बरसात में शरीर के लिए अमृत है यह हरा फल, कीमत सिर्फ 5 रुपये, हर बीमारी से दिलाएगा छुटकारा

Health Benefits of Guava: स्वस्थ और तंदुरुस्त रहने के लिए मौसमी फलों का सेवन करना फायदेमंद होता है. हर मौसम में अलग फल आते हैं, जिनका लोग जमकर सेवन करते हैं. बारिश के मौसम में अमरूद (Guava) की बहार आ जाती है. यह फल स्वाद में लाजवाब होता है और इसका सेवन करना सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है. अमरूद पोषक तत्वों का पावरहाउस माना जा सकता है. यह एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन C, विटामिन A, लाइकोपीन, कैल्शियम, मैंगनीज और पोटेशियम से भरपूर होता है. अमरूद में कैलोरी कम होती है और फाइबर अधिक मात्रा में होता है. यह सभी प्रॉपर्टी अमरूद को सेहत के लिए वरदान बना देती हैं. आज आपको बता रहे हैं कि बरसात के मौसम में अमरूद खाने से शरीर को कौन से बड़े फायदे मिल सकते हैं.

इम्यूनिटी होती है बूस्ट – अमरूद हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है. हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक अमरूद विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत है. इसमें संतरे की अपेक्षा दोगुनी मात्रा में विटामिन सी होता है. विटामिन सी आपके इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद करता है. यह हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को मारकर हमारे शरीर को संक्रमण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को अमरूद का सेवन जरूर करना चाहिए.

ब्लड शुगर भी होता है कंट्रोल – अमरूद खाने में भले ही मीठा होता है, लेकिन डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है. अमरूद फाइबर का अच्छा स्रोत है और इसमें कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है, जिसकी वजह से डायबिटीज के मरीज भी इसका सेवन कर सकते हैं. कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से रोकता है. अमरूद में पाया जाने वाला फाइबर ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है. एक स्टडी में पता चला है कि अमरूद की पत्तियों का अर्क ब्लड शुगर लेवल में सुधार कर सकता है.

हार्ट हेल्थ होती है दुरुस्त – अमरूद दिल को स्वस्थ रखता है. अमरूद में उच्च मात्रा में पोटेशियम और सोडियम पाए जाते हैं, जो हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. एक अध्ययन के अनुसार भोजन से पहले पका हुआ अमरूद खाने से ब्लड प्रेशर कम हो सकता है. अमरूद खाने से हाई कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है. अमरूद खाने से गुड कोलेस्ट्रॉल 8% तक बढ़ सकता है. इससे हार्ट हेल्थ बूस्ट हो जाती है. एक अन्य अध्ययन से पता चलता है कि अमरूद की पत्तियों का अर्क हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के खतरे को कम कर सकता है.

 

वजन घटाने में मिलती है मदद – अमरूद वजन घटाने में मदद कर सकता है. यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो अमरूद एक शानदार विकल्प है. अमरूद आपके मेटाबॉलिज्म को सुधारने में मदद करता है और यह सुनिश्चित करता है कि आपके प्रोटीन, फाइबर और विटामिन का सेवन संतुलित रहे. शुगरी ड्रिंक्स या शुगरी फूड्स की जगह अमरूद के पत्तों की चाय और अमरूद खाने से आपको वजन कम करने में मदद मिलेगी. अमरूद में कैलोरी कम होती है और फिर भी पेट भर जाता है.

डायजेशन को बनाता है बेहतर – अमरूद में अन्य फलों की तुलना में अधिक मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है. फाइबर पेट साफ करने में मदद करता है, जिससे कब्ज से राहत मिलती है. एक अमरूद खाने से आपका पाचन स्वास्थ्य ठीक हो सकता है और पेट की कई समस्याएं दूर हो सकती हैं. अमरूद के बीज जब साबुत खाए जाते हैं या चबाए जाते हैं, तो पेट की समस्याएं दूर हो जाती हैं. एक अध्ययन से पता चलता है कि आप दस्त को रोकने के लिए अमरूद की पत्ती के अर्क का भी उपयोग कर सकते हैं.




Cardamom Benefits : पेट में बढ़ गई है गर्मी, इलायची का ऐसे करें इस्तेमाल, हो जाएगा ‘ठंडा-ठंडा कूल-कूल’

Cardamom Health Benefits: घर आए मेहमानों को लौंग-इलायची सर्व करते तो सभी ने देखा होगा. इलायची को माउथ फ्रेशनर के तौर पर उपयोग किया जाता है. खाने का जायका बढ़ाने और मिठाइयों में भी इलायची काफी इस्तेमाल होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इलायची औषधीय गुणों से भी भरपूर है. इसका सेवन शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है. इलायची की तारीस ठंडी होती है, ऐसे में इसका सेवन पेट की बढ़ी गर्मी को शांत करने में असरदार होता है. इसके साथ ही ब्लड प्रेशर को कम करने और डाइजेशन को बेहतर बनाने में भी इलायची असरदार है.

