Ujjain News: भस्म आरती…मस्तक पर मुकुट और त्रिकुंड से सजे बाबा महाकाल, फिर रमाई भस्म
written by Denva Post Bureau | 21/08/2024
भस्म आरती
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज सुबह भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि बुधवार पर बाबा महाकाल की भस्म आरती धूमधाम से की गई। इस दौरान बाबा महाकाल का राजसी स्वरूप में आभूषण पहनाकर श्रृंगार किया गया।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित आशीष शर्मा ने बताया कि भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर आज सुबह 3 बजे भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। जिसके बाद सबसे पहले भगवान का स्नान, पंचामृत अभिषेक करवाने के साथ ही केसर युक्त जल अर्पित किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का राजसी स्वरूप में श्रृंगार कर उन्हें मुकुट और त्रिकुंड से श्रृंगारित किया गया फिर भस्म आरती की गई। आज सुबह श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती के दर्शन किए और बाबा महाकाल के निराकार के सरकार होने के स्वरूप का दर्शन कर जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।
भस्म आरती….. मस्तक पर मुकुट और त्रिकुंड से सजे बाबा महाकाल, फिर रमाई भस्म
भस्म आरती….. मस्तक पर मुकुट और त्रिकुंड से सजे बाबा महाकाल, फिर रमाई भस्म
Ujjain Mahakal: भस्म आरती श्रृंगार…मावे से सजे महाकाल, सिर पर सजे नागराज; चारों ओर गूंजा ‘जय श्री महाकाल
written by Denva Post Bureau | 21/08/2024
बाबा महाकाल
गर्भगृह में सबसे पहले भगवान का जलाभिषेक व पूजन दर्शन कर श्रृंगार किया गया और उसके बाद भस्म आरती की गई। मंदिर में जैसे ही भगवान के दर्शन शुरू हुए, वैसे ही चारों ओर जय श्री महाकाल की गूंज गुंजायमान हो गई। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि श्रावण शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर आज सुबह 3 बजे भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। जिसके बाद सबसे पहले भगवान का शुद्ध जल से स्नान, पंचामृत स्नान करवाने के साथ ही केसर युक्त जल अर्पित किया गया।
आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि आज बाबा महाकाल का मावे और ड्रायफ्रूट से श्रृंगार किया गया और उनके सिर पर नागराज को विराजमान किया गया। जिसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई इसके बाद पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज से गुंजायमान हो गया।
बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचा कोरियाई प्रतिनिधि मंडल
इंडो कोरियन ज्वाइंट वेंचर कंपनी मेरकाबा एफीबार सीडीएस के प्रतिनिधि मंडल कोरियाई नागरिक जियोंग जोंग चेओल, क्वांगवोन रीव, जूनह्वी जो, सुश्री गेल कांग जुनसुंग ली, वूसोक चुंग एवं कंपनी में कार्यरत भारतीय नागरिक राजेश भारद्वाज, रवि ठाकुर ने अपने उज्जैन प्रवास के दौरान श्री महाकालेश्वर भगवान के दर्शन किये। इस दौरान प्रोटोकॉल व्यवस्था प्रभारी चंद्रप्रकाश शर्मा द्वारा उनका सम्मान किया गया।
बाबा के भक्त द्वारा रजत मुकुट दान दिया
श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्री महाकालेश्वर भगवान के महाराष्ट्र के नागपुर से पधारे भक्त सिद्धांत महाजन द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर को मंदिर के पुजारी अर्पित शर्मा की प्रेरणा से 1 नग चांदी का मुकुट भेंट किये गये। जिनका कुल वजन 2490.00 ग्राम है। जिसे श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक श्री प्रतीक द्विवेदी द्वारा प्राप्त पर दानदाता का सम्मान किया जाकर विधिवत रसीद प्रदान की गई। यह जानकारी मंदिर प्रबंध समिति के कोठार शाखा के कोठारी मनीष पांचाल द्वारा दी गई।
