भागवत कथा में धूमधाम से मना भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव

कथा व्यास सदभव तिवारी बोले— अधर्म बढ़ने पर धर्म रक्षा हेतु अवतार लेते हैं भगवान

नर्मदापुरम/माखननगर। “जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब धर्म की रक्षा के लिए भगवान स्वयं अवतार लेते हैं। मनुष्य जब अपने जीवन की नाव प्रभु के भरोसे छोड़ देता है, तब ईश्वर उसका मार्गदर्शन करते हैं”—ये प्रेरक विचार कथा व्यास श्री सदभव तिवारी ने ग्राम आमखेड़ी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान व्यक्त किए।

ग्राम आमखेड़ी में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की लीला का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा व्यास ने बताया कि जिस प्रकार अधर्म के प्रतीक रावण के अत्याचारों से पृथ्वी को मुक्त कराने के लिए भगवान राम का अवतार हुआ, उसी प्रकार कंस के अत्याचारों से पृथ्वी को मुक्त करने हेतु भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया।

कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर कथा पंडाल में भक्ति और उल्लास का वातावरण देखने को मिला। जन्मोत्सव से पूर्व गंगा अवतरण की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की झांकी प्रस्तुत हुई, पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भजनों पर झूमते-नाचते नजर आए।

कथा आयोजन में ग्राम आमखेड़ी के नागरिकों की सहभागिता विशेष रूप से देखने योग्य रही। ग्रामीणों ने इस आयोजन को अपना उत्सव मानते हुए व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक श्रद्धालुओं के साथ-साथ मीणा समाज सेवा संगठन, लायंस क्लब माखननगर, गायत्री परिवार एवं श्यामा किशोरी गौशाला के पदाधिकारियों ने भागवत जी की पूजा कर गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु पहुंच रहे हैं।
भागवत कथा के आयोजन से ग्राम आमखेड़ी में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और भक्तिमय वातावरण का संचार हो रहा है।




पूजा पद की नहीं, परमार्थ की होनी चाहिए – पं. श्याम मानवत

गोवर्धन लीला से मानवता को मिलता है सच्ची पूजा का संदेश
श्रीमद् भागवत कथा के पाँचवें दिन मानस मर्मज्ञ पं. श्याम जी मानवत ने गोवर्धन लीला का सार बताते हुए कहा कि पूजा प्रभाव की नहीं, स्वभाव की होनी चाहिए; पूजा अधिकार की नहीं, कर्तव्य की होनी चाहिए और पूजा पद की नहीं, परमार्थ की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्ची पूजा अहंकार की नहीं, बल्कि ओंकार यानी ईश्वरभाव से प्रेरित होनी चाहिए।

पं. मानवत ने कहा कि इंद्र इसलिए पूजनीय नहीं हो सकते क्योंकि वे स्वर्ग के राजा हैं। उन्होंने अपने प्रभाव और भय के बल पर पूजा करानी चाही, जबकि गोवर्धन पर्वत ने बिना किसी अहंकार के गोकुलवासियों को संकट के समय आश्रय दिया। यही कारण है कि गोवर्धन की पूजा हुई, क्योंकि उसमें परमार्थ, परोपकार और करुणा का भाव निहित है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि पूजा भय दिखाकर नहीं कराई जा सकती, पूजा में भाव ही प्रधान होता है। जहाँ सेवा, सुरक्षा और समर्पण होता है, वहीं ईश्वर का वास होता है। गोवर्धन लीला हमें यही सिखाती है कि शक्ति से नहीं, संवेदनशीलता और सेवा भाव से पूज्यता प्राप्त होती है।
विशिष्ट जनों की रही उपस्थिति
कथा के दौरान किसान संघ के प्रांत संगठन मंत्री भरत जी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा, विधायक विजयपाल सिंह, पूर्व विधायक हरिशंकर जायसवाल, महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष अर्चना पुरोहित, पूर्व अध्यक्ष रंजना मीना, ग्राम भारती के जिला प्रमुख महेंद्र सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं श्रोता उपस्थित रहे।
कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रोताओं ने गोवर्धन लीला के आध्यात्मिक संदेश को आत्मसात किया।




श्रीमद् भागवत कथा में भागवत आचार्य श्याम मनावत का जीवन-दर्शन

श्रीमद् भागवत कथा के दौरान भागवत आचार्य श्याम मनावत ने जीवन व्यवहार और आत्मबोध से जुड़े गूढ़ संदेश देते हुए कहा कि सलाह और मशवरा देना ठीक है, लेकिन किसी के जीवन का निर्णय उस पर थोपना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिना मांगे दी गई सलाह अक्सर संबंधों में दूरी और मन में अहंकार को जन्म देती है।

