Ujjain News: कामिका एकादशी पर बाबा महाकाल का तिरूपति बालाजी के रूप में शृंगार भस्म आरती
written by Denva Post Bureau | 31/07/2024
भस्म आरती…कामिका एकादशी पर तिरुपति बालाजी के स्वरूप में सजे बाबा महाकाल
वैसे तो विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन बाबा महाकाल का विभिन्न स्वरूपों में श्रृंगार किया जाता है, लेकिन आज बुधवार को कामिका एकादशी पर भस्म आरती में बाबा महाकाल तिरुपति बालाजी के स्वरूप में सजे। इस दौरान उनके मस्तक पर मुकुट और वैष्णव तिलक लगाया। चारों और गोविंदा…गोविंदा…की गूंज गुंजायमान हो गई।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी पर आज बुधवार सुबह 3 बजे भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। जिसके बाद सबसे पहले भगवान का शुद्ध जल से स्नान, पंचामृत स्नान करवाने के साथ केसर युक्त जल अर्पित किया गया। आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि कामिका एकादशी पर बाबा महाकाल तिरुपति बालाजी के स्वरूप में सजे। उनके मस्तक पर मुकुट और वैष्णव तिलक लगाया। जिसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल और गोविंदा…गोविंदा की गूंज गुंजायमान हो गया।
देखें भस्म आरती की तस्वीरें
Ujjain News: बाबा महाकाल की भस्म आरती…त्रिपुंड और चंद्रघंटा धारण कर आभूषणों से सजाए गए बाबा महाकाल…
written by Denva Post Bureau | 31/07/2024
करें बाबा महाकाल के दर्शन। (सांकेतिक तस्वीर)
वैसे तो विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज भी उन्ही परंपराओं का निर्वहन किया गया जो प्रतिदिन की जाती हैं। लेकिन, आज का दिन इसलिए विशेष था क्योंकि बाबा महाकाल 3 बजे न सिर्फ भक्तों को दर्शन देने के लिए जागे, बल्कि आभूषण पहनाकर उनका श्रृंगार किया गया और भस्म भी रमाई गई। जिसका लाभ भस्म आरती में बैठे हजारों श्रद्धालुओं को मिला।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित आशीष गुरु ने बताया कि श्रावण कृष्ण पक्ष की दशमी पर आज मंगलवार को सबसे पहले बाबा महाकाल को शुद्ध जल से स्नान करवाया गया। जिसके बाद पंचामृत स्नान करवाने के साथ ही बाबा महाकाल को केसर युक्त जल अर्पित किया गया। त्रिपुंड और चन्द्र लगाकर आभूषण से बाबा महाकाल को सजाया गया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई, इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज गुंजायमान हो गया।
Damoh News: नौवीं शताब्दी का यह मंदिर कलचुरी काल की वास्तुकला के सर्वश्रेष्ठ मंदिरों में से एक है, जानें इसकी विशेषता
written by Denva Post Bureau | 31/07/2024
मंदिर में स्थापित शिवलिंग
दमोह-जबलपुर मार्ग पर नोहटा में ऐतिहासिक नोहलेश्वर शिव मंदिर है, जो पुरातत्व विभाग के अधीन है। सावन के महीने में इस मंदिर को देखने और भगवान शिव के दर्शन करने प्रदेश भर से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर की बनावट ऐसी है कf एक बार जो इसे देखने आता है, देखता ही रह जाता है।
915 से 945 ई. के बीच हुआ निर्माण
मंदिर का निर्माण कल्चुरी नरेश युवराज प्रथम ने अपनी प्रिय रानी नोहला के नाम पर कराया था। युवराज धर्मावलंबी थे उन्होंने अपने शासन काल 915 से 945 ई. के बीच इस मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर की खासियत यह है कि यह मुस्लिम आक्रांताओं के हमलों से सुरक्षित रहा।
100 फीट लंबे चौड़े चबूतरे पर बना है मंदिर
यह मंदिर दमोह-जबलपुर स्टेट हाईवे पर मुख्य सड़क के किनारे स्थित है। मंदिर का निर्माण 100 फीट लंबाई चौड़ाई वाले 6 फीट उंचे चबूतरे पर किया गया है । मंदिर का प्रवेश द्वार पांच शाखाओं में विभक्त है । मंदिर के चार मुख्य स्तंभ हैं। इस मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। मंदिर की शिल्पकला बहुत कुछ खजुराहो के मंदिरों जैसी है। बारीक नक्काशियों वाली मूर्ति शिल्पकला अनुपम है। दाइं ओर नर्मदा और बाईं ओर यमुना की मूर्तियां हैं। चबूतरे के निचले भाग पर सामने दोनों ओर चारों तरफ लक्ष्मी के आठ रूपों की मूर्तियां हैं। गजलक्ष्मी की मूर्ति अत्यंत मनोहारी है। मुख्य द्वार पर शीर्ष भाग में नवग्रह की मूर्तियां हैं।
