आटा या मैदा? जानिए दोनों में क्या है बड़ा अंतर और सेहत के लिए कौन बेहतर

आजकल फास्ट फूड और बेकरी उत्पादों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पिज्जा, बर्गर, केक, बिस्किट और समोसे जैसी कई लोकप्रिय चीजें मैदा से बनाई जाती हैं। वहीं भारतीय घरों में सदियों से गेहूं के आटे से बनी रोटियां और पराठे भोजन का अहम हिस्सा रहे हैं। हालांकि दोनों ही गेहूं से बनते हैं, लेकिन पोषण और स्वास्थ्य के लिहाज से आटा और मैदा में बड़ा अंतर माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार मैदा एक रिफाइंड उत्पाद है, जबकि आटा साबुत गेहूं से तैयार किया जाता है। यही वजह है कि आटे को सेहत के लिए बेहतर माना जाता है।

कैसे बनता है आटा और मैदा?

Kamini Sinha, नोएडा स्थित डाइट मंत्रा क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन के अनुसार, आटा साबुत गेहूं को पीसकर बनाया जाता है। इसमें गेहूं का छिलका और अंकुर भी शामिल रहते हैं, जिनमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स मौजूद होते हैं।

वहीं मैदा बनाने के दौरान गेहूं के छिलके और अंकुर को पूरी तरह हटा दिया जाता है। इसके बाद बचे हुए हिस्से को बारीक पीसकर प्रोसेस और ब्लीच किया जाता है, जिससे उसका रंग सफेद हो जाता है।

क्यों नुकसानदायक माना जाता है मैदा?

विशेषज्ञों का कहना है कि मैदा में फाइबर की मात्रा बेहद कम होती है। इसके कारण इसे खाने के बाद जल्दी भूख लग सकती है। मैदा तेजी से पचती है, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है।लगातार अधिक मात्रा में मैदा का सेवन करने से मोटापा, वजन बढ़ना और Type 2 Diabetes जैसी लाइफस्टाइल बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा ज्यादा मैदा खाने से कब्ज, गैस और पेट भारी होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

आटे के क्या हैं फायदे?

साबुत गेहूं के आटे में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। यह पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। आटे में विटामिन, मिनरल्स और जरूरी पोषक तत्व भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा और पोषण देने में मदद करते हैं।

क्या मैदा में पोषण बिल्कुल नहीं होता?

विशेषज्ञों के मुताबिक मैदा में कार्बोहाइड्रेट और ऊर्जा जरूर होती है, लेकिन प्रोसेसिंग के दौरान इसके अधिकांश पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। कई देशों में मैदा में बाद में आयरन और कुछ विटामिन मिलाए जाते हैं, लेकिन फिर भी इसे साबुत आटे जितना पौष्टिक नहीं माना जाता।

बच्चों और युवाओं में बढ़ रहा मैदा का सेवन

फास्ट फूड और पैकेज्ड फूड्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण बच्चे और युवा बड़ी मात्रा में मैदा का सेवन कर रहे हैं। कई पैकेज्ड उत्पादों में भी मैदा का इस्तेमाल होता है, जिसकी जानकारी लोगों को नहीं होती। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए रोजमर्रा के भोजन में साबुत आटे को प्राथमिकता देना और मैदा से बनी चीजों का सीमित सेवन करना जरूरी है।




Radishes benefits : सर्दियों की मूली सेहत के लिए किसी औषधि से कम नहीं, पाचन से लेकर इम्यूनिटी तक देती है कई फायदे

Radishes benefits:

सर्दियों के मौसम में बाजार में आसानी से मिलने वाली मूली न सिर्फ स्वाद में खास होती है, बल्कि सेहत के लिए भी किसी औषधि से कम नहीं मानी जाती। आमतौर पर लोग इसे सलाद, सब्जी या पराठे के रूप में खाते हैं, लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों ही पद्धतियों में मूली को गुणों का भंडार बताया गया है। नियमित रूप से मूली का सेवन करने से शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।

पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है मूली

लोकल 18 से बातचीत में रायबरेली जिले के आयुष चिकित्सालय शिवगढ़ की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. स्मिता श्रीवास्तव (बीएएमएस, लखनऊ विश्वविद्यालय) बताती हैं कि मूली का सफेद कंद पाचन तंत्र को मजबूत करने में बेहद सहायक होता है।
मूली में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और कब्ज, गैस व अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है।

एसिडिटी और भूख की समस्या में फायदेमंद

डॉ. स्मिता के अनुसार, भोजन के साथ मूली का सेवन करने से पेट हल्का रहता है और भूख भी संतुलित बनी रहती है। जिन लोगों को बार-बार एसिडिटी की शिकायत रहती है, उनके लिए मूली का सेवन काफी लाभकारी माना जाता है।

लीवर को करता है डिटॉक्स

मूली लीवर के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इसमें मौजूद तत्व लीवर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं, जिससे शरीर में जमा विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं और लीवर की कार्यक्षमता बढ़ती है।
डॉ. स्मिता बताती हैं कि मूली का रस पीलिया की रोकथाम में भी उपयोगी माना जाता है।

इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक

मूली में विटामिन-सी, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। सर्दियों में मूली का सेवन करने से सर्दी-खांसी और मौसमी संक्रमण से बचाव में भी मदद मिलती है।

त्वचा, बाल और दिल के लिए भी फायदेमंद

मूली में मौजूद सल्फर यौगिक त्वचा और बालों की सेहत के लिए लाभकारी होते हैं। वहीं, हृदय स्वास्थ्य की बात करें तो मूली में पाया जाने वाला पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है।
इसके अलावा मूली कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में भी सहायक मानी जाती है।

संतुलित मात्रा में करें सेवन

विशेषज्ञों का कहना है कि मूली सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन इसका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक मात्रा में सेवन करने से कुछ लोगों को गैस या पेट से जुड़ी दिक्कत हो सकती है।




Can diabetics eat Chikoo: डायबिटीज के मरीज रहें सावधान! चीकू का सेवन बढ़ा सकता है ब्लड शुगर, जानिए नुकसान और वजह

Can diabetics eat chikoo: डायबिटीज की बीमारी में खानपान को लेकर जरा-सी लापरवाही भी ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकती है। आमतौर पर फल सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं, लेकिन डायबिटीज के मरीजों के लिए हर फल सुरक्षित नहीं होता। ऐसा ही एक फल है चीकू, जिसका स्वाद भले ही लोगों को खूब पसंद आता हो, लेकिन शुगर के मरीजों के लिए यह नुकसानदायक साबित हो सकता है। 

क्यों डायबिटीज में चीकू से परहेज जरूरी?

विशेषज्ञों के मुताबिक चीकू में प्राकृतिक शुगर (फ्रक्टोज और सुक्रोज) की मात्रा काफी अधिक होती है। इसका ग्लाइसेमिक लोड भी ज्यादा होता है, यानी इसे खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है। यही वजह है कि जिन लोगों का शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं रहता, उन्हें चीकू खाने से बचने की सलाह दी जाती है।

डॉक्टरों का कहना है कि जानकारी के अभाव में कई डायबिटीज मरीज चीकू खा लेते हैं, जिससे अचानक शुगर बढ़ने का खतरा रहता है। इस विषय पर की गई कई स्टडीज में भी चीकू को हाई शुगर फ्रूट की श्रेणी में रखा गया है।

चीकू में पोषक तत्वों का खजाना

हालांकि, चीकू पूरी तरह खराब फल नहीं है। आयुर्वेद और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार इसमें कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
चीकू में विटामिन A, B, C और E के साथ-साथ कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और मैंगनीज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं।

इंटरनेशनल साइंस एंड रिसर्च जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, चीकू हड्डियों को मजबूत बनाने, आंखों की रोशनी सुधारने, फेफड़ों की सेहत और पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद करता है।

किन समस्याओं में फायदेमंद है चीकू

चीकू पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे कब्ज, गैस, पेट फूलना और डायरिया में राहत देने में मददगार माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर की सूजन कम करते हैं।
यह शरीर की गर्मी को कम करने, इम्यूनिटी बढ़ाने और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में भी सहायक है।
चीकू में मौजूद नेचुरल शुगर तुरंत ऊर्जा देती है, इसलिए थकान, कमजोरी या वर्कआउट करने वालों के लिए यह फायदेमंद माना जाता है।
साथ ही विटामिन E और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को झुर्रियों से बचाने और एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, गर्भावस्था में होने वाली उल्टी और चक्कर की समस्या में भी चीकू लाभदायक हो सकता है।

क्या डायबिटीज के मरीज चीकू खा सकते हैं?