Ujjain: श्रावण का चौथा सोमवार…भस्म आरती में गूंज उठा जय श्री महाकाल; जलाभिषेक व पूजन दर्शन कर किया श्रृंगार
written by Denva Post Bureau | 21/08/2024
बाबा महाकाल
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज श्रावण शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर बाबा महाकाल अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए रात 2.30 बजे जागे। भस्म आरती के पहले वीरभद्र और मानभद्र से आज्ञा लेकर सबसे पहले चांदी द्वार को खोला गया उसके बाद घंटी बजाकर भगवान तक यह सूचना पहुंचाई गई की पुजारी व अन्य लोग आपको जगाने के लिए मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं। गर्भगृह में सबसे पहले भगवान का जलाभिषेक व पूजन दर्शन कर श्रृंगार किया गया और उसके बाद भस्म आरती की गई। मंदिर में जैसे ही भगवान के दर्शन शुरू हुए वैसे ही चारों और जय श्री महाकाल की गूंज गुंजायमान हो गई।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित आशीष पुजारी ने बताया कि श्रावण मास के चौथे सोमवार शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर आज सुबह 3 बजे भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। जिसके बाद सबसे पहले भगवान का शुद्ध जल से स्नान, पंचामृत स्नान करवाने के साथ ही केसर युक्त जल अर्पित किया गया। आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि आज बाबा महाकाल का भांग मावे और ड्रायफ्रूट से श्रृंगार किया गया और उन्हें फूलों की माला से सजाया गया। श्रृंगार के दौरान उनके मस्तक पर त्रिपुंड, सूर्य, चन्द्र भी सजाया गया। जिसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई इसके बाद पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज से गुंजायमान हो गया।
सीधी का घसिया बाजा नृत्य दल श्री महाकालेश्वर भगवान की चतुर्थ सवारी मे शामिल होगा
श्री महाकालेश्वर भगवान की चौथे सोमवार की सवारी में भी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की मंशानुरूप जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद के माध्यम से भगवान श्री महाकालेश्वर जी की सवारी में जनजातीय कलाकारों का दल भी सहभागिता करेगा। 12 अगस्त को घासी जनजातीय घसिया बाजा नृत्य सीधी के उपेन्द्र सिंह के नेतृत्व में इनका दल श्री महाकालेश्वर भगवान की चौथी सवारी में पालकी के आगे भजन मंडलियों के साथ अपनी प्रस्तुति देते हुए चलेगा। विंध्य मेकल क्षेत्र का प्रसिद्ध घसिया बाजा सीधी के बकबा, सिकरा, नचनी महुआ, गजरा बहरा, सिंगरावल आदि ग्रामों में निवासरत घसिया एवं गोंड जनजाति के कलाकरों द्वारा किया जाता है।
इस नृत्य की उत्पत्ति के संबंध में किंवदंती है कि यह नृत्य शिव की बारात में विभिन्न वनवासियों द्वारा किए जा रहे करतब का एक रुप है। जिस तरह शिव की बारात में दानव, मानव, भूत-प्रेत, भिन्न भिन्न तरह के जानवर आदि शामिल हुए थे। कुछ उसी तरह इस नृत्य में भी कलाकारों द्वारा अनुकरण किया जाता है। इस नृत्य के कलाकार इसे 12 अलग अलग तालों में पूरा करते है। यह गुदुम बाजा, डफली, शहनाई, टिमकी, मांदर, घुनघुना वाद्य यंत्रो का उपयोग करते है। साथ ही इनकी वेशभूषा बंडी, पजामा, कोटी आदि होती है।
भस्म आरती श्रंगार और नृत्य…..
भस्म आरती श्रंगार और नृत्य…..
भस्म आरती श्रंगार और नृत्य…..
