लड्डू गोपाल को घर की किस दिशा में स्थापित करें?

हिन्दू धर्म के ज्यादातर घरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा विशेष रूप से की जाती है।लेकिन लड्डू गोपाल की सेवा और आराधना के दौरान वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। ऐसा करने से साधक को पूजा, सेवा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, इसका लाभ तभी मिलेगा जब घर में लाए लड्डू गोपाल को सही दिशा में स्थापित करें। ऐसे में सवाल है कि आखिर घर में लड्डू गोपाल को किस दिशा में स्थापित करें। इस बारे में denvapost को बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य महेश व्यास

कब लाएं लड्डू गोपाल की प्रतिमा?

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, लड्डू गोपाल की नई मूर्ति लाने के लिए जन्माष्टमी का दिन सबसे शुभ माना जाता है। यदि जन्माष्टमी पर संभव न हो तो भादो या फिर सावन माह के किसी भी दिन लड्डू गोपाल को घर लाया जा सकते हैं। इसके अलावा, किसी भी महीने की एकादशी तिथि के दिन भी घर में लड्डू गोपाल को लाया जा सकता है।

घर की इस दिशा में स्थापित करें मूर्ति

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में लड्डू गोपाल की मूर्ति को स्थापित करना सबसे शुभ माना जाता है। क्योंकि वास्तु के अनुसार, यह दिशा आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ी हुई होती है। इसलिए इस दिशा में लड्डू गोपाल की प्रतिमा स्थापित करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है और घर में खुशहाली रहती है।

ऐसे स्थापित करें लड्डू गोपाल

ज्योतिषाचार्य की मानें तो लड्डू गोपाल की मूर्ति को घर के मंदिर या पूजा स्थल में स्थापित करने के लिए हमेशा किसी ऊंचे स्थान का चयन करना चाहिए। क्योंकि लड्डू गोपाल को ऊंचे स्थान पर ही विराजमान किया जाता है, इसके लिए आप चौकी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं या फिर अगर आप चाहें तो लड्डू गोपाल को झूले पर भी विराजमान कर सकते हैं।

लड्डू गोपाल की पूजा विधि

घर के मंदिर में लड्डू गोपाल को स्थापित करने के बाद रोज सुबह-शाम पूजा करना जरूरी है। नियमित रूप से स्नान के बाद मंदिर को साफ रखें और पूजा करें। ध्यान रहे कि, पूजा में शुद्ध सामग्री का ही उपयोग करना है। मंत्रों का जाप करें और लड्डू गोपाल को नियमित भोग लगाएं। लड्डू गोपाल की सेवा पूर्ण श्रद्धा से करें, संभव हो तो उनको नियमित स्नान कराएं और रोज उनको स्वच्छ वस्त्र पहनाएं।




Mahakal Bhasma Aarti Darshan: देवी स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रुद्राक्ष माला और कमल के फूल बढ़ा रहे थे शोभा

Baba Mahakal dressed as a goddess, wearing a rosary of Rudraksh and also offering lotus flowers

देवी स्वरूप में सजे बाबा महाकाल

अश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का आलौकिक शृंगार हुआ। इस दौरान बाबा महाकाल को आभूषण से देवी स्वरूप में सजाया गया और फूलों की माला से शृंगार किया गया। जिसने भी इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया, वे देखते ही रह गए। आज भक्तों को दर्शन देने के लिए बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। इसके बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती धूमधाम से की गई।

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि अश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि यानी कि नवरात्रि के सातवें दिन बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद सबसे पहले भगवान का स्नान, पंचामृत अभिषेक करवाने के साथ ही केसर युक्त जल अर्पित किया गया। इस अलौकिक शृंगार को जिसने भी देखा, वह देखता ही रह गया। आज बाबा महाकाल का आभूषण से देवी स्वरूप मे शृंगार किया गया और रुद्राक्ष की माला के साथ कमल के फूल भी अर्पित किए गए। फिर महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती के दर्शन किए और भस्म आरती की व्यवस्था से लाभान्वित हुए। श्रद्धालुओं ने इस दौरान बाबा महाकाल के निराकार से साकार होने के स्वरूप का दर्शन कर जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।

