Baba Mahakal : भक्तों ने सुबह 4 बजे उठकर बाबा महाकाल के दर्शन किए, पहले पंचामृत अभिषेक, फिर रमाई भस्म

उज्जैन विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर गुरुवार सुबह 4 बजे हुई भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन-अभिषेक कर आकर्षक स्वरूप में पूजन सामग्री से श्रृंगार किया गया। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल को भस्म रमाई गई। इस दौरान हजारों भक्तों ने दिव्य दर्शनों का लाभ लिया और जय श्री महाकाल के उद्घोष किए, जिससे पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
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कालों के काल, विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर आज गुरुवार को बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती के लिए सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत को अर्पित कर किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को फूलों की माला धारण करवाई गई।

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आज के श्रृंगार की विशेष बात यह रही कि बाबा महाकाल के मस्तक पर चंदन से त्रिपुंड का श्रृंगार किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती कर भोग अर्पित किया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर जय श्री महाकाल का उद्घोष करते रहे।




Mahakaleswar : प्रथम पंचामृत स्नान कराया, बाबा महाकाल को रमाई भस्म से शृंगारित पूजन

उज्जैन श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर बुधवार सुबह 4 बजे हुई भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन-अभिषेक कर आकर्षक स्वरूप में श्रृंगार किया गया। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल को भस्म रमाई गई। इस दौरान भक्तों ने दर्शनों का लाभ लिया।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर बुधवार आज श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भस्म आरती के लिए सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से किया। प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मोगरे की माला धारण करवाई गई।

आज के श्रृंगार की विशेष बात यह रही कि पंचामृत स्नान के बाद बाबा महाकाल को पूजन सामग्री से श्रृंगारित किया गया। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती कर भोग अर्पित किया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर जय श्री महाकाल का उद्घोष किया।

रजत मुकुट भेंट

श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुजरात के अहमदाबाद से पधारीं भक्त सुश्री सपना लखेड़ा द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर जी को एक रजत मुकुट भेंट किया गया। जिसे श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा प्राप्त कर दानदाता का सम्मान किया गया व विधिवत रसीद प्रदान की गई।




Baba Mahakal : बुद्ध पूर्णिमा भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को सिर पर बेलपत्र और चंद्रमा से सजाया गया

उज्जैन श्री महाकालेश्वर मंदिर में वैशाख शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि सोमवार की सुबह 4 बजे हुई भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन-अभिषेक कर आकर्षक स्वरूप में श्रृंगार किया गया। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल को भस्म रमाई गई। इस दौरान भक्तों ने दिव्य दर्शनों का लाभ लिया और जय श्री महाकाल के उद्घोष किया।

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि वैशाख शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर सोमवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान भस्म आरती के लिए सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक, दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत को अर्पित कर किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मोगरे की माला धारण करवाई गई। आज के श्रृंगार की विशेष बात यह रही कि आज बाबा महाकाल को मस्तक पर बेल पत्र और चंद्रमा से सजाया गया। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती कर भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर “जय श्री महाकाल” का उद्घोष करने लगे।

भगवान विष्णु के 9वें अवतार थे गौतम बुद्ध

हिंदू धर्म में बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व है और यह शुभ पर्व आज है। हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के 9वें अवतार गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, इसलिए वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। वैशाख पूर्णिमा को केवल बुद्ध का जन्म ही नहीं हुआ था, बल्कि इस दिन बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उनका महानिर्वाण भी हुआ था।