Ujjain News : भस्म आरती में बाबा महाकाल का सूर्य-चंद्र से श्रृंगार…भक्तों को मिला दिव्य दर्शन का लाभ
written by Denva Post Bureau | 21/08/2024
भस्म आरती मे सूर्य, चन्द्र लगाकर सजे बाबा महाकाल….
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर बाबा महाकाल अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए रात 3 बजे जागे। वीरभद्र और मानभद्र से आज्ञा लेकर सबसे पहले चांदी द्वार खोला गया और फिर घंटी बजाकर भगवान तक यह सूचना पहुंचाई गई कि पुजारी व अन्य लोग आपकों जगाने के लिए मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं। गर्भग्रह में सबसे पहले भगवान का जलाभिषेक और पूजन दर्शन कर उनका श्रृंगार किया गया, फिर भस्म आरती की गई। मंदिर में जैसे ही भगवान के दर्शन शुरू हुए वैसे ही चारों ओर जय श्री महाकाल की गूंज गुंजायमान हो गई।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश गुरु ने बताया कि श्रावण मास के शनिवार और शुक्ल पक्ष की षष्ठी पर आज सुबह 3 बजे भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। सबसे पहले भगवान का शुद्ध जल से स्नान, पंचामृत स्नान करवाने के बाद केसर युक्त जल अर्पित किया गया। आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि आज बाबा महाकाल का भांग से श्रृंगार किया गया और उन्हें फूलों की माला से सजाया गया। श्रृंगार के दौरान उनके मस्तक पर त्रिपुंड, सूर्य और चन्द्र भी सजाया गया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई।
1 किलोग्राम का छत्र और 250 ग्राम का मुकुट दान किया
बाबा महाकाल को गाजियाबाद से पधारे एक भक्त ने 1 किलोग्राम का छत्र और 250 ग्राम का मुकुट मंदिर के पुरोहित शिवम शर्मा, शुभम शर्मा की प्रेरणा से भेंट किया। दर्शन व्यवस्था प्रभारी राकेश श्रीवास्तव ने उनका दुपट्टा और प्रसाद से सम्मान किया।
Ujjain Baba Mahakal : नागपंचमी पर भस्म आरती में सर्पों से सजे बाबा महाकाल, हजारों भक्तों ने किए अलौकिक दर्शन
written by Denva Post Bureau | 21/08/2024
Uujjain Mahakaleshwar Mandir: आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि नागपंचमी के अवसर पर बाबा महाकाल का सर्पों से श्रृंगार किया गया। उन्हे फूलों की माला से सजाया गया। श्रृंगार के दौरान उनके मस्तक पर भी सर्प पहनाया गया।
नागपंचमी पर करें बाबा महाकाल के दर्शन।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर बाबा महाकाल अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए रात 3 बजे जागे। वीरभद्र और मानभद्र से आज्ञा लेकर सबसे पहले चांदी द्वार को खोला गया और उसके बाद घंटी बजाकर भगवान तक सूचना पहुंचाई गई कि पुजारी और अन्य लोग आपको जगाने के लिए मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं। गर्भग्रह में सबसे पहले भगवान का जलाभिषेक और पूजन दर्शन कर उनका श्रृंगार किया गया, फिर भस्म आरती की गई। मंदिर में जैसे ही भगवान के दर्शन शुरू हुए वैसे ही चारों ओर जय श्री महाकाल की गूंज गुंजायमान हो गई।
महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित आशीष गुरु ने बताया कि श्रावण मास के शुक्रवार और शुक्ल पक्ष की पंचमी पर आज सुबह 3 बजे भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। जिसके बाद भगवान को शुद्ध जल से स्नान और पंचामृत स्नान करवाने के बाद केसर युक्त जल अर्पित किया गया। आज शुक्रवार के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि नागपंचमी के अवसर पर बाबा महाकाल का सर्पों से श्रृंगार किया गया। उन्हे फूलों की माला से सजाया गया। श्रृंगार के दौरान उनके मस्तक पर भी सर्प पहनाया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज गुंजायमान हो गया।