अखण्ड दीप हेतु 91 लीटर घी दान में प्राप्त

श्री महाकालेश्वर मंदिर के श्री गर्भगृह में जलने वाली अखंड ज्योति (नन्दा दीप) हेतु शिव-शक्तिधाम (दुर्गापुर) एवं श्री महामृत्युंजय मठ(महाकाल लोक) स्वामी प्रणव पुरी द्वारा 91 लीटर घी की सेवा अर्पित हुई। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ द्वारा स्वामी प्रणव पुरी का सम्मान किया गया व विधिवत रसीद प्रदान की गई।

देवी स्वरूप मे सजे बाबा महाकाल, रुद्राक्ष की माला पहनी कमल के फूल भी लिए अर्पित

देवी स्वरूप मे सजे बाबा महाकाल, रुद्राक्ष की माला पहनी कमल के फूल भी लिए अर्पित




Ujjain News : भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल देवी स्वरूप में सजे हुए

Baba Mahakal dressed as goddess during Bhasma Aarti

बाबा महाकाल

अश्विन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि बुधवार पर आज श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का आलौकिक श्रृंगार हुआ। इस दौरान बाबा महाकाल को आभूषण से देवी स्वरूप में सजाया गया और फूलों की माला से श्रृंगार किया गया। जिसने भी इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया वह देखते ही रह गया। आज भक्तों को दर्शन देने के लिए बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। जिसके बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती धूमधाम से की गई।

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि अश्विन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी की नवरात्रि के सातवें दिन पर आज बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। जिसके बाद सबसे पहले भगवान का स्नान, पंचामृत अभिषेक करवाने के साथ ही केसर युक्त जल अर्पित किया गया। आज के इस अलौकिक श्रृंगार को जिसने भी देखा वह देखता ही रह गया।

आज बाबा महाकाल का आभूषण से श्रृंगार किया गया और फिर महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती के दर्शन किए और भस्म आरती की व्यवस्था से लाभान्वित हुए। श्रद्धालुओं ने इस दौरान बाबा महाकाल के निराकार से साकार होने के स्वरूप का दर्शन कर जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।

बाबा के भक्त द्वारा आर्टिफिशियल ज्वेलरी प्राप्त

श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्री महाकालेश्वर भगवान को चेन्नई के भक्त दीपक कुमार व प्रदीप कुमार द्वारा श्री महाकालेश्वर भगवान के श्रृंगार हेतु आर्टिफिशियल ज्वेलरी भेंट की गई। जिसमें मुकुट, त्रिपुंड, लॉकेट, कुंडल, पुष्प, चन्द्रमा, तिलक, बिन्दी, इत्र की शीशी, एवं चन्दन आदि भेंट में प्राप्त हुई। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा विधिवत रसीद प्रदान की गई। यह जानकारी मंदिर प्रबंध समिति की कोठार शाखा द्वारा दी गई।




Ujjain News: भस्म आरती में मावे से सजे बाबा महाकाल, मस्तक पर सजे चंद्रमा और सूर्य; भक्तों को दिये दर्शन

Baba Mahakal decorated with mawa in Bhasma Aarti, moon and sun decorated on his head

बाबा महाकाल

अश्विन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि सोमवार पर आज श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का आलौकिक श्रृंगार हुआ। इस दौरान बाबा महाकाल के शीश पर चंद्रमा और सूर्य को सजाया गया और रुद्राक्ष व फूलों की माला से श्रृंगार किया गया। जिसने भी इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया वह देखते ही रह गया। आज भक्तों को दर्शन देने के लिए बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। जिसके बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती धूमधाम से की गई।