कथा के प्रवचन में आचार्य ने कहा कि हर व्यक्ति का जीवन, उसकी परिस्थितियाँ और उसकी यात्रा अलग-अलग होती है। ऐसे में हमें मार्ग दिखाने का अधिकार तो है, लेकिन निर्णय लेने का अधिकार उसी व्यक्ति को होना चाहिए। यही व्यवहारिक धर्म है और यही जीवन जीने की सही कला है।

भागवत आचार्य ने श्रोताओं को समझाते हुए कहा कि “जिस दिन मनुष्य को साध्य और साधन के अंतर का बोध हो जाता है, उसी दिन उसका जीवन धन्य हो जाता है।” उन्होंने बताया कि लक्ष्य चाहे कितना भी पवित्र क्यों न हो, यदि उसे पाने का साधन गलत है, तो वह लक्ष्य भी अपना मूल्य खो देता है। जीवन में साध्य के साथ-साथ साधन की पवित्रता अत्यंत आवश्यक है।

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए आचार्य ने कहा कि भगवान कृष्ण ने सदैव धर्मपूर्ण साधनों से ही अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। चाहे कंस का वध हो या पांडवों की रक्षा—हर जगह श्रीकृष्ण ने मानवता, नीति और धर्म का मार्ग दिखाया।

कृष्ण जन्म उत्सव की रही धूमधाम

कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण जन्म का पावन प्रसंग आया, पूरा पंडाल भक्ति और उल्लास से गूंज उठा। रात ठीक बारह बजे कृष्ण जन्म उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। झांकियों, पुष्पवर्षा, दीप प्रज्वलन और भजन-कीर्तन से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

श्रद्धालुओं ने नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की जैसे भजनों पर नृत्य कर अपनी आस्था प्रकट की। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, वहीं बच्चों को बाल गोपाल के रूप में सजाया गया। पंडाल में मौजूद हर श्रद्धालु कृष्ण भक्ति में सराबोर नजर आया।

कृष्ण जन्म उत्सव के अवसर पर प्रसाद वितरण किया गया और समूचा क्षेत्र “हरि बोल” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा।

कथा के अंत में भागवत आचार्य ने कहा कि कृष्ण को केवल पूजने से नहीं, बल्कि उनके जीवन मूल्यों को अपनाने से सच्ची भक्ति होती है। यदि मनुष्य अपने व्यवहार में संयम, विवेक और करुणा को स्थान दे दे, तो जीवन स्वयं एक सुंदर कथा बन जाता है।




माघ पूर्णिमा 2026: 1 फरवरी को है पावन पर्व, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और धार्मिक महत्व

 

Magh Purnima 2026: माघ माह में आने वाली पवित्र पूर्णिमा को माघ पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। हिंदू वैदिक परंपरा में इस तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस वर्ष माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन देवता स्वर्गलोक से पृथ्वी पर अवतरित होकर पवित्र नदियों के संगम में स्नान करते हैं। इसी कारण इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व

माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और आर्थिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है। माना जाता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर सभी पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

माघ पूर्णिमा 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार—

  • माघ पूर्णिमा तिथि आरंभ: 1 फरवरी 2026, सुबह 5:52 बजे

  • माघ पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 फरवरी 2026, सुबह 3:38 बजे

  • पर्व मनाया जाएगा: 1 फरवरी 2026

शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:24 से 6:17 बजे तक

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:57 बजे तक

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:23 से 3:07 बजे तक

  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:58 से 6:24 बजे तक

माघ पूर्णिमा पूजा सामग्री की सूची

  • घी

  • पंचामृत

  • रोली

  • अक्षत (चावल)

  • सिंदूर

  • दीपक

  • चंदन का पेस्ट

  • सूती बाती

  • मिठाइयां

  • गंगाजल

  • कमल और पीले फूलों की माला

  • लाल वस्त्र

  • भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति

माघ पूर्णिमा पर क्या करें?

  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी में स्नान करें या स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं।

  • भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें।

  • भगवान सत्यनारायण की कथा का पाठ करें।

  • शुद्ध घी का दीपक जलाकर फल, पंचामृत और तुलसी के पत्ते अर्पित करें।

  • इस दिन तिल, गुड़, वस्त्र और अनाज का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।


धार्मिक मान्यता

मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य करने से न केवल आर्थिक लाभ होता है, बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी बढ़ती है। यह दिन आत्मशुद्धि और ईश्वर भक्ति के लिए विशेष माना गया है।

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि denvapost. com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.




