उज्जैन के महाकाल लोक में सीएम मोहन यादव की बड़ी पहल: लाइट एंड साउंड शो, महाकालेश्वर बैंड और ‘श्री अन्न’ लड्डू बने आकर्षण का केंद्र

mahakal lok
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उज्जैन । महाकाल की नगरी उज्जैन आज एक बार फिर आस्था और नवाचार का केंद्र बन गई। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को महाकाल लोक ( mahakal lok) परिसर में कई नई योजनाओं और सांस्कृतिक पहलों की शुरुआत की। इनमें लाइट एंड साउंड शो, महाकालेश्वर बैंड, और श्री अन्न (मिलेट्स) से बने लड्डुओं को महाकाल प्रसाद में शामिल करने की घोषणा प्रमुख रही। इन पहलों ने न केवल भक्तों में उत्साह भर दिया बल्कि उज्जैन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक रंगों से जोड़ने का संदेश भी दिया।

“प्रधानमंत्री मोदी ने श्री अन्न का महत्व बताया, मध्यप्रदेश उसे अपनाएगा” — सीएम मोहन यादव

सीएम मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे विश्व में श्री अन्न (मिलेट्स) को “सुपरफूड” के रूप में पहचान दिलाई है।
अब मध्यप्रदेश इसे पूरी तरह अपनाने की दिशा में अग्रसर है।
उन्होंने कहा —“श्री अन्न हमारे देश की प्राचीन आहार परंपरा का हिस्सा रहा है। आज हम इसे फिर से महाकाल ( mahakal lok) के प्रसाद के रूप में लौटा रहे हैं। यह न केवल सेहत के लिए लाभकारी है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करेगा।”

अब प्रसाद में मिलेंगे श्री अन्न से बने पौष्टिक लड्डू

मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले महाकाल मंदिर ( mahakal temple) में बेसन के लड्डू प्रसाद के रूप में दिए जाते थे।
कई भक्त उपवास के दौरान बेसन नहीं खाते, जिससे उन्हें असुविधा होती थी।
इसी को ध्यान में रखते हुए अब प्रसाद में रागी, कोदो-कुटकी और ज्वार-बाजरा जैसे अनाजों से तैयार किए गए ‘श्री अन्न लड्डू’ वितरित किए जाएंगे।

इन लड्डुओं में प्रोटीन, फाइबर और विटामिन भरपूर मात्रा में होंगे।
साथ ही यह बदलाव आदिवासी किसानों और लघु अनाज उत्पादकों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा।
सीएम ने कहा कि “यह सिर्फ प्रसाद नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और भारतीय परंपरा का संगम है।”

महाकालेश्वर बैंड: शंख, नगाड़े और घड़ियाल की ध्वनि से गूंजा परिसर

उद्घाटन समारोह का दूसरा बड़ा आकर्षण रहा ‘महाकालेश्वर बैंड’ की स्थापना।
यह बैंड पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों — शंख, नगाड़े, घड़ियाल, ढोल और बांसुरी — से सुसज्जित है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा —“प्राचीन भारत में शंख और नगाड़े न केवल संगीत के उपकरण थे, बल्कि धार्मिक संदेश और ऊर्जा के प्रतीक भी थे। आज महाकाल ( mahakal lok ) के दरबार में इन ध्वनियों की वापसी हुई है।”

यह बैंड हर उत्सव, धार्मिक सवारी और विशेष आयोजन में भोलेनाथ की महिमा का संगीत रूप में गुणगान करेगा।
इसके संगीत में शिवपुराण के मंत्र, महाकाव्यात्मक धुनें और लोक वाद्यों की लय का समावेश किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को एक अलौकिक अनुभव प्राप्त होगा।

महाकाल लोक (mahakal lok) में शुरू हुआ लाइट एंड साउंड शो: शिवपुराण की कथाओं से सजी आस्था की रात

उज्जैन के महाकाल लोक ( mahakal lok) परिसर में अब प्रतिदिन भव्य लाइट एंड साउंड शो आयोजित होगा।
इस शो में भगवान शिव की कथाओं, शिवपुराण, और प्राचीन अवंतिका नगरी (उज्जैन) के गौरवशाली इतिहास को अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