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि अश्विन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी की नवरात्रि के पांचवें दिन पर आज बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। जिसके बाद सबसे पहले भगवान का स्नान, पंचामृत अभिषेक करवाने के साथ ही केसर युक्त जल अर्पित किया गया। आज के इस अलौकिक श्रृंगार को जिसने भी देखा वह देखता ही रह गया।

आज बाबा महाकाल का मावे से श्रृंगार किया गया और फिर महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती के दर्शन किए और भस्म आरती की व्यवस्था से लाभान्वित हुए। श्रद्धालुओं ने इस दौरान बाबा महाकाल के निराकार से साकार होने के स्वरूप का दर्शन कर जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।

अन्नक्षेत्र में हुआ कन्या भोज

प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी उमा-सांझी आयोजन की कड़ी में मन्दिर के अन्नक्षेत्र में कन्या-पूजन व कन्या-भोज सम्पन्न हुआ, जिसमें लगभग 170 कन्याओं ने भाग लिया। परंपरा अन्तर्गत मन्दिर के सहायक प्रशासनिक अधिकारी आर. के. तिवारी ने भोज के पूर्व कन्याओं को अक्षत-तिलक लगाकर पाँव पूजे। कन्याओं को भेंट स्वरूप कंपास दिये गए।




Ujjain News : भस्म आरती में सूर्य, चंद्रमा के साथ सजे बाबा महाकाल, पूजन सामग्री से हुआ अलौकिक शृंगार

Ujjain News: Baba Mahakal decorated with Sun and Moon in Bhasma Aarti, decorated with worship materials

बाबा महाकाल की भस्म आरती और रजत पालकी में सवार होकर निकली मां उमा

आज श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के शीश पर सूर्य और चंद्रमा बनाए गए और फूलों की माला से शृंगार किया गया, जिसने भी इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया वह देखते ही रह गया। आज भक्तों को दर्शन देने के लिए बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे, जिसके बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती धूमधाम से की गई।

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि अश्विन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी की नवरात्रि के तीसरे दिन पर आज बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए, जिसके बाद सबसे पहले भगवान का स्नान, पंचामृत अभिषेक करवाने के साथ ही केसर युक्त जल अर्पित किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का माता स्वरूप में भव्य शृंगार किया गया। आज के इस अलौकिक शृंगार को जिसने भी देखा वह देखता ही रह गया।

बाबा महाकाल का पूजन सामग्री से शृंगार किया गया और फिर महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती के दर्शन किए और भस्म आरती की व्यवस्था से लाभान्वित हुए। श्रद्धालुओं ने इस दौरान बाबा महाकाल के निराकार से साकार होने के स्वरूप का दर्शन कर जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।

राजसी ठाट-बाट से निकाली उमा माता की सवारी

श्री महाकालेश्वर मंदिर में उमा सांझी महोत्सव में भगवान श्री महाकालेश्वर की भांति वर्ष में एक बार निकलने वाली श्री उमा माता की सवारी श्री महाकालेश्वर मंदिर से राजसी ठाट-बाट से निकाली गई। पंच दिवसीय उमा सांझी महोत्सव के पश्चात चन्द्र दर्शन के लिए परंपरानुसार उमा माता जी की सवारी नगर भ्रमण पर निकली। सवारी के पूर्व सभा मंडप में पूजन पश्चात श्री उमा माता की पालकी को नगर भ्रमण की ओर रवाना किया।

श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर मध्यप्रदेश सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा श्री उमा माता को सलामी देने के बाद पालकी ने नगर भ्रमण की ओर प्रस्थान किया। मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रद्धालुओं ने पालकी में विराजित भगवान श्री उमा माता के दर्शनों का लाभ लिया। पालकी में श्री उमा माता की रजत की प्रतिमा व डोल रथ गरूड़ पर माताजी (पीतल की प्रतिमा) तथा भगवान श्री महेश विराजित होकर निकले। सवारी श्री महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर श्री महाकाल चौराहा, महाकाल घाटी, तोपखाना, दौलतगंज चौराहा, नई सड़क, कंठाल, सराफा, छत्री चौक, गोपाल मन्दिर, पटनी बाजार, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कार्तिक चौक एवं मोढ़ की धर्मशाला, रामानुज कोट होते हुए क्षिप्रा तट पर पहुंची। यहां जवारे व संजा विसर्जन एवं पूजन के पश्चात सवारी कहारवाड़ी, बक्षी बाजार एवं महाकाल रोड होते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर वापस आई।

