Ujjain Mahakal: एकादशी पर बाबा महाकाल का वैष्णव तिलक से श्रृंगार

बाबा महाकाल के प्रांगण में सोमवार को कालो के काल बाबा महाकाल भस्म आरती के दौरान भांग व पूजन सामग्री से शृंगारित हुए। इस दौरान उन्हें अलौकिक स्वरूप में शृंगारित किया गया। जिसका लाभ हजारों श्रद्धालुओं ने लिया। श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज एकादशी पर सुबह 4 बजे हुई भस्मारती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन अभिषेक कर आकर्षक स्वरूप में शृंगार किया गया। इस दौरान बाबा महाकाल को वैष्णव तिलक के साथ ही फूलों और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। इस शृंगार के बाद फिर उन्होंने भस्म रमाई। जिसके बाद भक्तों ने इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया और जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।

एकादशी पर भस्म आरती मे वैष्णव तिलक लगाकर सजे बाबा महाकाल, भक्तो को हुए अलौकिक दर्शन

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी सोमवार पर आज बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। जिसके बाद सबसे पहले भगवान को गर्म जल से स्नान करवाकर दूध, दही, शहद, शक्कर, घी आदि पंचामृत से स्नान कराया गया और प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। पंचामृत पूजन के बाद भगवान महाकाल का पूजन सामग्री से आकर्षक स्वरूप में शृंगार किया गया। भक्तों ने बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर इस शृंगार के दर्शन किए और जय श्री महाकाल का उद्घोष करने लगे। जिसके बाद बाबा महाकाल को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती की गई।




Ujjain News : भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल ने त्रिनेत्र रूप में दिए दर्शन

उज्जैन श्री महाकालेश्वर मंदिर में सुबह 4 बजे हुई भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन-अभिषेक कर त्रिनेत्र स्वरूप में श्रृंगार किया गया। इस दौरान बाबा महाकाल को फूलों और रुद्राक्ष की माला से सजाया गया। श्रृंगार के बाद उन्हें भस्म रमाई, जिसके बाद भक्तों ने इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया और ‘जय श्री महाकाल’ का उद्घोष किया।

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की नवमी पर शनिवार को बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। सबसे पहले भगवान को गर्म जल से स्नान करवाकर दूध, दही, शहद, शक्कर, घी आदि पंचामृत से स्नान कराया गया। फिर प्रथम घंटा बजाकर ‘हरि ओम’ का जल अर्पित किया गया।

पंचामृत पूजन के बाद भगवान महाकाल का पूजन सामग्री से आकर्षक स्वरूप में श्रृंगार किया गया। भक्तों ने बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर इस श्रृंगार के दर्शन किए और ‘जय श्री महाकाल’ का उद्घोष किया। इसके बाद बाबा महाकाल को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती की गई।

वित्त आयोग अध्यक्ष ने लिया बाबा महाकाल का आशीर्वाद

16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया उज्जैन प्रवास के दौरान महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे, उन्होंने बाबा महाकाल का पूजन और अभिषेक किया। पूजन मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा द्वारा संपन्न करवाया गया। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उज्जैन संभाग आयुक्त संजय गुप्ता द्वारा पनगढ़िया को उत्तरीय वस्त्र व स्मृतिचिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। इस दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, प्रशासक प्रथम कौशिक आदि उपस्थित थे।

भस्म आरती श्रंगार मे बाबा महाकाल ने दिए त्रिनेत्र स्वरूप मे दर्शन, वित्त आयोग अध्यक्ष ने लिया श

भस्म आरती श्रंगार मे बाबा महाकाल ने दिए त्रिनेत्र स्वरूप मे दर्शन, वित्त आयोग अध्यक्ष ने लिया श

भस्म आरती श्रंगार मे बाबा महाकाल ने दिए त्रिनेत्र स्वरूप मे दर्शन, वित्त आयोग अध्यक्ष ने लिया श

वित्त आयोग के अध्यक्ष ने किए दर्शन।




Chaitra Navratri 2025 : चैत्र नवरात्रि 2025 नवमी कब है ? जानिए हवन कन्या पूजा विधि…