इलायची में एंटी बैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं जो कि इंफेक्शन को रोकने और उससे लड़ने में मदद करते हैं. हेल्थलाइन के मुताबिक इलायची का सेवन दांतों में कैविटी बनने से रोकने के साथ मुंह की दुर्गंध को भी खत्म करता है. पेट की गर्मी बढ़ने पर इलायची को पाउडर के तौर पर लेकर या फिर इलायची का पानी पीकर राहत पायी जा सकती है.

इलायची के सेहत से जुड़े फायदे

ब्लड प्रेशर घटाता है – इलायची में मौजूद पोषक तत्व हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए लाभकारी हो सकते हैं. इसका नियमित सेवन ब्लड प्रेशर को घटाने में मदद कर सकता है. इलायची में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और डाइयूरेटिक प्रॉपर्टीज मौजूद होती हैं जो कि ब्लड प्रेशर को कम करती हैं.

पेट संबंधी समस्याएं – पेट में गर्मी बढ़ने की समस्या में इलायची का सेवन काफी लाभकारी हो सकता है. इलायची में मौजूद तत्व इतने प्रभावी होते हैं कि वे पेट में हुए अल्सर को ठीक करने में भी मददगार हो सकते हैं. इसके साथ ही इलायची का सेवन पाचन संबंधी समस्याओं में भी राहत देता है.

इंफेक्शन – एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर इलायची का सेवन शरीर में होने वाले संक्रमण से लड़ने में मदद करता है. मौसम में बदलाव की वजह से होने वाले इंफेक्शन को कंट्रोल करने में भी इलायची का सेवन फायदेमंद हो सकता है. रिसर्च के मुताबिक इलायची में कई तरह के बैक्टीरिया से लड़ने की क्वालिटी होती है.

सूजन – इलायची में एंटी-बैक्टीरियल के साथ ही एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं, ऐसे में शरीर में सूजन आने या फिर जोड़ों संबंधी समस्याओं की वजह से होने वाले इन्फ्लेमेशन में इलायची का सेवन लाभकारी हो सकता है.

इलायची इस्तेमाल के तरीके
आमतौर पर इलायची को छिलके सहित सीधा ही खाया जाता है. इसे माउथ फ्रेशनर की तरह इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा इलायची के दानों को निकालकर उनका पाउडर बनाकर भी इसे उपयोग कर सकते हैं. इलायची का पानी भी शरीर के लिए बेहद लाभकारी होता है. इलायची के पानी में भी कई रोगों से लड़ने की क्षमता होती है.




Cancer : दुनिया में पहली बार सात मिनट में मिलेगा कैंसर उपचार, इस देश में तीन-चौथाई तक घट जाएगा इलाज का समय

England To Rollout World's First 7-Minute Cancer Treatment Jab

Cancer Treatment Jab
– फोटो : सोशल मीडिया

इंग्लैंड जल्द कैंसर रोगियों के लिए सात मिनट का इलाज शुरू करने वाला है। जी हां, आपने सही पढ़ा। ब्रिटेन की सरकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) दुनिया में पहली एजेंसी होगी जो इंग्लैंड में सैकड़ों रोगियों को कैंसर का इलाज करने वाला इंजेक्शन पेश करेगी। इससे इलाज में लगने वाले समय में तीन-चौथाई तक की कटौती हो सकती है।

कम समय में मिलेगा इलाज

ब्रिटिश मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (एमएचआरए) से इसे मंजूरी मिल चुकी है। मंजूरी के बाद एनएचएस इंग्लैंड ने मंगलवार को कहा कि इम्यूनोथेरेपी, एटेजोलिजुमाब से इलाज कराने वाले सैकड़ों रोगियों को त्वचा के नीचे इंजेक्शन दिया जाएगा। इससे और बेहतर परिणाम मिल सकेंगे और कैंसर के इलाज में समय की कटौती हो सकेगी।

मरीजों की देखभाल में मदद मिलेगी

वेस्ट सफोल्क एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के सलाहकार व ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अलेक्जेंडर मार्टिन ने बताया कि इस मंजूरी से न केवल हमें अपने मरीजों की देखभाल में मदद मिलेगी, बल्कि हमारी टीमों को दिन भर में अधिक मरीजों का इलाज करने में सक्षम बनाएगी।

ऐसे होता है इलाज

इंग्लैंड की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ने बताया कि  एटेजोलिजुमैब, जिसे टेकेंट्रिक भी कहा जाता है। टेकेंट्रिक एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है, जो कैंसर मरीजों के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्यों को प्रभावित करता है। यह आमतौर पर रोगियों को ड्रिप के माध्यम से सीधे उनकी नसों में दिया जाता है। परेशानी तब आती है, जब नसों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में रोगियों को ड्रिप लगाने में लगभग 30 मिनट या एक घंटे तक का समय लग जाता है।