Baba Mahakal : आज बाबा महाकाल को भस्म आरती के दौरान त्रिपुंड और तिलक से सजाया

उज्जैन श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज वैशाख शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर शुक्रवार सुबह 4 बजे हुई भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन-अभिषेक कर आकर्षक स्वरूप में श्रृंगार किया गया। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल को भस्म रमाई गई। इस दौरान भक्तों ने इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया और जय श्री महाकाल का उद्घोष किया, जिससे वातावरण गूंज उठा।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि वैशाख शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि शुक्रवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान भस्म आरती के लिए सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक, दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत को अर्पित कर किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर ‘हरि ओम’ का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मोगरे की माला धारण करवाई गई। श्रृंगार की विशेष बात यह रही कि बाबा महाकाल को मस्तक पर त्रिपुंड व तिलक से सजाया गया। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती कर भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर “जय श्री महाकाल” का उद्घोष करने लगे।

बाबा के भक्त ने रजत छत्र भेंट किया

श्री महाकालेश्वर मंदिर में पधारी भक्त आशालता होलकर द्वारा पुजारी आकाश पुजारी की प्रेरणा से भगवान श्री महाकालेश्वर को 1 नग रजत का छत्र भेंट किया गया, जिसका वजन लगभग 660.800 ग्राम है। जिसे श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा प्राप्त कर दानदाता का सम्मान किया गया तथा विधिवत रसीद प्रदान की गई। यह जानकारी कोठार शाखा के मनीष पांचाल द्वारा प्रदान की गई।

दर्शनार्थी का गुम हुआ पर्स व सोने का हार वापस किया गया

श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाराष्ट्र के पुणे से दर्शन के लिए आईं स्वाति का दर्शन उपरांत मंदिर परिसर में बैग गिर गया। जिसे मंदिर में कार्यरत सुरक्षाकर्मी संदीप सिसोदिया को प्राप्त हुआ और उनके द्वारा श्री महाकालेश्वर मंदिर के कंट्रोल रूम में जमा किया गया। कंट्रोल रूम के माध्यम से परिसर में पर्स गुम होने की सूचना (अनाउंसमेंट) प्रसारित की गई। जिस पर श्रद्धालु स्वाति मंदिर कंट्रोल रूम पहुंचीं और उनके द्वारा पर्स व उसमें रखे सामान का क्रॉस वेरिफिकेशन किया गया, जिसके बाद श्रद्धालु को उनका गुम हुआ पर्स व उसमें रखा 5 ग्राम सोने का हार पुनः वापस किया गया। गुम हुई सामग्री पुनः प्राप्त होने पर श्रद्धालु ने श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के कर्मचारियों एवं सुरक्षा कर्मी का आभार व्यक्त किया।

प्रभारी मंत्री टेटवाल ने श्री महाकालेश्वर भगवान के दर्शन किए

मध्यप्रदेश शासन में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं रोजगार विभाग तथा उज्जैन के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल एवं राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज ने अपने उज्जैन प्रवास के दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन किए। इस अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक हिमांशु कारपेंटर एवं मूलचंद जूनवाल द्वारा माननीय अतिथियों का स्वागत एवं सत्कार किया गया।

बाबा महाकाल की भस्म आरती।
बाबा महाकाल की भस्म आरती।
बाबा महाकाल की भस्म आरती।



Kedarnath Mandir : केदारनाथ मंदिर आज 2 मई 2025 को खुल रहा है, खूबसूरत मंदिर के दर्शन करें

केदानाथ मंदिर के द्वार आज 2 मई के खुल रहे हैं. चार धामों में से एक केदारनाथ आज श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुल गया है. आज सुबह 7 बजे से मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुल गया है.

केदानाथ मंदिर के द्वार आज 2 मई के खुल रहे हैं. चार धामों में से एक केदारनाथ आज श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुल गया है. आज सुबह 7 बजे से मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुल गया है.

बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली मंगलवार को विश्वनाथ मंदिर, गुप्तकाशी से रवाना होकर केदारनाथ धाम पहुंची.

बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली मंगलवार को विश्वनाथ मंदिर, गुप्तकाशी से रवाना होकर केदारनाथ धाम पहुंची.