Chaitra Navratri 2025 Navami Puja: पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि चैत्र महीने में पड़ती है. इसकी शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है और नवमी तिथि पर समापन होता है। इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च को हो रही है। नवरात्रि में पूरे नौ दिनों तक मां भगवती के अलग-अलग रूपों की पूजा-उपासना की जाती है।

वैसे तो नवरात्रि का हर दिन महत्वपूर्ण होता है. लेकिन विशेषकर अष्टमी-नवमी तिथि का खास महत्व है। इस दिन लोग कन्या पूजन (KanjaK Puja) करते हैं और हवन (Havan) करते हैं। साथ ही चैत्र नवरात्रि की नवमी को राम नवमी (Ram Navami 2025) का त्योहार भी मनाया जाता है। आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि किस दिन पड़ेगी और इस दिन पूजा के लिए किन सामग्रियों की जरूरत पड़ेगी।

चैत्र नवरात्रि 2025 नवमी कब? (Chaitra Navratri 2025 Navami Date)

नौ दिनों तक चलने वाले उत्सव में नवमी तिथि चैत्र नवरात्रि का आखिरी दिन होता है। इस साल चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि 7 अप्रैल 2025 को है। इस दिन लोग कंजक पूजते हैं और घर पर हवन भी कराते हैं और इसी के साथ नवरात्रि का समापन भी हो जाता है। नवमी पूजा के लिए विशेष पूजा सामग्रियों की आवश्यकता होती है। आप अभी से इन सामग्रियों की सूची तैयार कर इन्हें इकट्ठा कर लें, जिससे कि पूजा-हवन में किसी तरह की बाधा उत्पन्न न हो।

नवमी पूजा विधि (Chaitra Navratri 2025 puja vidhi)

चैत्र नवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ कपड़े पहन लें। पूजा स्थल पर माता रानी की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा या तस्वीर में फूलों की माला अर्पित करें। मां को फूल, अक्षत, सिंदूर, चंदन, सुहाग का सामान और भोग आदि अर्पित करें।

हवन के लिए सबसे पहले हवन स्थल की सफाई करके वहां गंगाजल छिड़कें। साथ ही हवनकुंड को भी साफ कर लें. हवन कुंड में आम की लकड़ियां सजाएं। लकड़ियों के बीच में कपूर और घी डालें. सूखे नारियल में कलावा बांधकर हवन कुंड में रखें। पान का पत्ता, लौंग, सुपारी आदि सामग्रियों को डालकर मंत्रों जाप करते हुए नवदुर्गा, नवग्रह और त्रिदेव समेत सभी देवी-देवताओं को आहुति दें। इसके बाद माता रानी की आरती करें और फिर कन्याओं की पूजा कर उन्हें भोजन कराएं। कन्याओं को विदा करने से पहले उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें कुछ उपहार जरूर दें।

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है,कि denvapost.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले।




Bhasma Aarti Special : पूजन सामग्री से सजा बाबा महाकाल का दरबार, जानिए क्यों होती है हर दिन भस्म आरती

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण में कालों के काल बाबा महाकाल भस्म आरती के दौरान पूजन सामग्री से श्रृंगारित हुए। इस दौरान उनका विशेष स्वरूप में श्रृंगार किया गया, जिसका लाभ हजारों श्रद्धालुओं ने लिया। श्री महाकालेश्वर मंदिर में सुबह 4 बजे हुई भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन-अभिषेक कर आकर्षक स्वरूप में श्रृंगार किया गया। इस दौरान बाबा महाकाल को रुद्राक्ष व फूलों की माला अर्पित की गई। श्रृंगार के बाद उन्होंने भस्म रमाई, और फिर भक्तों ने दिव्य दर्शनों का लाभ लिया।

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि बुधवार को बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। सबसे पहले भगवान को गर्म जल से स्नान करवाकर दूध, दही, शहद, शक्कर, घी आदि पंचामृत से स्नान कराया गया और प्रथम घंटाल बजाकर “हरि ओम” का जल अर्पित किया गया।

पंचामृत पूजन के बाद भगवान महाकाल का पूजन सामग्री से आकर्षक स्वरूप में श्रृंगार किया गया। इस दौरान भक्तों ने बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर दर्शन किए और “जय श्री महाकाल” का उद्घोष किया। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा महाकाल को भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती की गई।

क्या है भस्म आरती?