Holashtak 2026: 24 फरवरी से लगेंगे होलाष्टक, जानें होली की तारीख और क्या करें–क्या न करें

फाल्गुन का महीना 2 फरवरी 2026 से शुरू हो जाएगा। इस महीने में पड़ने वाले महाशिवरात्रि और होली का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। खासतौर पर होली से पहले आने वाले होलाष्टक के आठ दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं और विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

होलाष्टक 2026 में कब से होंगे शुरू

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक प्रारंभ होते हैं और पूर्णिमा तिथि यानी होलिका दहन तक रहते हैं।
साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के साथ समाप्त होंगे।

बसंत पंचमी से ही होली की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन से लेकर होली तक बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित किया जाता है। कई स्थानों पर इसी दिन होली का डंडा गाड़ने की परंपरा भी निभाई जाती है।

क्या है होलाष्टक का धार्मिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार राक्षसराज हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था और भगवान विष्णु के परम भक्त अपने पुत्र प्रह्लाद को अपने अधीन करना चाहता था। उसने प्रह्लाद को आठ दिनों तक घोर यातनाएं दीं। इन्हीं आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय रहती हैं।

होलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिए

शास्त्रों में होलाष्टक के दौरान 16 संस्कारों को करने की मनाही बताई गई है। इनमें शामिल हैं:

  • नामकरण संस्कार
  • जनेऊ संस्कार
  • गृह प्रवेश
  • विवाह संस्कार

इसके अलावा इस अवधि में हवन, यज्ञ और अन्य मांगलिक कार्य भी नहीं किए जाते। शास्त्रों के अनुसार जिन कन्याओं का विवाह हाल ही में हुआ हो, उन्हें इस दौरान मायके में रहने की परंपरा है।

होलाष्टक में बरतें विशेष सावधानी

मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रहता है। इसलिए इस समय

  • किसी अनजान व्यक्ति से कोई चीज न लें और न खाएं
  • मानसिक और शारीरिक रूप से संयम बनाए रखें

होलिका दहन और होली 2026 की तिथि

  • होलिका दहन: 3 मार्च 2026
  • रंगों वाली होली: 4 मार्च 2026

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक रहेगा।

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नर्मदा परिक्रमा: आस्था, आत्मशुद्धि और भारतीय जीवन-दर्शन की जीवंत यात्रा

भारत की पवित्र नदियों में नर्मदा का स्थान विशिष्ट है। गंगा जहाँ मोक्षदायिनी मानी जाती हैं, वहीं नर्मदा को स्वयं शिवस्वरूपा कहा गया है। नर्मदा परिक्रमा केवल नदी की यात्रा नहीं, बल्कि यह मन, विचार और जीवन के परिष्कार की साधना है। यह परिक्रमा व्यक्ति को भौतिकता से निकालकर प्रकृति, समाज और स्वयं से जोड़ती है।

नर्मदा: एक नदी नहीं, जीवंत देवी

पुराणों के अनुसार नर्मदा का अवतरण भगवान शिव के पसीने से हुआ माना जाता है। स्कंद पुराण, मत्स्य पुराण और वायु पुराण में नर्मदा की महिमा का विस्तार से वर्णन है। मान्यता है कि नर्मदा के दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है, और उसके जल के स्पर्श से आत्मा पवित्र होती है।

इसी कारण नर्मदा को रेवा, शंकरजा और महानदी भी कहा जाता है।

परिक्रमा की परंपरा और नियम

नर्मदा परिक्रमा लगभग 2600 किलोमीटर की पैदल यात्रा है, जो अमरकंटक से आरंभ होकर अरब सागर तक जाती है और पुनः अमरकंटक लौटती है। परिक्रमा का मूल नियम है—

  • नर्मदा को सदैव दाईं ओर रखना
  • नदी को पार न करना
  • पैदल यात्रा करना
  • संयम, सात्त्विक आहार और सेवा भाव रखना

यह नियम परिक्रमा को एक साधारण यात्रा से ऊपर उठाकर आध्यात्मिक अनुशासन बना देते हैं।

आत्मशुद्धि और जीवन परिवर्तन की साधना

नर्मदा परिक्रमा को तपस्या कहा गया है। महीनों और वर्षों तक चलने वाली यह यात्रा व्यक्ति को—

  • धैर्य
  • सहनशीलता
  • त्याग
  • और आत्मनिरीक्षण
    सिखाती है।

परिक्रमा के दौरान व्यक्ति समाज के हर वर्ग से मिलता है—आदिवासी, किसान, संत, गृहस्थ—और जीवन को नए दृष्टिकोण से समझता है। यही कारण है कि कहा जाता है—
“नर्मदा परिक्रमा मनुष्य को बाहर नहीं, भीतर से बदलती है।”

सामाजिक समरसता की मिसाल

नर्मदा परिक्रमा भारतीय सामाजिक एकता का अनूठा उदाहरण है। मार्ग में बसे गाँवों के लोग बिना किसी भेदभाव के परिक्रमावासियों को—

  • भोजन
  • विश्राम
  • और सहयोग
    प्रदान करते हैं।

यह परंपरा आज भी जीवित है और बताती है कि भारतीय संस्कृति सेवा और सह-अस्तित्व पर आधारित है।