केदारनाथ धाम की ओर तीर्थयात्रियों का रेला उमड़ पड़ा है. इस मौके पर केदारनाथ मंदिर को फूलों से सजाया गया.

केदारनाथ धाम की ओर तीर्थयात्रियों का रेला उमड़ पड़ा है. इस मौके पर केदारनाथ मंदिर को फूलों से सजाया गया.

बाबा केदारनाथ के मंदिर को 108 क्विंटल फूलों से सजाया है, जिसका भव्य रूप देखने लायक है.

बाबा केदारनाथ के मंदिर को 108 क्विंटल फूलों से सजाया है, जिसका भव्य रूप देखने लायक है.

रंग-बिरंगे फूलों की सुगंध और भव्यता मंदिर को और भी दिव्य बना रही है.

रंग-बिरंगे फूलों की सुगंध और भव्यता मंदिर को और भी दिव्य बना रही है.

बाबा केदारनाथ का मंदिर दिवाली के 2 दिन के बाद यानि भाई-दूज के दिन दर्शन के लिए बंद कर दिया जाता है. सर्दियों के महीनों के दौरान, मंदिर बर्फ से ढका रहता है.

बाबा केदारनाथ का मंदिर दिवाली के 2 दिन के बाद यानि भाई-दूज के दिन दर्शन के लिए बंद कर दिया जाता है. सर्दियों के महीनों के दौरान, मंदिर बर्फ से ढका रहता है.




Baba Mahakal : भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल ने चंद्रमा और ॐ मस्तक पर शृंगार किया दिव्य दर्शन…

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में वैशाख शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि मंगलवार पर बाबा महाकाल का विदेशी करंसी से विशेष शृंगार किया गया। इस दौरान भस्म आरती के लिए सुबह चार बजे मंदिर के पट खोले गए। पण्डे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर फलों के रस से बने पंचामृत को अर्पित कर किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और रुद्राक्ष की माला धारण करवाई गई।

आज के शृंगार की विशेष बात यह रही कि बाबा महाकाल को मस्तक पर चंद्रमा और ॐ से सजाया गया। शृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती कर भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या मे श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर जय श्री महाकाल का उद्घोष करने लगे।

श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में मोबाइल उपयोग प्रतिबंधित

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा लिए गए निर्णय के क्रम में, सुरक्षा व अन्य कारणों से मन्दिर परिसर में मोबाइल ले जाना, उपयोग करना प्रतिबंधित किया गया है। मंदिर परिसर में धार्मिक परंपरा, शुचिता व पवित्रता के चलते न सिर्फ उपयोग बल्कि मोबाइल रखे जाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। मोबाइल द्वारा नंदिहाल, गर्भगृह, दर्शन के समय फोटो लेने व वीडियो आदि बनाने से न सिर्फ अन्य यात्रीगण परेशान होते हैं अपितु दर्शन पंक्ति में अनावश्यक रुककर सभी को विलंब भी होता है। दर्शनार्थियों के मोबाइल आदि सुरक्षित रखने के लिए मंदिर के प्रवेश द्वार मानसरोवर भवन, बड़ा गणपति रोड द्वार क्रमांक 04, अवंतिका द्वार क्रमांक 01 पर लॉकर की व्यवस्था है, जिसमे श्रद्धालु सुविधापूर्वक मोबाइल रख कर रसीद प्राप्त करेंगे व दर्शन पश्चात रसीद जमाकर मोबाइल वापस प्राप्त कर सकते हैं। अतःपरिसर में मोबाईल का प्रयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है। उपयोग करते पाए जाने पर दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी।

भस्म आरती के पहले हुआ पंचामृत स्नान।

भस्म आरती के पहले हुआ पंचामृत स्नान।

भस्म आरती के पहले हुआ पंचामृत स्नान।

भस्म आरती के पहले हुआ पंचामृत स्नान।




Baba Mahakal : चाँदी का मुकुट धारण किये बाबा महाकाल, दिये दिव्य दर्शन

वैशाख कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर रविवार को विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित समस्त भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक के बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया।

