इन 5 पत्तियों को चबाने से ही रक्त शर्करा निकल आएगा बाहर, बढ़ जाएगा इंसुलिन का प्रोडक्शन, डायबिटीज होगा जड़ से खत्म

4 Leaves Reduced Blood Sugar:खराब लाइफस्टाइल डायबिटीज का कारण है. इस खराब लाइफस्टाइल के लिए अनहेल्दी फूड खाना, गलत तरीके से खाना और फिजिकल एक्टिविटी नहीं करना जिम्मेदार है. पर इन्हीं आदतों में सुधार कर डायबिटीज को जड़ से खत्म किया जा सकता है. अगर डायबिटीज प्री-डायबिटीज स्टेज में हैं तो कुछ देसी पत्तियों को चबाकर ही ब्लड शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है. पहले इन पत्तियों से आयुर्वेद में इलाज किया जाता था लेकिन अब विज्ञान ने भी इसे साबित किया है. आइए जानते हैं कि कौन सी पत्तियों को चबाने से रक्त शर्करा का स्तर नहीं बढ़ेगा.

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1.एलोवेरा के पत्ते- एनसीबीआई यानी अमेरिकी नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन की रिसर्च के मुताबिक एलोवेरा में हाइपोग्लासेमिक गुण होता है जो ब्लड शुगर को कम करता है. एलोवेरा के पत्तों को सुबह खाली पेट खाने से इंसुलिन का उत्पादन बढ़ सकता है.

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2. शरीफा के पत्ते-(Annona squamosa)-शरीफा के पत्ते को चबाने से ब्लड शुगर एकदम घट जाएगा. प्री-डायबेटिक स्टेज में शरीफा के पत्ते को सुबह-सुबह रोजना चबाया जाए तो डायबिटीज जड़ से खत्म हो जाएगा. एनसीबीआई की रिसर्च में शरीफा के पत्तों में एंटी-डायबेटिक गुण को प्रमाणित किया गया है.  Image: Canva

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3.नीम (Azadirachta indica)-नीम एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल होता है लेकिन इसके पत्ते से ब्लड शुगर को भी कंट्रोल किया जा सकताहै. एनसीबीआई की रिसर्च में कहा गया है कि नीम के पत्ते डायबिटीज को भी कंट्रोल कर सकते हैं. Image: Canva

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4. आम-आम स्टोन फ्रूट है. भारतीय संस्कृति में आम का पेड़ बेहद पवित्र माना जाता है. इसकी पत्तियों को कलश के उपर पूजा-पाठ में चढ़ाया जाता है लेकिन इसकी पत्तियां औषधीय गुणों से भी भरपूर है. इसकी पत्तियों में 3 बीटा टेकेक्सारोल और इथाइल एसिलेट कंपाउड होता है हाइपरग्लेसिमिया को कंट्रोल करता है. Image: Canva

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5. तुलसी-तुलसी का पौधा भी हर भारतीय के घरों की शोभा है. इसकी पत्तियां भी बेहद पवित्र होती है. तुलसी में कई औषधीय गुण हैं जिनमें यह एंटी-डायबेटिक भी होता है. तुलसी में हाइपोग्लेसीमिया गुण पाया जाता है जो ब्लड शुगर को नीचे ले आता है. Image: Canva




AIIMS Delhi में यहां रुककर फ्री में कराएं अपने परिजनों का इलाज, मात्र इतने रुपये में मिल जाएगा कमरा, खाना भी मिलेगा सस्ता

New dehli. एम्स दिल्ली (AIIMS, Delhi) में देश के कोने-कोने से लोग इलाज कराने आते हैं. यहां इलाज कराने आने वालों में ऐसे बहुत सारे मरीज और तीमारदार होते हैं, जो होटलों और गेस्ट हाउस (Rooms near AIIMS New Delhi) में रहने में समर्थ नहीं होते. ऐसे लोगों के सामने दिल्ली एम्स में दिखाने के साथ-साथ ठहरने की समस्या रहती है. खासकर बिहार, यूपी, झारखंड, एमपी, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों के मरीज नई दिल्ली, आनंद विहार, पुरानी दिल्ली या हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर ट्रेन से बाहर निकलते ही अपने परिजनों को फोन लगा कर ठहरने के बारे में जानकारी लेने लगते हैं. ऐसे मरीजों और तीमारदारों को बताना चाहते हैं कि एम्स दिल्ली के अगल-बगल में कई धर्मशालाएं, विश्राम सदनें, गेस्ट हाउस के साथ-साथ कई टेंट और समय-समय पर अस्थाई सेंटर भी हैं, जो दूर-दराज से आए मरीजों को फ्री में ठहरने का बंदोबस्त तो करते ही हैं साथ ही खाना और दवा भी मुफ्त में देते हैं.

