
सिवनी। लखनादौन नगर में चट्टी से बस स्टैंड मार्ग पर नगर परिषद द्वारा निर्मित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकानों के आवंटन में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि नियमों की अनदेखी कर दुकानों का कब्जा दे दिया गया, जिससे शासन को करीब 83 लाख रुपये की राजस्व क्षति हुई।
मामले की जांच के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर ने नगर परिषद लखनादौन की अध्यक्ष मीना बलराम गोल्हानी, दो पूर्व मुख्य नगर अधिकारी (सीएमओ) गजेंद्र पांडे और गीता वाल्मीक, वर्तमान राजस्व उपनिरीक्षक रवि गोल्हानी, पीआईसी सदस्यों सहित 14 दुकानदारों पर प्रकरण दर्ज किया है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ अपराध
ईओडब्ल्यू जबलपुर ने आरोपियों के विरुद्ध धारा 409 एवं 120-बी भादवि,
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(सी), 13(1)(ए), 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।
बिना पूरी राशि और अनुबंध के दिया दुकानों का कब्जा
जांच में सामने आया कि नगर परिषद द्वारा निर्मित आठ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में कुल 75 दुकानों की नीलामी की गई थी। नियमों के अनुसार नीलामी के 21 दिन के भीतर 25 प्रतिशत राशि और शेष राशि 120 दिन में जमा करना अनिवार्य था। इसके बाद अनुबंध कर मासिक किराया निर्धारित किया जाना था।
इसके विपरीत, 24 अगस्त 2020 से 18 अक्टूबर 2024 के बीच कई दुकानदारों को बिना पूरी राशि जमा कराए और बिना किसी अनुबंध के ही दुकानों का कब्जा दे दिया गया।
32 में से 13 दुकानदारों ने नहीं जमा की राशि
सत्यापन में पाया गया कि 32 दुकानों में से 13 दुकानदारों ने लगभग 79.82 लाख रुपये जमा नहीं किए, वहीं करीब 2.88 लाख रुपये किराया भी वसूल नहीं किया गया, जिससे कुल मिलाकर शासन को लगभग 83 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
आरक्षित दुकानों का नियमविरुद्ध आवंटन
जबलपुर निवासी रविंद्र सिंह आनंद की शिकायत पर जांच शुरू हुई थी। जांच में यह भी सामने आया कि आरक्षित वर्ग की दुकानों को सामान्य वर्ग को आवंटित किया गया।
दुकान क्रमांक-7 को वैभव दुबे को बिना पुनः नीलामी कराए आवंटित कर दिया गया, जबकि नियम अनुसार तीन बार नीलामी विफल होने पर ही दुकान को अनारक्षित घोषित किया जा सकता है। पीआईसी बैठक में प्रस्ताव पारित कर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
ईओडब्ल्यू की कार्रवाई जारी
ईओडब्ल्यू के अनुसार तत्कालीन सीएमओ, वर्तमान राजस्व उपनिरीक्षक, पीआईसी सदस्य और दुकानदारों की मिलीभगत एवं पद के दुरुपयोग से यह पूरा घोटाला सामने आया है। फिलहाल मामले की विस्तृत विवेचना जारी है और आगे और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।