इस कंपनी ने बनाई दवा

रोश प्रोडक्ट्स लिमिटेड के मेडिकल डायरेक्टर मारियस शोल्ट्ज का कहना है कि सीधे नस में भेजने की विधि से अब पहले की 30 से 60 मिनट की तुलना में इसमें लगभग 7 मिनट का समय लगता है। बता दें, एटेजोलिजुमाब रोश (ROG.S) कंपनी जेनेंटेक द्वारा बनाई गई है। यह एक इम्यूनोथेरेपी दवा है, जो मरीज की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं को खोजने और नष्ट करने के लिए मजबूत और सक्षम बनाती है। वर्तमान में इसके द्वारा फेफड़े, स्तन और यकृत सहित विभिन्न प्रकार के कैंसर वाले एनएचएस रोगियों का इलाज हो रहा है।




आंखों की रोशनी को फ्लड लाइट जैसे बनाना है तेज, तो चाहिए 5 विटामिनों से भरपूर फूड

How to Improve Eyesight Naturally : जब भी आंखों में रोशनी को बढ़ाने की बात आती है, लोग अक्सर यही सलाह देते हैं कि विटामिन ए से भरपूर फूड जैसे कि गाजर, सेब, अंगूर आदि का सेवन करें लेकिन एक्सपर्ट के मुताबिक, आंखों की रोशनी में तेज लाने के लिए सिर्फ विटामिन ए से काम नहीं चलेगा बल्कि इसके लिए कई तरह के विटामिनों की जरूरत होती है क्योंकि एक विटामिन का संबंध दूसरे विटामिन से होता है. वहीं आजकल आंखों पर जबर्दस्त संकट आ गया है. एक तरफ पहले से ही वायु प्रदूषण के कारण लोगों की आंखों पर असर पड़ता था और अब पिछले दो-तीन दशकों से तरह-तरह के गैजेट्स और स्क्रीन में रहने की आदत ने सबसे ज्यादा आंखों को बुरी तरह प्रभावित किया है.

इन सारी परेशानियों से बचने के लिए हेल्दी डाइट लेनी जरूरी है ताकि प्रदूषण और स्क्रीन के दुष्प्रभाव से बचा जा सके. हेल्थलाइन की खबर के मुताबिक, आंखों की सेहत को मजबूत बनाने के लिए 9 तरह के विटामिंस और कई अन्य पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है. आंखों की रोशनी को तेज करने के लिए विटामिन ए के अलावा विटामिन ई, विटामिन सी, विटामिन बी 6, बी 9, बी 12, राइबोफ्लेविन, नियासिन, लूटिन, जेक्सांथिन, ओमेगा 3 फैटी एसिड, थियामिन जैसे पोषक तत्वों की आवश्यकता है.

आंखों के लिए जरूर विटामिन और आवश्यक फूड

1. विटामिन ए-निःसंदेह आंखों की रोशनी तेज करने के लिए विटामिन ए की सबसे अधिक जरूरत होती है. विटामिन ए आंखों की बाहरी परत यानी कॉर्निया को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कॉर्निया में यदि दिक्कत होती है तो आंखों से हमें कम दिखाई देती है. विटामिन ए की कमी से रतौंधी की बीमारी भी हो सकती है. विटामिन ए के लिए आप गाजर के अलावा शकरकंद, हरी पत्तीदार सब्जियां, पंपकिन सीड्स, शिमला मिर्च आदि का सेवन करें.

2.विटामिन बी 2-आंखों में चमक तेज करने के लिए विटामिन बी 2 की भी जरूरत होती है. विटामिन बी 2 को राइबोफ्लेविन विटामिन भी कहा जाता है. यह एंटीऑक्सीडेंट्स होता है जो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होने से आंखों की कोशिकाओं को राहत मिलती है. विटामिन बी 2 के लिए दूध, ओट्स, छाछ, मटन, साबुत अनाज का सेवन करना चाहिए.

3. विटामिन बी 6, 9, 12- आंखों की रोशनी तेज करने के लिए आंखों की कोशिकाओं को हेल्दी रहना जरूरी है. अगर किसी कोशिका में इंफ्लामेशन आती है तो इससे वह अंग खराब होने लगताहै. विटामिन बी 6, 9 और विटामिन बी 12 आंखों में इंफ्लामेशन नहीं होने देता है. अगर आंखों में सूजन हो जाए तो आंखों से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इन विटामिंस के लिए मटन, सार्डिन मछली, बादाम, पंपकिन सीड्स, साबुत अनाज, टून, ट्रोट आदि का सेवन करें.

4.विटामिन ई-आंखों में चमक बुढ़ापे तक बरकरार रहे, इसके लिए विटामिन ई की भी उसी तरह जरूरत है जैसे विटामिन ए की जरूरत होती है. विटामिन ई भी आंखों की कोशिकाओं की रक्षा करता है. यह फ्री रेडिकल्स और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस दोनों से आंखों को बचाता है. विटामिन ई के लिए बादाम, सीड्स, सैलमन, सीड्स ऑयल, एवोकाडो, हरी पत्तीदार सब्जियों का सेवन करें.