विशेषज्ञ साफ तौर पर कहते हैं कि डायबिटीज के मरीजों के लिए चीकू सुरक्षित फल नहीं है
अगर किसी मरीज का शुगर लेवल पूरी तरह कंट्रोल में है, तो भी चीकू बहुत कम मात्रा में और डॉक्टर की सलाह के बाद ही खाना चाहिए। बिना सलाह इसके सेवन से शुगर अचानक बढ़ सकता है।

चीकू किसे नहीं खाना चाहिए?

  • जिन लोगों का ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं रहता

  • डायबिटीज के मरीज

  • वजन कम करने की डाइट फॉलो करने वाले लोग

  • जिन लोगों को लेटेक्स या टैनिन से एलर्जी होती है

इन लोगों को चीकू से दूरी बनाए रखना बेहतर है

सुरक्षित विकल्प क्या हैं?

डायबिटीज के मरीज चीकू की जगह अमरूद, सेब, नाशपाती या बेरीज जैसे लो-ग्लाइसेमिक फल खा सकते हैं, जो शुगर लेवल को तेजी से नहीं बढ़ाते।

चीकू पोषक तत्वों से भरपूर फल जरूर है, लेकिन डायबिटीज के मरीजों के लिए यह नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में सेहत को सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टर या डाइट एक्सपर्ट की सलाह के बिना इसका सेवन न करना ही बेहतर है।

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Denvapost इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)




Health benefits of ginger coffee: कॉफी में अदरक डालकर पीना सेहत के लिए फायदेमंद या नुकसानदायक? जानिए पूरा सच

चाय ही नहीं, कॉफी में भी अदरक डालकर पीते हैं लोग, जानें इसके फायदे और नुकसान

आजकल लोग अपनी रोजमर्रा की कॉफी को और ज्यादा हेल्दी बनाने के लिए उसमें तरह-तरह की चीजें मिलाकर पीने लगे हैं। चाय में अदरक का इस्तेमाल तो आम है, लेकिन अब कॉफी में अदरक डालकर पीना एक नया हेल्थ ट्रेंड बनता जा रहा है। कुछ लोग इसे मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के लिए पीते हैं, तो कुछ इसे इम्युनिटी बूस्टर और वजन घटाने वाला ड्रिंक मानते हैं।

लेकिन सवाल यह है कि कॉफी और अदरक का यह कॉम्बिनेशन सच में सेहत के लिए फायदेमंद है या इससे नुकसान भी हो सकता है? आइए जानते हैं इसके फायदे और नुकसान।

कॉफी और अदरक: दोनों के अपने-अपने फायदे

कॉफी और अदरक, दोनों ही अपने-अपने आप में सेहत के लिए लाभकारी माने जाते हैं।

  • कॉफी में मौजूद कैफीन दिमाग को अलर्ट रखने, थकान कम करने और फोकस बढ़ाने में मदद करता है।

  • अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो पाचन सुधारने, सर्दी-खांसी से राहत देने और इम्युनिटी मजबूत करने में सहायक होते हैं।

जब इन दोनों को एक साथ मिलाया जाता है, तो यह ड्रिंक शरीर में गर्माहट पैदा करता है और मेटाबॉलिज्म को सक्रिय करने में मदद कर सकता है।

