संकट में अन्नदाता: राज्यसभा में गूंजी ओलावृष्टि प्रभावित किसानों की आवाज

नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश में हाल ही में हुई ओलावृष्टि, तेज बारिश और आंधी-तूफान से किसानों की रबी फसलों को हुए भारी नुकसान का मुद्दा आज संसद के उच्च सदन में प्रमुखता से उठा। राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने ‘विशेष उल्लेख’ के माध्यम से किसानों की पीड़ा को सदन के सामने रखते हुए केंद्र सरकार से तत्काल राहत की मांग की।

सांसद नारोलिया ने अपने संबोधन में बताया कि प्रदेश के लगभग 25 जिलों—विशेष रूप से उज्जैन, धार, रतलाम और शाजापुर—में गेहूं सहित अन्य रबी फसलें पूरी तरह तबाह हो गई हैं। उन्होंने कहा कि कटाई के समय आई इस आपदा ने किसानों की सालभर की मेहनत को बर्बाद कर दिया है। खेतों में खड़ी फसल गिर गई, दाने झड़ गए और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

उन्होंने यह भी बताया कि केवल फसल ही नहीं, बल्कि सिंचाई पाइपलाइन, भंडारण व्यवस्था और अन्य कृषि संसाधनों को भी गंभीर क्षति पहुंची है, जिससे किसानों की स्थिति और अधिक दयनीय हो गई है।

किसानों के हित में आवाज बुलंद करते हुए सांसद नारोलिया ने सरकार से मांग की कि प्रभावित जिलों में नुकसान का जल्द से जल्द सटीक सर्वे कराया जाए और रिपोर्ट के लिए समय-सीमा तय की जाए। साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सरल प्रक्रिया के माध्यम से शीघ्र मुआवजा दिया जाए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के मानकों के अनुसार प्रभावित किसानों को अतिरिक्त केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा सरकारी खरीद केंद्रों पर फसल की गुणवत्ता मानकों में आंशिक छूट देकर किसानों की उपज की खरीद सुनिश्चित करने की भी बात कही।

अपने संबोधन के अंत में सांसद नारोलिया ने सरकार से अपील की कि इस संकट की घड़ी में अन्नदाताओं को पारदर्शी, त्वरित और न्यायपूर्ण राहत प्रदान की जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से संभल सकें और भविष्य के लिए फिर से खड़े हो सकें।

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