बेहद करामाती हैं अरबी (Taro) के पत्ते, शरीर में पोषक तत्वों की कमी को तो पूरा करते हैं, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में भी असरदार

 

Taro Leaves To Control Cholesterol: खराब लाइफ स्टाइल और जंक फूड सेहत पर सीधा असर कर रहा है. ये हमारे शरीर मे कई गंभीर बीमारियों को बुलावा देने के लिए काफी है. इन्हीं बीमारियों में एक है कोलेस्ट्रॉल. कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 200 मिग्रा/डीएल से कम रहना ही बेहतर माना जाता है. जबकि इसके गंभीर होने पर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है और इस परेशानी से आज ज्यादातर लोग जूझ रहे हैं. हमारे लिए बेहतर होगा कि कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ने से पहले ही कंट्रोल कर लिया जाए. हालांकि एक्सपर्ट इसको कंट्रोल करने के लिए बेहतर खान-पान की सलाह देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ हरे पत्ते भी इस बीमारी को कंट्रोल करने में असरदार हो सकते हैं. जी हां, हम ऐसे ही हरे पत्ते अरबी (Taro) के पत्ते की बात कर रहे है. जो हमारे शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करते हैं. साथ ही इनका सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल कट्रोल रहता है. आइए जानते हैं अरबी के पत्ते सेहत के कैसे फायदेमंद.

फायदेमंद कैसे

अरबी के पत्ते एंटीऑक्‍सीडेंट, विटामिन सी, लो कार्ब, लो कैलोरी, हाई फाइबर आदि के अच्छे स्रोत होते हैं. इसके चलते ये दिल का अच्छे से ख्याल रखते हैं. इनका सेवन करने से हार्ट हेल्‍दी रहता है, साथ ही इम्‍यूनिटी भी बूस्‍ट होती है. इनका इस्तेमाल बढ़ते वजन को रोकने और स्किन के लिए भी किया जाता है.

पुराने पत्ते अधिक सेफ

अरबी के पत्ते नए के मुकाबले पुराने अधिक फायदेमंद होते हैं. हालांकि अरबी के पत्ते खाने से इस बात का जरूर ध्यान रखें कि सब्जी पूरी तरह से पकी हुई हो. क्योंकि कच्चे पत्ते सेहत के लिए अधिक नुकसानदायक होते हैं. बता दें कि, इसमें हाई ऑक्‍सालेट कंटेंट होता है, जो किडनी स्‍टोन की समस्‍या को ट्रिगर कर सकता है. हालांकि कई हरी पत्तेदार साग-सब्जियों में ऑक्‍सालेट कंटेंट होता है, लेकिन उनमें इसकी मात्रा बहुत ही कम होती है.

कोलेस्‍ट्रॉल लेवल करता है कंट्रोल

अरबी के पत्तों का सेवन करने से कोलेस्‍ट्रॉल लेवल कंट्रोल रहता है. एक्सपर्ट इसको कई तरह से खाने की सलाह देते हैं. इसके लिए आप अरबी के पत्ते को धोकर, सुखाकर और पीसकर पाउडर बना लें और रोजाना सुबह या शाम में दूध या पानी में मिलाकर पिएं. इसके अलावा इसकी सब्जी भी पका कर खाई जा सकती है. ऐसा करने से कोलेस्ट्रॉल को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है.

इसका रखें विशेष ध्‍यान

अरबी के पत्तों का इस्तेमाल करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. बता दें कि, अरबी के पत्ते खाने के लिए प्रयोग करें तो उन्‍हें कम से कम आधा घंटा उबालना बेहद जरूरी है. यदि आप इसे बेक करें तो कम से कम 1 घंटा बेक करना जरूरी है. ऐसा करने से हानिकारक कीटों का खात्मा हो जाता है.