कॉफी में अदरक डालने के संभावित फायदे

  • मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद

  • पेट की गैस, ब्लोटिंग और मतली से राहत

  • सर्दी-खांसी में आराम

  • शरीर को एनर्जी और गर्माहट प्रदान करता है

  • कुछ लोगों में वजन घटाने की प्रक्रिया को सपोर्ट करता है

इन लोगों को सावधान रहने की जरूरत

हालांकि यह ड्रिंक हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होती। कुछ मामलों में इसके नुकसान भी हो सकते हैं—

  • ज्यादा कैफीन और अदरक मिलकर एसिडिटी और जलन बढ़ा सकते हैं

  • खाली पेट पीने से पेट दर्द या बेचैनी हो सकती है

  • हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट की समस्या वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए

  • गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के बिना इसे नहीं अपनाना चाहिए

कैसे करें सही तरीके से सेवन

  • कॉफी में अदरक की मात्रा बहुत कम रखें

  • दिन में एक बार से ज्यादा न पिएं

  • खाली पेट पीने से बचें

  • अगर पहले से पेट या एसिडिटी की समस्या है, तो इसे न लें




क्या सर्दियों में बार-बार होता है सिर दर्द? परेशान हैं तो अपनाएं ये देसी तरीका, मिनटों में मिलेगा आराम

ठंड के मौसम में बहुत से लोग बार-बार सिरदर्द की समस्या से परेशान रहते हैं। यह दर्द कभी हल्का तो कभी इतना तेज हो जाता है कि दिनभर काम करना मुश्किल हो जाता है। अगर सर्दियों में सिरदर्द बार-बार हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है, क्योंकि यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।

डॉक्टरों के अनुसार, सर्दी का मौसम जहां कुछ लोगों के लिए आरामदायक होता है, वहीं कई लोगों के लिए यह सेहत से जुड़ी परेशानियां लेकर आता है। जुकाम-खांसी के साथ-साथ सर्दियों में सिरदर्द सबसे आम समस्या बन जाती है।

ठंडी हवा का सीधा असर

ठंडी हवा जब सीधे सिर या कानों पर लगती है, तो रक्तवाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे सिरदर्द हो सकता है। इसलिए बाहर निकलते समय सिर और कानों को मफलर या टोपी से ढकना जरूरी है।

शरीर में पानी की कमी

सर्दियों में प्यास कम लगती है, जिस कारण लोग कम पानी पीते हैं। डिहाइड्रेशन से दिमाग तक ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है और सिरदर्द शुरू हो जाता है।
समाधान: दिनभर गुनगुना पानी, हर्बल टी या सूप लेते रहें।

सूरज की रोशनी की कमी

धुंध और बादलों की वजह से धूप कम मिलती है, जिससे सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। यह भी सिरदर्द का कारण बन सकता है।

साइनस की समस्या

सर्दियों में नाक बंद होना या साइनस में सूजन होने से माथे पर भारीपन और तेज दर्द महसूस होता है।

नींद की कमी

सर्दियों में दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं। अनियमित नींद माइग्रेन और सिरदर्द की समस्या को बढ़ा सकती है।

क्या खाएं जिससे सिरदर्द से मिले राहत

  • मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त भोजन

  • ताजे फल और हरी सब्जियां

  • सुबह हल्की धूप में बैठें, इससे विटामिन-D मिलेगा

सिरदर्द होने पर अपनाएं ये देसी उपाय

  अदरक की चाय पिएं – इसमें सूजन कम करने वाले गुण होते हैं
  गर्म पानी की भाप लें – साइनस खुलने में मदद मिलेगी
  हल्के गर्म तेल से सिर की मालिश करें – ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होगा
  शांत जगह पर थोड़ी देर आराम करें

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

       अगर सिरदर्द के साथ:

  • लगातार उल्टी जैसा महसूस हो

  • आंखों के सामने अंधेरा आए

  • तेज बुखार हो

  • दर्द कई दिनों तक बना रहे

तो इसे घरेलू उपायों से ठीक करने की कोशिश न करें। यह न्यूरोलॉजिकल समस्या या हाई ब्लड प्रेशर का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. denvapost.com इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)




सर्दियों में ज्यादा चाय पीना सेहत के लिए कितना सही? जानिए आयुर्वेद की चेतावनी और बेहतर विकल्प