बाबा महाकाल की भस्म आरती और रजत पालकी में सवार होकर निकली मां उमा

बाबा महाकाल की भस्म आरती और रजत पालकी में सवार होकर निकली मां उमा

बाबा महाकाल की भस्म आरती और रजत पालकी में सवार होकर निकली मां उमा

बाबा महाकाल की भस्म आरती और रजत पालकी में सवार होकर निकली मां उमा




Ujjain News: श्री महाकालेश्वर मंदिर में पांच दिनों तक मनाया जाएगा उमा-सांझी महोत्स

Ujjain: Uma-Sanjhi festival will be celebrated for five days in Shri Mahakaleshwar temple

श्री महाकालेश्वर मंदिर में उमा-सांझी महोत्सव।

शिव एवं उमा का प्रकृति और पुरुष का उत्सव श्री महाकालेश्वर मंदिर में उमा-सांझी महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस बार यह महोत्सव 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। उमा-सांझी के पूजन की परंपरा प्राचीन संस्कृति पर आधारित है। पांच दिवसीय आयोजन में मंदिर के सभा मंडप में धार्मिक झांकियां तथा सांझी सजाई जाएगी। भगवान महाकाल मनमहेश रूप में कोटि तीर्थ कुंड में नौका विहार करेंगे। प्रतिदिन शाम को लोक कलाकार गीत, संगीत और नृत्य की प्रस्तुति देंगे। ग्वालियर के ढोली बुआ नारदीय संकीर्तन से भक्तों को हरि कथा सुनाएंगे।

श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिवर्ष श्राद्ध पक्ष में उमा सांझी महोत्सव मनाया जाता है। आयोजन के तहत महाकाल मंदिर के सभामंडप में संझा सजाई जाएगी। वहीं, महाकाल के आंगन में सांस्कृतिक आयोजन भी होंगे। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा इस वर्ष उमा-सांझी महोत्सव का आयोजन 28 सितंबर अश्विन कृष्ण पक्ष एकादशी से 2 अक्टूबर अश्विन शुक्ल द्वितीया तक आयोजित किया जाएगा। इस पांच दिवसीय आयोजन में प्रतिदिन सायं-आरती के पश्चात लोक संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ही बच्चों के लिए रंगोली और अन्य स्पधार्ओं का आयोजन होंगे, जिसके अंतर्गत रंगोली के रंग से किलाकोट, रंगमहल, शीशमहल आदि की सांझी बनाएंगे। वहीं, चार अक्टूबर को चंद्र दर्शन की द्वितीया पर उमा माता की सवारी महाकाल मंदिर से प्रारंभ होकर पंरपरागत मार्ग से शिप्रा तट तक जाएगी। शिप्रा पर संझा विसर्जन व पूजन के बाद सवारी वापस मंदिर आती है। पांच दिन तक संध्या के समय चयनित लोक कलाकारों द्वारा गायन, वादन व नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाती है।

पांच-दिवसीय धार्मिक, सांस्कृतिक, और लोककला उत्सव

उमा सांझी महोत्सव, उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में मनाया जाने वाला पांच-दिवसीय धार्मिक, सांस्कृतिक, और लोककला उत्सव है। इस साल 2024 में यह महोत्सव 28 सितम्बर से शुरू हुआ था। इस महोत्सव के दौरान, मंदिर में कई तरह के आयोजन होते हैं, जिनमें शामिल हैं।