पर्यावरण चेतना की धरोहर

नर्मदा परिक्रमा प्रकृति के साथ सहजीवन का पाठ पढ़ाती है। परिक्रमावासी जंगलों, घाटों, पहाड़ियों और खेतों से गुजरते हुए यह अनुभव करते हैं कि—

  • नदी केवल जलधारा नहीं
  • बल्कि जीवन का आधार है

आज जब नर्मदा प्रदूषण, अवैध खनन और अतिक्रमण से जूझ रही है, तब परिक्रमा हमें नदी संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का संदेश देती है।

नर्मदा और मध्यप्रदेश की पहचान

नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है। अमरकंटक, मंडला, जबलपुर, नर्मदापुरम, ओंकारेश्वर, महेश्वर जैसे तीर्थ न केवल धार्मिक, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र हैं। नर्मदा परिक्रमा इन सभी स्थलों को एक सांस्कृतिक सूत्र में पिरोती है।

आधुनिक युग में नर्मदा परिक्रमा का संदेश

आज के भागदौड़ भरे, उपभोक्तावादी जीवन में नर्मदा परिक्रमा हमें—

  • धीमे चलने
  • कम में जीने
  • और प्रकृति के साथ संतुलन बनाने
    का संदेश देती है।

यह यात्रा सिखाती है कि विकास का अर्थ केवल निर्माण नहीं, संरक्षण और संवेदना भी है।

नर्मदा परिक्रमा एक धार्मिक अनुष्ठान से कहीं आगे है। यह भारतीय जीवन दर्शन की चलती-फिरती पाठशाला है, जहाँ आस्था, पर्यावरण, समाज और आत्मा—सब एक साथ चलते हैं।

जब तक नर्मदा बहती रहेगी, तब तक परिक्रमा की यह परंपरा हमें याद दिलाती रहेगी कि— नदी को बचाना, जीवन को बचाना है।




Basant Panchami 2026: परीक्षा से हैं परेशान? बसंत पंचमी पर मां सरस्वती पूजा से बढ़ाएं फोकस और सफलता

Basant Panchami 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला बसंत पंचमी पर्व केवल ऋतुराज बसंत के आगमन का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह दिन मां सरस्वती—ज्ञान, बुद्धि, कला और संगीत की देवी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी मनाई जाएगी। खास बात यह है कि यह पर्व ऐसे समय आता है, जब देशभर में कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्र बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे होते हैं।

ऐसे में बसंत पंचमी का धार्मिक और मानसिक महत्व छात्रों के लिए और भी बढ़ जाता है।

परीक्षा की तैयारी और बसंत पंचमी का महत्व

मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से एकाग्रता, स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। बोर्ड परीक्षाओं के दौरान छात्रों पर मानसिक दबाव, तनाव और भ्रम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे समय में यह पर्व मानसिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी के मुख से मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इसे विद्या आरंभ और लेखन आरंभ के लिए भी श्रेष्ठ दिन माना जाता है।

कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए, जिनके सामने करियर से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय होते हैं, बसंत पंचमी विशेष फलदायी मानी जाती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा से मन में स्थिरता आती है और पढ़ाई में मन लगता है।

बसंत पंचमी की पूजा विधि

पूजा के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पीले या सफेद रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
घर के किसी साफ स्थान या ईशान कोण में मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और मां को पीले फूल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें।

छात्र अपनी पुस्तकें, कॉपियां और कलम पूजा स्थान पर रखें। मान्यता है कि इससे शिक्षा में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

इसके बाद श्रद्धा भाव से
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः”
मंत्र का 108 बार जाप करें। यह मंत्र स्मरण शक्ति को मजबूत करने और पढ़ाई में फोकस बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

बसंत पंचमी पर छात्रों के लिए विशेष स्टडी टिप्स

  • पढ़ाई की नई शुरुआत करें: इस दिन किसी कठिन विषय या नए अध्याय की शुरुआत शुभ मानी जाती है।

  • स्टडी प्लान बनाएं: बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्र इस दिन अपना रिवीजन शेड्यूल तैयार करें।

  • डिजिटल डिस्ट्रैक्शन से दूरी: पूजा के बाद मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पढ़ाई पर ध्यान दें।

  • लिखकर अभ्यास करें: मां सरस्वती लेखन और स्मरण शक्ति की देवी हैं, इसलिए उत्तर लिखकर अभ्यास करना अधिक लाभकारी रहेगा।

  • सकारात्मक सोच रखें: परीक्षा को डर नहीं, बल्कि खुद को साबित करने का अवसर मानें।

छात्रों के लिए संदेश

बसंत पंचमी यह संदेश देती है कि पूजा और श्रद्धा के साथ-साथ नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास भी उतने ही जरूरी हैं।
ज्ञान केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य और सकारात्मक सोच से भी प्राप्त होता है।

परीक्षा के समय बसंत पंचमी छात्रों को मानसिक मजबूती, नई ऊर्जा और आत्मविश्वास देने वाला पर्व माना जाता है।