कल्चुरी काल का श्रेष्ठ मंदिर
नोहलेश्वर मंदिर में सरस्वती, विष्णु, अग्नि, कंकाली देवी, उमा-महेश्वर, शिव-पार्वती, लक्ष्मी नारायण के भी दर्शन होते हैं। पशु, पक्षियों को उनके ब्याल के रूप में उत्कीर्ण किया गया है। यह कल्चुरी काल की स्थापत्य कला के सर्वश्रेष्ठ मंदिरों में से एक है, जिसे मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संरक्षित घोषित किया गया है।
नोहलेश्वर मंदिर आस्था व शिल्प कला का अद्भुत संगम
ग्राम नोहटा में बने नवमीं शताब्दी के कल्चुरी कालीन प्राचीन शिव मंदिर की सुदंरता देखते ही बनती है। यह मंदिर आस्था व शिल्प कला का अदभुत संगम हैं। मंदिर के अंदर अति प्राचीन शिवलिंग विराजमान है। यहां पर वैसे तो वर्ष भर लोगों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सावन माह में लोगों की भारी भीड़ लगती है और पूरे प्रदेश से श्रद्धालु इस पुरातत्व महत्व के मंदिर को देखने आते हैं।
Khandwa News: जानिए भगवान ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के प्राकट्य की महिमा
written by Denva Post Bureau | 31/07/2024
खंडवा जिले में स्थित है भगवान ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की धार्मिक तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में श्रावण मास के दूसरे सोमवार भी सुबह से ही बड़ी संख्या में भोले बाबा के भक्त बाबा ओंकार के दर्शन करने पहुंचे हैं। यहां सुबह 4 बजे से बाबा ओंकार के पट खोल दिए गए, और दर्शन शुरू कर दिए गए। इसके बाद हर कोई ओम आकर के पर्वत पर बसे बाबा ओंकार की एक झलक पाकर उनका आशीर्वाद लेने की कोशिश करता हुआ दिखाई दिया।
बड़ी संख्या में देश के दूर दराज के हिस्सों से यहां पहुंचे भक्त बाबा ओंकारेश्वर के जयकारे लगाते हुए नजर आए। सावन माह के दूसरे सोमवार को यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मां नर्मदा में स्नान करने के बाद भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में पहुंचकर दर्शन लाभ ले रहे हैं। इसके बाद शाम करीब चार बजे भगवान ओमकारेश्वर और भगवान ममलेश्वर की सवारियां भी निकलेंगी, जो कि रात करीब 10 बजे तक नगर भ्रमण करेंगी।
यह है भगवान ओंकारेश्वर के प्रकट होने की महिमा
भगवान ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित डंकेश्वर दीक्षित जी महाराज ने भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की महिमा का गुणगान करते हुए भक्तों को बताया कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से चौथा ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर का है। वहीं बाबा ओंकार के यहां प्रकट होने को लेकर उन्होंने बताया कि भगवान राम से 14 पीढ़ी पूर्व मांधाता नाम से राजा हुए हैं, जिनकी तपस्या से भगवान ओंकारेश्वर प्रकट हुए हैं। यहां एक ही शिवलिंग में ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनो प्रकट हुए हैं। यहां प्राचीन समय से जो अखंड दीप जल रहा है, उसमें भी एक ही दीपक में तीन बत्तियां जल रही हैं, ब्रह्मा विष्णु और महेश की।
यहां 7 किलोमीटर का है परिक्रमा मार्ग
ओंकार पर्वत के बारे में बताते हुए पंडित डंकेश्वर दीक्षित जी महाराज ने बताया कि ओम्कारेश्वर नगर की इस पहाड़ी के ऊपर 7 किलोमीटर का परिक्रमा मार्ग है। परिक्रमा का यह पूरा मार्ग भी ओम आकार की ही आकृति में है। यही नहीं, जिस पर्वत पर स्वयं भगवान ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर विराजमान हैं, वह पर्वत भी स्वयं शिवलिंग के आकार में है। इतना ही नहीं, इस पर्वत के चारों तरफ नर्मदा मैया बह रही हैं।
यहां की शयन आरती है प्रसिद्ध