    •  मंदिर के सभा मंडप में धार्मिक झांकियां और सांझी सजाई जाती है।
    •  रंग महल, उमा महल, और किला कोट जैसी झांकियां रंगोली के रंगों से सजाई जाती हैं।
    •  शिव-पार्वती के कई रूपों की झांकियां भी सजाई जाती हैं।
    •  भगवान महाकाल मनमहेश रूप में कोटि तीर्थ कुंड में नौका विहार करते हैं।
    •  प्रतिदिन शाम को लोक कलाकार गीत, संगीत, और नृत्य की प्रस्तुति देते हैं।
    •  ग्वालियर के ढोली बुआ नारदीय संकीर्तन से भक्तों को हरि कथा सुनाते हैं।



उज्जैन महाकाल भस्म आरती दर्शन, हजारों भक्त पहुंचे, भांग से सजाया गया

Ujjain Mahakal Bhasma Aarti Darshan, thousands of devotees arrived, decorated with hemp

बाबा महाकाल का भस्म आरती

अश्विन कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल भक्तों को दर्शन देने के लिए सुबह 4 बजे जागे। इसके बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती धूमधाम से की गई। इस दौरान बाबा महाकाल का भांग और ड्रायफ्रूट से शृंगार किया गया। इसका लाभ हजारों श्रद्धालुओं ने लिया।

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि अश्विन कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि शुक्रवार पर आज बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद सबसे पहले भगवान का स्नान, पंचामृत अभिषेक करवाने के साथ ही केसर युक्त जल अर्पित किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का भव्य शृंगार किया गया। इस अलौकिक शृंगार को जिसने भी देखा वह देखता ही रह गया।

आज भगवान का राजसी स्वरूप में शृंगार कर उन्हें नवीन मुकुट से  शृंगारित किया गया और फिर महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती के दर्शन किए और भस्म आरती की व्यवस्था से लाभान्वित हुए। श्रद्धालुओं ने इस दौरान बाबा महाकाल के निराकार से साकार होने के स्वरूप का दर्शन कर जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।




Ujjain: भस्म आरती में त्रिपुंड लगाकर सजे बाबा महाकाल, गणपति बप्पा की विदाई के इस रूप में किया गया श्रृंगार

Ujjain: Baba Mahakal decorated with Tripund in Bhasma Aarti decorated in this form to bid farewell to Ganpati

करें बाबा महाकाल के दर्शन।

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज बुधवार को भस्म आरती में बाबा महाकाल को त्रिपुंड लगाकर श्रृंगारित किया गया। बाबा महाकाल भक्तों को दर्शन देने के लिए सुबह 4 बजे जागे, जिसके बाद बाबा भस्म आरती की गई। इस दौरान बाबा महाकाल के दर्शन कर हजारों श्रद्धालुओं ने लाभ लिया।

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर बुधवार को आज बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। जिसके बाद सबसे पहले भगवान को स्नान, पंचामृत अभिषेक करवाने के साथ ही केसर युक्त जल अर्पित किया गया। बाबा महाकाल का त्रिपुंड लगाकर अलौकिक श्रृंगार किया गया। भगवान को नवीन मुकुट धारण कराया गया, जिसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती के दर्शन किए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबन्ध समिति की बैठक आयोजित

श्री महाकालेश्वर मंदिर में राष्ट्रपति के आगमन की व्यवस्थाओं के संबंध में मंदिर प्रबंन्ध समिति की बैठक श्री महाकाल महालोक के सभा कक्ष में मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष और जिला कलेक्टर नीरज सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक के प्रारम्भ में मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ ने सभी सदस्यगण का स्वागत कर विषय वस्तु प्रस्तुत की। बैठक में राष्ट्रपति के आगमन, दर्शन मार्ग, स्वास्ति वाचन आदि व्यवस्था के साथ ही सुरक्षा आदि अन्य व्यवस्थाओं पर माननीय सदस्यगण, पुजारी-पुरोहित गण, अधिकारी गण से विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में मंदिर प्रबंध समिति के सदस्यगण, महानिर्वाणी अखाड़े के गादीपति महंत विनीत गिरी महाराज, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, उज्जैन विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप सोनी, पुजारी राजेश गुरुजी, पुजारी आशीष गुरु, मन्दिर अधिकारी गण आदि उपस्थित थे।