जैसे-जैसे सर्दियों का मौसम नजदीक आता है, वैसे-वैसे घरों में चाय का सेवन भी बढ़ने लगता है। ठंड से राहत पाने और शरीर को गर्म रखने के लिए लोग दिन में कई बार चाय पीते हैं। कई लोगों के लिए सुबह की शुरुआत और शाम की थकान बिना चाय के अधूरी लगती है। लेकिन आयुर्वेद सिर्फ स्वाद या तात्कालिक गर्माहट के लिए चाय पीने को पूरी तरह सही नहीं मानता। आयुर्वेद के अनुसार खान-पान हमेशा शरीर के दोष, पाचन शक्ति और मौसम के अनुरूप होना चाहिए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सर्दियों में ज्यादा चाय पीना फायदेमंद है या धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।

आयुर्वेद चाय के बारे में क्या कहता है

लोकल 18 से बातचीत में डॉ. राजकुमार (आयुष) ने बताया कि सर्दियों में शरीर में कफ दोष स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। ठंड का असर पाचन अग्नि पर भी पड़ता है। चाय में मौजूद कैफीन, दूध और चीनी का अधिक सेवन पाचन अग्नि को कमजोर कर सकता है। जब पाचन सही ढंग से काम नहीं करता, तो गैस, एसिडिटी, भारीपन और कब्ज जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
आयुर्वेद के अनुसार चाय ऊपर से शरीर को गर्म महसूस कराती है, लेकिन अंदर से कफ को बढ़ाकर शरीर का संतुलन बिगाड़ सकती है

ज्यादा चाय पीने के नुकसान

अधिक मात्रा में चाय पीने से सर्दी-जुकाम और बलगम की समस्या बढ़ सकती है। खासतौर पर दूध वाली चाय कफ को और ज्यादा बढ़ाती है, जिससे नाक बंद रहना, गले में खराश और खांसी जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
इसके अलावा चाय में मौजूद टैनिन आयरन के अवशोषण को कम करता है। लंबे समय तक ज्यादा चाय पीने से कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। आयुर्वेद यह भी मानता है कि बार-बार चाय पीने से शरीर उस पर निर्भर हो जाता है और बिना चाय के सिरदर्द, चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

सर्दियों में चाय के बेहतर विकल्प

आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में ऐसे पेय ज्यादा फायदेमंद होते हैं, जो हल्की लेकिन स्थायी गर्माहट दें।

  • अदरक, तुलसी, दालचीनी या सौंठ से बनी हर्बल चाय

  • गुनगुना पानी, जीरा पानी या हल्का काढ़ा

ये न सिर्फ शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं, बल्कि पाचन को मजबूत करते हैं और इम्युनिटी बढ़ाने में भी मददगार होते हैं।

अगर कोई व्यक्ति चाय छोड़ नहीं सकता, तो आयुर्वेद दिन में एक या दो कप से ज्यादा चाय न पीने की सलाह देता है। साथ ही खाली पेट चाय पीने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

सर्दियों में चाय का सीमित सेवन नुकसानदेह नहीं है, लेकिन जरूरत से ज्यादा चाय पीना धीरे-धीरे सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। आयुर्वेद के अनुसार संतुलन ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है, इसलिए चाय के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक और प्राकृतिक विकल्पों को अपनाना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।




सर्दियों में बच्चों की सेहत की देसी ढाल: कुंती नानी के आजमाए नुस्खे

सर्दियों का मौसम आते ही छोटे बच्चों की सेहत को लेकर माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है। ठंडी हवाएं, गिरता तापमान और मौसम में अचानक बदलाव बच्चों को जल्दी बीमार कर सकता है। ऐसे समय में शिवपुरी की कुंती नानी ने अपने वर्षों के अनुभव से बच्चों की देखभाल के ऐसे देसी नुस्खे साझा किए हैं, जो आज भी उतने ही कारगर और सुरक्षित माने जाते हैं।