पंडित दीक्षित जी ने सभी ज्योतिर्लिंगों में भगवान ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर का मंदिर क्यों अलग है, इसको लेकर बताया कि पूरे 12 ज्योतिर्लिंगों में शयन आरती होती है। लेकिन बाबा ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में प्रभु का रात्रि विश्राम रहता है। यहां पर बाबा ओंकार के शयन के लिए झूला, पालना, चौसर, पासे बिछाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि पुराणों में कहा गया है कि भोले बाबा का रात्रि विश्राम ओंकारेश्वर में ही है, और वे 3 बजे रात्रि में उठकर उज्जैन के महाकालेश्वर जाते हैं, और वहां स्नान करते हैं। इसलिए वहां की भस्म आरती प्रसिद्ध है, और यहां ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में शयन आरती प्रसिद्ध है।
मां नर्मदा मैया की भी बताई महिमा
पंडित डंकेश्वर जी महाराज ने बताया कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में केवल ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग ही है, जिसके तट को छूकर कोई नदी बह रही है। इसके दर्शन के पश्चात कोई महानदी का दर्शन होता है। वह महानदी नर्मदा मैया है। मान्यता है कि भगवान शंकर की देह से निकले पसीने की बूंद से मां नर्मदा मैया उत्पन्न हुई है। अन्य नदियां उत्तर से दक्षिण और दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर बहती हैं। लेकिन मां नर्मदा उदय से अस्त की ओर बहती है अर्थात पूरब से पश्चिम की ओर बहती है। सब नदियों में नर्मदा नदी ही ऐसी नदी है, जिसके जितने भी कंकर हैं सब शंकर हैं। इसीलिए नर्मदा पुराण में भी कहा गया है कि, नर्मदा जल के स्पर्श होने से जो शिवलिंग बनता है, उसको सीधे ले जाकर पूजा कीजिए। नर्मदा जल के स्पर्श होने से वह स्वयं अधिष्ठित हो जाते हैं। अभी 22 जनवरी को रामलला अयोध्या में भी नर्मदा जी का शिवलिंग स्थापित किया गया है।
खंडवा जिले में स्थित है भगवान ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर
Ujjain News: बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे पीएम मोदी के भाई पंकज, भस्म आरती में हुए शामिल
written by Denva Post Bureau | 31/07/2024
बाबा महाकाल के भक्त
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई पंकज मोदी रविवार सुबह भस्म आरती में बाबा महाकाल के दरबार में पहुंचे। जिन्होंने लगभग दो घंटे तक आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती के दर्शन किए। भस्म आरती के दौरान पंकज मोदी कभी तालियां बजाते हुए नजर आए तो कभी भजन गाते हुए।
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित आशीष गुरु ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई पंकज मोदी आज बाबा महाकाल के दर्शन करने उज्जैन आए थे। जहां उन्होंने भस्म आरती में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह बाबा महाकाल का दरबार है और वर्तमान में श्रावण मास चल रहा है, इसीलिए वे बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने यहां पहुंचे थे। महाकाल की भस्म आरती देखी और नंदी जी के कानों में अपनी मनोकामना कही। पूजन अर्चन के बाद मंदिर से रवाना हो गए।
जानिए कौन हैं पंकज मोदी
पंकज नरेंद्र मोदी के सबसे छोटे भाई हैं। वे अभी गांधीनगर रायसण की एक सोसाइटी में रहते हैं। वे सूचना विभाग में काम करते थे। जहां से वे डिप्टी डायरेक्टर पद से रिटायर्ड हुए हैं। पंकज मोदी को 2014 में डिप्टी डायरेक्टर पद पर प्रमोशन मिला था। रिटायर्ड होने के बाद मां और परिवार के साथ पंकज मोदी सरकारी आवास छोड़कर अपने नए बंगले में आ गए।
ऐसा शिवलिंग जिसकी पूजा करता था रावण…दिल्ली के पास है यह मंदिर, सावन में दर्शन करने से होती है हर मनोकामना पूरी
written by Denva Post Bureau | 31/07/2024
Image Source : SOCIAL
Bisrakh Shiv Temple
सावन का पावन महीना चल रहा है। यह महीना भगवान शिव को समर्पित है। ऐसे में आज हम आपको ग्रेटर नोएडा में स्थित महादेव के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे जो बेहद लोकप्रिय है। ग्रेटर नोएडा स्थित बिसरख गांव में भगवान शिव का एक ऐसा अनोखा मंदिर है जिसका उल्लेख शिवपुराण में भी मिलता है। चलिए जानते हैं इस मंदिर में क्या है ऐसा ख़ास और यहां आप कैसे पहुंच सकते हैं?