शो के दौरान प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर लाइट्स, ध्वनि प्रभाव और सांस्कृतिक संगीत का ऐसा संयोजन किया गया कि पूरा परिसर शिवमय हो उठा। शिव की तांडव कथा, सृष्टि की उत्पत्ति, और काल भैरव की लीला जैसे प्रसंगों को दृश्य रूप में दिखाया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध रह गए।

मुख्यमंत्री ने कहा —“यह शो सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि ज्ञान और आस्था का संगम है। इससे आने वाली पीढ़ियाँ भी हमारी सनातन संस्कृति को जान सकेंगी।”

महाकाल लोक(mahakal lok) में दीपों की रोशनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दिव्य संगम

कार्यक्रम के दौरान पूरा महाकाल लोक परिसर दीपों की श्रृंखला और आतिशबाजी से जगमगा उठा।
शिव आरती, नृत्य नाटिका, और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने आयोजन को दिव्यता का रूप दे दिया।
देशभर से आए श्रद्धालुओं ने इस पल को कैमरे में कैद किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी भक्तों को दीपावली की शुभकामनाएँ दीं और कहा — “बाबा महाकाल की कृपा से उज्जैन आज एक नई पहचान के साथ विश्व मंच पर स्थापित हो रहा है। महाकाल लोक सिर्फ एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बन चुका है।”

महाकाल लोक (mahakal lok) : धर्म, पर्यटन और अर्थव्यवस्था का संगम

महाकाल लोक (mahakal lok) परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना और राज्य सरकार के समन्वय से तैयार की गई है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही है।
यहाँ रोज़ाना हजारों श्रद्धालु आते हैं, जिससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और खाद्य उद्योगों को भी लाभ मिल रहा है।

सीएम मोहन यादव ने कहा कि आने वाले समय में महाकाल लोक (mahakal lok) को “विश्व स्तर के तीर्थ अनुभव केंद्र” के रूप में विकसित किया जाएगा।इसके लिए स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, सांस्कृतिक हेरिटेज ज़ोन, और डिजिटल गाइड सिस्टम की योजनाएँ भी तैयार की जा रही हैं।

श्री अन्न से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

सीएम ने कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के “श्री अन्न मिशन” से देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषक कल्याण, और पोषण सुरक्षा को नई गति मिली है। मध्यप्रदेश सरकार अब हर ज़िले में मिलेट्स मिशन लागू करेगी।
उन्होंने बताया कि महाकाल मंदिर के प्रसाद से इसकी शुरुआत करना प्रतीकात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है — क्योंकि यह आस्था और आत्मनिर्भरता का संगम है।

श्रद्धालुओं में खुशी, बोले — यह नवाचार महाकाल की महिमा बढ़ाएगा

महाकाल लोक में मौजूद श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक इस पहल से बेहद उत्साहित दिखे।
उज्जैन निवासी रितेश शर्मा ने कहा, “महाकालेश्वर बैंड और लाइट शो ने पूरे माहौल को भक्ति और गौरव से भर दिया। ऐसा लगा जैसे महाकाल स्वयं उपस्थित हैं।”

वहीं एक महिला श्रद्धालु ने कहा कि “अब प्रसाद में मिलने वाले श्री अन्न लड्डू न केवल स्वादिष्ट होंगे बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी। यह एक दूरदर्शी निर्णय है।”

महाकाल लोक (mahakal lok) में परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम

उज्जैन का महाकाल लोक (mahakal lok)अब सिर्फ एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत प्रतीक बन गया है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ये पहलें न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास को भी जोड़ती हैं।

जहाँ एक ओर लाइट एंड साउंड शो से श्रद्धालु शिवपुराण और अवंतिका के इतिहास से परिचित होंगे, वहीं दूसरी ओर श्री अन्न लड्डू और महाकालेश्वर बैंड जैसी पहलें नवाचार के साथ भारतीय परंपरा को पुनर्जीवित करेंगी।उज्जैन की यह पहल पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकती है — कि आस्था और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं, विरोधी नहीं।




नवरात्रि (Navratri 2025) पर प्रशासनिक संस्थाओं की नई पहल

Navratri 2025
Navratri

नवरात्रि (Navratri 2025 )पर्व पर साबूदाना खिचड़ी और मट्ठा से हुई श्रद्धालुओं की सेवा