शुद्ध मिठाई कौन सी है,जिसमें मिलावट नहीं की जा सकती है

 

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बाजार में मिलावटी मिठाइयों की भरमार है लेकिन जब हमारा मिठाई खाने का मन होता है तो हमें इन मिठाइयों को ही खाना पड़ता है। मावा से बनने वाली मिठाई हो या फिर छेने की मिठाई, सभी में हलवाई मिलावट कर देते हैं। अगर आप भी ये जानना चाहते हैं कि कौन सी ऐसी मिठाई है, जिसमें मिलावट नहीं की जा सकती है? तो इसका जवाब है पेठा (Petha), ये एक ऐसी मिठाई है जिसे बनाते समय कोई भी मिलावट नहीं की जा सकती है। पेठा भूरा नाम के सब्जी से बनता है जिसे इंग्लिश में Ash Gourd कहा जाता है। मीठा पेठा जिस भूरा नाम की सब्जी से बनता है उसके अनगिनत फायदे हैं।

पेठा खाने के फायदे

गर्मी के मौसम में अगर आपका मीठा खाने का मन होता है तो आप पेठा मिठाई खा सकते हैं। आगरा का पेठा दुनियाभर में मशहूर है, इसे कई दिनों तक बिना फ्रिज के भी स्टोरी किया जा सकता है। गर्मी के मौसम में पेठा शरीर को ठंडा रखता है और एनर्जी भी देता है।

bina milawat ki mithai

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सफेद पेठे के फायदे (Health Benefits Of Ash Gourd)

 

    1. सफेद पेठा औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसमें मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, जिंक, आयरन, कैल्शियम और विटामिन सी की भरपूर मात्रा पाई जाती है। 

 

    1. सफेद पेठे का जूस सुबह के समय खाली पेट पीने से पेट साफ होता है और पेट संबंधी बीमारियां भी कम होती हैं।

 

    1. पेठे का जूस पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है।

 

    1. सफेद पेठा आयरन की कमी पूरी करता है और इम्यूनिटी बूस्ट करने में भी मददगार है।

 

    1. सफेद पेठा कब्‍ज (Constipation) की समस्‍या खत्म करता है।

 

    1. सफेद पेठे के रस में हींग मिलाकर पीने से पथरी की समस्या से राहत मिलती है।

 

    1. पीलिया की बीमारी में सफेद पेठा फायदेमंद होता है।

 

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)





फिटकरी को बालों में कैसे लगाएं

 

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alum for hair growth

घने और लंबे बालों की इच्छा हर कोई रखता है लेकिन ये सपना हर किसी का पूरा नहीं होता। गर्मी के मौसम में बाल और तेजी से झड़ने लगते हैं तो इस मौसम में बालों का खास ख्याल रखना पड़ता है। बालों की ग्रोथ (hair growth) के लिए लोग बाजार से महंगे महंगे प्रोडक्ट लेकर आते हैं लेकिन उनसे कुछ खास रिजल्ट नहीं मिलता है। ऐसे में हम आपके लिए लाए हैं एक ऐसी चीज जो सस्ती भी है और इसके इस्तेमाल से आपके बाल अच्छे होंगे और उनकी ग्रोथ भी होगी। हम बात कर रहे हैं फिटकरी की, जो कि लगभर हर घर में होती है। फिटकरी के अनगिनत फायदे हैं, यहां हम आपको बालों के लिए फिटकरी के इस्तेमाल का तरीका बता रहे हैं।

बालों की ग्रोथ के लिए फिटकरी (alum for hair growth)

alum for hair growth

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alum for hair growth

पोटेशियम और सोडियम से भरपूर फिटकरी बालों की ग्रोथ बढ़ाने में मददगार साबित होती है। बालों की ग्रोथ अच्छी करने के लिए आप फिटकरी के पाउडर को नारियल तेल में मिलाकर लगाएं। इस मिक्स से न सिर्फ आपके बालों की ग्रोथ अच्छी होगी बल्कि आपके बाल काले भी होंगे। फिटकरी और नारियल का तेल स्कैल्प के पोर्स को खोलने में मदद करता है। जिससे बाल हेल्दी होते हैं। इसके अलावा आप फिटकरी को पानी में मिलाकर इससे बाल भी धो सकते हैं।

डैंड्रफ में फिटकरी का इस्तेमाल

बैक्टीरियल गुण (Anti Bacterial)  से भरपूर फिटकरी आपकी स्कैल्प की सफाई करने में फायदेमंद साबित होगी। इसके लिए आप फिटकरी को रात में एक मग पानी में भिगाकर रख दें। अगर आपके पास फिटकरी का पाउडर है तो 3 चम्मच पाउडर को एक मग पानी में मिक्स करें और फिर इस पानी को स्कैल्प पर डालकर अच्छे से रगड़ते हुए साफ करें। आखिर में सादा साफ पानी से पूरे सिर को अच्छे से धोएं। इस तरह से फिटकरी का इस्तेमाल करने से स्कैल्प की अच्छे से सफाई होगी और डैंड्रफ की दिक्कत भी खत्म होगी। 