भगवान महाकाल की भस्म आरती को लेकर पंडित अर्पित गुरु बताते हैं कि भस्म आरती का एक और नाम “मंगला आरती” भी दिया गया है। मंगला आरती में बाबा हर रोज निराकार से साकार रूप धारण करते हैं। बाबा भस्म को संसार को नाशवान होने का संदेश देने के लिए लगाते हैं। इसके लिए बाबा ताजी भस्म शरीर पर धारण करते हैं। भस्म आरती में गाय के गोबर के उपले की भस्म बाबा को अर्पण की जाती है। जब बाबा को भस्म अर्पण की जाती है, तो पांच मंत्रों के उच्चारण के साथ की जाती है। ये पांच मंत्र हमारे शरीर के पांच तत्वों का प्रतीक होते हैं। इनके उच्चारण के साथ ही व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

महाकाल की भस्म घर में रखने की मान्यता

महाकाल मंदिर के पुजारी अर्पित गुरु ने बताया कि भस्म आरती में गाय के गोबर के उपले से बनी शुद्ध पांच कंडों की राख का उपयोग किया जाता है। इसी भस्म से महाकाल का स्नान होता है। भगवान को चढ़ी हुई भस्म बहुत से लोग अपने साथ ले जाते हैं।

यह भस्म पवित्र गाय के गोबर के उपले से तैयार की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि गौ माता का गोबर अत्यंत पवित्र होता है, जिसमें मां लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसलिए बहुत से लोग इस भस्म को अपने घर ले जाते हैं। मान्यता है कि भस्म को घर में रखने से मां लक्ष्मी का सदा वास बना रहता है और इससे सुख-समृद्धि आती है।

भस्म आरती विशेष - पूजन सामग्री से सजे बाबा महाकाल, जानिए प्रतिदिन क्यों की जाती है भस्म आरती

भस्म आरती विशेष - पूजन सामग्री से सजे बाबा महाकाल, जानिए प्रतिदिन क्यों की जाती है भस्म आरती

भस्म आरती विशेष - पूजन सामग्री से सजे बाबा महाकाल, जानिए प्रतिदिन क्यों की जाती है भस्म आरती




Mumbai News : शिवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ, 11 लाख पार्थिव शिवलिंग एवं रुद्र महायज्ञ

उल्हासनगर के रेजिडेंसी एंटीलिया मैदान मैं महाशिवरात्रि महोत्सव एवं रुद्र महायज्ञ का आयोजन 17 फरवरी से 26 फरवरी तक किया जा रहा है। आयोजन समिति से मिली जानकारी के अनुसार महाशिवरात्रि महोत्सव एवं रुद्र महायज्ञ का आयोजन विश्व हिंदू संत परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी अरूणानंद महाराज के सानिध्य में किया जा रहा है।

कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ भव्य महोत्सव

17 फरवरी को महाशिवरात्रि महोत्सव एवं युद्ध महायज्ञ की शुरुआत भव्य कलश यात्रा के साथ की गई। 18 फरवरी से 25 फरवरी तक प्रतिदिन पीठ पूजन, पार्थ शिवलिंग निर्माण, रुद्राभिषेक एवं महाआरती जैसे अनुष्ठान होंगे साथी श्रद्धालुओं के लिए कई धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। 26 फरवरी को सहस्त्रधारा अभिषेक और महा आरती के साथ महाशिवरात्रि महोत्सव का समापन किया जाएगा। उक्त आयोजन में उल्हासनगर पधारे स्वामी अरूणानंद महाराज ने देनवापोस्ट को बताया कि वह पिछले 7 वर्षों से मॉरीशस में गोलोक धाम के माध्यम से गौ माता की रक्षा कर रहे हैं।

गौ माता की दुर्दशा रोकने पर देना होगा ध्यान

स्वामी जी ने बताया कि आज हम देख रहे हैं कि जिसे हम अपनी मां कहते हैं शास्त्रों के अनुसार गो माता में 33 कोटि देवी देवताओं का वास है। लेकिन वर्तमान समय में कई जगह बड़ी निर्दयता से उन्हें काटा जा रहा है। जिसकी हम निंदा करते हैं। हम दोस्त काटने वाले को दे रहे हैं क्या यह सत्य है?