कुंती नानी का कहना है कि सर्दियों में बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए थोड़ी-सी सावधानी और नियमित देखभाल बेहद जरूरी है। उनके अनुसार ठंड के मौसम में बच्चों के शरीर को गर्म रखना सबसे अहम होता है, ताकि सर्दी-जुकाम और अन्य मौसमी बीमारियों से बचाव किया जा सके।

देसी तेल से मालिश है बेहद लाभकारी

कुंती नानी बताती हैं कि सर्दियों में बच्चों की रोजाना गुनगुने तेल से मालिश करनी चाहिए। खासतौर पर अजवाइन और लहसुन डालकर पकाए गए तेल से मालिश करने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और ठंड का असर कम पड़ता है। इससे सर्दी-खांसी और बदन दर्द जैसी समस्याओं में भी राहत मिलती है।

नहाने में बरतें खास सावधानी

सर्दियों में बच्चों को ठंडे पानी से नहलाने से बचना चाहिए। कुंती नानी की सलाह है कि हमेशा गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें और नहलाने के तुरंत बाद बच्चों को सूखे व गर्म कपड़े पहनाएं। नहाने के दौरान इस बात का भी ध्यान रखें कि बच्चा ज्यादा देर तक ठंडे माहौल में न रहे।

सुबह-शाम ठंड से बचाव जरूरी

कुंती नानी कहती हैं कि बच्चों को सुबह और शाम के समय ठंड से विशेष रूप से बचाना चाहिए। बाहर ले जाते समय बच्चों को पूरी तरह ढंककर रखें। सिर, कान, हाथ और पैर को गर्म कपड़ों से ढकना बेहद जरूरी है, क्योंकि इन्हीं हिस्सों से ठंड सबसे पहले शरीर में प्रवेश करती है। मोजे, दस्ताने और टोपी का इस्तेमाल सर्दी-खांसी से बचाव में मदद करता है।

डायपर और सफाई पर दें ध्यान

बच्चों की साफ-सफाई को लेकर कुंती नानी विशेष सतर्कता बरतने की सलाह देती हैं। उनका कहना है कि बच्चों को ज्यादा देर तक गीले कपड़ों या डायपर में नहीं रखना चाहिए। लंबे समय तक ऐसा रहने से त्वचा पर रैशेज, संक्रमण और अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

बच्चों के संकेतों को न करें नजरअंदाज

कुंती नानी माताओं को सलाह देती हैं कि बच्चों के रोने, बेचैनी या ठंड लगने के संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें। सर्दियों में बच्चों को हल्का लेकिन गर्म भोजन देना भी फायदेमंद होता है, जिससे शरीर को अंदर से ऊर्जा मिलती रहे।

कुंती नानी का मानना है कि भले ही आज बाजार में आधुनिक उत्पादों की भरमार हो, लेकिन देसी नुस्खे आज भी सबसे सुरक्षित और असरदार हैं। सही देखभाल, साफ-सफाई और घरेलू उपाय अपनाकर सर्दियों में बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित रखा जा सकता है।




कोविड-19 के बाद हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ा, जानें रिपोर्ट में क्या चेतावनी

कोविड-19 के बाद हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ा
कोरोना के कारण लाखों लोगों के हार्ट पर मंडरा रहा खतरा, सही से एहतियात नहीं
Covid-19 Put your heart at Risk: करीब पाँच साल पहले कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को हिला दिया था। महामारी थम चुकी है, लेकिन कोविड-19 के दुष्प्रभाव अब भी लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित कर रहे हैं। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे लाखों मरीजों के सामने सबसे बड़ा खतरा है—हार्ट अटैक

यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट ने चेताया है कि कोविड संक्रमण दिल और रक्त वाहिकाओं पर स्थायी नुकसान छोड़ सकता है।


कोविड और दिल पर हार्ट अटैक का असर

  • हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बढ़ा खतरा – कोविड संक्रमण के बाद खून में थक्के बनने की संभावना बढ़ जाती है, जो हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं।

  • कार्डियक फंक्शन पर असर – वायरस न केवल फेफड़ों को प्रभावित करता है, बल्कि दिल और ब्लड वैसल्स को भी नुकसान पहुंचाता है।