माखन नगर।नवरात्रि ( Navratri)के पावन अवसर पर माखन नगर में आस्था और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। जनपद पंचायत माखन नगर परिवार ने देवीधाम की ओर जा रहे श्रद्धालुओं के लिए विशेष भंडारे का आयोजन किया। इस दौरान भक्तों को साबूदाना खिचड़ी और मट्ठा का प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और उन्होंने प्रसाद ग्रहण कर आत्मिक संतोष का अनुभव किया।


सरपंच, सचिव और कर्मचारियों की मौजूदगी

इस आयोजन की खास बात यह रही कि केवल औपचारिकता तक सीमित न रहते हुए पंचायत के सरपंच, सचिव और सभी कर्मचारी स्वयं सेवा में जुट गए। भक्तों को प्रसाद परोसते समय पंचायत परिवार के हर सदस्य के चेहरे पर सेवा और भक्ति का भाव स्पष्ट झलक रहा था। स्थानीय लोगों का कहना था कि आमतौर पर प्रशासनिक संस्थाएं ऐसे धार्मिक आयोजनों में केवल प्रतिनिधि भेजकर औपचारिकता निभाती हैं, लेकिन माखन नगर पंचायत परिवार ने खुद प्रसाद वितरण की जिम्मेदारी उठाकर मिसाल पेश की है।


श्रद्धालुओं को मिला संबल

नवरात्रि (navratri 2025) पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवीधाम की ओर पैदल या वाहनों से यात्रा करते हैं। लंबी यात्रा और धूप-गर्मी के कारण वे थकान और कमजोरी महसूस करते हैं। ऐसे में भंडारे में मिला प्रसाद और मट्ठा उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं था।एक श्रद्धालु ने कहा, “साबूदाना खिचड़ी हल्की और सुपाच्य होती है। व्रतधारी भक्तों के लिए यह सबसे अच्छा भोजन है। मट्ठा ने तो मानो हमारी थकान पूरी तरह मिटा दी। यह प्रसाद केवल भोजन नहीं, मां दुर्गा की कृपा का आशीर्वाद था।”


सामाजिक समरसता का संदेश

भंडारे में समाज का हर वर्ग शामिल हुआ। महिलाएं, पुरुष, बच्चे, बुजुर्ग सभी एक ही पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते दिखे। एक ही थाली में बैठकर भोजन करने की यह परंपरा सामाजिक समरसता और समानता का प्रतीक है। पंचायत परिवार के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि धर्म और आस्था केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज को जोड़ने और भाईचारा बढ़ाने का माध्यम भी हैं।


प्रशासनिक संस्थाओं की नई पहचान

जनपद पंचायत द्वारा किया गया यह आयोजन प्रशासनिक संस्थाओं की एक नई संवेदनशील छवि को सामने लाता है। आमतौर पर पंचायतें सड़क, पानी, बिजली या विकास योजनाओं तक सीमित दिखाई देती हैं, लेकिन माखन नगर पंचायत ने दिखा दिया कि प्रशासन समाज के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो सकता है। यह पहल न केवल क्षेत्र के लोगों को प्रभावित कर रही है बल्कि अन्य पंचायतों और प्रशासनिक इकाइयों के लिए भी एक प्रेरणादायी उदाहरण बन रही है।


सेवा और सहयोग की मिसाल

भक्तों ने प्रसाद ग्रहण करने के बाद इसे सेवा और भक्ति का अद्भुत संगम बताया। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए अविस्मरणीय रहेगा। एक बुजुर्ग श्रद्धालु ने कहा, “हमने कई बार यात्रा मार्ग में भंडारे देखे हैं, लेकिन पंचायत के लोग स्वयं सेवा करते हुए पहली बार देख रहे हैं। यह हमें बहुत अच्छा लगा। यह आयोजन सेवा, सहयोग और भक्ति का सच्चा उदाहरण है।” वहीं, पंचायत परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्हें भी इस सेवा से आत्मिक संतोष मिला। उनके अनुसार, भक्तों की सेवा करना सबसे बड़ा सौभाग्य है।