स्वामी अरूणानंद महाराज ने बताया कि गौ माता को अगर हम सड़क पर छोड़ देंगे तो कोई भी अत्याचार मां के साथ करेगा ही। हमें हमारी गौ माता की रक्षा करनी चाहिए। हमारे पूर्वज गौ माता को परिवार का सदस्य समझते थे यह हम जानते हैं। लेकिन आज शहरीकरण होने के कारण गौ माता को साथ रखना संभव नहीं है। लेकिन एक सोसायटी के माध्यम से हम हमारी गौ माता के लिए एक सुंदर आवास की व्यवस्था तो कर ही सकते हैं।




Mahakumbh Mela : महाकुंभ मेले में मची भगदड़, संगम पर हादसा, छावनी में तब्दील

Prayagraj News : महाकुंभ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर भीड़ बढ़ने से भगदड़ मच गई है। संगम नोज के करीब भगदड़ में दर्जनों लोग घायल हो गए हैं। दर्जनों एम्बुलेंस से घायलों को केंद्रीय चिकित्सालय महाकुंभ लाया गया है। जहां घायलों का उपचार चल रहा है। गंभीर रूप से घायल श्रद्धालुओं को हायर सेंटर भी रेफर किया गया है। महाकुंभ मेले की ओएसडी आकांक्षा राणा ने मीडिया के सामने आकर जानकारी दी है।

उन्होंने कहा कि संगम पर भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ की घटना हुई है। हालांकि उनका दावा है कि कोई ज्यादा गंभीर रूप से घायल नहीं है। लेकिन लगातार घायलों के आने का सिलसिला जारी है। महाकुंभ मेले के केंद्रीय चिकित्सालय को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। मीडिया कर्मियों को भी अस्पताल के अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक मेला क्षेत्र में कुछ महिलाओं का दम घुटा एक दूसरे पर वह गिरी। जिसके वजह से बैरिकेडिंग टूटी. 20 से 25 घायल है। मौत की सूचना कहीं से नहीं है। सब का इलाज कराया जा रहा है। हादसे के बाद महाकुंभ में क्राउड डायवर्जन प्लान लागू हो गया है। महाकुंभ में श्रद्धालुओं की एंट्री रोक दी गई है। शहर के बाहर ही श्रद्धालुओं के जत्थों को रोका गया। 10 से ज्यादा जिलाधिकारियों को क्राउड मैनेजमेंट की जिम्मेदारी मिली है। भीड़ को काबू में करने के लिए प्रयागराज के बॉर्डर के इलाकों में अधिकारियों को सक्रिय कर दिया गया है।




सेठानी घाट में कल से श्रीमद् भागवत कथा की बहेगी रसधार

नर्मदापुरम के सेठानी घाट में गुरुवार से श्रीमद् भागवत कथा की रसधार बहेगी। श्रीमद् भागवत 23-29 जनवरी तक दिन के 1 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। वृंदावन से पधारे आचार्य पंडित श्री राम तिवारी जी श्रीमद् भागवत के विभिन्न प्रसंगों पर प्रवचन करेंगे। 7 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन मां रेवा, आप और हम सभी की ओर से किया जा रहा है। आयोजन समिति का कहना है कि तैयारी अंतिम चरण में है। सेठानी घाट में  पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।




Ujjain Mahakal: भांग से हुआ बाबा महाकाल का आलौकिक शृंगार, भस्म आरती में चारों ओर गूंजा ‘जय श्री महाकाल

Ujjain Mahakal: Baba Mahakal's supernatural makeup was done with cannabis

उज्जैन बाबा महाकाल।

धार्मिक नगरी उज्जैन में बाबा महाकाल का ऐसा मंदिर है जो कि 12 ज्योर्तिलिंगों में शामिल है। यहां श्रद्धालु दूर-दूर से भगवान शिव की पूजा और दर्शनों के लिए आते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान महाकाल प्रतिदिन भस्म से शृंगार करते हैं। ऐसी मान्यता है कि उनके दर्शनों से प्रत्येक श्रद्धालुओं का जीवन-मृत्यु का चक्र खत्म हो जाता है और वह अकाल मृत्यु के भय से भी मुक्त हो जाता है।