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)

 





हाथ-पैर सुन्न होना हो सकता है इन बीमारियों के लक्षण, तुरंत कर लें निदान

 

 

Numbness is sign of Diabetes alcohol disorder: कई बार हाथ-पैर सुन्न हो जाता है. इन जगहों पर कुछ महसूस नहीं होता. कुछ समय बाद अपने आप यह सही भी हो जाता है. इसलिए अधिकांश लोग हाथ-पैर में सुन्नपन को नजरअंदाज कर देते है. लेकिन हाथ-पैर का सुन्न होना कई बीमारियों के संकेत हो सकते हैं. अगर शुरू में इसकी पहचान कर ली जाए तो इलाज कराने में आसानी होता है. दरअसल, सुन्नापन नर्व के डैमेज होने, दब जाने या इरीटेशन होने की वजह से हो सकता है. इससे एक सिंगल नर्व भी प्रभावित हो सकता है और बहुत सारे नर्व भी. यह बैक में स्लिप डिस्क के कारण भी हो सकता है और कार्पेल टनेल सिंड्रोम के कारण भी हो सकता है.

सूत्रो से प्राप्त जानकारी के मुताबिक कई बीमारियां और कीमोथेरेपी या अल्कोहल के कारण बने टॉक्सिन से भी हाथ-पैर में सुन्नापन आ सकता है. इसमें नर्व फाइबर पैर तक प्रभावित हो जाता है. ऐसे में जैसे ही नर्व डैमेज होता है वैसे पैर तक सुन्नापन होने लगता है.



सुन्नापन्न होता क्यों है

हमारे शरीर में 96 हजार किलोमीटर का नर्व यानी तंत्रिका तंत्र होता है जिससे हर तरह के सिंग्लन पूरे शरीर में इधर से उधर होता है. आमतौर पर दिमाग और स्पाइल कॉर्ड के बाहर वाले नर्व जब डैमेज होता है तब सुन्नापन होता है. इसमें प्रभावित नर्व सिग्नल नहीं पहुंचाता है जिसके कारण हाथ, पैर, बांह और पैरों की ऊंगलियों में कुछ भी महसूस नहीं होता है. कुछ सुन्नापन दर्द के साथ भी महसूस हो सकता है जबकि अधिकांश सुन्नापन्न में कुछ भी महसूस नहीं होता. हालांकि इस तरह के सुन्नापन जीवन के लिए घातक स्थिति नहीं होती है जैसा कि स्ट्रोक और ट्यूमर में होता है.

इन बीमारियों के कारण हो सकता है सुन्नापन्न

हाथ और पैर में सुन्नापन्न के लिए कई बीमारियां जिम्मेदार हो सकती है. यह डायबिटीज के कारण भी हो सकता है. डायबिटेकि न्यूरोपैथी में ब्लड शुगर की अधिकता नर्व को डैमेज करने लगता है. इसके अलावा अल्कोहल यूज डिसॉर्डर, एमिलॉयडोसिस, टूथ डिजीज, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, पोरफायरिया, रेनॉड्स डिजीज जैसी लाइफस्टाइल से संबंधित बीमारियों में भी नर्व डैमेज हो जाता है जिसके कारण हाथ-पैर में सुन्नता आ जाती है. इसके अलावा ब्रेन ट्यूमर और स्ट्रोक की स्थिति में भी हाथ-पैर सुन्न होने लगता है. लेप्रोसी, लाइम डिजजी, सिफलिस, कीमोथेरेपी और एचआईवी की दवा के साइड इफेक्ट के कारण भी हाथ-पैर में सुन्नापन्न आ जाता है. अगर शरीर में विटामिन बी 12 की कमी हो जाए, तो भी हाथ-पैर में सुन होने के लक्षण देख सकते है.


कैसे करें इसका इलाज

जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि हाथ-पैर में सुन्नापन के कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं. इसलिए खुद से यह नहीं समझा जा सकता कि किस बीमारी की वजह से यह हो रहा है. ऐसे में डॉक्टर अन्य लक्षणों के आधार पर कुछ टेस्ट की सलाह देते हैं, इस आधार पर पता लगाया जा सकता है कि हाथ-पैर में सुन्नापन के क्या कारण है. इसलिए अगर हाथ-पैर में सुन्नापन या झनझनाहट बार-बार हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.