नवरात्रि (Navratri 2025) और प्रसाद का महत्व

हिंदू धर्म में नवरात्रि ( Navratri) का विशेष महत्व है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और उपवास रखते हैं। इस दौरान दिया जाने वाला प्रसाद केवल भोजन नहीं माना जाता, बल्कि मां की कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक होता है। साबूदाना खिचड़ी और मट्ठा का प्रसाद न केवल व्रतधारियों के लिए उपयुक्त है, बल्कि यह ऊर्जा और ताजगी प्रदान करने वाला आहार भी है। यह चयन दर्शाता है कि पंचायत परिवार ने भक्तों की सुविधा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा।


भक्तों की प्रतिक्रियाएँ

भक्तों ने आयोजन की खुलकर सराहना की।

  • एक महिला श्रद्धालु ने कहा, “जब हम देवीधाम की ओर जा रहे थे, तब यह प्रसाद हमारे लिए वरदान साबित हुआ। यह सेवा हमारी यात्रा को आसान बना गई।”
  • एक युवक ने कहा, “आज के समय में जब लोग व्यस्तता में एक-दूसरे की मदद कम कर पाते हैं, ऐसे में पंचायत का यह सामूहिक प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायी है।”

व्यापक संदेश

यह आयोजन केवल एक भंडारा या प्रसाद वितरण नहीं था, बल्कि समाज को यह संदेश देने का माध्यम था कि सच्ची भक्ति सेवा में निहित है। जब हर वर्ग के लोग मिलकर समाज की भलाई के लिए काम करते हैं, तो न केवल भक्तों की कठिनाई दूर होती है बल्कि समाज भी एकजुट होता है।


नवरात्रि (Navratri) पर्व पर माखन नगर जनपद पंचायत परिवार का यह आयोजन क्षेत्र की धार्मिक और सामाजिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है। साबूदाना खिचड़ी और मट्ठा का प्रसाद केवल शरीर को ऊर्जा देने वाला भोजन नहीं था, बल्कि यह आस्था, सेवा, सहयोग और सामाजिक एकता का प्रतीक था। यह आयोजन यह संदेश देता है कि प्रशासन और समाज अगर मिलकर काम करें, तो न केवल विकास कार्य बल्कि धार्मिक-सामाजिक गतिविधियाँ भी नई ऊँचाइयाँ छू सकती हैं।

माखन नगर पंचायत परिवार ने यह सिद्ध कर दिया कि सेवा ही सच्चा धर्म है, और भक्तों की सेवा

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7 सितंबर को पूर्णिमा की तिथि पर चंद्र ग्रहण का साया…

भारतीय पंचांग परंपरा में हर तिथि का अपना महत्व है। लेकिन जब एक ही दिन पूर्णिमा, सत्यनारायण व्रत, चंद्र ग्रहण और उसके अगले दिन से पितृ पक्ष का आरंभ हो, तब यह संयोग अत्यंत दुर्लभ और विशेष बन जाता है। 7 सितंबर 2025 को ऐसा ही अद्भुत संयोग बन रहा है, जिसे शास्त्रों में अत्यधिक पुण्यकारी माना गया है।

सत्यनारायण व्रत का महत्व

सत्यनारायण व्रत का वर्णन स्कंदपुराण में मिलता है। भगवान विष्णु के इस सरल और सुलभ रूप की कथा सुनने और कराने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

दरिद्रता और रोगों का नाश होता है।

संतान सौभाग्य और विवाह में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं।

मानसिक शांति और पारिवारिक सौहार्द प्राप्त होता है।

भाद्रपद पूर्णिमा पर किया गया यह व्रत विशेष रूप से शुभ फलदायी माना गया है।

पूर्णिमा का महत्व

धर्मसिंधु में कहा गया है कि पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और जप का फल गंगास्नान के बराबर होता है।
मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार यह तिथि देवताओं को प्रिय है और व्रत-पूजन, कथा-श्रवण तथा दान के लिए सर्वोत्तम है।

7 सितंबर 2025 का पंचांग और ग्रह-गोचर

तिथि: पूर्णिमा (समाप्ति रात 11:38 बजे)

नक्षत्र: शतभिषा (रात 9:41 बजे तक), फिर पूर्वाभाद्रपदा

योग: सुकर्मा (सुबह 6:10–9:23 बजे तक)