सबसे पहले बात करते हैं एम्स दिल्ली का राजगढ़िया विश्राम सदन, श्री सांई विश्राम सदन, सुरेका विश्राम सदन का जहां पर आप ओपीडी पर्ची पर डॉक्टरों से लिखवा कर कम से कम 14 दिन ठहर सकते हैं. यहां पर सिंगल रुम के साथ-साथ हॉल में बेड उपलब्ध हैं. एम्स के इन तीन विश्राम सदनों में सिंगल बेड का चार्ज 20 रुपये और डबल बेड वाले रूम का चार्ज 150 रुपये और तीन बेड वाले रूम का चार्ज 225 रुपये लिया जाता है. अगर आदमी ज्यादा हो जाता है तो प्रति आदमी 20 रुपये और लिया जाता है. एम्स के बिल्कुल सामने और सफदरजंग अस्पताल से सटे इस विश्रामालय में फिलहाल 249 मरीजों का रहने बंदोबस्त है, लेकिन अभी 300 मरीज रह रहे हैं. मरीजों के तीमारदार अलग से होते हैं. सुरेका विश्राम सदन को दोबारा से रेनोवेट किया जा रहा है. सुरेका विश्राम सदन में 216 मरीजों का रहने का बंदोबस्त है.

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एम्स दिल्ली का राजगढ़िया विश्राम सदन, श्री सांई विश्राम सदन, सुरेका विश्राम सदन है.

एम्स दिल्ली के पास विश्राम सदनों की संख्या
इसी तरह एम्स ट्रामा सेंटर के पास भी एम्स दिल्ली का ही एक पावर ग्रीड नाम से एक और विश्राम सदन बना है, जिसमें मरीज और तीमारदार रह सकते हैं. पावर ग्रीड कारपोरेशन ने इस धर्मशाला का निर्माण कराया है. इसमें 400 मरीज और तीमारदार आराम से रह सकते हैं. पावर ग्रीड विश्राम सदन में सिंगल बेड के लिए मरीजों से 50 रुपये और एक कमरा के लिए 200 रुपये वसूला जाता है. इस पावर ग्रीड विश्राम सदन के नीचे कैंटीन भी है, जहां सब्सडाइज रेट पर मरीज और परिजन खाना खा सकते हैं.

एम्स के धर्मशाला में आप ऐसे रुकें
आपको बता दें कि एम्स ट्रामा सेंटर के पास ही सीआरपीएफ ने एक अस्थाई विश्राम सदन बना रखा है, जहां पर मरीज और उनके परिजन फ्री में रह सकते हैं. एम्स के विश्राम सदनों में ठहरने के लिए डॉक्टरों से लिखवाना जरूरी होता है. वगैर डॉक्टर के लिखे आप इन विश्राम सदनों में ठहर नहीं सकते हैं. राजगढ़िया, श्री सांई और सुरेका विश्राम सदनों में कुछ दिनों का वेटिंग भी रहता है. लेकिन, आप नाम और नंबर जब लिखावा देंगे तो मैनेजर आपको बेड या रूम खाली होने पर कॉल कर इसकी जानकारी देते हैं. इसके लिए कई एनजीओ भी मरीजों की मदद करती है.

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एम्स के नजदीक गौतम नगर, युसूफ सराय के मंदिर वाली गली, सफदरजंग एनक्लेव और आईएनए मार्केट नजदीक है.

इन धर्मशालों में रहने के साथ-साथ खाना भी फ्री
इसी तरह सफदरजंग अस्पताल का भी एक धर्मशाला है, जहां पर मुफ्त में रहने के साथ-साथ खाने का भी उत्तम प्रबंध है. एम्स में जिन मरीजों को दिखाने में परेशानी होती है या जो मरीज एम्स में नहीं दिखा पाते हैं वह सफदरजंग में दिखा कर उसके धर्मशाला में ठहर सकते हैं. सफदरजंग का धर्मशाला एम्स ट्रामा सेंटर के बिल्कुल सामने है. यह सरोजनी नगर एरिया कहलाता है. यहां पर 65 मरीजों के साथ-साथ उनके एक-एक देखभाल करने वाले लोग ठहर सकते हैं.

एम्स दिल्ली से सटे इन एरिया में आप रुक सकते हैं
एम्स के नजदीक गौतम नगर, युसूफ सराय के मंदिर वाली गली, सफदरजंग एनक्लेव, आईएनए मार्केट, हौजखास और साउथ एक्स जैसे जगहों पर भी फ्री में रहने का कई तरह के बंदोबस्त हैं. कुछ मरीज खुशनसीब होते हैं, जिनको रहने का ठिकाना मिल जाता है. लेकिन, बहुत सारे ऐसे मरीज भी होते हैं, जिनको जानकारी के अभाव में इधर-उधर भटकना पड़ता है या फिर एम्स के आस-पास ही सड़क किनारे या मेट्रो अंडर पास के नजदीक चादर बिछा कर रात बितानी पड़ती है.