Yoga Shakti:ऑक्सीजन के बिना आधे घंटे तक जीवित रहे रिटायर्ड साइंटिस्ट, चौंक गए डॉक्टर

 

international yoga day 2023 Retired scientist survived for half an hour without oxygen

लाइव डेमो देते साइंटिस्ट

 

किसी को दो से तीन मिनट ऑक्सीजन न मिले तो उसकी मृत्यु हो जाती है और करीब छह मिनट में ब्रेन डेड हो जाता है, लेकिन आरआर कैट से रिटायर्ड 71 वर्षीय साइंटिस्ट वेदप्रकाश गुप्ता का दावा है कि वे आधा घंटा बिना ऑक्सीजन के रह सकते हैं। अपना दावा साबित करने के लिए उन्होंने मंगलवार शाम अभिनव कला समाज में लाइव डेमो दिया। गुप्ता ने बताया, डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए 25 साल पहले मेडिटेशन और योग करने लगा। मैंने योग को विज्ञान में कन्वर्ट करना शुरू किया। वेदांत व श्रीमद् भगवद् गीता पढ़ी। इनमें विज्ञान है, जिसे ऋषि-मुनियों ने खोजा था। इस तरह न्यूरो साइंस और वेदांत को मिलाकर योग विज्ञान की खोज की। इसके अन्तर्गत बनाए उपकरण ब्रीवो मीटर व डब्ल्यू बीसी मॉनिटर है। ब्रीबो ध्यान को मोबाइल स्क्रीन पर रेकॉर्ड कर सकते हैं। डब्ल्यू बीसी मॉनिटर से भी ध्यान को रेकॉर्ड किया जाता है।

ध्यान के जरिए पैदा होती है ऑक्सीजन

 

अभिनव कला समाज में मीडियाकर्मियों से चर्चा में वेदप्रकाश गुप्ता ने कहा, जब मैं समाधि में चला जाता हूं तो मेरे ब्रेन में ध्यान के जरिए ऑक्सीजन पैदा होती है और मुझे बाहरी ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ती। मैंने नाइट्रोजन चैंबर बनाया है। यह सिम्पल बॉक्स है, जिसमें समाधि के दौरान नाइट्रोजन भर देते हैं। इसमें ऑक्सीजन नहीं है, इसे साबित करने के लिए ऑक्सीजन मॉनिटर लगाया है। इसमें गुप्ता आधा घंटा रहे। इस दौरान उनका ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल और हार्ट रेड सामान्य रहा। इस दौरान वहां मौजूद वैज्ञानिक एवं डॉक्टर ने इनके दावों की पुष्टि की कि बाहर से ऑक्सीजन न मिलने पर भी उनका शरीर सामान्य रूप से कार्य कर रहा है।

उन्होंने यह भी कहा

 

कल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस international yoga day 2023 है और इस दिन पूरे विश्व में करोड़ों लोग योगासन और प्राणायाम करेंगे। मगर योग का एक दूसरा पहलू भी है जो हजारों वर्ष पहले विलुप्त हो गया था। इसी योग को करके प्राचीनकाल में ऋषि हजारों वर्ष जीवित रहते थे और कई आध्यात्मिक शक्तियां प्राप्त करते थे। स्वामी विवेकानंदजी ने अमेरिका जाकर जिस योग का प्रचार किया और आध्यात्मिक ज्ञान को पश्चिम तक पहुंचाया वह योग भी यही था। आज मैं इसी योग की शक्ति का आपसे परिचय कर रहा हूं। प्रचलित योग सिर्फ 100-125 वर्ष पुराना है। जबकि यह योग प्राचीनकाल से चला आ रहा है और पुराणों के अनुसार भगवान शिव ने योग की शुरुआत की इसलिए भगवान शिव का एक नाम ‘आदि योगी’ भी है।