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Rashifal: धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि का कैसा रहेगा आज का दिन? जानिए धन, करियर, प्रेम और सेहत का हाल

आज 22 जनवरी 2026, गुरुवार का दिन चंद्रमा के कुंभ राशि में गोचर और शुक्ल चतुर्थी तिथि के प्रभाव में है। दिन आत्ममंथन, दीर्घकालिक योजना और भावनात्मक संतुलन की मांग करता है। राहु काल और दुष्मुहूर्त के कारण कुछ समय सावधानी भी जरूरी रहेगी। आइए जानते हैं धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के लिए आज का विशेष राशिफल।

धनु राशिफल (Sagittarius Horoscope Today)

धनु राशि के लिए आज का दिन दिशा और दृष्टिकोण तय करने वाला है। आपकी सोच व्यापक रहेगी और आप तात्कालिक लाभ से अधिक भविष्य की स्थिरता पर ध्यान देंगे।

सुबह शतभिषा नक्षत्र (14:27 बजे तक) के प्रभाव में सीखने, सलाह लेने और करियर प्लानिंग के लिए समय अनुकूल है। वरियान योग (17:37 बजे तक) वरिष्ठों का सहयोग दिला सकता है।

दोपहर में 13:52 से 15:12 बजे तक राहु काल और 15:01 से 15:44 बजे तक दुष्मुहूर्त में निवेश, यात्रा या जल्दबाजी से बचें।

अभिजीत मुहूर्त (12:11–12:54) दिन का सबसे शुभ समय रहेगा।
शाम को पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र आपको गंभीर और जिम्मेदार निर्णय लेने की प्रेरणा देगा।

  • Career: ज्ञान और योजना से प्रगति

  • Finance: जोखिम से बचना बेहतर

  • Love: व्यवहारिकता हावी

  • Health: थकान, ऊर्जा की कमी

  • उपाय: दोपहर में निर्णय टालें

  • Lucky Color: पीला

  • Lucky Number: 3

मकर राशिफल (Capricorn Horoscope Today)

मकर राशि वालों के लिए आज का दिन जिम्मेदारी और अनुशासन का है। आत्ममंथन आपको भविष्य की ठोस नींव तैयार करने में मदद करेगा।

सुबह शतभिषा नक्षत्र लक्ष्य तय करने और वरिष्ठों से संवाद के लिए अनुकूल है। वरियान योग स्थिरता प्रदान करेगा।

दोपहर में राहु काल के दौरान पद, अधिकार या जिम्मेदारी को लेकर विवाद से बचें। दुष्मुहूर्त में कोई कठोर फैसला न लें।

अभिजीत मुहूर्त में योजनाओं को व्यवस्थित करना लाभकारी रहेगा।
शाम को आप समझेंगे कि हर जिम्मेदारी अकेले उठाना जरूरी नहीं।

  • Career: जिम्मेदारी बढ़ेगी, स्थायित्व मिलेगा

  • Finance: आय स्थिर, खर्च पर नियंत्रण जरूरी

  • Love: भावनाएं दब सकती हैं, संवाद करें

  • Health: जोड़ों में दर्द, थकान

  • उपाय: धैर्य और अनुशासन रखें

  • Lucky Color: स्लेटी

  • Lucky Number: 8

कुंभ राशिफल (Aquarius Horoscope Today)

कुंभ राशि के लिए आज आत्मचिंतन और आंतरिक बदलाव का दिन है। चंद्रमा आपकी ही राशि में होने से भावनाएं गहरी रहेंगी।

सुबह शतभिषा नक्षत्र नेटवर्किंग और दीर्घकालिक लक्ष्यों पर विचार के लिए श्रेष्ठ है। वरियान योग सहयोग देता है, लेकिन आत्मनिर्भरता भी सिखाता है।

दोपहर में राहु काल और दुष्मुहूर्त के कारण भ्रम और असमंजस बढ़ सकता है, इसलिए नई शुरुआत टालें।

अभिजीत मुहूर्त आत्मविश्वास लौटाएगा।
शाम को जिम्मेदारी का एहसास बढ़ेगा।

  • Career: पर्दे के पीछे की मेहनत रंग लाएगी

  • Finance: खर्च पर नियंत्रण जरूरी

  • Love: दूरी या मौन की स्थिति

  • Health: अनिद्रा, मानसिक बेचैनी

  • उपाय: ध्यान और श्वास अभ्यास

  • Lucky Color: नीला

  • Lucky Number: 4

मीन राशिफल (Pisces Horoscope Today)

मीन राशि के लिए आज का दिन भावनात्मक समझ और सीमाएं तय करने का है। चंद्रमा कुंभ में होने से आप भावनाओं को भीतर ही भीतर परखेंगे।

सुबह शतभिषा नक्षत्र मार्गदर्शन और रचनात्मक सोच के लिए अनुकूल है। वरियान योग भावनात्मक संतुलन देगा।