देखें तस्वीरें…
Kedarnath Yatra : 7 अगस्त से हेलीकॉप्टर से शुरू होगी केदारनाथ यात्रा, टिकट किराया होगा 25 फीसदी कम
written by Denva Post Bureau | 21/08/2024
रुद्रप्रयाग में सीएम धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केदारघाटी पहुंचकर अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद, उन्होंने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर हालात पर चर्चा करते हुए जरूरी दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुधवार से 25 प्रतिशत कम किराये पर हेलिकॉप्टर से केदारनाथ यात्रा शुरू की जाएगी। साथ ही पैदल यात्रा को जल्द शुरू करने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हेलिकॉप्टर टिकट में जो छूट दी जाएगी, उसका वहन राज्य सरकार करेगी।
मंगलवार को सोनप्रयाग पहुंचकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यात्रा मार्ग से जुड़े सभी विभागों की समीक्षा करते हुए बरसात से हुई क्षति की जानकारी ली। उन्होंने विभागों द्वारा यात्रा को पुन: शुरू करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। सीएम ने बताया कि गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग 29 स्थानों पर पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। साथ ही रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग को भी व्यापक क्षति पहुंची है। अतिवृष्टि से बिजली, पानी की लाइनों के साथ ही सरकारी संपत्तियों को क्षति पहुंची है। जिनकी मरम्मत प्राथमिकता से की जाए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अतिवृष्टि के बाद से जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन के साथ एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ सहित अन्य संस्थाओं ने पूरे मनोयोग से फंसे हुए यात्रियों और अन्य को सुरक्षित स्थानों में पहुंचाने में भूमिका निभाई है। उन्होंने जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि यात्रा शुरू करने के लिए किए जाने वाले कार्यों में स्थानीय लोगों के सुझाव और सहायता ली जाए। इस मौके पर प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, डीजीपी अभिनव कुमार, लोनिवि सचिव पंकज पांडे, आपदा सचिव विनोद सुमन, कमिश्नर विनय शंकर पांडे, आईजी केएस नगन्याल आदि मौजूद थे।
Ujjain News : रात 3 बजे उठे बाबा महाकाल… पहले स्नान, फिर श्रृंगार और अंत में रमाई भस्म बाबा महाकाल
written by Denva Post Bureau | 21/08/2024
आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि बाबा महाकाल का पूजन सामग्री से श्रृंगार किया गया और उन्हें फूलो की माला से सजाया गया। श्रृंगार के दौरान उनके मस्तक पर चन्द्रमा और नवीन मुकुट भी पहनाया गया। जिसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई,
करें बाबा महाकाल के दर्शन।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज श्रावण शुक्ल पक्ष की द्वितिया तिथि पर बाबा महाकाल अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए रात 3 बजे जागे। वीरभद्र और मानभद्र से आज्ञा लेकर सबसे पहले चांदी द्वार को खोला गया और घंटी बजाकर भगवान तक यह सूचना पहुंचाई गई की पुजारी और अन्य लोग आपको जगाने के लिए मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं। गर्भग्रह में सबसे पहले भगवान का जलाभिषेक और पूजन दर्शन कर उनका श्रृंगार किया गया और फिर भस्म आरती की गई। मंदिर में जैसे ही भगवान के दर्शन शुरू हुए वैसे ही चारों ओर जय श्री महाकाल की गूंज गुंजायमान हो गई।