5.विटामिन सी-विटामिन सी वैसे तो पूरे शरीर में इम्यूनिटी के लिए बहुत जरूरी है. विटामिन ई एंटीऑक्सीडेंट है जो आंखों को फ्री रेडिकल्स के दुष्प्रभाव से बचाता है. विटामिन सी आंखों में कोलेजन प्रोडक्शन को बढ़ाता है जो आंखों की संरचना को सुंदर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. साइट्रस फ्रूट, शिमला मिर्च, फूलगोभी, केले आदि में भरपूर मात्रा में विटामिन सी होता है.




Healthy Teeth : दांतों को स्वस्थ रखने में ‘यह’ नुस्खा है बड़े काम का, मुंह से आने वाली बदबू से भी मिलेगा छुटकारा

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Bhopal : ये बात सच है कि आपके चेहरे की खूबसूरती सिर्फ आपकी आंखें या आपके होेंठ ही बयां नहीं करते हैं। आपके चेहरे और मुस्कान को सुंदर बनाते हैं आपके चमचमाते मोती जैसे दांत। दांतों का पीलापन इसी खूबसूरती पर ग्रहण लगा सकता है। इसलिए चेहरे के साथ ही अपनी मुस्कान को भी तरोताजा रखने के लिए अपने दांतों की  साफ- सफाई और चमक का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी है।

इसके लिए आपको ज्यादा मशक्कत और खर्चा करने की भी जरूरत नहीं है। बस आपको इस समस्या से निजात पाने के लिए एक घरेलू नुस्खे को अपनाने पड़ सकते हैं, जो कि बेहद कारगर है। ये नुस्खा है पानी में नमक मिलाकर कुल्ला करना।

अगर आपके मुंह से बदबू आती है और दांतों में भयानक दर्द रहता है, तो आप रात के भोजन के बाद गुनगुने पानी में नमक मिलाकर कुल्ला करें। साथ ही सुबह के समय जब भी आप ब्रश करें तो इस पानी से कुल्ला करें। ऐसा लगातार करने पर आपको कुछ ही दिनों में दांतों में बैक्टीरिया से आराम मिलेगा। दरअसल, नमक एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। नमक गंदगी को हटाने में काफी कारगर साबित होता है।

आजकल ओरल हेल्थ से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं से लोग परेशान रहते हैं। इससे निजात पाने के लिए लोग दांतों के डॉक्टर को दिखाते हैं, महंगी दवाएं खाते हैं, लेकिन फिर भी इससे आराम नहीं मिलता है। ऐसे में नमक पानी का कुल्ला आपके लिए काफी असरदार साबित हो सकता है।




घुटनों का बढ़ गया है दर्द? उठना-बैठना भी हो रहा मुश्किल? 5 आसान उपाय करें फॉलो

Knee Pain: दुनियाभर में एक बड़ी संख्या में लोग घुटनों के दर्द (knee Pain) से परेशान हैं. पहले के समय में ये समस्या बढ़ती उम्र के लक्षणों में आती थी, लेकिन ये आजकल इसकी चपेट में कम उम्र के लोग भी हैं. हालांकि घुटनों में दर्द के कई कारण हो सकते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण तो उम्र का असर ही है. दूसरा किसी पोषक तत्व की कमी या कहीं गिरने आदि की चोट भी हो सकती है. यह दर्द कभी कभार सामान्य होता है तो कभी-कभी लंबे समय से होने वाले दर्द के कारण लोगों को काफी उलझन का सामना करना पड़ता है. लेकिन, यदि किसी चीज से टकराकर आपके घुटनों में दर्द बैठ गया है, जिसे अक्सर अंदरूनी दर्द कहते हैं. इस दर्द से निजात पाने के लिए आप कुछ घरेलू उपाय फॉलो कर सकते हैं. आइए धनवंतरी क्लीनिक नोएडा के इंटीग्रेटिड चिकित्सक डॉ. संजय वार्ष्णेय से जानते हैं घुटनों का दर्द दूर करने के आसान उपाय-

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हल्दी: सेहत की कई परेशानियों को दूर करने में हल्दी बेहद कारगर मानी जाती है. दरअसल, हल्दी को उसके औषधीय गुणों के लिए ही जाना जाता है. इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण घुटने के दर्द से राहत दिलाते हैं. इसके लिए एक चम्मच हल्दी में जरूरत के अनुसार पानी लेकर पेस्ट बना लें और घुटनों पर लगाएं. ऐसा करने से आपको जल्द राहत मिलेगी. इस पेस्ट को दिन में 2 बार भी लगाया जा सकता है. (Image- Canva)

02

अदरक: घुटनों में हो रहे दर्द से निजात पाने के लिए अदरक (Ginger) बेहद असरदार मानी जाती है. दरअसल, अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो दर्द को दूर करने में मदद करती है. अदरक आपके जोड़ों के दर्द (Joint Pain) या सूजन के दर्द से भी निजात दिलाती है. इसके लिए अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके उसे गर्म पानी में डालें. अब पानी को छानकर उसमें स्वाद के लिए शहद और नींबू का रस मिला लें. इसके बाद इस पानी को नियमित पीने से आपको घुटनों के दर्द से राहत मिलेगी.  (Image- Canva)