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देश के सबसे बड़े और सबसे सस्ते अस्पताल दिल्ली एम्स में हर दिन हजारों मरीज इलाज कराने आते हैं. (फाइल फोटो)

देश के सबसे बड़े और सबसे सस्ते अस्पताल दिल्ली एम्स में हर दिन हजारों मरीज इलाज कराने आते हैं. एम्स दिल्ली में एक ही दिन में ओपीडी में दिखाना और सारे जांच करवाना संभव नहीं होता है. डॉक्टर अमूमन हर मरीज को तीन- चार दिन बाद ही बुलाते हैं. इन तीन-चार दिनों में ही मरीजों को अपनी जांच भी करवानी पड़ती होती है और दिखाना भी पड़ता है. ऐसे में एम्स के आस-पास कई ऐसे धर्मशालाएं, गेस्ट हाउस और अस्थाई टेंट वाले तंबू हैं, जहां पर मरीज और तीमारदार आधार कार्ड, डॉक्टर का पर्चा और मोबाइल नंबर दे कर दिन आराम से रह सकते हैं.




5 संकेतों से समझ जाएं पेट में होने लगी है बड़ी गड़बड़, देर होने से पहले हो जाएं सतर्क, हो सकता है बड़ा नुकसान

Symptoms of bad Gut Health: पेट अगर खराब है तो कुछ भी अच्छी नहीं लगता है. कई बड़ी बीमारियों की शुरुआत पेट से जुड़ी समस्याओं के साथ होती है. ऐसे में ये बेहद जरूरी है कि हम अपने पेट की सेहत को दुरुस्त रखें. गट हेल्थ का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है, खराब पेट के लिए न सिर्फ खराब लाइफस्टाइल जिम्मेदार होती है बल्कि गलत खानपान भी उतना ही रिस्पॉन्सिबल होता है. ऐसा नहीं है कि पेट की खराबी या उससे जुड़ी समस्याएं रातो रात पैदा हो जाती हैं. ऐसा होने में काफी लंबा वक्त लगता है, लेकिन इसके प्रति लापरवाह होना बड़ी समस्या में तब्दील हो जाता है.
खराब गट हेल्थ के लिए कई कारण जिम्मेदार होते हैं. हेल्थलाइन की खबर के मुताबिक कुछ संकेत बताते हैं कि आंतों की स्थिति खराब हो रही है. ऐसे में सही समय पर इसका इलाज आपको बड़ी परेशानियों से बचा सकता है.

5 संकतों को न करें नज़रअंदाज़

कब्ज, गैस – पेट में गड़बड़ी के सबसे कॉमन संकेत लंबे समय तक कब्ज बने रहना और गैस की समस्या होती है. हर तीसरा व्यक्ति इस तरह की समस्या से दो-चार होता नजर आता है. कभी-कभी इस तरह की समस्या हो तो ये ज्यादा चिंता की बात नहीं है, लेकिन अगर लंबे वक्त तक गैस की समस्या रहे या फिर कब्ज हो तो ये कई बड़ी बीमारियों का कारण बन सकता है. कब्ज के चलते ही पाइल्स की समस्या भी होती है. लंबे वक्त तक हार्टबर्न, जी मिचलना जैसी परेशानियां भी नजरअंदाज न करें.

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वजन में बदलाव – कई लोगों का अचानक तेजी से वजन बढ़ने लगता है या फिर घटने लगता है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. एक वजह गट हेल्थ बिगड़ना भी हो सकता है. दरअसल, गट हेल्थ बिगड़ने पर शरीर न्यूट्रिएंट्स को पूरी तरह से एब्जॉर्ब नहीं कर पाता है और ब्लड शुगर और स्टोर फैट को रेगुलेट नहीं कर पाता है, इससे तेजी से वजन बढ़ जाता है. इसी तरह छोटी आंत में बैक्टीरिया की ओवरग्रोथ के चलते वजन तेजी से घटने लगता है.

लगातार थकान – आप अगर ज्यादा मेहनत करने के बाद थका महसूस करते हैं तो ये बेहद कॉमन है, लेकिन अगर कुछ नहीं करके भी लगातार थकान बनी रहती है तो ये चिंता का विषय है. ये आपकी खराब  हेल्थ का भी संकेत हो सकता है. इसके साथ ही गहरी नींद न लेना पाना भी आंतों की खराब सेहत की ओर इशारा करती है.

स्किन इरिटेशन – बहुत से लोग स्किन संबंधी समस्याओं से परेशान रहते हैं, आपको बता दें कि स्किन से जुड़ी समस्याएं खराब गट हेल्थ की वजह से भी हो सकती है. स्किन की आम और गंभीर बीमारी सोरायसिस भी आंतों में एक प्रकार के बैक्टीरिया से रिलेटेड है. आंतो में गुड बैक्टीरिया की कमी होने पर इसका सीधा प्रभाव इम्यून सिस्टम पर पड़ता है और इसका असर शरीर के अंगों और स्किन पर नजर आता है.

फूड  इन्टॉलरेंस – बहुत से लोगों को फूड इन्टॉलरेंस की समस्या होती है, ये समस्या फूड एलर्जी से अलग है. फूड इन्टॉलरेंस आंतों में मौजूद खराब क्वालिटी के बैक्टीरिया की वजह से हो सकता है. इसके चलते कुछ फूड्स को खाने पर डाइजेशन से जु़ड़ी परेशानियां पैदा होने लगती हैं, जैसे जी मिचलाना, गैस डायरिया, पेडू में दर्द आदि. हालांकि इसे लेकर अभी और रिसर्च की दरकार है.




