
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। महागठबंधन ने आखिरकार तेजस्वी यादव को अपना मुख्यमंत्री पद का चेहरा (CM Face) घोषित कर दिया है। जैसे ही यह ऐलान हुआ, NDA खेमे में भी हलचल मच गई।
महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सवाल उठाया — “हमारा सीएम फेस तेजस्वी हैं, NDA का सीएम चेहरा कौन है?”
गहलोत के इस सवाल ने सियासी बहस को और गर्मा दिया।
महागठबंधन का दांव: युवाओं और बदलाव की राजनीति पर फोकस
महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वाम दल) ने बिहार चुनाव 2025(Bihar Elections 2025) के लिए तेजस्वी यादव पर दांव लगाया है। तेजस्वी न सिर्फ लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी माने जाते हैं, बल्कि उन्हें युवा चेहरे के रूप में भी देखा जा रहा है।
उनकी उम्र, ऊर्जा और जनसंपर्क शैली ने पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला महागठबंधन की एक रणनीतिक चाल है — जिसका मकसद युवा मतदाताओं, बेरोजगारी और शिक्षा के मुद्दे पर समर्थन जुटाना है।
तेजस्वी यादव ने हाल ही में कहा था — “बिहार में बदलाव का वक्त आ गया है। हमारी लड़ाई विकास बनाम विनाश की है। अब जनता रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य चाहती है, न कि झूठे वादे।”
NDA का जवाब: “नीतीश ही हैं और रहेंगे मुख्यमंत्री”
महागठबंधन के इस ऐलान के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने भी अपनी रणनीति साफ कर दी।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, राजीव प्रताप रूडी और उपेंद्र कुशवाहा ने एक सुर में कहा कि नीतीश कुमार ही NDA के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।
नित्यानंद राय ने स्पष्ट शब्दों में कहा — “चुनाव के बाद अगर NDA की सरकार बनी, तो सीएम नीतीश कुमार ही होंगे। बिहार में विकास की गाड़ी नीतीश जी और मोदी जी की जोड़ी से ही आगे बढ़ सकती है।”
उन्होंने आगे कहा कि बिहार को साम्प्रदायिक राजनीति नहीं, बल्कि स्थिर विकास चाहिए। “देश और प्रदेश को नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार जैसे नेता चाहिए, जो गरीबों को भूखा नहीं सोने देते।”
रूडी बोले: “नीतीश थे, हैं और रहेंगे”
सारण के सांसद राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि नीतीश कुमार का मुकाबला कोई नहीं कर सकता।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा — “तेजस्वी यादव को सीएम फेस घोषित कर दिया गया है, लेकिन वह जनता के बीच दिखाई नहीं देते। उनके नाम के साथ लालू प्रसाद यादव की यादें जुड़ी हैं, और जनता वही दौर नहीं चाहती।”रूडी ने यह भी कहा कि तेजस्वी के खिलाफ भ्रष्टाचार और जमीन घोटालों के मामले लंबित हैं, जो उनकी साख पर सवाल उठाते हैं। “तेजस्वी के गले में फंदा लटका है, वह किसी भी दिन गिरफ्तार हो सकते हैं। ऐसे में जनता उन्हें क्यों चुनेगी?”