03

एलोवेरा: कई औषधीय गुणों से भरपूर एलोवेरा घुटने के दर्द को खींचकर बाहर निकालने की क्षमता रखता है. इसके लिए आप एलोवेरा जेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसको लगाने से दर्द तो कम होगा ही, साथ ही घुटनों की सूजन भी कम होगी. इसको बनाने के लिए एलोवेरा जेल में थोड़ा सा हल्दी पाउडर मिक्स करें. इसके बाद इसे दर्द से प्रभावित हिस्से पर लगाएं. इससे दर्द और सूजन कम हो सकती है. (Image- Canva)

04

कपूर का तेल: घुटनों के दर्द से निजात पाने के लिए आप कपूर का तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके नियमित इस्तेमाल से आपको जल्द राहत मिल सकती है. इसे लगाने के लिए एक चम्मच कपूर के तेल में एक चम्मच नारियल का तेल मिला लेंगे. अब इन दोनों को अच्छे से गर्म करेंगे. जब तेल ठंडा हो जाए तो दिन में 2 बार इस तेल से घुटनों की मालिश करें. ऐसा करने से घुटनों का दर्द दूर हो जाएगा. (Image- Canva)




Healthy Teeth Remedies : दांतों को स्वस्थ रखने में ‘यह’ नुस्खा है बड़े काम का, मुंह से आने वाली बदबू से भी मिलेगा छुटकारा

दांतों को स्वस्थ रखने में ‘यह’ नुस्खा है बड़े काम का, मुंह से आने वाली बदबू से भी मिलेगा छुटकारा

Bhopal : ये बात सच है कि आपके चेहरे की खूबसूरती सिर्फ आपकी आंखें या आपके होंठ ही बयां नहीं करते हैं। आपके चेहरे और मुस्कान को सुंदर बनाते हैं आपके चमचमाते मोती जैसे दांत। दांतों का पीलापन इसी खूबसूरती पर ग्रहण लगा सकता है। इसलिए चेहरे के साथ ही अपनी मुस्कान को भी तरोताजा रखने के लिए अपने दांतों की  साफ- सफाई और चमक का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी है।

इसके लिए आपको ज्यादा मशक्कत और खर्चा करने की भी जरूरत नहीं है। बस आपको इस समस्या से निजात पाने के लिए एक घरेलू नुस्खे को अपनाने पड़ सकते हैं, जो कि बेहद कारगर है। ये नुस्खा है पानी में नमक मिलाकर कुल्ला करना।

अगर आपके मुंह से बदबू आती है और दांतों में भयानक दर्द रहता है, तो आप रात के भोजन के बाद गुनगुने पानी में नमक मिलाकर कुल्ला करें। साथ ही सुबह के समय जब भी आप ब्रश करें तो इस पानी से कुल्ला करें। ऐसा लगातार करने पर आपको कुछ ही दिनों में दांतों में बैक्टीरिया से आराम मिलेगा। दरअसल, नमक एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। नमक गंदगी को हटाने में काफी कारगर साबित होता है।

आजकल ओरल हेल्थ से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं से लोग परेशान रहते हैं। इससे निजात पाने के लिए लोग दांतों के डॉक्टर को दिखाते हैं, महंगी दवाएं खाते हैं, लेकिन फिर भी इससे आराम नहीं मिलता है। ऐसे में नमक पानी का कुल्ला आपके लिए काफी असरदार साबित हो सकता है।




दिल्ली-NCR में अब इस रहस्यमयी बुखार के मामले बढ़े, डॉक्टरों ने चेताया- ऐसे लक्षण दिखे तो नॉर्मल फीवर न समझें

New Dehli : दिल्ली-एनसीआर में डेंगू, मलेरिया और वायरल फीवर के बाद एक और तरह का फीवर लोगों को परेशान कर रहा है. इस बुखार को मेडिकली टर्म में स्क्रब टाइफस (Scrub Typhus) कहा जाता है. दिल्ली से सटे गाजियाबाद में तो स्क्रब टाइफस से अब तक 13 लोग बीमार हो चुके हैं. हालांकि, स्क्रब टाइफस से अभी तक किसी की मौत नहीं हुई है. डॉक्टरों की मानें तो यह फीवर अगर लंबे समय तक बना रहे तो मरीज का मल्टीऑर्गन फेलियर हो सकता है और मरीज की जान जाने का भी खतरा रहता है. ऐसे में इस बुखार के बारे में जानकारी रखना सभी के लिए जरूरी है.

आपको बता दें कि स्क्रब टाइफस एक खतरनाक बीमारी है, जिसका लक्षण डेंगू की तरह ही होता है. लेकिन, यह एक खास प्रकार के कीड़े के काटने की वजह से होती है. आमतौर पर इस कीड़े को टिक कहते हैं, जो पहाड़ी इलाकों में ही पाए जाते हैं. लेकिन, हाल के वर्षों में यह बीमारी दिल्ली से सटे गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा में भी हो रहा है. यह बीमारी बच्चों और बुजुर्गों दोनों को शिकार बनाता है. इस कीड़े को काटने से एक खास प्रकार का निशान बन जाता है, जो इसकी सबसे बड़ी पहचान है.