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित आशीष गुरु ने बताया कि श्रावण मास के मंगलवार को आज सुबह 3 बजे भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। जिसके बाद भगवान को शुद्ध जल स्नान और पंचामृत स्नान करवाने के बाद केसर युक्त जल अर्पित किया गया। श्रृंगार की विशेषता यह रही कि बाबा महाकाल का पूजन सामग्री से श्रृंगार किया गया और उन्हें फूलो की माला से सजाया गया। श्रृंगार के दौरान उनके मस्तक पर चन्द्रमा और नवीन मुकुट भी पहनाया गया। जिसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई, इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज गुंजायमान हो गया।
रात 3 बजे जागे बाबा महाकाल… पहले स्नान फिर श्रृंगार और अंत मे रमाई भस्म
रात 3 बजे जागे बाबा महाकाल… पहले स्नान फिर श्रृंगार और अंत मे रमाई भस्म
Mahakal Sawari: बाबा महाकाल की तीसरी सवारी आज, तीन रूपों में दर्शन देने निकलेंगे भगवान
written by Denva Post Bureau | 21/08/2024
महाकाल आज तीन स्वरूपों में दर्शन देने निकलेंगे
श्री महाकालेश्वर की श्रावण/भाद्रपद माह में निकलने वाली सवारी के क्रम में तृतीय सोमवार पर आज 5 अगस्त को भगवान श्री महाकालेश्वर की तीसरी सवारी निकलेगी। इसमें बाबा महाकाल श्री चंद्रमौलेश्वर के रूप में पालकी में, हाथी पर श्री मनमहेश के रूप में व गरूड़ रथ पर श्री शिव-तांडव रूप में विराजित होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे।
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक एवं अपर कलेक्टर मृणाल मीना ने बताया कि श्री महाकालेश्वर भगवान की सवारी निकलने के पूर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन होगा। उसके पश्चात भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान को सलामी दी जाएगी। उसके बाद सवारी परंपरागत मार्ग महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी से होती हुई रामघाट पहुंचेगी। जहां क्षिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक खाती का मंदिर, सत्यीनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होती हुई पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
विभिन्न जनजातियों के दल सवारियों मे सम्मिलित होंगे
श्री महाकालेश्वर भगवान की तीसरे सोमवार की सवारी में भी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद के माध्यम से भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी में जनजातीय कलाकारों का दल भी सहभागिता करेगा। आज 5 अगस्त को मध्यप्रदेश के निमाड़ अंचल के पारंपरिक लोकनृत्य काठी नृत्य दल श्री महाकालेश्वर भगवान की तीसरी सवारी में पालकी के आगे भजन मंडलियों के साथ अपनी प्रस्तुति देते हुए चलेगा। यह नृत्य मध्यप्रदेश के निमाड़ अंचल पारंपरिक प्रसद्धि लोकनृत्य है। इस नृत्य की शुरुआत देव-प्रबोधनी एकादशी (देवउठनी ग्यारस) से होती है और तीन महीने तेरह दिन तक लगातार गांव- गांव जाकर इस नृत्य को किया जाता है और महाशिवरात्रि के दिन पचमढ़ी जाकर भगवान महादेव पर जल चढ़ाकर विर्सजन किया जाता है। इस नृत्य की प्रस्तुति भारत के लगभग सभी राज्यों में हो चुकी है।
Damoh News: दमोह में तीन नदियों के संगम पर है मडकोलेश्वर शिव मंदिर, देवताओं ने एक ही रात में बनाया था
written by Denva Post Bureau | 21/08/2024
मंदिर में स्थापित शिवलिंग
दमोह जिले के बटियागड़ ब्लॉक के सीतानगर गांव के पास भगवान शिव का प्रसिद्ध मड़कोलेश्वर धाम मंदिर है। मान्यता प्रचलित है कि तीन नदियों के संगम स्थल पर स्थित इस मंदिर का निर्माण देवताओं ने एक रात में किया था, जिसमें कहीं जोड़ नहीं हैं।