उपेंद्र कुशवाहा का तंज: “सूर्य का पूरब से निकलना तय, नीतीश का सीएम बनना तय”
NDA की डुमरांव सभा में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार का सीएम बनना उतना ही तय है, जितना सूर्य का पूरब से निकलना। उन्होंने कहा —“नीतीश कुमार बिहार के सीएम थे, हैं और रहेंगे। उनके अनुभव और प्रशासनिक क्षमता पर कोई प्रश्न नहीं उठा सकता।”
कुशवाहा ने बताया कि NDA इस बार 243 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है, और टिकट वितरण में हर जाति और वर्ग का ध्यान रखा गया है। उनके अनुसार, यह चुनाव विकास बनाम वादाखिलाफी के बीच लड़ा जा रहा है।
जीतन राम मांझी का बयान: “नीतीश से ज्यादा योग्य कोई नहीं”
केंद्रीय मंत्री और HAM (सेक्युलर) प्रमुख जीतन राम मांझी ने भी नीतीश के पक्ष में बयान दिया।
उन्होंने कहा — “बिहार की जनता जानती है कि 2005 से पहले क्या हाल था। लालू-राबड़ी के शासन में कानून-व्यवस्था चरमराई थी। अब जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में बिजली, सड़क और शिक्षा की व्यवस्था सुधरी है, तो जनता फिर से उन्हें मौका देगी।”मांझी ने दावा किया कि 14 नवंबर के चुनाव (Bihar Elections 2025)में NDA की स्पष्ट जीत होगी और नीतीश फिर मुख्यमंत्री बनेंगे।
राजनीतिक समीकरण: तेजस्वी बनाम नीतीश की सीधी टक्कर
बिहार चुनाव (Bihar Elections 2025) का यह संस्करण एक तरह से तेजस्वी यादव बनाम नीतीश कुमार की सीधी टक्कर में बदल गया है। जहां महागठबंधन युवाओं और बदलाव की राजनीति की बात कर रहा है, वहीं NDA विकास, स्थिरता और शासन के अनुभव को मुद्दा बना रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बिहार में पिछले कुछ वर्षों में जातिगत राजनीति की जगह प्रदर्शन आधारित राजनीति ने जगह बनाई है। नीतीश कुमार की विकास यात्रा, बिजली-सड़क-शिक्षा जैसे मुद्दे अब भी उनकी ताकत हैं। हालांकि, बेरोजगारी, पलायन और महंगाई जैसे मुद्दे महागठबंधन के लिए वोटर को आकर्षित करने का आधार बन सकते हैं।
महागठबंधन की रणनीति: युवाओं पर फोकस, कांग्रेस की सक्रिय भूमिका
कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ मिलकर राजद इस बार युवा मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश में है। राज्य में 18–29 वर्ष के बीच के मतदाताओं की संख्या करीब 2.8 करोड़ बताई जा रही है — यानी कुल वोटर बेस का लगभग 40 प्रतिशत। तेजस्वी यादव लगातार बेरोजगारी, शिक्षा और आउटसोर्सिंग की समस्याओं को उठाकर युवाओं से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा —“हमारा सीएम फेस तेजस्वी यादव हैं। अब हम जानना चाहते हैं कि NDA का चेहरा कौन है? बिहार की जनता अब बदलाव चाहती है।”
NDA की रणनीति: मोदी-नीतीश की जोड़ी पर भरोसा
दूसरी ओर, NDA पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी पर निर्भर है।
NDA नेताओं का मानना है कि मोदी का राष्ट्रीय नेतृत्व और नीतीश का राज्यस्तरीय अनुभव मिलकर स्थिर सरकार दे सकता है।NDA ने अपने प्रचार अभियान में “विकास ही विश्वास” का नारा अपनाया है।पार्टी के प्रचार में नीतीश कुमार की 20 साल की उपलब्धियों — सड़क निर्माण, स्कूली शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और शराबबंदी — को प्रमुखता से दिखाया जा रहा है।
जनता के मन में सवाल: क्या तेजस्वी नीतीश का विकल्प बन पाएंगे?
बिहार की जनता अब इस सवाल पर विभाजित है कि क्या तेजस्वी यादव, नीतीश कुमार के विकल्प के रूप में स्वीकार्य चेहरा हैं। युवा वर्ग में तेजस्वी की लोकप्रियता बढ़ी है, लेकिन बुजुर्ग और मध्यम वर्ग अब भी नीतीश की स्थिरता पर भरोसा जताते हैं।
राजनीतिक रूप से यह चुनाव एक जनरेशन गैप वाली लड़ाई बन चुका है — जहां एक ओर अनुभव और विकास का दावा है, वहीं दूसरी ओर नई सोच और बदलाव की उम्मीद।यह भी पढ़े माखननगर पुलिस की तत्परता से नाबालिग सकुशल बरामद, आरोपी गोविंद यादव गिरफ्तार