श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल भस्म आरती के दौरान शुक्रवार सुबह 4 बजे बाबा महाकाल का भांग से आलौकिक स्वरूप में शृंगार किया गया। भस्म आरती में चारों ओर जय श्री महाकाल की गूंज गुंजायमान हुई। जिसने भी इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया वह देखते ही रह गया।

कीजिए बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन, जिससे अकाल मृत्यु के भय से मिलती हैं मुक्ति

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि पौष माह कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि शुक्रवार पर आज बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। उसके बाद सबसे पहले भगवान को गर्म जल से स्नान, पंचामृत अभिषेक करवाने के साथ ही केसर युक्त जल अर्पित किया गया। आज बाबा महाकाल का आभूषण से आलौकिक शृंगार किया गया। जिसके बाद फिर पूजन अर्चन के बाद बाबा महाकाल को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का ऐसा शृंगार देख सभी अभिभूत हो गए। बाबा महाकाल के इस आलौकिक स्वरूप को सभी ने निहारा। श्रद्धालुओं ने इस दौरान बाबा महाकाल के निराकार से साकार होने के स्वरूप का दर्शन कर जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।

कीजिए बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन, जिससे अकाल मृत्यु के भय से मिलती हैं मुक्ति

कीजिए बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन, जिससे अकाल मृत्यु के भय से मिलती हैं मुक्ति

रजत मुकुट दान दिया

श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्री महाकालेश्वर भगवान को महाराष्ट्र के सांगली से पधारे सम्पत राव माने द्वारा एक नग चांदी का मुकुट भेंट किया। जिसका वजन 1344.00 ग्राम है। पूजन पुरोहित सुभाष शर्मा द्वारा सम्पन्न करवाया गया। जिसे श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा प्राप्त पर दानदाता का सम्मान किया जाकर विधिवत रसीद प्रदान की गई। यह जानकारी मंदिर प्रबंध समिति की कोठार शाखा द्वारा दी गई।




भारतीय संस्कृति से दीपदान कर मानाते है जन्मोत्सव : पंडित देवेंद्र कृष्ण शास्त्री

ग्राम आरी श्री राम जानकी मंदिर में सुंदरकांड का आयोजन किया गया। इस अवसर पर  पंडित देवेंद्र कृष्ण शास्त्री जन्म दिवस होने के कारण कार्यक्रम में  जन्म उत्सव मनाया गया। शास्त्री जी ने बताया कि जन्म उत्सव कैसे मनाया जाता है।
     प्रातः काल स्नान ध्यान के बाद भगवान का पूजन अर्चन एवं अभिषेक करना चाहिए । साथ ही परिवार बंधुओं सहित सुंदरकांड एवं भगवान का सत्संग भजन करना चाहिए।

भागवत आचार्य देवेंद्र शर्मा  ने बताया जन्मोत्सव के दिन कैंडल बुझाने की जगह हमको दीपदान करने के साथ ही वृक्षारोपण एवं गौ सेवा अधिक  करना चाहिए। क्योंकि हमारे जीवन को हमे प्रकाश की ओर ले जाना है न कि अंधकार की ओर इसलिए कैंडल बुझा कर नहीं, हमें दीप प्रचलित कर भगवान के सामने अपना जन्म उत्सव मनाना चाहिए। सोमवार को राम जानकी मंदिर आरी में शास्त्री जी का जन्म उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में भव्य सुंदरकांड का आनंद लिया और भक्तों ने दी शास्त्री जी को खूब-खूब बधाई दी , श्री राम जानकी मंदिर मैं बड़े ही उत्साह के साथ शाम के समय गांव के सभी बच्चे पूजन अर्चना एवं मत्रों का उच्चारण करना सीख रहे हैं।