दमोह से करीब 20 किलोमीटर दूर छतरपुर मार्ग पर यह मंदिर है। यहां भगवान शिव की विशाल पिंडी स्थापित है और तीन नदियों का संगम है। जहां पूरे प्रदेश से श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि मंदिर का निर्माण स्वयं देवताओं द्वारा एक रात में किया गया था। इसके अलावा इस स्थान पर तीन नदियों का संगम होने के कारण इस स्थान को त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है। यहां पर सुनार, कोपरा नदी आकर मिलती है कुछ दूरी पर इन दोनों नदियो में जुड़ी नदी भी मिल जाती है जिस कारण से इसे त्रिवेणी संगम कहते है।
अपना आकार बदलता है शिवलिंग
यहां पर दूर-दूर से भक्त दर्शन करने आते हैं तथा भगवान भोलेनाथ के सामने अपनी मनोकामना रखते हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो यह मंदिर बड़ा रहस्यमयी माना जाता है, क्योंकि इस मंदिर को बनाने के लिए सिर्फ पत्थर का उपयोग किया गया है जिसमें कहीं भी जोड़ नहीं है। वहीं मंदिर में विराजमान भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग दिन प्रतिदिन अपना आकार बदलता है ओर बढ़ता ही जा रहा है।
हजारों वर्ष पुराना है इतिहास
इस स्थान के बारे में लोग बताते हैं कि करीब 1000 वर्ष पूर्व यहां पर एक गांव हुआ करता था जिसका नाम था मड़कोला। जहां पर जहरीले, कीड़े तथा भयंकर जानवर रहा करते थे। यहां के लोग किसी तरह मौत से लड़ते रहे और जिंदगी गुजारते रहते थे। किंवदंती है कि यहां पर एक चबूतरा बना हुआ था जिस पर भगवान भोलेनाथ दिखाई दिए, जिसके बाद एक रात्रि में स्वयं देवताओं द्वारा मंदिर बनाया जा रहा था। तभी इसी गांव की एक महिला के द्वारा आटा पीसने वाली हाथ चक्की चला दी। जिसकी आवाज सुनकर देवता अंतर्ध्यान हो गए और यहां से चले गए। हालांकि तब तक मंदिर तो पूरा बन चुका था, लेकिन सिर्फ कलश नहीं रखा पाया था। इस घटना के बाद इस गांव में किसी अज्ञात बीमारी का प्रकोप कहर बनकर टूटा और पूरा गांव वीरान हो गया तथा कुछ लोग बचे थे जो इस गांव को छोड़ कर चले गए। कुछ समय बाद यहां पर एक संत आए जिनका नाम था शिवोहम महाराज। उन्होंने यहां पर कठिन तपस्या करके भगवान भोलेनाथ को मनाया। यहां पर मकर संक्रांति और शिवरात्रि पर मेला भी लगता है। हजारों की संख्या में दूर-दूर से भक्त आते रहते हैं। इसके अलावा सावन के महीने में हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शनों के लिए आते हैं।
Mahakal Darshan: श्रावण के तीसरे सोमवार पर बाबा महाकाल का मावा और भांग से शृंगार किया गया
written by Denva Post Bureau | 21/08/2024
महाकाल का भस्म आरती शृंगार
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज श्रावण के तीसरे सोमवार को सुबह 2.30 बजे मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद बाबा महाकाल का पूजन अर्चन कर भस्म आरती की गई। बाबा महाकाल की इस भस्म आरती के दर्शन बैठक व चलित व्यवस्था के तहत हजारो श्रद्धालुओं ने किए।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि पर मावे और भांग से भगवान का आकर्षक शृंगार किया गया। इस दौरान भगवान के मस्तक पर त्रिपुंड से उन्हें सजाया गया और फिर भस्म आरती की गई। महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित आशीष गुरु ने बताया कि सोमवार सुबह बाबा महाकाल का शुद्ध जल से स्नान करने के बाद उनका पंचामृत स्नान किया गया। फिर भगवान का पूजन अर्चन अभिषेक हुआ और भगवान को भस्म रमाई गई। श्रावण मास के तीसरे सोमवार पर बाबा महाकाल के दर्शनों के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे जिन्होंने श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति की नई व्यवस्था के तहत बाबा महाकाल के दर्शनों का लाभ लिया।