इसके बाद कपूर आरती संपन्न कर बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट एवं रुद्राक्ष की माला धारण करवाई गई। आज के विशेष श्रृंगार की विशेषता यह रही कि बाबा महाकाल को मस्तक पर रजत मुकुट अर्पित कर गले में मोगरे की माला पहनाई गई। श्रृंगार उपरांत महानिर्वाणी अखाड़े के पुजारियों द्वारा ज्योतिर्लिंग पर भस्म रमाई गई तथा फिर कपूर आरती कर भोग अर्पित किया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और दिव्य स्वरूप के दर्शन कर ‘जय श्री महाकाल’ के उद्घोष के साथ बाबा की भक्ति में लीन हो गए।

51 कैम्पर पानी दान किए

श्री महाकालेश्वर मंदिर में उज्जैन निवासी भक्त मनीष मीणा ने समाजसेवी पप्पू बौरासी के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए जल वितरण हेतु 51 नग 20 लीटर के पानी के कैम्पर दान किए। मनीष मीणा ने इसी माह श्री महाकालेश्वर मंदिर में 5 लाख रुपये की नकद राशि भी दान की थी। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने दानदाता का सम्मान कर उन्हें रसीद प्रदान की और धन्यवाद ज्ञापित किया।
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गुजरात के श्रद्धालु ने दान किए 1 लाख 11 हजार 111 रुपये

श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुजरात के सूरत से पधारे भक्त भावेश भाई बरोत ने पुजारी राम शर्मा की प्रेरणा से मंदिर में 1 लाख 11 हजार 111 रुपये की नकद राशि दान की। सहायक प्रशासक प्रतीक द्विवेदी ने दानदाता को सम्मानित कर रसीद प्रदान की और आभार व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर की समस्त व्यवस्थाएं दान के माध्यम से संचालित होती हैं। भक्त अपनी श्रद्धानुसार भगवान महाकाल को नकद राशि, वस्त्र, अन्न आदि भेंट स्वरूप अर्पित करते हैं। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संचालित नि:शुल्क अन्नक्षेत्र और गौशाला में भी श्रद्धालु समय-समय पर अन्नदान करते हैं। अधिकारी, पुजारी एवं कर्मचारी भक्तों को मंदिर में दान के लिए प्रेरित करते रहते हैं।




Ujjain News : भीषण गर्मी में शुरू होगी 118 किलोमीटर लंबी पंचक्रोशी यात्रा

बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में वैशाख माह की प्रचंड गर्मी में पंचक्रोशी यात्रा शुरू होने जा रही है। इस यात्रा की शुरुआत 23 अप्रैल से होगी और यह 28 अप्रैल तक चलेगी। जो देवों के देव महादेव के पांच प्रसिद्ध मंदिरों से होकर गुजरेगी। यह पंचक्रोशी यात्रा 118 किलोमीटर की होगी। भीषण गर्मी की परवाह किए बिना, हजारों भक्त नंगे पैर, सिर पर अपनी आवश्यकता की सामग्री रखकर यह कठिन यात्रा करेंगे। इस दौरान श्रद्धालु भगवान शिव के पांच प्रमुख मंदिरों के दर्शन करेंगे।

पंचक्रोशी यात्रा का इतिहास उज्जैन में वैशाख मास के दौरान होने वाली पंचक्रोशी यात्रा का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। जिस प्रकार माघ और कार्तिक मास का धार्मिक महत्व है, उसी प्रकार वैशाख मास में किए गए दान, पुण्य और स्नान का भी विशेष महत्व है। पुराणों में भी वैशाख मास में स्नान के महत्व का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस पवित्र महीने में दान-पुण्य या स्नान नहीं कर पाते हैं, वे इस पंचक्रोशी यात्रा में शामिल होकर अथवा यात्रा के अंतिम पांच दिनों में स्नान करके पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु इस आध्यात्मिक यात्रा में भाग लेने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