रावण से जुड़ा है शिव मंदिर का इतिहास:
आपको बता दें इस मंदिर का इतिहास लंकापति रावण से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी मान्यता है कि बिसरख गांव में इस शिवलिंग को रावण के पिता ऋषि विश्रवा ने ही स्थापित किया था। यही नहीं, ऋषि विश्रवा ने रावण के जन्म के लिए इसी मंदिर में शिवलिंग की स्थापना कर पूजा अर्चना की थी। जिसके बाद ही रावण का जन्म हुआ था। इसके बाद कई सालों तक रावण ने भी यहां तपस्या की थी।
अष्टभुजाधारी शिवलिंग है बेहद मशहूर
यह शिवलिंग आज भी गांव के मंदिर में मौजूद है। ऐसा अष्टभुजाधारी शिवलिंग भारत में कहीं भी आपको देखने नहीं मिलेगा। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की गहराई बहुत ज़्यादा है जो आजतक कोई का कोई अनुमान नहीं लगा पाया है। शिव के मंदिर के पास में ही रावण का भी मंदिर है। यहां रावण का जन्म हुआ है इसलिए आज भी यहां के लोग दशहरा पर रावण का दहन नहीं बल्कि उसकी पूजा करते हैं।
क्या है इस मंदिर की विशेषता?
इस मंदिर में मौजूद पूजारी और गाँव के लोगों का मानना है कि अगर आप सावन में इस शिवलिंग के दर्शन करने आते हैं तो भगवान शिव आपकी हर मनोकामना पूरी करेंगे। ऐसे में भगवान शिव के प्रति आस्था उनके भक्तों को इस जगह तक खिंच ही लाती है।
कैसे पहुंचे शिव मंदिर?
बिसरख गांव पहुंचने के लिए ग्रेटर नोएडा से यहां आसानी पहुंचा जा सकता है। आपको बता दें, किसान चौक से बिसरख गांव की दूरी महज़ पांच किलो मीटर है। यहां कार या ऑटो से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
Ujjain News: आज बाबा महाकाल की भस्म आरती में हुआ ये खास काम, खुल गई तीसरी आंख
written by Denva Post Bureau | 31/07/2024
बाबा महाकाल की भस्म आरती मे आज हुआ यह विशेष श्रंगार
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज सबसे पहले वीरभद्र की आज्ञा लेकर चांदी गेट खोले गए और फिर अलसुबह 3 बजे भस्मारती की शुरुआत हुई। जिसके बाद बाबा महाकाल का विशेष पूजन अर्चन कर भस्म आरती की गई।
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शनिवार के महासंयोग पर सुबह 3 बजे भस्म आरती के दौरान वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर मंदिर के पट खुले गए। पण्डे पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया।
आज के श्रृंगार की विशेष बात यह रही की श्रृंगार में बाबा महाकाल की तीसरी आंख खुल गई, मावे से श्रृंगार से सजाकर उन्हें मखाने की माला भी पहनाई गई। पुजारियों ओर पुरोहितों द्वारा विशेष श्रृंगार कर कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को नवीन मुकुट व मुंड माला धारण करवाई गई। जिसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शनों का लाभ लिया। जिससे पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज से गुंजायमान हो गया।
Baba Mahakal : भस्म आरती में बाबा महाकाल का चांद और बिल्वपत्र से श्रृंगा
written by Denva Post Bureau | 31/07/2024
करें बाबा महाकाल के दर्शन।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज सबसे पहले वीरभद्र की आज्ञा लेकर चांदी गेट खोले गए और तड़के 3 बजे भस्मारती की शुरुआत हुई। जिसके बाद बाबा महाकाल का विशेष पूजन अर्चन कर भस्म आरती की गई।