दोपहर में राहु काल और दुष्मुहूर्त भावनात्मक भ्रम ला सकते हैं, इसलिए आर्थिक या भावनात्मक प्रतिबद्धता से बचें।

अभिजीत मुहूर्त आत्मशांति और सही संवाद का समय है।
शाम को आप भावनात्मक रूप से अधिक परिपक्व महसूस करेंगे।

  • Career: सहयोग से नए अवसर

  • Finance: आय ठीक, खर्च संतुलित रखें

  • Love: समझ और धैर्य जरूरी

  • Health: थकान, पैरों से जुड़ी परेशानी

  • उपाय: जल तत्व से जुड़ा दान

  • Lucky Color: समुद्री हरा

  • Lucky Number: 7

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Horoscope 21 January 2026: “राशिफल 21 जनवरी 2026: मकर–धनु–कुंभ–मीन के लिए संयम, सोच और सतर्क निर्णय”

Rashifal: धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के लिए आज यानी 21 जनवरी 2026 का दिन कैसा रहेगा? क्या धन और सेहत के मामले में हानि होगी या जीवन में कोई शुभ समाचार मिल सकता है, जानते हैं इन चार राशियों का विशेष राशिफल (Horoscope Today).

धनु राशिफल (Sagittarius)

धनु राशि: विचारों से अधिक व्यवहारिक निर्णयों का दिन

21 जनवरी 2026 का दिन धनु राशि के जातकों के लिए सोच से अधिक व्यवहारिक निर्णय लेने का संकेत देता है। चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित होने से आपकी दृष्टि व्यापक और भविष्य उन्मुख रहेगी। शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यह बताती है कि आज बनाई गई योजनाएँ आगे चलकर आपकी दिशा तय करेंगी, लेकिन उनसे तुरंत परिणाम की अपेक्षा रखना निराशा दे सकता है।

दिन के प्रथम भाग में धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जो दोपहर 1 बजकर 59 मिनट तक सक्रिय रहेगा। यह समय सीखने, सलाह लेने और दीर्घकालीन योजनाओं पर विचार करने के लिए अनुकूल है। करियर या आर्थिक भविष्य को लेकर गंभीर चर्चा हो सकती है।
हालाँकि पूरे दिन व्यतीपात योग (शाम 6 बजकर 58 मिनट तक) सक्रिय रहने के कारण किसी भी सूचना को बिना जाँच-पड़ताल स्वीकार करना नुकसानदेह हो सकता है।

दोपहर का समय विशेष सावधानी मांगता है।

  • राहु काल: 12:32 से 13:52

  • दुष्टमुहूर्त: 12:11 से 12:53

इस अवधि में निवेश, उधार, या जल्दबाजी में कोई निर्णय लेना टालें। शांत रहकर केवल परिस्थितियों का अवलोकन करना ही बेहतर रहेगा।

शाम के समय शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव बढ़ेगा, जिससे सोच अधिक स्पष्ट और तार्किक होगी। आप यह तय कर पाएंगे कि किस दिशा में आगे बढ़ना है और किन निर्णयों को कुछ समय के लिए रोकना उचित रहेगा।

दैनिक फलादेश

Career: योजना और ज्ञान के सहारे आगे बढ़ेंगे, जल्दबाजी नुकसान दे सकती है।
Finance: सुरक्षा और स्थिरता को प्राथमिकता दें।
Love: भावनाओं से अधिक व्यवहारिकता हावी रहेगी।
Health: थकान और ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है।

उपाय

दोपहर के समय कोई भी आर्थिक निर्णय लेने से बचें।

Lucky Color: पीला
Lucky Number: 3

मकर राशिफल (Capricorn)

मकर राशि: जिम्मेदारी और आत्ममंथन का दिन

मकर राशि के जातकों के लिए आज का दिन जिम्मेदारियों के निर्वहन और आत्ममंथन का है। चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित होने से आप अपने कार्य और निजी जीवन को कुछ दूरी से देखने में सक्षम होंगे, जिससे निर्णय अधिक संतुलित रहेंगे। शुक्ल तृतीया यह संकेत देती है कि आज लिया गया कोई भी फैसला दीर्घकालिक प्रभाव डालेगा, इसलिए किसी भी विषय पर जल्द निष्कर्ष निकालने से बचें।

दिन के प्रथम भाग में धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव दोपहर 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। यह समय लक्ष्य तय करने, वरिष्ठों से संवाद स्थापित करने और योजनाओं को व्यवस्थित करने के लिए अनुकूल है। कार्यक्षेत्र में अपनी भूमिका और ज़िम्मेदारियों को लेकर स्पष्टता आएगी। हालांकि पूरे दिन व्यतीपात योग (शाम 6 बजकर 58 मिनट तक) सक्रिय रहने के कारण नियमों की अनदेखी या अधूरी जानकारी परेशानी का कारण बन सकती है।