Ujjain News : भस्मार्ती में आज श्री गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल के दर्शन

Baba Mahakaal dressed in the form of Shri Ganesh in Bhasmarti Mahakal Darshan Today

भस्मारती मे श्री गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म भी रमाई, गूंज उठा जय श्री गणेश जय श्री म

गणेश उत्सव के अवसर पर प्रतिदिन बाबा महाकाल अपने भक्तों को श्री गणेश के रूप में दर्शन दे रहे हैं। भस्म आरती के दौरान कभी भांग, तो कभी मावे और पूजन सामग्री से श्री गणेश के स्वरूप का निर्माण किया जा रहा है। आज सुबह भी भस्म आरती के समय बाबा महाकाल को पूजन सामग्री से श्री गणेश के रूप में सजा कर श्रंगारित किया गया। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि गुरुवार के दिन श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल सुबह 4 बजे भक्तों को दर्शन देने के लिए जागे। इसके बाद धूमधाम से भस्म आरती की गई, जिसमें बाबा महाकाल को मावे से बने श्री गणेश के स्वरूप में सजाया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत दर्शन का लाभ उठाया।

श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि आज गुरुवार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा के बाद मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद बाबा महाकाल का स्नान, पंचामृत अभिषेक और केसर युक्त जल अर्पित कर, उन्हें श्री गणेश के स्वरूप में श्रंगारित किया गया। इस रूप में बाबा महाकाल को पुत्र के रूप में देख भक्तों को विशेष आनंद हुआ। इस अद्वितीय श्रृंगार को जिसने भी देखा, वह मंत्रमुग्ध हो गया। बाबा महाकाल को एक नए मुकुट से सजाया गया और महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा उन्हें भस्म अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती के दर्शन किए और आरती की पवित्रता का लाभ उठाया। इस दौरान भक्तों ने बाबा महाकाल के निराकार से साकार रूप का दर्शन करते हुए ‘जय श्री महाकाल’ और ‘जय श्री गणेश’ के जयकारे लगाए। भस्म आरती में बाबा महाकाल, श्री गणेश के रूप में सजकर भस्म में रम गए, और पूरे मंदिर परिसर में ‘जय श्री गणेश’ और ‘जय श्री महाकाल’ के नारे गूंज उठे।

भस्मारती मे श्री गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म भी रमाई, गूंज उठा जय श्री गणेश जय श्री म

भस्मारती में श्री गणेश स्वरूप में सजाए गए बाबा महाकाल।

भस्मारती मे श्री गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म भी रमाई, गूंज उठा जय श्री गणेश जय श्री म

भस्मारती में श्री गणेश स्वरूप में सजाए गए बाबा महाकाल।

भस्मारती मे श्री गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म भी रमाई, गूंज उठा जय श्री गणेश जय श्री म

भस्मारती में श्री गणेश स्वरूप में सजाए गए बाबा महाकाल। नंदी बाबा के आज के दर्शन।




Pitru Paksha 2024 : पितृ पक्ष 2024 आरंभ तिथि 17 या 18 सितंबर पहली श्राद्ध तिथि कब

Pitru Paksha 2024: हमारे पूर्वजों को श्रृद्धांजलि देने के लिए अश्विन माह (Ashwin month) में पितृ पक्ष के सोलह दिन बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं. पितृपक्ष (Shradh paksha) किए गए श्राद्ध से पितरों का ऋण उतरता है और पितरों (Pitra) की आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है.

दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति इस दौरान तर्पण (Tarpan), पिंडदान (Pind daan) किया जाता है. श्राद्ध पितरों की मृत्यु तिथि पर करना चाहिए. अगर इन सभी रिश्तेदारों की मृत्यु तिथि मालूम न हो तो सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या (Sarva Pitru Amavasya) पर श्राद्ध कर्म किया जा सकता है. जानें इस साल पितृ पक्ष में पहला श्राद्ध (Pitra paksha 2024 start date) कब किया जाएगा, क्या है महत्व.

पितृ पक्ष 17 या 18 सितंबर कब शुरू ? (Pitru Paksha first shradh 17 or 18 september)

    • पितृ पक्ष शुरू – 17 सितंबर 2024 (भाद्रपद पूर्णिमा)
    • पिृत पक्ष समाप्त – 2 अक्टूबर 2024 (सर्व पितृ अमावस्या)

पितृ पक्ष में पहला श्राद्ध कब ? (Pitru Paksha Start Date)

पितृ पक्ष की शुरुआत भले ही 17 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा से हो रही लेकिन  इस दिन श्राद्ध नहीं किया जाएगा. पूर्णिमा पर ऋषियों का तर्पण करने का विधान है.पूर्णिमा तिथि के श्राद्ध को ऋषि तर्पण भी कहा जाता है. पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म के कार्य प्रतिपदा तिथि से होते हैं. ऐसे में इस साल पहला श्राद्ध 18 सितंबर को प्रतिपदा तिथि पर होगा.

साल में श्राद्ध कब-कब कर सकते हैं

साल की 12 अमावस्याएं, 12 संक्रांतियों, 16 दिन के पितृ पक्ष सहित साल में 96 दिन बताए गए हैं, जिनमें श्राद्ध किया जा सकता है. अगर श्राद्ध पक्ष में भी तिथि याद न होने के लिए चलते पितरों को श्रृद्धांजलि नहीं दे पा रहे हैं तो सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने से पितरों को तृप्ति मिल जाती है.

ग्रंथों के अनुसार 365 दिन तक श्राद्ध की व्यवस्था है, जो रोज श्राद्ध करते हैं, उनके लिए नित्य श्राद्ध का विधान है. समय की कमी के चलते रोज श्राद्ध करना मुश्किल है इसलिए ये खास तिथियां बताई गई है.

पितृ पक्ष की तिथियां (Pitru Paksha 2024 Tithi)

    • पूर्णिमा श्राद्ध  – 17 सितंबर 2024 (मंगलवार)
    • प्रतिपदा श्राद्ध – 18 सितंबर 2024 (बुधवार)
    • द्वितीया श्राद्ध – 19 सितंबर 2024 (गुरुवार)
    • तृतीया श्राद्ध – 20  सितंबर 2024 (शुक्रवार)
    • चतुर्थी श्राद्ध – 21 सितंबर 2024 (शनिवार)
    • महा भरणी – 21 सितंबर 2024 (शनिवार)
    • पंचमी श्राद्ध – 22 सितंबर 2024 (रविवार)
    • षष्ठी श्राद्ध – 23 सितंबर 2024 (सोमवार)
    • सप्तमी श्राद्ध – 23 सितंबर 2024 (सोमवार)
    • अष्टमी श्राद्ध – 24 सितंबर 2024 (मंगलवार)
    • नवमी श्राद्ध – 25 सितंबर 2024 (बुधवार)
    • दशमी श्राद्ध – 26 सितंबर 2024 (गुरुवार)
    • एकादशी का श्राद्ध – 27 सितंबर 2024 (शुक्रवार)
    • द्वादशी श्राद्ध – 29 सितंबर 2024 (रविवार)
    • मघा श्राद्ध – 29 सितंबर 2024 (रविवार)
    • त्रयोदशी श्राद्ध – 30 सितंबर 2024 (सोमवार)
    • चतुर्दशी श्राद्ध – 1 अक्टूबर 2024 (मंगलवार)
    • सर्वपितृ अमावस्या – 2 अक्टूबर 2024 (बुधवार)

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