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बरसात के दिनों में स्क्रब टायफस के अधिक मामले आते है. (पीटीआई सांकेतिक तस्वीर)

स्क्रब टायफस के लक्षण
डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी शख्स को घास काटता है तो डॉक्टर से जरूर दिखाए, ताकि डॉक्टर समय से इस बीमारी की पहचान कर उसका इलाज शुरू कर सकें. बरसात के दिनों में स्क्रब टायफस के अधिक मामले आते है. स्क्रब टायफस एक जीवाणु से संक्रमित पिस्सू के काटने से फैलता है, जो खेतों, झाडिय़ों व घास में रहने वाले चूहों में पनपता है. जीवाणु चमड़ी के माध्यम से शरीर में फैलता है और स्क्रब टायफस बुखार बन जाता है.

बीमारी की पहचान कैसे करें
गाजियाबाद के सीनियर फीजिशियन डॉ अभिषेक कुमार कहते हैं, पिस्सू जैसे कीड़े में ओरेंटया तत्सुत्सुगुमाशी नामक बैक्टीरिया होता है. इसके काटने के बाद संक्रमण फैल जाता है. मरीज के दिल, दिमाग, फेफड़े और लीवर के साथ-साथ शरीर के सभी ऑर्गन्स पर यह प्रभाव डालता है. यदि समय पर इसकी पहचान हो जाए तो मरीज सात से 10 दिन में ठीक हो सकता है. स्क्रब टाइफस में शरीर पर रैसेज के साथ गांठें भी पड़ जाती हैं. मरीज को हाई फीवर और सिर में दर्द रहता है. साथ ही मरीज की भूख कम हो जाती है.

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स्क्रब टाइफस हो जाने पर घबराएं नहीं . डॉक्टर से संपर्क करें और साथ ही घर व आसपास के वातावरण को साफ रखें.

ऐसे रखें अपना ख्याल
डॉ अभिषेक आगे कहते हैं, देखिए बरसात के मौसम में खेत में जमीन पर चलने के दौरान जूते-चप्पल जरूर पहनें. अगर घर में रहते हैं तो नमी न होने दें. बिस्तर और कपड़े साफ रखें. समय-समय दवा का छिड़काव करते रहें. बुखार अगर बार-बार आ रहा है तो अच्छे डॉक्टर को जरूर दिखा लें.’

स्क्रब टाइफस हो जाने पर घबराएं नहीं . डॉक्टर से संपर्क करें और साथ ही घर व आसपास के वातावरण को साफ रखें. पिछले साल भी इस बीमारी से गाजियाबाद में 95 लोग बीमार पड़े थे. इस बीमारी में पारसिटामोल के साथ मरीजों को डॉक्सीसाइक्लन और एजिथ्रोमाइसिन की दवा दी जाती है. बता दें कि स्क्रब टायफस शुरूआत में तो आम बुखार की तरह होता है, लेकिन यह सीधे किडनी और लीवर पर अटैक करता है. यही कारण है कि मरीजों की मौत हो जाती है.

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डायबिटीज मरीजों के लिए गुणकारी हैं ये 4 आयुर्वेदिक हर्ब्स, सुबह खाली पेट सेवन से मिलेगा फायदा

Ayurveda Herbs for Diabetes Patients: डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो कई बीमारियों को एक साथ जन्म देती है. अगर शुरुआती दौर में डायबिटीज का इलाज शुरू नहीं किया जाए तो यह बहुत जल्दी हार्ट डिजीज, किडनी डिजीज और आंखों से संबंधित बीमारियों का कारण बन जाती है. डायबिटीज में ब्लड शुगर या ग्लूकोज की मात्रा खून में बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. ग्लूकोज हमारे लिए एनर्जी का प्रमुख स्रोत है. इंसुलिन ग्लूकोज को एनर्जी में बदल देता है. लेकिन जब पैंक्रियाज में इंसुलिन कम बने या बने ही नहीं, तब ग्लूकोज एनर्जी में बहुत कम बदलता है और इसका नतीजा होता है कि ग्लूकोज यूं ही खून में जमा होने लगता है जो शरीर के कई अंगों को प्रभावित करने लगता है. डायबिटीज के लिए मुख्य रूप से हमारा गलत खान-पान और खराब लाइफस्टाइल जिम्मेदार है. जब हम फिजिकल एक्टिविटी कम करने लगते हैं, कोई शारीरिक श्रम नहीं करते और ज्यादा गलत चीजें खाने लगते हैं तब डायबिटीज की बीमारी होती है. चूंकि डायबिटीज की बीमारी का सीधा संबंध लाइफस्टाइल से है, इसलिए लाइफस्टाइल की ठीक कर ही ब्लड शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है. इसके लिए कुछ आयुर्वेदिक हर्ब्स कमाल के काम करते हैं.