दोपहर का समय विशेष सतर्कता मांगता है—

  • दुष्टमुहूर्त: 12:11 से 12:53

  • राहु काल: 12:32 से 13:52

इस अवधि में टकराव, नौकरी से जुड़े बड़े फैसले या किसी पर दबाव बनाने से बचें। यह समय मौन, धैर्य और निरीक्षण का है।

शाम के समय शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव बढ़ेगा। इससे मानसिक बोझ हल्का होगा और आगे की रणनीति तय करने में सहायता मिलेगी।

दैनिक फलादेश

Career: जिम्मेदारियाँ बढ़ेंगी, लेकिन परिणाम स्थायी और ठोस होंगे।
Finance: आय स्थिर रहेगी, खर्च सोच-समझकर करें।
Love: भावनाएँ भीतर दब सकती हैं, संवाद आवश्यक है।
Health: जोड़ों और थकान से जुड़ी परेशानी संभव है।

उपाय

दोपहर के समय मौन रखें और शाम को आत्ममंथन करें।

Lucky Color: स्लेटी
Lucky Number: 8

कुंभ राशिफल (Aquarius)

कुंभ राशि: आत्मचिंतन और भविष्य की तैयारी का दिन

आज का दिन कुंभ राशि के जातकों के लिए आत्मविश्लेषण और भीतर की तैयारी का है। चंद्रमा आपकी ही राशि में स्थित होने से आप मानसिक रूप से अधिक सजग, संवेदनशील और विचारशील रहेंगे। शुक्ल तृतीया नई शुरुआत का संकेत अवश्य देती है, लेकिन यह शुरुआत आज बाहरी घटनाओं से अधिक आंतरिक स्तर पर होगी।

दिन के प्रथम भाग में धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव दोपहर 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इस समय नेटवर्किंग, मित्रों, सामाजिक दायरे और दीर्घकालिक लक्ष्यों को लेकर गंभीर मंथन संभव है। हालांकि पूरे दिन व्यतीपात योग (शाम 6 बजकर 58 मिनट तक) सक्रिय रहने के कारण दूसरों की राय से प्रभावित होकर निर्णय लेना नुकसानदेह हो सकता है।

दोपहर का समय विशेष सावधानी मांगता है—

  • दुष्टमुहूर्त: 12:11 से 12:53

  • राहु काल: 12:32 से 13:52

इस अवधि में नौकरी परिवर्तन, स्थान परिवर्तन, निवेश या कोई बड़ा निर्णय टालना ही सुरक्षित रहेगा। इस समय धैर्य और मौन ही आपकी सबसे बड़ी ताकत होगी।

शाम के समय शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव बढ़ेगा। यह समय शोध, योजना निर्माण और आने वाले कदमों की तैयारी के लिए अत्यंत अनुकूल रहेगा। जो बातें अभी स्पष्ट नहीं हैं, उनके संकेत मिलने लगेंगे।

दैनिक फलादेश

Career: पर्दे के पीछे की मेहनत भविष्य में ठोस परिणाम देगी।
Finance: खर्चों पर नियंत्रण आवश्यक है।
Love: दूरी या भावनात्मक मौन का अनुभव हो सकता है।
Health: अनिद्रा और मानसिक बेचैनी परेशान कर सकती है।

उपाय

ध्यान, प्राणायाम और श्वास अभ्यास करें।

Lucky Color: नीला
Lucky Number: 4

मीन राशिफल (Pisces)

मीन राशि: भावनात्मक समझ और सीमाएँ तय करने का दिन

आज का दिन मीन राशि के जातकों के लिए भावनात्मक स्पष्टता और स्वस्थ सीमाएँ तय करने का है। चंद्रमा कुंभ राशि में होने से आप अपनी भावनाओं को भीतर ही भीतर परखेंगे और हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय सोच-समझकर कदम उठाएंगे। शुक्ल तृतीया यह संकेत देती है कि आज की गई सोच और आत्ममंथन भविष्य के महत्वपूर्ण बदलावों की नींव रखेगा।

दिन के प्रारंभिक भाग में धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव दोपहर 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। यह समय किसी वरिष्ठ, मार्गदर्शक या अनुभवी व्यक्ति से सलाह लेने, अपने लक्ष्य स्पष्ट करने और दिशा तय करने के लिए अनुकूल है। हालांकि पूरे दिन व्यतीपात योग (शाम 6 बजकर 58 मिनट तक) सक्रिय रहने के कारण भावनात्मक भरोसा करने से पहले सतर्कता आवश्यक रहेगी।

दोपहर का समय सावधानी मांगता है—

  • दुष्टमुहूर्त: 12:11 से 12:53

  • राहु काल: 12:32 से 13:52

इस दौरान किसी भी प्रकार की आर्थिक या भावनात्मक प्रतिबद्धता, वादा या निर्णय टालना ही बेहतर रहेगा।