हालांकि, इस यात्रा की शुरुआत कब हुई, इसका कोई निश्चित उल्लेख नहीं मिलता, लेकिन विद्वानों का मानना है कि यह परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है। पंचक्रोशी यात्रा का केंद्र उज्जैन महाकाल की नगरी उज्जैन का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। प्राचीन अवंतिका नगरी चौकोर आकार में बसी हुई है और इसके विभिन्न कोणों पर स्थित शिव मंदिर इसके द्वारपाल माने जाते हैं। पूर्व में पिंगलेश्वर, दक्षिण में कायावरोहणेश्वर, पश्चिम में बिल्वकेश्वर, उत्तर दिशा में दुर्देश्वर और नीलकंठेश्वर महादेव इन पांच प्रमुख मंदिरों की दूरी लगभग 118 किलोमीटर है। पंचक्रोशी यात्रा के दौरान श्रद्धालु इन्हीं पांचों शिव मंदिरों की परिक्रमा करते हैं और पवित्र क्षिप्रा नदी में स्नान करते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस यात्रा को पूर्ण करने वाले भक्तों को 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पांचक्रोशि यात्रा के लिए की गई कुछ ऐसी तैयारी।

यहां से शुरू होगी पंचक्रोशी यात्रा

श्रद्धालुगण नागचंद्रेश्वर मंदिर पटनी बाजार से बल प्राप्त कर यात्रा प्रारंभ कर लखेरवाडी से होते हुए छत्रीचौक, सराफा, कंठाल चौराहा, निजातपुरा, कोयला फाटक चौराहा, उद्योगपुरी, ढांचा भवन, होटल नक्षत्र के सामने, उण्डासा, पिंग्लेश्वर, श्री सिंथेटिक चौराहा, धतरावदा, लालपुर, सेफी नाका चौराहा, शक्करवासा, शनि मंदिर, महावीर तपोभूमि चौराहा, राघौपिपलिया, करोहन, गोंदिया, तालोद, बंबोरा, नलवा चौपाटी, अंबोदिया, नईखेडी, आजमपुरा, सोढंग नाका चौराहा, के.डी.पैलेस, जैथल, आगर रोड पुराना टोलटेक्स, उण्डासा होते हुए पुनः होटल नक्षत्र के सामने से ढांचा भवन, उद्योगपुरी, कोयला फाटक चौराहा, निजातपुरा, कंठाल चौराहा, सराफा, छत्री चौक, नागचंद्रेश्वर मंदिर पर बल वापस कर रामघाट पर स्नान पश्चात यात्रा समाप्त करेंगे।

यातायात व्यवस्था में होगा यह बदलाव

23 अप्रैल 2025 से 27 अप्रैल 2025 तक पंचक्रोशी यात्रा का आयोजन होना है। जिसके तहत यातायात व्यवस्था निम्नानुसार रहेगी। दिनांक 22 अप्रैल से ही श्रद्धालुगण यात्रा मार्ग में यात्रा करने लगते हैं अतः पंचक्रोशी यात्रा मार्ग में निम्नानुसार डायवर्सन रहेगा।

1. जो भारी वाहन एवं अन्य वाहन आगरनाका से मण्डीगेट, पांण्ड्याखेड़ी होकर देवास और इन्दौर की ओर जाना चाहते है वो आगरनाका से उन्हेलनाका साडू माता की बावडी से वाय-पास होकर आस्था गार्डन, त्पोभूमि होकर जा सकेगें। इस मार्ग से इन्दौर, देवास से आगर की ओर जा सकेंगे।

2. जो वाहन देवास से नरवर, नागझिरी होकर उज्जैन की ओर जाना चाहते है वो वाय-पास से त्पोभूमि, प्रशांति धाम चौराहा होकर उज्जैन के लिये जा सकेंगे।