कार्यक्रम को वसंत तिवारी सांगाखेड़ा कला एवं उनके साथी ने  सुंदरकांड प्रस्तुत किया।  श्रीमती सीमा साहू राष्ट्रीय तेली साहू महा संगठन, राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव सेठ, प्रदेश प्रवक्ता किसान केशव साहू, नर्मदापुरम नगर अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद साहू, माखन नगर साहू समाज अध्यक्ष अरविंद साहू, अनिल साहू, भवानी साहू , मुकेश साहू, विजय राठौड़, प्रमोद साहू, रोहित साहू, संजय साहू, निर्मल सेठ, गौरीशंकर साहू, बिन्नू साहू,  ललित साहू, सोनू साहू, देवेंद्र साहू, दीपक साहू, समस्त ग्रामीण सहित ग्राम पंचायत आरी उपसरपंच एवं सामाजिक बंधु उपस्थित रहे।




Chhatarpur News: छतरपुर में भगवान के लिए हनुमान पहुंचे जनसुनवाई में !

मध्यप्रदेश के छतरपुर से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां भगवान हनुमान अपने घर (मंदिर) के लिए दर-दर भटक रहे हैं। बीते दिनों जिले में हुई जनसुनवाई में एक मंदिर के पुजारी हनुमानजी की मूर्ति को गोद में लेकर एसपी के सामने पहुंचे। पुजारी का कहना है कि कुछ दबंगों ने भगवान की जमीन पर कब्जा कर लिया है। वह कई बार जनसुनवाई में आ चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है। इस बार वह लोडर वाहन में भगवान को लेकर जनसुनवाई में आए। लेकिन, अधिकारियों ने उनसे कहा कि भगवान ले जाओ, नहीं तो फेंक देंगे।

मंदिर की जमीन पर दंबंगों का कब्जा

पुजारी पुरुषोत्तम नायक ने बताया कि इसके पहले भी वे भगवान को गोद में लेकर कलेक्टर और एसपी के पास आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पुजारी ने बताया कि नौगांव तहसील के फुलवारा गांव में मंदिर की जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। वे 2016 और 2022 में सिविल कोर्ट से केस जीत चुके हैं, लेकिन अब तक सिविल फैसले को लागू नहीं किया गया। फैसला उनके पक्ष में आने के बाद भी उन्हें जमीन पर कब्जा नहीं मिला है। इससे भगवान अभी तक मंदिर में विराजमान नहीं हो पाए हैं। उन्होंने कहा कि 2016 से ही हम भगवान को लेकर जगह-जगह भटक रहे हैं।

मेरी नहीं तो भगवान की सुन लें
पुजारी का कहना है कि अधिकारी उनकी नहीं, कम से कम भगवान की बात तो सुन लें। इसी कारण वे भगवान को लेकर जनसुनवाई में लेकर आते हैं। पुजारी का आरोप है कि वे कई सालों से आदेश का पालन कराने और कब्जा दिलाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन और तारीखें ही दी जा रही हैं।

एसडीएम की गलत कार्रवाई का आरोप
पुजारी का कहना है कि पिछली बार उनके आवेदन पर एडीएम ने संबंधित एसडीएम से मामले को तत्काल निपटाने का आदेश दिया था, लेकिन नौगांव की एसडीएम विशा माधवानी ने मामले की गलत जांच की और जिला प्रशासन को गुमराह कर दिया।

सीएम, पीएम और राष्ट्रपति से मिलेंगे
पुजारी का आरोप है कि जब वे भगवान को लेकर जनसुनवाई में पहुंचे तो अधिकारी उन्हें बाहर निकालने आए और कहा कि अपने भगवान को लेकर जाओ, वरना फेंक देंगे। इस घटना से पुजारी बेहद दुखी हैं। उन्होंने कहा कि वे अब भगवान को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलने भोपाल जाएंगे। अगर, वहां भी सुनवाई नहीं होती तो दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मिलेंगे।

एडीएम बोले: भगवान का मामला निपटा चुके
इस मामले को लेकर एडीएम मिलिंद नागदेवे से बात करने का प्रयास किया गया। लेकिन, वह नहीं रुके, वह जाते-जाते कह गए कि भगवान का मामला पहले ही निपटाया जा चुका है।