  • लक्षण – सांस फूलना, सीने में दर्द, अनियमित धड़कनें और अत्यधिक थकान।

  • हाई-रिस्क ग्रुप – पहले से हृदय रोगी और बुजुर्ग लोग।


लॉन्ग कोविड और दिल की जटिलताएँ हार्ट अटैक   

लॉन्ग कोविड वाले मरीजों में “कार्डियक लॉन्ग कोविड” के लक्षण प्रमुख हैं:

  • सीने में दर्द

  • सांस लेने में कठिनाई

  • अनियमित दिल की धड़कन

  • लगातार थकान और चक्कर

  • ऑटोनॉमिक डिसफंक्शन – यानी शरीर की नसों का सही से काम न करना, जो दिल की धड़कन, सांस और तापमान को नियंत्रित करती हैं।


शोध में सुझाए गए उपाय

शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर सही कदम समय रहते उठाए जाएँ तो दिल पर कोविड का खतरा कम किया जा सकता है।

  1. वैक्सीनेशन जारी रहे – पूरी तरह वैक्सीन लेने वालों में गंभीर हृदय रोगों का खतरा कम होता है।

  2. समय पर पहचान और इलाज – संदिग्ध मरीजों की शुरुआती जांच ज़रूरी है।

  3. कार्डियक रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम

    • विशेष फिजियोथेरेपी

    • पोषण और देखभाल

    • दिल को मज़बूत बनाने वाले एक्सरसाइज़

    • नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग

  4. समान स्वास्थ्य सेवा पहुंच – हर वर्ग तक इन सेवाओं को पहुँचाना ज़रूरी है।

कोविड-19 का असर केवल महामारी के दौरान नहीं रहा, बल्कि यह लॉन्ग कोविड के रूप में आज भी लाखों मरीजों की ज़िंदगी को प्रभावित कर रहा है। दिल की बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए जरूरी है कि वैक्सीनेशन, समय पर पहचान, और विशेष कार्डियक रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम को प्राथमिकता दी जाए।
यह केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में पब्लिक हेल्थ सिस्टम की सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।

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40 की उम्र के बाद बढ़ती प्रोस्टेट समस्या, बिना ऑपरेशन ऐसे मिलेगा राहत

देहरादून। 40 की उम्र पार करने के बाद ज्यादातर पुरुषों को प्रोस्टेट (Prostate Problem) की दिक्कत होने लगती है। यह समस्या शहर से लेकर गांव तक तेजी से फैल रही है। आमतौर पर पेशाब करने में रुकावट, बार-बार टॉयलेट जाना, पेट भारी लगना या कमर दर्द जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। डॉक्टर दवाइयां और कई बार ऑपरेशन की सलाह देते हैं, लेकिन सवाल है कि क्या बिना ऑपरेशन इसका इलाज संभव है? जवाब है – हां, आयुर्वेद (Ayurvedic Treatment for Prostate) इसके लिए असरदार विकल्प हो सकता है।

प्रोस्टेट क्या है?

प्रोस्टेट पुरुषों की एक छोटी ग्रंथि है जो मूत्राशय के नीचे और मूत्र नली के चारों ओर होती है। उम्र के साथ यह धीरे-धीरे बढ़ने लगती है जिसे प्रोस्टेट एनलार्जमेंट कहा जाता है। इसी कारण पेशाब रुक-रुक कर आना या बार-बार पेशाब लगने की समस्या होती है।

डॉक्टर का इलाज या आयुर्वेद?

