ब्राह्मण समाज में आक्रोश: IAS अधिकारी संतोष वर्मा की अभद्र टिप्पणी के विरोध में सौंपा गया ज्ञापन

माखननगर — अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समाज पर की गई कथित अभद्र और अमर्यादित टिप्पणी के विरोध में माखननगर क्षेत्र का ब्राह्मण समाज खुलकर सामने आया। टिप्पणियों को समाज की गरिमा और सामाजिक सद्भावना पर प्रहार बताते हुए नगर एवं ब्लॉक माखननगर के ब्राह्मण समाज ने तहसीलदार माखननगर के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपा।समाज द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि—एक उच्च प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी द्वारा इस तरह की भाषा और टिप्पणी अत्यंत अनुचित है।यह टिप्पणी केवल एक वर्ग को नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक मर्यादा और सामाजिक एकता को ठेस पहुंचाती है।ऐसी टिप्पणी सामाजिक तनाव और विभाजनकारी मानसिकता को बढ़ावा देती है, जो संविधान की भावना के विपरीत है।ब्राह्मण समाज ने मांग की है कि—1. IAS अधिकारी संतोष वर्मा के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया जाए।2. शासन इस मामले में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए समाज की भावनाओं को सम्मान दे।3. भविष्य में इस प्रकार की अमर्यादित भाषा और जातिगत टिप्पणी करने वाले किसी भी अधिकारी-कर्मचारी पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।ज्ञापन सौंपने के दौरान माखननगर के ब्राह्मण समाज के सभी वरिष्ठ जन, सामाजिक प्रतिनिधि, युवा वर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने अपनी एकजुट उपस्थिति के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया कि समाज अपने सम्मान के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज कराया विरोधब्राह्मण समाज ने ज्ञापन कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न किया। प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज किसी भी वर्ग के प्रति वैमनस्य नहीं रखता, लेकिन किसी भी अधिकारी द्वारा की गई साम्प्रदायिक या जातिगत टिप्पणी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।तहसीलदार माखननगर ने समाज के प्रतिनिधियों से ज्ञापन प्राप्त किया और इसे शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। समाज ने उम्मीद जताई कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और दोषी अधिकारी के खिलाफ विधि-सम्मत कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित करेगी।घटना के बाद पूरे क्षेत्र के ब्राह्मण समाज में रोष स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। समाजजन इस मुद्दे को केवल जातिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि प्रशासनिक आचरण के गंभीर उल्लंघन के रूप में देख रहे हैं।ब्राह्मण समाज ने कहा कि यदि शासन स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आगे आंदोलनात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं।

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