आई फ्लू हो जाएगा छूमंतर, घर में रखी इन 3 चीजों से धो लें आंखें, आयुर्वेद के चिकित्‍सक ने दी सलाह

Home remedy for Eye Flu in Ayurveda:  बरसात के मौसम में कई प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस और एलर्जी का रिस्‍क बढ़ जाता है यही वजह है कि इस बार आई फ्लू ने लोगों को परेशान कर दिया है. आंखों में खुजली और चिपचिपा पानी आने के साथ ही रेड या पिंक आई वाली इस बीमारी से लाखों लोग जूझ रहे हैं. आई फ्लू होने पर जहां लोग अस्‍पतालों में जा रहे हैं तो कुछ लोग खुद ही आई ड्रॉप्स खरीदकर इलाज कर रहे हैं लेकिन क्‍या आपको मालूम है कि आपके घर और रसोई में ऐसी चीजें मौजूद हैं जो आई फ्लू जैसी बीमारियों को छूमंतर करने में कारगर हैं.

ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा में आयुर्वेदिक ऑप्‍थेल्‍मोलॉजी में असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ. अंकुर त्रिपाठी बताते हैं कि कंजक्टिवाइटिस या आई फ्लू फैलने के कई कारण बताए गए हैं. यह संक्रमित व्‍यक्ति के कपड़े छूने से, साथ में सोने से, साथ में खाना खाने से, हाथ मिलाने से, गले मिलने से, उनके कपड़े मसलन तौलिया, रूमाल, गमछा, तकिया, बिस्तर आदि का उपयोग करने से और अपने हाथों से बार बार मुख, आंखें इत्यादि को छूने से होता है.

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आयुर्वेद के अनुसार आंखों की बीमारियों से बचने के लिए त्रिफला क्‍वाथ से आंखें धुलना बेहद फायदेमंद हैं.

आंखें लाल होना है बड़ा लक्षण
इस बीमारी का प्रमुख लक्षण आंखें लाल होना और आंखों में किरकारापन महसूस होने के अलावा पानी आना और खुजली होना है. अगर किसी की एक आंख में कंजक्टिवाइटिस है और अगर आप उसे छूते हैं और फिर बिना साबुन से हाथ धोए उसी हाथ से दूसरी आंख को भी छू लेते हैं तो इससे भी दूसरी आंख संक्रमित हो जाती है. इसलिए बचाव के उचित तरीकों को जानना जरूरी है.

आंख का सफेद भाग में सूजन यानि कंजक्टिवाइटिस
डॉ. कहते हैं कि आंखों के संक्रमण से आंख के सफेद भाग यानि कंजक्टिवा में सूजन हो जाती हैं और यह पलकों की आंतरिक परत तक होती है. जब सफेद भाग (कंजक्टिवा) की सूक्ष्म रक्त नलिकाएं सूज जाती हैं, तो आंखों का यह सफ़ेद भाग लाल या गुलाबी दिखने लगता है. इसलिए इसे पिंक आई भी कहा जाता है. इन दिनों वायरल कंजक्टिवाइटिस का प्रकोप ज्‍यादा है पर जब इसमें बैक्टीरियल संक्रमण हो जाता है तो यह गंभीर हो जाता है.

रसोई में मौजूद है इलाज
डॉ. अंकुर कहते हैं कि आई फ्लू होने पर या आई फ्लू से बचने के लिए रसोई में मौजूद 3 चीजों से आंखों को धुलना काफी फायदेमंद है. पहला आप साफ पानी से आंखें धो सकते हैं. दूसरा त्रिफला क्वाथ से आंखें धो सकते हैं और तीसरा गुलाब जल से आंखें धुल सकते हैं. इसमें साफ जल और गुलाब जल तो सामान्‍य रूप से इस्‍तेमाल किए जा सकते हैं लेकिन त्रिफला क्‍वाथ आपको बनाना पड़ेगा. इसकी विधि नीचे दी गई है.

त्रिफला क्वाथ बनाने की विधि:
सामग्री: त्रिफला चूर्ण, साफ जल
एक व्यक्ति के लिए लिए एक गिलास साफ पानी पीने वाला उसमें दो चुटकी त्रिफला चूर्ण डालकर उबालें, अच्छे से उबल जाए तब नीचे रख दे, जब साधारण गुनगुना हो जाए तब उस त्रिफला क्वाथ पानी को एक सूती कपड़े की सात-आठ परत या लेयर बना के छान लें ताकि उसमें कोई चूर्ण के कण ना आएं और फिर उस छने हुए त्रिफला क्वाथ पानी से दो अलग-अलग गिलास में डाल दें. इस क्‍वाथ से दोनो आंखों को अलग-अलग धोएं.