प्रचलित योग का कोई आधार नहीं है, इस बात का प्रमाण यह है कि प्रचलित योग करने के लिए कोई प्राचीन और प्रमाणित पुस्तक नहीं है। योग साहित्य के अनुसार प्रचलित योग, करीब हजार वर्ष पुराने ‘हठ योग’ से निकला है, जिनका श्रेय स्वामी गोरक्षनाथ को जाता है। ‘हठ योग’ का मतलब बलपूर्वक योग है, जिसके अन्तर्गत बहुत कठिन शरीर की मुद्राओं में आसान लगाया जाता था। 25 वर्ष की गहन योग साधना के बाद मैं योग की अंतिम समाधि तक पहुंचा हूं, जिसे पतांजलि योग सूत्र में र्निबीज असम्प्रज्ञात समाधि कहा गया है। इसी समाधि से मनुष्य में योग की इतनी शक्ति आ जाती है कि उसे जीने के लिए बाहर की ऑक्सीजन की आवश्यकता ही नहीं पड़ती जैसा कि इस प्रयोग में दिखाया गया। 

 

इस प्रकार मैंने ‘पतांजलि योग सूत्र’ द्वारा योग साधना को सरल ही नहीं किया अपितु योग को एक विज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा प्रणाली में शामिल किया जा सकेगा, क्योंकि अन्य विज्ञान के विषयों की तरह योग विज्ञान भी पूर्ण रूप से धर्मर्निपेक्ष अभ्यास है। ऐसा होने पर विश्व के समस्त लोग योग के आश्चर्यचकित और उपयोगी प्रभाव का लाभ लेकर मन की शांति के साथ अपने जीवन स्तर को भी सुधार सकेंगे।





बालों को नई चमक देने और खूबसूरत बनाने के लिए मुल्तानी मिट्टी की ‘ऐसी’ हेयर पैक बनाकर करें इस्तेमाल, जानिए इस ऑर्गेनिक हेयर पैक को बनाने का तरीका

 

बालों को नई चमक देने और खूबसूरत बनाने के लिए मुल्तानी मिट्टी की ‘ऐसी’ हेयर पैक बनाकर करें इस्तेमाल, जानिए इस ऑर्गेनिक हेयर पैक को बनाने का तरीका

Kanchan sharma

Bhopal: गर्मियों में स्किन के साथ बालों को भी खास देखभाल की जरूरत होती है। नहीं तो धूल-मिट्टी के संपर्क में आने से बाल फ्रिजी, ड्राई, ऑयली, डैंड्रफ आदि समस्याओं से भर जाते हैं। ऐसे में आप किसी हेयर केयर प्रोडक्ट की जगह मुल्तानी मिट्टी से अलग-अलग हेयर पैक बनाकर लगा सकते हैं। ये बालों को जड़ों से पोषित करके उसे लंबा, घना, मजबूत, मुलायम व शाइनी बनाने में मदद करेंगे। आइए जानें मुल्तानी मिट्टी से हेयर पैक बनाने व लगाने का तरीका

सामग्री

मुल्तानी मिट्टी का पाउडर 4 चम्मच

एलोवेरा जेल- 5 चम्मच,

दही- 2 चम्मच

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हेयर पैक बनाने और लगाने की विधि

इस हेयर मास्क को बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़ा कटोरा लें, अब इसमें मुल्तानी मिट्टी का पाउडर डालें और एलोवेरा जेल और दही मिलाएं। सभी को अच्छे से मिक्स करें, जब तक की चिकना पेस्ट न बन जाए। इस पैक को अपने पूरे बालों और स्कैल्प पर लगाएं। इस मास्क को आप ब्रश की सहायता से भी लगा सकते हैं।

जब पूरे बालों में पैक लग जाए तो इसे शॉवर कैप से 30 मिनट तक ढ़क कर रखें। 30 मिनट के बाद आप इस हेयर मास्क को सादा पानी से अच्छे से साफ कर लें। इस पैक से बालों की कंडीशनिंग होगी। इसके अलावा, मुल्तानी मिट्टी और एलोवेरा से बाल मॉइश्चराइज होंगे। स्कैल्प हेल्दी होगी। इसमें इस्तेमाल हुआ नींबू और एलोवेरा जेल एंटीबैक्टीरियल और एंटी फंगल एजेंट के रूप में काम करेगा।





गर्मी के मौसम में थकान क्‍यों महसूस होती है ज्‍यादा, किस वजह से कम होती है शरीर की ऊर्जा

 