भद्रा: 12:43 बजे दोपहर तक

चंद्र राशि: कुंभ

सूर्य राशि: सिंह

विशेष: पूर्ण चंद्र ग्रहण

आरंभ: 9:58 PM

मध्य: 11:42 PM

मोक्ष: 1:26 AM

ग्रहण और सूतक का प्रभाव

चंद्र ग्रहण से सूतक दोपहर 12:57 बजे से लग जाएगा।

सूतक काल में सामान्य पूजा-पाठ, नैवेद्य अर्पण और कथा-श्रवण वर्जित है।

ग्रहण काल में किया गया मंत्र-जप और ध्यान सामान्य दिनों से हजार गुना फलदायी माना जाता है।

ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान करना अत्यंत शुभ है।

पितृ पक्ष से पूर्व का महत्व

8 सितंबर से पितृ पक्ष आरंभ होगा। शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा को की गई सत्यनारायण पूजा का पुण्य सीधे पितरों को प्राप्त होता है।
ब्रह्मपुराण में कहा गया है कि पितृ पक्ष से पूर्व की गई यह पूजा पितरों को शांति और मोक्ष प्रदान करती है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

सुबह 6:30 से 10:30 बजे तक – सबसे उपयुक्त समय।

अभिजित मुहूर्त (11:54–12:44 PM) उपलब्ध है, परंतु 12:43 तक भद्रा रहने से कठिनाई हो सकती है।

इसलिए सुबह का समय ही श्रेष्ठ है।

सत्यनारायण कथा की विधि

1. स्नान कर संकल्प लें।

2. भगवान विष्णु/सत्यनारायण की प्रतिमा स्थापित करें।

3. गणेश पूजन, नवग्रह पूजन और कलश स्थापन करें।

4. पांच अध्यायों की कथा श्रद्धापूर्वक करें।

5. नैवेद्य, फल, मिठाई आदि अर्पित करें।

6. आरती कर प्रसाद वितरण करें और ब्राह्मणों/जरूरतमंदों को दान दे ।

ग्रहण काल में क्या करें?

“ॐ नमो नारायणाय” या “ॐ विष्णवे नमः” का जाप करें।

भगवान विष्णु के शंख, चक्र, गदा, पद्म स्वरूप का ध्यान करें।

ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें और वस्त्र, अन्न या दक्षिणा का दान करें।

7 सितंबर 2025 की पूर्णिमा केवल चंद्र ग्रहण और पितृ पक्ष के कारण ही नहीं, बल्कि सत्यनारायण व्रत के संयोग से भी अत्यंत दुर्लभ है।
इस दिन सुबह पूजा और कथा करने, रात में ग्रहण काल में मंत्र-जप करने तथा अंत में स्नान-दान से पुण्य पूरा करने से जीवन में सुख-शांति आती है और पितरों की आत्मा भी तृप्त होती है।

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Janmashtami 2025: विष्णु अवतार होकर भी कहलाए माखन चोर, जन्माष्टमी पर पढ़ें कृष्ण के माखन चोरी की कथा

आपका दिया हुआ टेक्स्ट जन्माष्टमी की पौराणिक पृष्ठभूमि और माखनचोर कृष्ण की कथा को विस्तार से बताता है। अगर इसे त्योहार-विशेष लेख या पौराणिक कथा-आधारित फीचर स्टोरी की तरह सजाकर लिखा जाए तो यह पाठकों के लिए और रोचक हो सकता है।

मैं इसे थोड़ा संवारा हुआ, उत्सवमय और कथात्मक अंदाज़ में ऐसे पेश कर रहा हूँ—

जन्माष्टमी और माखनचोर कान्हा की कथा

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को देशभर में हर्षोल्लास से जन्माष्टमी मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस वर्ष यह पर्व शनिवार, 16 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा।

श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है। अपने बाल्यकाल की मनमोहक लीलाओं और नटखट स्वभाव से वे सभी के प्रिय बने। इसी कारण उन्हें मुरलीधर, गोपाला, नंदलाला, लड्डू गोपाल, कान्हा, कन्हैया जैसे अनेक नाम मिले। लेकिन एक नाम—माखनचोर—उनकी सबसे चंचल और प्यारी लीला की याद दिलाता है।