कई हैं विधियां
आयुर्वेद की ओर से साधारण नेत्र प्रक्षालन के लिए कई चीजें बताई गई हैं लेकिन इन्‍हें वैद्य के परामर्श से ही इस्‍तेमाल कर सकते हैं. जैसे – त्रिफला, दारू हरिद्रा, यष्ठीमधु से बने क्वाथ से, गुलाब जल से.

इन बातों का भी रखें ध्‍यान
डॉ. अंकुर कहते हैं कि हाथों को बार-बार साबुन से धोना, साफ सूती रूमाल या तोलिया उपयोग करना, आंखों को न मसलना, संक्रमित व्यक्ति से दूर रहना, और अगर कोई संक्रमित व्यक्ति हैं तो वो काले चश्मे का उपयोग करें, भीड़भाड़ वाली जगह पे जाने से बचे स्विमिंग पूल, नदी आदि में एक साथ नहाने से बचे, साधारण व लघु(हल्का) सुपाच्य भोजन करें, वैद्य के परामर्श से सप्ताह में एक बार उपवास कर सकते हैं, जिससे पाचन शक्ति ठीक रहती हैं. वहीं ज्‍यादा परेशानी हो तो चिकित्सक से उचित परामर्श करें, खुद ही सीधे मेडिकल से दवाई लेने से बचें.




4 शाकाहारी फूड्स में है भरपूर विटामिन B12, शरीर को बनाए फौलादी

Source Of Vitamin E: शरीर को स्वस्थ और तंदरुस्त रखने के लिए कई विटामिंस और पोषक तत्वों की जरूरत होती है. किसी भी विटामिन की कमी से सेहत कमजोर होने लगती है. इसी तरह का विटामिन बी12 भी है. यह स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है. विटामिन B12 की कमी से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. विटामिन बी12 की कमी से नसों के कमजोरी की बीमारी का सामना करना पड़ सकता है. विटामिन B12 की कमी होने पर हाथों में सुन्नपन और झुनझुनाहट महसूस होती है. मांसाहारी लोगों को तो अंडे, मछली रेड मीट आदि से आसानी से विटामिन B12 मिल जाता है. शाकाहारी लोगों के लिए इसकी पूर्ति के लिए विटामिन B12 से भरपूर हेल्दी फूड्स का सेवन करना चाहिए. आइए आज हम आपको विटामिन B12 से भरपूर फूड्स बताते हैं.

1.डेरी उत्पाद: वेबएमडी में छपी एक खबर के मुताबिक, शाकाहारी लोगों को विटामिन B12 की भारपाई के लिए कुछ खास फूड्स पाए निर्भर रहना होता है. इसके लिए बेस्ड स्त्रोत डेयरी प्रोडक्ट्स है. दूध में भरपू मात्रा में विटामिन बी12 मौजूद होता है. यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है. दूध में कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. विटामिन B12 की पूर्ति के लिए अपने डाइट में डाइट में दूध, दही को जरूर शामिल करें.

2. सोया मिल्क: ऐसे लोग जो डेयरी फूड्स का सेवन नहीं करते हैं उनके लिए सोया मिल्क विटामिन B12 का बेस्ट स्त्रोत हो सकता है. इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन B12 मौजूद होता है. यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है. विटामिन B12 की पूर्ति के लिस आप भी सोया मिल्क का सेवन कर सकते हैं.

3. मशरूम: मशरूम में भरपूर मात्रा में विटामिन B12 मौजूद होता है.यह सेहत को दुरुस्त रखता है. इसमें कई अन्य विटामिन और पोषक तत्व मौजूद होते हैं. शाकाहारी लोग विटामिन B12 की पूर्ति के लिए मशरूम को डाइट में शामिल कर सकते हैं.

4. टोफू: टोफू, विटामिन बी12 का बेहतरीन स्त्रोत माना जाता है. इसके सेवन से शरीर को प्रोटीन समेत कई अन्य पोषक तत्व भी मिल जाते हैं. यह सेहत के लिए बहुत लाभकारी होता है.




खाना बनाने के दौरान आप भी करते हैं ये 5 गतलियां, फूड बन जाएगा जहर

Worst Cooking Methods: हेल्दी रहने के लिए हेल्दी भोजन बहुत जरूरी है. अगर हेल्दी खाना न हो तो हम कई बीमारियों के शिकार हो जाते हैं. हेल्दी भोजन के लिए यह भी जरूरी है कि हम भोजन को पका कैसे रहे हैं. पकाने का तरीका क्या है. खाना इस तरह से पकना चाहिए कि इसमें से पोषक तत्व न निकलें और वह शुद्ध रूप से शरीर को प्राप्त हो. भारतीय परंपरा में, भोजन तैयार करने के लिए कई प्रकार की खाना पकाने की विधियों का उपयोग किया जाता है. लेकिन वर्तमान में स्वाद के चक्कर में हम भोजन को जहर की तरह पकाते हैं. इससे फूड में से जो पोषक तत्वों की हानि होती है, वह तो है ही, उसके अलावा हानिकारक रसायन हमारे पेट में जाता है जो जहर की तरह असर करता है. यह फिर हमारे लिवर, किडनी और हार्ट जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है. यहां तक इससे कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है. आइए जानते हैं कि खान पकाते समय हम क्या गलतियां करते हैं.