गर्मियों के मौसम में जब तापमान बहुत ज्‍यादा हो जाता है तो अक्‍सर लोगों को काफी थकान महसूस होने लगती है. कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्‍यों होता है कि बढ़ते तापमान के साथ थकान का अहसास भी क्‍यों बढ़ता जाता है. क्‍या ये गर्म मौसम के कारण बहुत ज्‍यादा पसीना निकलने के कारण शरीर में हुई पानी की कमी की वजह से होता है या इसकी कोई दूसरी वजह भी है? गर्मियों में हमारे शरीर को ऐसा क्‍या हो जाता है कि हमें शरीर में बिलकुल ताकत नहीं होने या एनर्जी खत्‍म होने जैसा अनुभव होता है. हम आपको दे रहे हैं आपके मन में उठने वाले ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब.

विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मी के मौसम में बढ़ा हुआ तापमान हमारे शरीर में पानी की कमी करने के साथ ही बॉडी एनर्जी को भी घटाता है. इसीलिए सर्दी और बारिश के मौसम के मुकाबले गर्मियों में लोग ज्‍यादा थका हुआ महसूस करते हैं. यही नहीं, जो लोग ज्‍यादा समय तक धूप में रहते हैं, उनके शरीर को इस दिक्‍कत से निपटने में उतनी ही ज्‍यादा मुश्किल पेश आती है. डॉक्‍टरों के मुताबिक, इसे ही समर फटीग या गर्मियों में होने वाली थकान कहा जाता है. अब सवाल ये उठता है कि क्‍या सिर्फ पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीकर इस समस्‍या से निपटा जा सकता है?

 

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ज्‍यादा गर्मियों में शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए ज्‍यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है.

गर्मियों में क्‍यों महसूस होती है ज्‍यादा थकान
सबसे पहले समझते हैं कि गर्मियों में ज्‍यादा थकान क्‍यों महसूस होती है? इसकी कई वजह बताई जाती हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर आप अपने काम की वजह से लंबे समय तक धूप में रहते हैं तो आपके मेलाटोनिन हॉर्मोन पर बुरा असर पड़ता है. ये असंतुलित हो जाता है. बता दें कि ये हॉर्मोन समय से सोने और जगने के लिए जिम्‍मेदार होता है. अब अगर आपका ये हार्मोन असंतुलित हो जाता है तो आपकी नींद का चक्र बिगड़ जाता है. ज्‍यादा गर्म मौसम में नींद पूरी होने के कारण भी थकान ज्‍यादा महसूस होती है.

गर्मियों में ज्‍यादा पानी क्‍यों पीना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि भीषण गर्मी में ज्‍यादा थकान के लिए शरीर में पानी की कमी होना भी जिम्‍मेदार है. अगर आपके शरीर में कमी की कमी हो जाएगी तो आप पर गर्मी का बुरा असर भी ज्‍यादा ही होगा. इसीलिए डॉक्‍टर्स गर्मी के मौसम में ज्‍यादा पानी पीने की सलाह देते हैं. दरअसल, ज्‍यादा पानी पीने से जब तापमान बढ़ेगा तो पसीना बहने के कारण शरीर में होने वाली पानी की कमी को पूरा किया जा सकेगा. विज्ञान के मुताबिक, पसीना हमारे शरीर के कोर टेम्‍प्रेचर को संतुलन में रखने के लिए यानी शरीर को ठंडा रखने का काम करता है. इसीलिए गर्मियों में ज्‍यादा पसीना आता है. लिहाजा, पसीने के कारण पानी की कमी को पूरा करने के लिए ज्‍यादा पानी जरूरी हो जाता है.

 

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डॉक्‍टर्स गर्मियों में रसीले फल, ज्‍यादा पानी और रसेदार सब्जियां खाने की सलाह देते हैं.

गर्मी से बचने को खाना चाहिए कैसा भोजन?
अब सवाल ये उठता है कि सिर्फ ज्‍यादा मात्रा में पानी पीने से सबकुछ ठीक रहेगा. डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पर विशेषज्ञ कहते हैं कि ज्‍यादा गर्मी से निपटने के लिए केवल पानी पीने से ही काम नहीं वलेगा. इसके लिए सही मात्रा में अच्‍छा भोजन लेना भी जरूरी है. गर्मियों के मौसम में ज्‍यादा कार्बोहाइडेड वाली चीजें खाने से परहेज करना चाहिए. दरअसल, ऐसा भोजन पचने में काफी समय और शरीर की बहुत ज्‍यादा ऊर्जा खर्च हो जाती है. वहीं, ऐसे भोजन को पचाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और गर्मी में शरीर को ठंडा रखने में परेशानी होती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्म मौसम में ऐसी चीजें भी नहीं खानी चाहिए, जो शरीर से ज्‍यादा मात्रा में पानी निकालती हैं. ऐसी चीजों में अल्‍कोहल शामिल है. डाइट में सलाद, रसीले फल और रसेदार सब्‍जि‍यों को शामिल करना चाहिए.