3. पंचक्रोशी यात्रा रूद्धाक्ष होटल शनि मंदिर से त्पोभूमि टर्निंग तक रॉग साइड से जायेगी इसलिये जो यातायात इन्दौर से उज्जैन की ओर जाएगा उसे त्पोभूमि से प्रशांति धाम चौराहा तक रॉग साइड से भेजा जायेगा और इसी मार्ग से प्रशांति धाम से इन्दौर की ओर जाने वाला यातायात भेजा जायेगा। इसलिये वाहन चालक सावधानी पूर्वक वाहन चलायें।

4. पंचक्रोशी यात्रा में जैथल से यात्रा क्रास करेगी इसलिये आगर से आने वाले यातायात को जैथल क्रांसिंग से रॉग साइड उज्जैन की ओर भेजा जायेगा इसी मार्ग से उज्जैन से आगर की ओर जाने वाला यातायात भी गुजरेगा।

5. देवास तरफ से आने वाले भारी वाहन जो बड़नगर बदनावर की ओर जाना चाहते है वो भारी वाहन सीधे बदनावर फोर लेन से होकर जायेगें।




Ujjain Mahakal : भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का हुआ चंद्रमा से शृंगार

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर फलों के रस से बने पंचामृत अर्पित किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और रुद्राक्ष और नोट की माला धारण करवाई गई।

आज के शृंगार की विशेष बात यह रही कि आज भस्मआरती में सोमवार के संयोग पर बाबा महाकाल का त्रिनेत्र और मुंडमाला से शृंगार किया गया और भोग लगाया गया। बाबा के मस्तक पर चंद्रमा से शृंगारित करते हुए फूलों की माला भी धारण करवाई गई। शृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती की गई और भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर जय श्री महाकाल का उद्घोष करने लगे।

भस्म आरती में त्रिनेत्र और चंद्रमा से सजे बाबा महाकाल, किसी ने ई कार्ट तो किसी ने नगद राशि का द

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति को ई-कार्ट का आया दान

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति को केनरा बैंक की ओर से दो ई-कार्ट और श्री महाकाल महालोक में दर्शनार्थियों को छाया 18 केनोपी टेंट भेट की गई। केनरा बैंक की एमडी सत्यनारायण राजू और चैयरमैन विजय रंगन और बैंक की टीम ने श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर श्री महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों की सुविधा हेतु 2 नग ई-कार्ट और 20 कनोपी टेंट भेंट किए गए। मंदिर प्रबंध समिति की ओर सुरक्षा प्रभारी अनुराग चौबे द्वारा बैंक प्रबंधन का धन्यवाद ज्ञापित कर सम्मान किया गया। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन और श्री महाकाल महालोक के भ्रमण हेतु पधारने वाले वरिष्ठ नागरिक/दिव्यांगजनों के लिए नीलकण्ठ पथ, त्रिवेणी संग्रहालय, नंदी द्वार से श्री महाकालेश्वर में प्रवेश हेतु निर्धारित द्वार तक आवागमन करने के लिए प्रतिक्षालय स्थापित कराए जाकर, प्रतिक्षालय से सतत् ई-कार्ट चलायी जाती है। ज्ञात हो कि श्री महाकालेश्वर मंदिर की सभी व्यवस्थायें दान के माध्यम से ही संचालित होती हैं। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संचालित नि:शुल्क अन्नक्षेत्र, गौशाला आदि में भी अपनी श्रद्धानुसार अन्न दान भी करते हैं। समय–समय पर मंदिर के अधिकारी/ पुजारी/पुरोहितों/मंदिर प्रबंध समिति सदस्यों व कर्मचारियों के माध्यम से भी भक्तों को मंदिर में दान करने हेतु प्रेरित किया जाता है।

भस्म आरती में त्रिनेत्र और चंद्रमा से सजे बाबा महाकाल, किसी ने ई कार्ट तो किसी ने नगद राशि का द