खाना बनाने के दौरान गलतियां

1. डिप फ्राई-स्वाद के लिए हम कई फूड को डिप फ्राई करते हैं लेकिन डिप फ्राई वाली ये चीजें जहर की तरह हो जाती हैं. चाहे हम कितनी भी अच्छी चीज क्यों न बनाएं क्योंकि डिप फ्राई वाली चीजें हेल्दी नहीं रहती. इसमें ज्यादा तापमान होने के कारण यह ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया ऑक्सीडाइज हो जाता है जो पेट में जाने के बाद ट्रांस फैट में बदल जाता है और हार्ट, लिवर, किडनी पर असर करता है.

2. पैन फ्राई-डिप फ्राई की तरह पैन फ्राई वाली चीजें भी बहुत खराब होती है. इससे फूड से पोषक तत्व निकल जाते हैं और यह टॉक्सिन में बदलने लगता है. पैन फ्राई के कारण एक्रीलामाइड जैसे हानिकारक रसायन बनता है जो कैंसर का कारण हो सकता है. फूड पैन फ्राई में जितना अधिक गहरा कलर होगा उतना अधिक एक्रीलामाइड बनेगा.

3. ग्रिलिंग-आजकल फूड को ज्यादा चटपटी बनाने के लिए हम ग्रिलिंग करते हैं. इसमें बार्बी क्यू के सहारे आग के उपर फूड को रख देते हैं. चिकन टिक्का या पनीर टिक्का आमतौर पर ग्रिल ही होता है. हालांकि ग्रिलिंग वाली सारी चीजें हानिकारक नहीं होती है. बहुत सी चीजें ग्रिल करने से फायदेमंद हो जाता है. लेकिन इसमें यदि आप रेड मीट या प्रोसेस्ड चीजें ग्रिल करते हैं तो यह कैंसर का कारण बन सकता है.

4. माइक्रोवेविंग-कई अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि माइक्रोवेव से रेडिएशन निकलता है. 2011 के डब्ल्यूएचओ के अध्ययन में भी यह बात सामने आई कि माइक्रोवेव से निकले रेडिएशन फूड में कैंसरकारक रसायन छोड़ सकता है. इसलिए माइक्रोवेव भी हमारे लिए सही नहीं है.

5. स्मोकिंग-हम सब जानते हैं कि स्मोक करना हमारे लिए घातक होता है. इसी तरह स्मोक में खाना बनाना भी हमारे लिए घातक साबित हो सकता है. स्मोक से एचसीए और पोलीसाइक्लिक हाइड्रोकार्बन जैसे हानिकारक रसायन फूड में मिल जाता है जो कैंसरकारक है.




काले घने लंबे बालों के लिए मेथी आंवला रीठा शिकाकाई शैंपू

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मेथी आंवला रीठा शिकाकाई शैंपू: बालों की समस्याओं से हर दूसरा व्यक्ति परेशान है। किसी को सफेद बालों की समस्या है तो किसी के बाल तेजी से झड़ रहे हैं।  तो, कोई अपने बेजान दोमुंहे बालों से परेशान है। ऐसी स्थिति में डाइट और  हेयरकेयर रूटीन को ठीक करने के साथ आपको अपने बालों के लिए कैमिकल्स युक्त चीजों में कमी लानी चाहिए। ऐसे में आपको कुछ नेचुरल हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसा ही है मेथी आंवला रीठा शिकाकाई शैंपू (Methi amla reetha shikakai shampoo)। जानते हैं इस शैंपू को बनाने के 2 तरीके और लगाने के फायदे।

मेथी आंवला रीठा शिकाकाई का शैंपू कैसे बनाएं-How to make methi amla reetha shikakai shampoo

1. मेथी आंवला रीठा शिकाकाई से तैयार करें पाउडर शैंपू

मेथी आंवला रीठा शिकाकाई से आप पाउडर वाला शैंपू तैयार कर सकते हैं। आपको करना ये है कि मेथी आंवला रीठा शिकाकाई को हल्का सा भून कर दरदरा करके पीस लें और इसे लंबे समय तक इस्तेमाल करने के लिए किसी डिब्बे में बंद करके रख लें। अब जब भी आपको शैंपू करना हो तो 1 घंटे पहले गुनगुने पानी में इस पाउडर को मिलाकर रख लें। इसके बाद बालों को इस शैंपू से वॉश करें।

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2. मेथी आंवला रीठा शिकाकाई जेल शैंपू

मेथी आंवला रीठा शिकाकाई जेल शैंपू को आप कई प्रकार से इस्तेमाल कर सकते हैं। आपको इस जेल को बनाने के लिए मेथी आंवला रीठा शिकाकाई तीनों को गर्म पानी में भिगोकर रात में रखना है। सुबह इन्हें थोड़ा जूसर में चलाकर मिला लें। अब सफेद कपड़ा लगाकार इसे छान लें। अब इस जेल को सीधे अपने बालो में लगाएं और बालों को वॉश करें।