तपती गर्मी में पिघलने लगी है स्किन? ये 4 चीजें चेहरे पर लगा देंगी सुरक्षा कवच

 

पिछले एक महीने से गर्मी कहर ढा रही है. तापमान 45 को भी पार कर गया है. लेकिन लोगों को अपना काम करना ही पड़ता है. चाहे कितनी भी तेज धूप हो, आसमान से आतिश निकल रही हो लेकिन पेट के लिए लोगों को काम करना ही पड़ता है. जब हम तेज धूप में बाहर जाएंगे तो सबसे पहले हमारी स्किन पर यह असर डालेगी. अगर स्किन टैन हो जाती है तो इसकी रंगत बिगड़ जाती है. वैसे तो तेज धूप में बाहर निकलने से हर किसी की स्किन खराब होती है लेकिन महिलाओं को इसका खामियाजा ज्यादा भुगतना पड़ता है.

वैसे तेज धूप में बाहर निकलने से बाहर ज्यादा पानी पीना या नारियल पानी पीना जैसे घरेलू नुस्खे काम जरूर आते हैं लेकिन यदि तेज धूप हो तो स्किन डैमेज होने लगता है. इस स्थिति में घरेलू नुस्खे से कैसे चेहरे को पहले जैसा चमकाया जाए यह जानना जरूरी है. हम यहां कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जो झुलसती गर्मी में भी आपकी त्वचा को जवां बनाए रखने में मदद करेंगे.

गर्मी से स्किन को ऐसे बचाएं

1.ठंडे पानी से चेहरा साफ करें-एनडीटीवी के मुताबिक गर्मी के मौसम में अक्सर अपने चेहरे को ठंडे पानी से वॉश करें. इससे धूप में निकलने पर जो पसीना और डस्ट स्किन में चिपकता है, वह बाहर निकल जाता है. अगर आप इसके लिए ठंडा दूध में कॉटन बॉल को डूबाकर फिर इसे चेहरे पर लगाकर डस्ट को निकालें तो ज्यादा बेहतर होगा.

2.बेसन और दूध का पेस्ट-गर्मी के दिनों चेहरे को तेज धूप के असर को खत्म करने के लिए चेहरे पर बेसन और दूध का पेस्ट बना लें. इसमें हल्दी और नींबू मिला दें. इस पेस्ट को चेहरे पर रब करें. 10 मिनट तक इसे चेहरे पर लगा रहने दें. इसके बाद इसे साफ करें. बदलाव तुरंत दिखेगा. दूध की जगह मलाई का इस्तेमाल और बेहतर रिजल्ट लाएगा.

3. मूल्तानी मिट्टी और रोज वाटर-गर्मी के दिनों में चेहरे की टेनिंग खत्म करने के लिए मुल्तानी मिट्टी और चंदन पाउडर में रोज वाटर मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें. इसे चेहरे पर लगाकर सूखने तक छोड़ दें. इसके बाद साफ कर लें. यदि स्किन मैच्योर है तो चंदन पाउडर में रोजवाटर के साथ दही और हल्दी को मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें और स्किन पर लगाएं. सूखने के बाद इसे साफ कर लें. चेहरा चमक उठेगा.

 

4. छाछ और शहद-छाछ और शहद स्किन के लिए बेहतरीन मॉइश्चराइजर है. यदि स्किन नॉर्मल है तो छाछ से चेहरे को साफ करें. इसे 10 मिनट तक लगाकर छोड़ दें, इसके बाद साफ कर लें. यदि स्किन ऑयली है तो शहद का लेप लगा लें और 10 मिनट तक छोड़ दें. इसके बाद चेहरा साफ कर लें. अपने आप स्किन मुलायम लगने लगेगी.