भस्म आरती में त्रिनेत्र और चंद्रमा से सजे बाबा महाकाल, किसी ने ई कार्ट तो किसी ने नगद राशि का द

एक लाख एक हजार नगद दान किए

श्री महाकालेश्वर मंदिर में झारखंड से पधारे भक्त ने पुरोहित रूपम शर्मा और नवनीत शर्मा की प्रेरणा से श्री महाकालेश्वर भगवान को रुपये एक लाख एक हजार नकद भेंट किए। दानदाता द्वारा गुप्त दान किया गया है और उनकी पहचान नहीं बताने का निवेदन किया है। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से दानदाता को विधिवत रसीद प्रदान कर मंदिर के विरेन्द्र शर्मा और अभिषेक शर्मा द्वारा सम्मान किया गया।




Bhasma Aarti : बाबा महाकाल को चंद्रमा, मुकुट और कानों में कुंडल पहनाए

उज्जैन विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मंगलवार तड़के भस्म आरती के दौरान चार बजे मंदिर के पट खोले गए। पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से किया। प्रथम घंटा बजाकर बाबा महाकाल को हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा को चांदी का मुकुट और रुद्राक्ष और पुष्पों की माला धारण करवाई गई।

आज के श्रृंगार की विशेष बात यह रही कि चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया की भस्म आरती में बाबा महाकाल का आकर्षक स्वरूप में श्रृंगार किया गया। बाबा के मस्तक पर चंद्र और त्रिपुंड का श्रृंगार किया गया, साथ ही फूलों की माला भी धारण करवाई गई। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती कर भोग अर्पित किया गया। इस दौरान भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और उनकी भक्ति में लीन होकर जय श्री महाकाल का उद्घोष करने लगे। इससे पूरा मंदिर गुंजायमान हो गया।

भक्त ने रजत मुकुट भेंट किया

श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाराष्ट्र के नागपुर से आए अमित कुकडे और चेतन खडसे ने अनिकेत सेन की प्रेरणा से भगवान श्री महाकालेश्वर को 1 नग रजत मुकुट भेंट किया। इसका वजन नग सहित लगभग 1028.00 ग्राम है। इसे श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के वीरेन्द्र शर्मा द्वारा प्राप्त किया गया और दानदाता का सम्मान कर उन्हें विधिवत रसीद प्रदान की गई।

1250 किलो हापुस आम अर्पित किए गए

पुणे के डॉ. सागर, उनकी पत्नी डॉ. साधना, पुत्र साराध्य, पुत्री साध्या और चिरंजीवी पुत्र सात्विक कोलते परिवार द्वारा बाबा श्री महाकाल को महाराष्ट्र के रत्नागिरी के आमों का राजा हापुस आम का 1250 किलो का महाभोग चढ़ाया गया। प्रतिनिधि मुरली मनोहर जोशी ने बताया कि हिंदू नववर्ष के पहले दिन करीब 4 लाख रुपये कीमत के हापुस आम अर्पित किए गए। स्वर्ण वर्क जड़ित आमों को चांदी की थाली में महाराजा भोग के रूप में साढ़े तीन मुहूर्त के शुभ अवसर पर बाबा के चरणों में महाकाल मंदिर के पुजारी महेश पुजारी और गोपाल पुजारी द्वारा पूजन-अर्चन कर अर्पित किया गया।

भस्म आरती - चन्द्र, मुकुट और कानों में कुंडल पहनकर सजे बाबा महाकाल, जानिए क्यों चढ़ाए गए इतने क

भस्म आरती - चन्द्र, मुकुट और कानों में कुंडल पहनकर सजे बाबा महाकाल, जानिए क्यों चढ़ाए गए इतने क

भस्म आरती - चन्द्र, मुकुट और कानों में कुंडल पहनकर सजे बाबा महाकाल, जानिए क्यों चढ़ाए गए इतने क