मेथी आंवला रीठा शिकाकाई शैंपू लगाने के फायदे-Methi amla reetha shikakai shampoo benefits

मेथी आंवला रीठा शिकाकाई शैंपू  लगाने के कई फायदे हैं। पहले तो, ये शैंपू प्रोटीन से भरपूर है और इसलिए इसका इस्तेमाल बालों की जड़ों को पोषण देगा और इन्हें अंदर से मजबूत बनाएगा। दूसरा, इसमें आंवला है जो कि आयरन और विटामिन सी से भरपूर है और बालों को काला करने में मदद कर सकता है। तीसरा, शिकाकाई स्कैल्प की सफाई करता है और बालों को अंदर से मजबूत बनाता है। ये दो मुंहे बालों से बचाता है और रीठा एक नेचुरल क्लींजर है जो कि बालों की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। तो, इन तमाम फायदे के लिए आपको इस शैंपू का इस्तेमाल करना चाहिए।

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)




सेहत के लिए बेमिसाल है यह रोटी, शुगर को खून में ही देता है गला

Besan controls Diabetes: डायबिटीज में जैसे ही हम कुछ खाते हैं, वैसे ही ब्लड शुगर का ग्राफ तेजी से बढ़ जाता है. आमतौर पर हम गेंहू के आटे की रोटी या चावल मुख्य भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं और इन दोनों अनाज में कार्बोहाइड्रैट की मात्रा ज्यादा रहती है. इन दोनों से ब्लड शुगर के बढ़ने का खतरा रहता है. इसलिए एक्सपर्ट का मानना है कि गेंहू के आटे की जगह मोटे अनाज का आटा डायबिटीज के मरीजों को खाना चाहिए. इसलिए यदि आप डायबेटिक हैं तो इन आटे की जगह मोटे अनाज या काले चने का आटा खाएं. यदि आपको काला चने का आटा अच्छा नहीं लगता तो आप गेंहू के आटे में इसे मिलाकर खाएं. काला चने के आटा का सुबह सेवन करने से ब्लड शुगर कंट्रोल रहने के साथ कई फायदे एक साथ होंगे.

काला चने के आटे में पर्याप्त मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम, कैल्शियम आदि तत्व पाए जाते हैं. प्रोटीन के कारण काला चना शरीर को संपूर्ण पोषण देता है. काला चने का आटा डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर को गलाकर शरीर से बाहर करने की क्षमता रखता है. काला चना बैड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को भी बहुत कम कर देता है.

कैसे ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है
रेडक्लिफलैब के मुताबिक काला चना में फाइबर की मात्रा बहुत ज्यादा होता है जिसके कारण इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम हो जाता है. सुबह-सुबह यदि काला चने के आटे की रोटियों को नाश्ते में खा लिया जाए तो दिन ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है. यही कारण है कि काला चने की रोटियां डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर को मैनेज करने में बहुत मदद करती है. इसमें मौजूद डाइट्री फाइबर और प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट को शरीर में जल्दी अवशोषित नहीं होने देता है. एक अध्ययन में यहां तक पाया गया कि यदि काले चने की रोटियों का सेवन किया जाए तो ब्लड शुगर लेवल 36 प्रतिशत तक कम हो जाता है.

हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करता
काला चना में फाइबर के साथ-साथ पोटैशियम और मैग्नीशियम भी मौजूद रहता है. पोटैशियम हार्ट के मसल्स को मजबूत बनाने में बहुत मददगार है. काला चना में सॉल्यूबल फाइबर भी रहता है. सॉल्यूबल फाइबर ट्राइग्लिसेराइड्स और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है. इसलिए काला चना हार्ट के मरीजों के लिए फायदेमंद है. वहीं काला चना में फाइबर की मात्रा अधिक होती है. यदि नाश्ते में काला चने के आटे की रोटियां खा ली जाए तो पूरा दिन भूख नहीं लगती और इससे वजन पर कंट्रोल करना आसान होता है.




पीठ में दर्द जिंदगी में मचा सकता है तबाही, हो सकता है कैंसर के संकेत

Back Pain Can be Sign of Cancer: क्या पीठ में दर्द कैंसर का संकेत हो सकता है. जी हां, यदि लगातार पीठ में दर्द जा नहीं रहा है तो यह कैंसर के संकेत हो सकते हैं. इसलिए पीठ के दर्द को कभी नजरअंदाज न करें, वरना यह जिंदगी में तबाही ला सकता है. हालांकि कमर में दर्द बहुत सामान्य हैं. अधिकांश लोग पीठ की दर्द की समस्या से जूझते रहते हैं. सामान्य तौर पर मसल्स के लिगामेंट में इंज्यूरी, गलत तरीके से भारी चीजों को उठाने, गलत पॉश्चर और रेगुलर एक्सरसाइज नहीं करने के कारण पीठ में दर्द होता है. शरीर का ज्यादा वजन पीठ में दर्द का एक और कारण है. लेकिन इन सबके अलावा कुछ प्रकार के कैंसर में भी पीठ में दर्द होता है.