5. दूध और चने का आटा पेस्ट-यदि गर्मी में ज्यादा स्किन टैन हो गया है तो चने के आटे को कच्चा दूध में मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें. इसमें लेमन जूस मिला दें. लेमन जूस अपने आप में नेचुरल ब्लीच है. यह टैनिंग को हटा देता है. इस तरह यह पेस्ट स्किन की टैनिंग को पल पर में दूर कर देता है.





तनाव खत्म कैसे करें

 

turmeric water benefits- India TV Hindi

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turmeric water benefits

आज के समय में हर कोई ऑफिस में काम और बिजनेस में होने वाली समस्याओं के कारण स्ट्रेस में रहता है। स्ट्रेस के कारण एंग्जाइटी की समस्या भी शुरू हो जाती है। अगर आप अपनी पर्सनल लाइफ और वर्क लाइफ को मैनेज नहीं कर पा रहे हैं तो ये समस्या समय से साथ और बढ़ सकती, जिससे कई गंभीर बीमारियां होने का चांस बढ़ जाता है। तनाव और एंग्जाइटी की समस्या को दूर करने में आपकी किचन में रखा एक मसाला बेहद कारगर साबित (Which food reduce stress) हो सकता है। हम बात कर रहे हैं हल्दी की, जिसे पानी में मिलाकर पीने (turmeric water) से कई समस्याएं कम हो सकती हैं।

रोज हल्दी वाला पानी पीने से क्या होता है? (turmeric water benefits)

हल्दी पानी से स्ट्रेस कम होगा

शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए हल्दी फायदेमंद साबित होती है। हल्दी का पानी पीने से एंग्‍जाइटी और स्‍ट्रेस का लेवल कम होता है। इसके साथ ही इस पानी से मूड अच्छा रहता है और लोग डिप्रेशन का शिकार बनने से भी बच जाते हैं। हल्दी से कई संक्रामक बीमारियों का बचाव भी होता है। 

त्वचा के लिए हल्दी पानी का फायदा

1 गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से त्वचा पर भी निखार आता है। हल्दी एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होती है जो कि स्किन को हेल्दी बनाने में मददगार साबित होता है। हल्दी पानी (turmeric water use) के सेवन ने स्किन में चमक आती है।

सूजन में हल्दी पानी के फायदे

नेचुरल एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी हल्दी को पानी के साथ पीने से शरीर में सूजन की समस्या से भी राहत मिलती है। इसके साथ ही अगर आप घुटनों के दर्द से पीड़ित रहते हैं तो इससे भी छुटकारा मिल सकता है। 

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)





Eco-friendly Lipstick | होंठों को मिले बेमिसाल चमक, ईको-फ्रेंडली लिपस्टिक का क्रेज

 

होंठों को मिले बेमिसाल चमक, ईको-फ्रेंडली लिपस्टिक का क्रेज

लिपस्टिक इसके बिना आपका मेकअप पूरा नहीं होता है। लिपस्टिक लगाने से न सिर्फ आपके होठ खूबसूरत दिखाई देते हैं, बल्कि आपकी लुक भी और ज्यादा ब्यूटीफुल हो जाता है। आजकल महिलाओं और यंग लड़कियों में ईको-फ्रेंडली लिपस्टिक का क्रेज है। पर्यावरण का ध्यान रखने वाली कलरबार रिफिलेबल लिपस्टिक, ‘टेकमीएजआईएम’ लिपस्टिक 100 फीसदी अल्ट्रा-प्रीमियम रिसाइकिल करने योग्य है।

यह लिपस्टिक क्रीम और मैट में 20 शेड्स में आती है। क्रीम वेरिएंट में 12 आकर्षक रंग हैं, जबकि मैट वेरिएंट में 8 शानदार रंग हैं। इसे बार-बार रिफिल कर लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके उपयोग से लगभग दो प्लास्टिक बोतलों के बराबर प्लास्टिक का उपयोग कम किया जा सकता है जो पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति एक पहल है।

विटामिन ई, जोजोबा ऑयल और शिया बटर के पोषण से भरपूर, यह वीगन लिपस्टिक लगाने में आसान है और सिर्फ एक बार में ही होंठों को बेमिसाल चमक देती है। इस रेंज की हर लिपिस्टिक बहुत खूबसूरत दिखने के साथ- साथ लंबे समय तक होठों पर टिकी रहती है।