डायबिटीज मरीजों के लिए आयुर्वेदिक हर्ब्स

1. लौंग-हेल्थलाइन की खबर के मुताबिक लौंग में ऐसे कंपाउड पाए जाते हैं जो ब्लड शुगर को बढ़ने नहीं देते. एक अध्ययन के मुताबिक लौंग इंसुलिन के प्रोडक्शन को बढ़ा देता है जिसके कारण इंसुलिन शुगर को बहुत तेजी से अवशोषित कर इसे एनर्जी में बदल देता है. लौंग पैंक्रियाज में उस सेल को सक्रिय कर देता है जिससे इंसुलिन बनता है. लौंग को सुबह-सुबह चबाने से दिन भर शुगर कंट्रोल रहती है.

2. दालचीनी-एनडीटीवी डॉक्टर के मुताबिक दालचीनी से भी ब्लड शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है. दालचीनी पेड़ के छाल से तैयार होता है. यह सुगंधित आयुर्वेदिक हर्ब्स है जिससे ब्लड शुगर को आसानी से कम किया जा सकता है. अध्ययन के मुताबिक दालचीनी का सेवन करने से फास्टिंग ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम हो जाता है.

2.मेथी-वैसे तो मेथी कई औषधियी गुणों से भरपूर है लेकिन मेथी के दाने से डायबिटीज को भी कंट्रोल किया जा सकता है. इसके साथ ही मेथी के दाने स्किन और पेट से संबंधित समस्याओं से बी निजात दिलाते हैं. मेथी के दाने से मेटाबोलिज्म को बूस्ट करता है जिसके कारण ब्लड शुगर को अवशोषण तेजी से हो पाता है. मेथी को रात में पानी में भिगो दें और सुबह डायबिटीज मरीज इसे छानकर इसके पानी को पी लें. दिनभर ब्लड शुगर नहीं बढ़ेगा. इसे आप सुबह में उबाल कर चाय की तरह भी पी सकते हैं.

4.नीम -एनसीबीआई के मुताबिक नीम एंटी-बैक्टीरियल गुणों के साथ-साथ एंटी-डायबेटिक भी होता है. एनसीबीआई की रिसर्च में कहा गया है कि नीम के पत्ते डायबिटीज को भी कंट्रोल कर सकते हैं. नीम के पत्तों को सुबह-सुबह चबाने से ब्लड शुगर की मात्रा नहीं बढ़ती है और इंसुलिन का उत्पादन सहज तरह से हो पाता है. नीम के पत्तों में कई ऐसे कंपाउंड पाए गए हैं जिनसे ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है.

5. तुलसी-तुलसी बेहद गुणकारी पौधा है जिसका कई बीमारियों में इस्तेमाल किया जाता है. तुलसी की पत्तियों से सर्दी-जुकाम तो ठीक होता ही है, यह एंटी-डायबेटिक भी है. यानी तुलसी की पत्तियों का सुबह-सुबह सेवन करने से ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है. तुलसी में हाइपोग्लेसीमिया गुण पाया जाता है जो ब्लड शुगर को नीचे ले आता है.




World Mosquito Day 2023: विश्व मच्छर दिवस आज, क्यों मनाया जाता है यह दिन

World Mosquito Day 2023: दुनियाभर में आज यानी 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस मनाया जा रहा है. इस दिन को मनाने का उद्देश्य मच्‍छरों (Mosquito) के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाना है. दरअसल, मलेरिया, जीका वायरस, चिकनगुनिया, डेंगू, वेस्ट नाइल रिवर वायरस, येलो फीवर और भी न जाने कितनी जानलेवा बीमारियां मच्छरों की ही देन हैं. दुनियाभर में हर साल लाखों लोगों की जान मच्छरों के कारण उत्पन्न होने वाले रोगों के कारण चली जाती है. यह दिन सर रोनाल्ड रॉस की उस खोज को भी समर्पित है, जिसमें उन्होंने मच्छरों को मलेरिया संचरण से जोड़ा था. वैसे तो यह दिन हर साल एक थीम पर मनाया जाता है, लेकिन साल 2023 की थीम तय नहीं की गई है.

दरअसल, बारिश के मौसम में मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसमें डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया जैसी बीमारियां ज्यादातर होती हैं. इसके लिए जरूरी है कि हम अपने और परिवार की सेहत के लिए कुछ आसान और उपयोगी कदम उठाएं. ऐसे में तमाम जरूरी सावधानियों को बरतने के अलावा हम कुछ घरेलू उपायों (Home Remedies) को अपनाकर भी खुद को इनसे बचा सकते हैं. आइए जानते हैं मॉस्किटो बाइट से बचने के घरेलू उपाय.

इन बीमारियों को जन्म देते हैं मच्छर

मलेरिया: मादा एनोफेलीज मच्छर के काटने से मलेरिया की बीमारी होती है. इस रोग में व्यक्ति के शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) इंफेक्टेड हो जाती हैं और खत्म होने लगती हैं. रोगी को सर्दी और सिरदर्द के साथ ही बार-बार कभी कम तो कभी ज्यादा बुखार आता है. गंभीर मामलों में बीमार व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है, यहां तक कि उसकी मौत भी हो सकती है.

