शिकायतों के बाद कई किसानों की समस्या हल, लेकिन लखन के खेत में ही क्यों भरा रहा पानी?

माखननगर। क्षेत्र में नहर विभाग की लापरवाही एक किसान पर भारी पड़ गई। नहर लाइनर 320 के बहाव से कुछ किसानों के खेतों में पानी भर गया था, जिसकी शिकायत किसानों ने तहसीलदार से की थी। शिकायत के बाद तत्काल कार्रवाई हुई और विभाग ने नाली खोदकर छगनलाल, संतोष, करिया, आसाराम एवं गोवर्धन के खेतों से पानी निकालकर समस्या का समाधान कर दिया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इसी प्रक्रिया में किसान लखन यादव के खेत को अनदेखा कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप उसका खेत पानी से भरा रहा और उसकी बोनी (बुवाई) काफी लेट हो रही।

शिकायतों के बाद आधा-अधूरा समाधान

तहसीलदार के निर्देश पर नहर विभाग तुरंत सक्रिय हुआ और उन किसानों के खेतों से पानी निकाला जो शिकायतकर्ता सूची में थे। विभाग की टीम ने नहर लाइनर के बहाव को बदलने के लिए नाली बनाई और ज्यादातर खेतों की समस्या हल हो गई। लेकिन लखन यादव के खेत के आगे नाली नहीं बनाई गई, जिसके कारण पूरा पानी उसके खेत में जमा हो गया।


एसडीओ पी.एल. दायमा का अजीब बयान

नहर विभाग के एसडीओ पी.एल. दायमा ने देनवापोस्ट से चर्चा में कहा कि
“हमने नाली सही बनाई है। आगे की नाली किसान को स्वयं बनानी थी।”

हालांकि यह सवाल उठना भी स्वाभाविक है कि जब अन्य किसानों के लिए विभाग ने नाली बनाकर पानी निकाला, तो लखन यादव के खेत के आगे वही कार्य क्यों नहीं किया गया? क्या यह विभाग की लापरवाही थी या शिकायत सूची में नाम न होने की वजह से उसे प्राथमिकता नहीं दी गई?


लखन यादव की बोनी लेट — फसल चक्र पर असर

नहर का पानी खेत में भर जाने से किसान लखन यादव की बोनी कई दिनों तक के लिए रुक गई। बोनी लेट होने से उसकी फसल का पूरा चक्र प्रभावित होगा, जिसका सीधा नुकसान उपज और आय दोनों पर पड़ेगा।

स्थानीय किसानों का कहना है कि नहर विभाग का काम समग्र रूप से क्षेत्र की समस्या को हल करना होना चाहिए था, न कि केवल उन किसानों की सहायता करना जिन्होंने शिकायत की थी।


अब बड़ा सवाल — जिम्मेदारी किसकी?

क्या नहर विभाग को पहले से यह सुनिश्चित नहीं करना चाहिए था कि लाइनर से निकलने वाला पानी सभी खेतों की दिशा में सुरक्षित रूप से बह जाए?
क्या किसी किसान का नाम शिकायत में न होना, विभाग के काम को अधूरा छोड़ने का बहाना बन सकता है?
सबसे बड़ा सवाल—लखन यादव की गलती क्या थी?

ग्रामीणों की मांग है कि तहसील प्रशासन को इस मामले की दोबारा जांच कर नहर विभाग की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी किसान को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।

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