माखनचोर की कथा

गोकुल में मां यशोदा और नंदबाबा के आंगन में पले-बढ़े कान्हा को माखन अत्यंत प्रिय था। यशोदा रोज़ उन्हें ताजा माखन खिलातीं। एक दिन कान्हा अपने मित्र मधुमंगल के घर पहुंचे और कुछ खाने को मांगा। घर में केवल बासी कढ़ी थी, जिसे मधुमंगल ने खुद ही झाड़ी में छिपकर पी लिया।

जब कान्हा ने पूछा, तो मधुमंगल ने कहा—

“तुम्हें तो रोज़ माखन और दूध मिलता है, पर मैं निर्धन हूं और मैंने कभी माखन चखा तक नहीं।”

कान्हा ने वचन दिया—

“अब से मैं तुम्हें रोज़ माखन खिलाऊंगा।”

इसके बाद कान्हा और मधुमंगल ने मिलकर पड़ोसियों के घर से माखन चुराना शुरू कर दिया। दोनों मित्र माखन खाकर खुश होते, और यही आदत कान्हा के “माखनचोर” नाम का कारण बनी।

मैया यशोदा और शरारत का राज़

जब पड़ोस की महिलाएं शिकायत करतीं कि कान्हा मटकी तोड़कर माखन चुरा रहे हैं, तो यशोदा पहले विश्वास नहीं करतीं। लेकिन एक दिन उन्होंने कान्हा को रंगे हाथ पकड़ लिया। गुस्से में पूछा—

“कन्हैया, माखन क्यों चुराते हो?”

कान्हा ने मासूम मुस्कान के साथ उत्तर दिया—

*“मैया, मैं चोरी नहीं करता।

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Baba Mahakal : आज भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को माथे पर भांग और चंद्रमा से सजाया

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज अलसुबह बाबा महाकाल ने अपने भक्तों को विशेष दर्शन दिए। श्रावण कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर बुधवार रात 3 बजे बाबा महाकाल की भस्म आरती हुई।

मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि सबसे पहले वीरभद्र जी की आज्ञा लेकर चांदी के कपाट खोले गए। इसके बाद गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की गई। भगवान महाकाल का जलाभिषेक पंचामृत दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया।

पुजारियों ने बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया। कपूर आरती के बाद भगवान को नवीन मुकुट और मुंडमाला धारण कराई गई। महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। इस बार श्रृंगार में भांग से विशेष सजावट की गई और बाबा के मस्तक पर चंद्रमा लगाया गया। भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने दिव्य दर्शन कर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से मंदिर परिसर को गुंजायमान कर दिया। इसके बाद विशेष महाआरती कर राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की गई।

छत्र और घी का भव्य दान

नई दिल्ली के मुकुंदपुर निवासी संतोष कुमार चौबे ने श्री महाकालेश्वर भगवान को एक चांदी का छत्र भेंट किया, जिसका वजन लगभग 4159 ग्राम है। इसके साथ ही गर्भगृह में प्रज्वलित अखंड नंदादीप के लिए 15 किलो के 11 डिब्बों में कुल 165 किलो घी भेंट स्वरूप अर्पित किया गया। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक श्री प्रतीक द्विवेदी ने छत्र और घी के दानकर्ता का सम्मान कर उन्हें विधिवत रसीद प्रदान की। यह जानकारी मंदिर के कोठारी मनीष पांचाल ने दी।




Ujjain Mahakal : माथे पर त्रिपुंड और कानों में मोर पंख बाबा महाकाल के दर्शन

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज श्रावण माह कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रविवार की सुबह तीन बजे हुई। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन-अभिषेक कर शृंगार किया गया। शृंगार के बाद बाबा महाकाल को भस्म रमाई गई। इस दौरान हजारों भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शनों का लाभ लिया जिसके बाद जय श्री महाकाल के उद्घोष से मंदिर परिसर गूंज उठा।
कालों के काल विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर मे आज श्रावण माह कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि शनिवार पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती के लिए सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पण्डे पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर फलों के रस से बने पंचामृत को अर्पित कर किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को फूलों की माला धारण करवाई गई।

