स्थिर हो रही है.”  लेकिन मधुमेह के कम मामलों वाले राज्यों में, वैज्ञानिकों ने प्री-डायबिटीज वाले लोगों की संख्या अधिक दर्ज की है. उदाहरण के लिए, यूपी में मधुमेह का प्रसार 4.8% है, जो देश में सबसे कम है, लेकिन राष्ट्रीय औसत 15.3% की तुलना में 18% प्री-डायबिटिक हैं.

 

31 राज्यों के 1 लाख से अधिक लोगों पर की गई स्टडी
उन्होंने कहा, “यूपी में मधुमेह वाले प्रत्येक व्यक्ति के मुकाबले प्री-डायबिटीज वाले लगभग चार लोग हैं. इसका मतलब है कि ये लोग जल्द ही मधुमेह रोगी बन जाएंगे. मध्य प्रदेश में, डायबिटीज के एक तो प्री-डायबिटीज के तीन लोग हैं. वहीं “सिक्किम एक अपवाद की तरह है, जहां मधुमेह और पूर्व-मधुमेह दोनों का प्रसार अधिक है. हमें कारणों का अध्ययन करना चाहिए.” इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के समर्थन से डॉ. मोहन के मधुमेह विशेषज्ञ केंद्र द्वारा संचालित अध्ययन 31 राज्यों के 113,000 लोगों पर आधारित था.





Cracked Heels Tips | फटी एड़ियों से हैं बड़े परेशान, तो ये घरेलू नुस्खे दिलाएंगे इससे निजात, एड़ियां बनेंगी नर्म, गुलाबी और कोमल, आज़मा कर देखें

 

फटी एड़ियों से हैं बड़े परेशान, तो ये घरेलू नुस्खे दिलाएंगे इससे निजात, एड़ियां बनेंगी नर्म, गुलाबी और कोमल, आज़मा कर देखें

Kanchan Sharma

अक्सर देखा गया है कि महिलाएं फटी एड़ियों से ज्यादा परेशान रहती हैं ये न सिर्फ लुक को बिगाड़ती हैं बल्कि क्रैक हील्स के चलते ऐसे फुटवेअर्स पहनना भी उनके लिए मुश्किल हो जाता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान है तो चिंता न करें। क्योंकि आज हम आपके लिए कुछ घरेलू नुस्खे लेकर आए है जिनकी मदद से आप फटी एड़‍ियों से जल्द छुटकारा पा सकते हैं। एड़ियां बन सकती हैं नर्म, गुलाबी और कोमल। आइए जानें इस बारे में।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, रात को सोने से पहले नारियल के तेल को हल्का गर्म कर फटी हुई एड़ियों पर लगाएं और फिर जुराबें पहनकर सो जाएं। सुबह उठकर पैरों को साफ पानी से धो लें। ऐसा रोज करने से आपकी एड़ियां मुलायम हो जाएंगी।

फटी एड़ियों को ठीक करने के लिए पके हुए केले का भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए बस आप मसले हुए पके केले को अपनी फटी हुई एड़ियों पर लगाएं और 15 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। इसके बाद अपनी एड़ियों को साफ पानी से साफ कर लें।

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हल्दी और नीम के पत्तों में मौजूद एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण आपकी फटी एड़ियों की समस्या को खत्म कर सकती है। इसके लिए नीम की पत्तियों का पेस्ट बना लें। फिर इस पेस्ट में हल्दी पाउडर मिला लें। रोजाना इसका इस्तेमाल करने से आपको जरूर लाभ मिलेगा।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि, फटी एड़ियों को ठीक करने के लिए आप एलोवेरा और चीनी का भी स्क्रब बना सकते हैं। फटी एड़ी पर लगाने के लिए एलोवेरा को शहद के साथ भी मिलाया जा सकता है। फटी हुई एड़ियों के लिए आप सेंधा नमक का भी इस्तेमाल कर सकती है। इसके लिए एक टब में गर्म के साथ नमक डाल दें और अपने पैर को उसमें कुछ देर तक डुबोए रखें।