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण कृष्ण पक्ष की षष्ठी और शुक्रवार के महासंयोग पर सुबह 3 बजे भस्म आरती के दौरान वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर मंदिर के पट खुले गए। पण्डे पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन किया। भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया।
श्रृंगार की विशेष बात यह रही की आज पूजन सामग्री से बाबा महाकाल का ऐसा श्रृंगार किया गया कि बाबा जटाधारी स्वरूप में नजर आए। पुजारियों और पुरोहितों द्वारा विशेष श्रृंगार कर बाबा महाकाल की कपूर आरती की गई और फिर उन्हें नवीन मुकुट व मुंड माला धारण करवाई गई। जिसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शनों का लाभ लिया। जिससे पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज से गुंजायमान हो गया।
Indore News : नर्मदा नदी परिक्रमा ममलेश्वर ओंकारेश्वर
written by Denva Post Bureau | 31/07/2024
नर्मदा नदी को चुनरी चढ़ाने निकली महिलाएं।
सावन माह में 10 यात्राओं के माध्यम से 40 हजार से अधिक श्रद्धालु ओंकारेश्वर ममलेश्वर तीर्थ दर्शन करेंगे। संस्था सृजन के द्वारा 25 जुलाई से 3 अगस्त तक यह आस्था का प्रवाह होगा। गुरुवार को इंदौर indore के बड़ा गणपति से सुबह चुनरी यात्रा निकालकर इसकी शुरुआत की गई। इसमें महिलाएं 1101 फीट की चुनरी मां नर्मदा को चढ़ाने के लिए इंदौर से ओंकारेश्वर के लिए रवाना हुईं। एक पेड़ मां के नाम 51 लाख पौधारोपण अभियान के तहत प्रतिदिन पौधे भी रोपे जाएंगे, महर्षि महामंडलेश्वर स्वामी उत्तम स्वामी महाराज के सानिध्य में यह यात्रा निकली।
40 हजार लोग शामिल होंगे
संस्था अध्यक्ष कमलेश खंडेलवाल, महेश दलोत्रा, संयोजक गोविन्द गोयल ओर महिला संयोजिका तनुजा खंडेलवाल ने बताया कि शिव आराधना के महीने सावन में शहर के अलग अलग क्षेत्र से ओंकारेश्वर ममलेश्वर तीर्थ दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जत्था जाएगा। इस श्रावण मास में निकलने वाली यात्रा में 40 हजार से अधिक लोग शामिल होंगे। इस एक दिनी यात्रा में महिलाओं को 45 बसों ओर छोटे चार पहिया वाहनों से ओंकारेश्वर ले जाया जाएगा। संस्था सृजन के तत्वाधान में 25 जुलाई से 3 अगस्त तक चलेगा। सन 2006 से शुरू हुई यात्रा का यह 19 वां वर्ष है। मध्य प्रदेश में सबसे पहले प्रारंभ हुई संस्था सृजन की यात्रा है, संस्था से 50 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
1 करोड़ 51 लाख मंत्रों का जाप
यात्रा के अवसर पर प्रतिदिन शामिल होने वाली मातृशक्ति ॐ नम शिवाय का जाप करेगी सभी मातृशक्ति 1 करोड़ 51 लाख मंत्रों का जाप करेगी और ओंकारेश्वर omkareshwar में पार्थिव शिवलिंग का पूजन करेगी। यात्रा महर्षि महामंडलेश्वर स्वामी उत्तम स्वामी महाराज के सानिध्य में निकलेगी।
कई दिन तक चलेंगे आयोजन