शाम के समय शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव बढ़ेगा। इससे आप भावनात्मक रूप से हल्का, संतुलित और अधिक स्पष्ट महसूस करेंगे। यह समय आत्मशांति पाने और आगे की दिशा तय करने के लिए उपयुक्त है।

दैनिक फलादेश

Career: सहयोग और सही मार्गदर्शन से नए अवसर मिल सकते हैं।
Finance: आय ठीक रहेगी, खर्चों में संतुलन बनाए रखें।
Love: भरोसे और आपसी समझ की विशेष आवश्यकता रहेगी।
Health: थकान और पैरों से जुड़ी समस्या परेशान कर सकती है।

उपाय

जल तत्व से जुड़ा दान करें या शांत वातावरण में ध्यान करें।

Lucky Color: समुद्री हरा
Lucky Number: 7

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि denvapost.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.




सीकर में पहली बार होगा सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ महायज्ञ, 24-25 जनवरी को उमड़ेगी श्रद्धा की गंगा

सीकर। वीर हनुमान की अखंड भक्ति और राम नाम की दिव्य गूंज से शीघ्र ही सीकर की पावन धरा अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर होने जा रही है। शेखावाटी अंचल में पहली बार दो दिवसीय सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ महायज्ञ का भव्य एवं दिव्य आयोजन किया जा रहा है, जो सम्पूर्ण क्षेत्र के लिए श्रद्धा, साधना और सनातन संस्कृति का ऐतिहासिक पर्व सिद्ध होगा।

यह विराट महायज्ञ शेखावाटी के संत-महात्माओं के आशीर्वाद तथा बोलता बालाजी धाम मंदिर के महंत श्री सुनील तिवाड़ी जी महाराज के पावन संरक्षण में सम्पन्न होगा। आयोजन में पंडित अश्वनी मिश्रा एवं पंडित मधुसूदन आसोपा का विशेष सानिध्य रहेगा।
511 विद्वान ब्राह्मण करेंगे सामूहिक पाठ
आयोजन समिति के सदस्य सुशील माटोलिया ने जानकारी देते हुए बताया कि इस महायज्ञ में 511 विद्वान वैदिक ब्राह्मण एक साथ हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिरस से ओत-प्रोत हो जाएगा। इस पुण्य अनुष्ठान में 511 यजमान सहभागी बनकर धर्म लाभ अर्जित करेंगे।

यह दिव्य आयोजन 24 एवं 25 जनवरी 2026 को बोलता बालाजी धाम, माधव सागर तालाब, मारू पार्क के समीप, सीकर में आयोजित होगा। महायज्ञ का संचालन महंत सुनील तिवाड़ी, पंडित अश्वनी मिश्रा एवं पंडित मधुसूदन आसोपा के सानिध्य में तथा पंडित अरविंद महाराज एवं पंडित पंकज मिश्रा के सह-आचार्यत्व में वैदिक विधि-विधान से किया जाएगा।

24 जनवरी को अखंड ज्योत प्रज्वलन से शुभारंभ

प्रथम दिवस 24 जनवरी को प्रातः 9 बजे विधिवत पूजन-अर्चन एवं अखंड ज्योत प्रज्वलन के साथ महायज्ञ का शुभारंभ होगा। इसके पश्चात संपूर्ण विश्व कल्याण, राष्ट्र शांति एवं जन-जन के कल्याण की भावना से सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ का महा-संकल्प लिया जाएगा और सामूहिक पाठ आरंभ होंगे।

25 जनवरी को 1100 दीपकों से भव्य महाआरती

द्वितीय दिवस 25 जनवरी को प्रातः पूजन एवं पाठ की पूर्णाहुति के पश्चात सायंकाल 5 बजे 1100 दीपकों से सुसज्जित भव्य महाआरती का आयोजन किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति का साक्षी बनेगा। इसके बाद महाप्रसाद भंडारे का आयोजन होगा तथा रात्रिकालीन भजन-जागरण में राम भक्ति और हनुमान भक्ति की अमृतमयी धारा प्रवाहित होगी।
प्रेस वार्ता में पोस्टर का विमोचन
इस अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में कार्यक्रम के भव्य प्रचार पोस्टर का विमोचन किया गया। प्रेस वार्ता में आयोजन समिति के अनुभव जैन, अमित चिरानिया, रतन अग्रवाल, दयाल सिंह शेखावत, मुकेश खडोलिया, प्रकाश सिंधी, महेंद्र मोदी, संजय कुमावत, संजीव केजरीवाल, मनोज पंसारी, संजय शर्मा, प्रदीप मोदी, स्वदेश शर्मा, ज्योति तनवानी, संतोष खण्डेलवाल सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी एवं समिति कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से इस महायज्ञ में अधिक से अधिक संख्या में पधारकर धर्म लाभ अर्जित करने की अपील की है।

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