आज के शृंगार की विशेष बात यह रही कि बाबा महाकाल के मस्तक पर त्रिपुंड लगाकर शृंगारित किया गया। इस दौरान भगवान महाकाल को कमल के फूलों की माला भी अर्पित की गई। साथ ही निराले स्वरूप मे नवीन मुकुट से शृंगारित किया गया। जिसके बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती कर भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर जय श्री महाकाल का उद्घोष करने लगे।

भस्म आरती

चलित भस्म आरती भी हुई

मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन के महाकाल मंदिर में आने वाले हर श्रद्धालु को भस्म आरती के दर्शन कराने के उद्देश्य से मंदिर में चलित भस्म आरती की गई। आज भस्म आरती में चलायमान दर्शन व्यवस्था रही। श्रद्धालुओं ने बिना किसी अनुमति के चलते हुए भगवान महाकाल के दर्शन कर किए। मंदिर प्रशासन ने भक्तों की अत्यधिक संख्या को देखते हुए कार्तिकेय मंडपम में तीन लाइन चलाकर भक्तों को भस्म आरती के दर्शन कराने की व्यवस्था की।




Live Updates Guru Purnima 2025 : पूजा मुहूर्त विधि मंत्र पूजा सामग्री व्यास पूर्णिमा शुभकामनाएं संदेश छवियाँ

Guru Purnima 2025 Live: हर धर्म में गुरु का विशेष महत्व है फिर चाहें वो शिक्षक हों या आध्यात्मिक गुरु। हर साल गुरुओं के लिए एक खास दिन समर्पित होता है जिसे गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन गुरुओं की पूजा, उनके प्रति आभार प्रकट किया जाता है और शिष्य आशीर्वाद लेते हैं, कुछ लोग तो गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु दीक्षा भी लेते हैं इस साल गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई 2025 को है।

कबीरदास जी कहते हैं – गुरु बिन ज्ञान न होत है, गुरु बिन मिलै न मोष। गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटै न दोष। ये दोहा गुरु की महिमा को दर्शाता है। गुरु के बिना ज्ञान नहीं होता, गुरु के बिना मोक्ष नहीं मिलता, गुरु के बिना सत्य का ज्ञान नहीं होता और गुरु के बिना दोष नहीं मिटते। इसलिए जीवन में गुरु का दर्जा ईश्वर के समान है। गुरु पूर्णिमा का मुहूर्त, विधि, उपाय, मंत्र, भोग आदि से जुड़ी समस्त जानकारी आप यहां देख सकते हैं।

क्यों मनाते हैं गुरु पूर्णिमा

गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है, और इसका मुख्य कारण है महर्षि वेद व्यास का जन्मदिवस इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा के रुप में भी मनाने की परंपरा है। वेद व्यास को हिंदू धर्म के सबसे महान गुरुओं में से एक माना जाता है, जिन्होंने महाभारत जैसे महान ग्रंथों की रचना की।

गुरु पूर्णिमा तिथि

इस बार गुरु पूर्णिमा की तिथि 10 जुलाई को अर्धरात्रि में 1:36 मिनट पर शुरू होगी, जो अगले दिन 11 जुलाई को आधी रात में 2 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि पड़ने के कारण यह पर्व 10 जुलाई को मनाई जाएगी।

गुरु पूर्णिमा पर क्या करें

गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। गुरु शिष्य को सही दिशा दिखाने वाले, अज्ञानता का नाश करने वाले और ज्ञान की रोशनी फैलाने वाले होते हैं। इस दिन हम सभी को अपने गुरु का सम्मान करते हुए उनके द्वारा दिए गए उपदेशों को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लेना चाहिए।




Baba Mahakal : भस्म आरती के दौरान माथे पर त्रिपुंड-सूर्य और चंद्रमा, गले में मुंड माला से सुशोभित बाबा महाकाल

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि मंगलवार की सुबह 4 बजे हुई भस्म आरती हुई। इस दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन-अभिषेक कर शृंगार किया गया। शृंगार के बाद बाबा महाकाल को भस्म रमाई गई। इस दौरान हजारों भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शनों का लाभ लिया, जिसके बाद जय श्री महाकाल के उद्घोष से मंदिर परिसर गूंज उठा।