खंडेलवाल ने बताया कि यात्रा की शुरुआत 25 जुलाई गुरुवार को बड़ा गणपति से हुई पहले दिन चुनरी यात्रा निकली जिसमें हजारों महिलाएं सुबह 8:30 बजे 1101 फीट की चुनरी लेकर मां नर्मदा Narmada को चढ़ाने निकली, बड़ा गणपति से शुरू हुई यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए संगम कॉर्नर पहुंची वहां से बसों से ओंकारेश्वर रवाना होकर मां को चुनरी चढ़ाएंगे, चुनरी चढ़ाने के बाद मां नर्मदा का जल लेकर महिलाएं कावड़ लेकर निकलेगी फिर वेद मंत्रों के बीच महादेव का अभिषेक होगा। फिर 26 जुलाई को वृंदावन कालोनी, 27 जुलाई को नगीन नगर, 28 जुलाई को कुशवाह नगर से और 29 जुलाई को सुखदेव नगर से निकलेगी। वहीं 30 जुलाई को मरीमाता चौराहा से, 31 जुलाई को संगम नगर से निकलेगी। इसके बाद एक अगस्त को मल्हारगंज से और 2 अगस्त को प्रबुद्ध समाज जन यात्रा पर जाएंगे और 3 अगस्त को कार्यकर्ताओं की यात्रा रहेगी। यात्रा प्रतिदिन सुबह 8 बजे निकलेगी और रात को 9 बजे वापस आएगी। रोज महिलाए नर्मदा मैया का विधि विधान से पूजन करके प्रति दिन 1101 फीट की चुनरी अर्पित करेगी। यात्रा में शामिल होने वाली महिलाओं को छतरियों का वितरण किया जाएगा, यह 125 रुपए की छतरियां नाम मात्र शुल्क 25 रुपए में वितरित होगी।
Ujjain News: अब 350 जवानों का पुलिस बैंड बाबा महाकाल की सवारी की शोभा बढ़ाएगा
written by Denva Post Bureau | 31/07/2024
नगर भ्रमण पर निकलेंगे बाबा महाकाल।
उत्साह, उमंग और आकर्षण के क्रम में 29 जुलाई को बाबा महाकाल की सवारी में जनजातीय दलों के प्रस्तुतियां के साथ 350 जवानों के पुलिस बैंड द्वारा भी प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद आगामी सवारी में नासिक, काशी से आए कलाकारों के डमरू की प्रस्तुतियां होगी। सवारियों में दत्त अखाड़ा में भारतीय संगीत के परंपरागत वाद्य यंत्रों में केंद्रित प्रस्तुतियां भी होगी। संबंधित विभागों द्वारा समुचित तैयारियां सुनिश्चित की जाए। यह बात कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने प्रशासनिक संकुल भवन में श्रावण -भादौ मास की व्यवस्थाओं, बाढ़ आपदा नियंत्रण समेत अन्य शासकीय योजनाओं की समीक्षा करते हुए बैठक में कही। उन्होंने कहा है कि बाबा महाकाल की सवारी की व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाएं।
कलेक्टर सिंह ने निर्देश दिए की हरसिद्धि पाल सहित बाबा महाकाल की सवारी के प्रमुख पॉइंट्स पर और बेहतर व्यवस्थाएं की जाएं। सवारी में सम्मिलित होने वाली मंडलियों को ताकीद किया जाए कि ढोल, मंजीरे, डमरू इत्यादि परंपरागत वाद्य यंत्रों के अतिरिक्त डीजे आदि का उपयोग न करें। नगर निगम द्वारा निर्धारित स्थलों पर लगाई गई एलईडी के माध्यम से सुचारू रूप से सवारी का लाइव प्रसारण किया जाए।
होटल्स का औचक निरीक्षण किया जाएं
श्रावण में बढ़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के दृष्टिगत श्री महाकालेश्वर मंदिर सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए माकूल प्रबंध किए जाएं। कावड़ यात्रियों के विश्राम आदि की भी बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। एसडीएम ,तहसीलदार द्वारा होटल्स का औचक निरीक्षण करें। वाजिब दरों से अधिक लेने वाले होटल्स को सील किया जाए या फिर होटल के समीप बूथ स्थापित कर निर्धारित दरों पर बुकिंग की जाए और होटल का व्यवस्थित संचालन कराएं।