पीला बुखार: यह एक विशेष प्रकार के मच्छर से फैलने वाला वायरल इंफेक्शन है. पीले बुखार में मरीज के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में सूजन आ जाती है. कम गंभीर मामलों में सिरदर्द, जी मिचलाना, बुखार और उल्टी जैसे लक्षण दिखते हैं. गंभीर मामलों में दिल, लिवर और किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं.

चिकनगुनिया: मच्छरों से फैलने वाली यह एक आम, लेकिन घातक बीमारी है. इस रोग में मरीज को बुखार, चकत्ते और जोड़ों में दर्द की शिकायत होती है. इंफेक्शन ठीक हो जाने के बाद भी इसके लक्षण लंबे समय तक रहते हैं और मरीज के शरीर को कमजोर कर देते हैं. इससे उसे चलने-फिरने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. मरीज को पूरी तरह से आराम की जरूरत होती है.

जीका वायरस: मच्छरों के काटने से फैलने वाली यह बेहद घातक बीमारी है. इसमें बुखार, लाल चकत्ते, जोड़ों और मासपेशियों में दर्द की शिकायत रहती है. इसके अन्य लक्षणों में सिरदर्द, कंजेक्टिवाइटिस और बेचैनी भी होती है. अगर कोई गर्भवती महिला इससे संक्रमित होती है तो उसके बच्चे का दिमाग छोटा रह सकता है.

डेंगू: डेंगू वायरस से संक्रमित मच्छर के काटने से यह बीमारी फैलती है. इस बीमारी में मरीज को बुखार, चकत्ते, जोड़ों और मासपेशियों में गंभीर दर्द जैसे लक्षण अनुभव होते हैं. इस बीमारी के दौरान मरीज को आराम की जरूरत होती है और इसकी वजह से मरीज महीनों तक चलने-फिरने में दर्द का अनुभव करता है.

मॉस्किटो बाइट से बचने के 4 घरेलू उपाय

नारियल तेल-नीम की पत्तियां: मच्छरों से बचने के लिए आप नारियल तेल और नीम की पत्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आप एक कटोरी में 5 से 6 चम्‍मच कोकोनट ऑयल लें और नीम के पत्तों को पीसकर एक चम्‍मच उसका रस डालें. आप चाहें तो इसमें नीम ऑयल का प्रयोग भी कर सकते हैं. इस मिश्रण को अब अपने पूरे शरीर पर लगाएं. कई घंटों तक मच्‍छर आपसे दूर रहेंगे.

दालचीनी ऑयल: मच्‍छरों से निजात पाने के लिए आप दालचीनी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. दरअसल, इसमें कुछ कम्पाउंड होते हैं, जो मच्छर के काटने को बेअसर करते हैं. इसके लिए आप 10-15 चम्‍मच पानी में 1 चम्‍मच दालचीनी का तेल लें और इसे एक स्प्रे बोतल में रख दें. आप अपने हाथ पैर आदि पर इसे लगाएं तो मच्‍छर आपसे दूर रहेंगे.

लहसुन का प्रयोग: मच्छरों को भगाने के लिए आप लहसुन का भी यूज कर सकते हैं. दरअसल, लहसुन में एलिसिन तत्‍व होता है, जो मच्छरों को भगाने में मदद कर सकता है. इसे प्रयोग करने के लिए 5-6 लहसुन की कलियों को 1 चम्मच तेल मिला लें और रातभर के लिए रख दें. सुबह इसमें 1 चम्मच नींबू का रस और 2 कप पानी मिलाएं. इसे आप स्प्रे बोतल में डालें और आसपास छिड़क लें.

बेकिंग सोडा-सिरका: मच्छरों के आतंक से बचने के लिए आप बेकिंग सोडा और सिरके का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आप एक कप सिरका में एक चौ‍थाई बेकिंग सोडा मिलाएं और इसे स्‍प्रे बोतल में भरकर अपने कमरे या आसपास स्‍प्रे कर दें. बता दें कि, इन दोनों को मिलाने से कार्बन डाइऑक्साइड निकलता है, जो मच्‍छरों को भगाने में काफी कारगर है.

मच्छरों के काटने पर सावधानी जरूरी

    • मच्छर काटे स्थान पर खुजली करने से बचें. ऐसा करने से इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है.
    • यदि आपको मच्छर काट ले तो उस जगह को साबुन और पानी से अच्छी तरह से धो लें.
    • खुजली, लाली और सूजन से बचने को मच्छर काटी जगह पर कैलामाइन लोशन लगा लें.
    • यदि सूजन-दर्द अधिक है तो प्रभावित जगह पर आइसपैक लगाएं या ठंडे पानी से नहाएं.
    • मच्छर के काटने के बाद खुजली ठीक न हो तो एंटीहिस्टामिन दवा का सेवन कर सकते हैं.
    • टी-बैग को ठंडे पानी में डुबोएं और निचोड़कर प्रभावित जगह पर 10-15 मिनट तक लगाएं.
    • ताजा एलोवेरा जेल लेकर प्रभावित जगह पर लगाएं, इससे खुजली और जलन से राहत मिलेगी.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Denvapost.com इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)