कालों के काल विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी मंगलवार पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती के लिए सुबह चार बजे मंदिर के पट खोले गए। पण्डे पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर फलों के रस से बने पंचामृत को अर्पित कर किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को फूलों की माला धारण करवाई गई।

आज के शृंगार की विशेष बात यह रही कि बाबा महाकाल के मस्तक पर त्रिपुंड, सूर्य, चंद्र लगाकर शृंगारित किया गया। इस दौरान भगवान महाकाल को मुंड माला भी अर्पित की गई। साथ ही निराले स्वरूप में नवीन मुकुट से शृंगारित किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती कर भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर जय श्री महाकाल का उद्घोष करने लगे।

श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा के भक्त द्वारा रजत मुकुट भेट में प्राप्त

श्री महाकालेश्वर मंदिर में उत्तरप्रदेश के खुरजा से पधारे भक्त रवि सचदेवा व राधिका सचदेवा द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर को दो नग रजत मुकुट भेंट किया। इसका वजन लगभग 2622.400 ग्राम है। पूजन दिनेश पुजारी द्वारा करवाया गया। जिसे श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा उपप्रशासक एस.एन.सोनी व सहायक प्रशासनिक अधिकारी आर.पी.गहलोत द्वारा प्राप्त पर दानदाता का सम्मान किया व विधिवत रसीद प्रदान की गईं।

भस्म आरती

भस्म आरती

भस्म आरती

भस्म आरती

भस्म आरती

महाकाल को रजत मुकुट भेंट करने वालों का सम्मान किया गया।




Ujjain Mahakal : भस्म आरती में बाबा महाकाल का त्रिपुंड और त्रिनेत्र से शृंगार

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि शुक्रवार की सुबह 4 बजे हुई भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन-अभिषेक कर शृंगार किया गया। शृंगार के बाद बाबा महाकाल को भस्म रमाई गई। इस दौरान हजारों भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शनों का लाभ लिया, जिसके बाद जय श्री महाकाल के उद्घोष से मंदिर परिसर गूंज उठा।

कालों के काल विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष की नवमी शुक्रवार पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती के लिए सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पण्डे पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर फलों के रस से बने पंचामृत को अर्पित कर किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को फूलों की माला धारण करवाई गई।

भस्म आरती

आज के शृंगार की विशेष बात यह रही कि बाबा महाकाल के मस्तक पर त्रिनेत्र और त्रिपुंड लगाकर शृंगारित किया गया। इस दौरान भगवान महाकाल को फूलों की माला भी अर्पित की गई। साथ ही निराले स्वरूप में नवीन मुकुट से शृंगारित किया गया। जिसके बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती कर भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या मे श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर जय श्री महाकाल का उद्घोष करने लगे।




Baba Mahakal : त्रिपुंड और भस्म आरती से सजे बाबा महाकाल ने अनोखे अंदाज में दिए भक्तों को दर्शन

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार को आषाढ़ माह कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर बाबा महाकाल का भव्य पंचामृत पूजन और विशेष श्रृंगार किया गया। तड़के सुबह 4 बजे संपन्न हुई भस्म आरती में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और त्रिनेत्रधारी भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने जानकारी दी कि भस्म आरती से पूर्व गर्भगृह में भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके लिए दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत अर्पित किया गया। आरती की शुरुआत प्रथम घंटाल बजाकर ‘हरि ओम’ जल अर्पण से की गई। तत्पश्चात कपूर आरती की गई और बाबा को फूलों की मालाएं पहनाई गईं।

इस अवसर पर बाबा महाकाल का त्रिपुंड धारण कर विशेष श्रृंगार किया गया। उन्हें भांग से अलंकृत कर नवीन मुकुट भी धारण कराया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य व मनोहारी दिखाई दिया। महानिर्वाणी अखाड़े के संतों द्वारा बाबा के ज्योतिर्लिंग पर भस्म रमाई गई और उसके बाद भोग अर्पण कर अंतिम कपूर आरती की गई।

भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर भावविभोर हो उठे और महाकाल भक्ति में लीन होकर भक्ति रस में सराबोर नजर आए।