एलोपैथी में लंबे इलाज और ऑपरेशन का डर कई लोगों को परेशान कर देता है। वहीं, आयुर्वेद सुरक्षित और आसान विकल्प देता है। आदर्श आयुर्वेदिक फॉर्मेसी के वैद्य दीपक कुमार ने बताया कि घर पर ही अपनाए जा सकने वाले उपाय से प्रोस्टेट की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

बड़ी काबुली हरड़ का नुस्खा

रात को दो बड़ी काबुली हरड़ एक गिलास पानी में भिगो दें।

ध्यान रखें, हरड़ पूरी तरह पानी में डूबनी नहीं चाहिए।

सुबह उठकर हरड़ काटकर बीज निकाल दें और गूदा चबाकर खा लें।

आखिर में वही पानी पी लें जिसमें हरड़ भिगोई थी।

नियमित रूप से करने पर धीरे-धीरे प्रोस्टेट की समस्या कम होने लगती है।

निष्कर्ष

प्रोस्टेट की समस्या आम है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं। अगर शुरुआती लक्षणों में ही ध्यान देकर आयुर्वेदिक नुस्खे अपनाए जाएं तो बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।




मोटापे से पाना है छुटकारा तो रोजाना करें ये आसान एक्सरसाइज़, तेजी से गलने लगेगी शरीर में जमी चर्बी

वजन घटाने के लिए एक्सरसाइज़- India TV Hindi
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वजन घटाने के लिए एक्सरसाइज़

अगर आपका वजन बढ़ा हुआ है और आप उसे कंट्रोल करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी जीवनशैली अच्छी करें। अच्छी डाइट के साथ इन कुछ आसान एक्सरसाइज़ को शामिल करें। इन एक्सरसाइज़ की मदद से आप वजन को धीरे धीरे कंरोल कर सकती हैं। बता दें, इन वर्कआउट को करने से सिर्फ मोटापा ही कम नहीं होता है बल्कि ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। इसके अलावा ये आपे ब्रेन और मेंटल हेल्थ के लिए काम करते हैं। साथ ही जब आप रोज एक्सरसाइज करते हैं तो आपके शरीर के कई अंग हेल्दी रहते हैं जिससे आप डायबिटीज, लिवर की बीमारी और मोटापा जैसी बीमारियों से बच सकते हैं। लेकिन, सवाल ये है कि रोजाना आप कौन सी एक्सरसाइज कर सकते हैं। जानते हैं इस बारे में विस्तार से।

वजन कम करने के लिए रोजाना करें एक्सरसाइज़:

  • ब्रिस्क वॉक: ब्रिस्क वॉक करना, आपके दिल के लिए फायदेमंद है। उदाहरण के लिए, नियमित रूप से वॉक करना वेट लॉस करने में मदद करता है। ये शरीर की चर्बी को कम करता है। ये हृदय रोग, स्ट्रोक, हाई बीपी और टाइप 2 डायबिटीज सहित विभिन्न गंभीर बिमारियों से बचाव में मदद कर सकता है।
  • ब्रीदिंग एक्सरसाइज: डेली ब्रीदिंग एक्सरसाइज करना फेफड़ों के लिए कई प्रकार से फायदेमंद है। दरअसल, सुबह उठने के बाद आपको ये एक्सरसाइज सबसे पहले करनी चाहिए। ये आपके फेफड़ों के काम काज को बेहतर बनाता है और फेफड़ों को स्ट्रांग बनाने में मदद करता है। इसके अलावा ब्रीदिंग एक्सरसाइज करना, आपके ब्लड सर्कुलेशन को तेज करता है और ब्रेन को भी रिफ्रेश करने में मदद करता है।
  • जॉगिंग: नियमित रूप से जॉगिंग करने से आपको वजन कम करने में मदद कर सकता है। खासकर अगर आप अपने आहार में भी बदलाव कर रहे हैं। जॉगिंग आपके हृदय स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने, इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने, तनाव और अवसाद से निपटने और उम्र बढ़ने के साथ लचीलेपन को बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए, अगर आप किसी भी उम्र के क्यों न हो जॉगिंग कर सकते हैं।
  • स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज: स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना आपके शरीर के काम काज को बेहतर बनाता है। ये आपके मांसपेशियों में खिंचाव को कम करने करने के साथ शरीर में दर्द सहित कई समस्याओं को कम करने में मददगार है। इसके अलावा ये थकान कम करता है और आपके शरीर में स्टैमिना बिल्डअप में मदद करता है। तो, रोजाना आपके लिए ये एक्सरसाइज करना फायदेमंद हो सकता है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। Denvapost.com किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)