लंग्स कैंसर में इस तरह से होता है पीठ दर्द
टीओआई की खबर के मुताबिक कुछ कैंसर लोअर बैक तक पहुंच जाता है. इसलिए लोअर बैक पेन करने लगता है. यह मेटास्टेसिस के लक्षण हो सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक ब्रेस्ट, लंग्स, टेस्टिकुलर और कोलोन कैंसर की स्थिति में कैंसर पीठ तक फैल जाता है जिसके कारण पीठ में बेपनाह दर्द होने लगता है. इन अंगों में कैंसर होने पर स्पाइन के रास्ते को रोक देता है. ब्रिटेन कैंसर रिसर्च के मुताबिक लंग्स कैंसर से पीड़ित 25 प्रतिशत मरीजों में बैक पैन या पीठ में दर्द की शिकायत रहती है. अगर लंग्स कैंसर लोअर बैक तक फैल गया है तो यह पीठ में दर्द होने लगता है. अगर रात में पसीना आता है, बहुत ज्यादा सर्दी रहती है, बुखार रहता और पेट से संबंधित समस्याएं रहती है और इन सबके साथ पीठ में दर्द है तो यह लंग्स कैंसर के संकेत हो सकते हैं. इस स्थिति में वजन भी बहुत तेजी से कम होने लगता है.

नॉर्मल दर्द से कैसे अलग है कैंसर का पीठ दर्द
नॉर्मल दर्द में पोजिशन बदलने के साथ दर्द आराम हो जाता है. थोड़ी देर इधर-उधर या कमर की एक्सरसाइज करने के साथ ही दर्द खत्म हो जाता है लेकिन अगर लंग्स, ब्रेस्ट, कोलोन या टेस्टिकुलर कैंसर की वजह से पीठ में दर्द है तो यह दर्द जल्दी जाएगा नहीं. हालांकि कैंसर की स्थिति में पीठ में बहुत तेज दर्द नहीं होता. लेकिन इससे असहजता बहुत होती है.

डॉक्टर के पास कब जाएं
अगर उपरोक्त लक्षण के साथ पीठ में दर्द हो और यह लगातार परेशान कर रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. हालांकि आमतौर पर अधिकांश मामलों में बैक पेन के लिए कैंसर जिम्मेदार नहीं होता है. इसके और भी कई कारण हैं लेकिन डॉक्टर जांच के बाद यह पता लगाएंगे कि पीठ के दर्द का वास्तविक कारण क्या है.




सूखकर लकड़ी होती जा रही हैं हड्डियां, सलाद के रूप में इस फूड को डाइट में करें शामिल

Benefits Of Onion: आपके किचन में भी प्याज जरूर पाई जाती होगी. इसका उपयोग लगभग सभी सब्जियों में किया जाता है. इसे न सिर्फ सब्जियों में बल्कि अन्य फास्टफूड और लजीज व्यंजनों में डाला जाता है. प्याज खाने का स्वाद बढ़ा देती है. प्याज को सलाद के रूप में भी खाया जाता है. एक तरफ प्याज जहां खाने का स्वाद बढ़ाती है, वहीं दूसरी तरफ यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. प्याज में विटामिन बी, पोटैशियम, विटामिन सी, फाइबर समेत कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं. आइए आज हम आपको प्याज के फायदे बताते हैं.

1. दिल की सेहत को दुरुस्त रखे: हेल्थलाइन में छपी एक खबर के मुताबिक, प्याज के सेवन से हार्ट हेल्दी होता है. इसमें कई एंटीऑक्सीडेंट और हेल्दी कंपाउंड पाए जाते हैं, जो दिल की सेहत को दुरुस्त रखते हैं. प्याज को सलाद के रूप में डाइट में शामिल करने से हार्ट अटैक का खतरा कम होता है.

2. हड्डियां मजबूत करे: प्याज के रोजाना सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं. यह हाडियों की सेहत के लिए बेहद लाभकारी है. प्याज में कई ऐसे विटामिंस और पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो हड्डियों की सेहत को दुरुस्त रखते हैं.

3. ब्लड शुगर कंट्रोल करे: प्याज के सेवन से डायबिटीज कंट्रोल होता है. यह ब्लड शुगर के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है. इसमें कई ऐसे कंपाउंड मौजूद होते हैं जो ब्लड शुगर के लिए फायदेमंद हैं.

4. पाचनतंत्र मजबूत करे: प्याज के सेवन से पाचनतंत्र मजबूत होता है. यह डाइजेशन को दुरुस्त करता है. इसका सेवन पेट की सेहत के लिए फायदेमंद है. प्याज में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो खाने को पचाने में फायदेमंद होता है.

5. इम्यूनिटी बूस्ट करे: प्याज के नियमित सेवन से इम्यूनिटी बूस्ट होती है. यह विटामिन सी का अच्छा स्त्रोत है. इसका सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इससे बीमारियों का खतरा कम होता है. आप भी रोजाना के डाइट में प्याज को जरूर शामिल करें.