
सोहागपुर : परीक्षा का समय चल रहा है, लेकिन स्कूलों की कक्षाएं खाली हैं। शिक्षक गायब हैं और बच्चे बिना मार्गदर्शन के भटक रहे हैं। इस गंभीर स्थिति पर आखिरकार प्रशासन की चुप्पी टूटी है। सोहागपुर की एसडीएम प्रियंका भलावी ने सख्त बयान जारी करते हुए कहा है कि जो शिक्षक स्कूल नहीं जा रहे हैं, उनके खिलाफ जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को पत्र लिखकर कार्रवाई की जाएगी।
बयान सख्त है, शब्दों में चेतावनी है—लेकिन सवाल अब भी वहीं खड़ा है: कार्रवाई कब होगी? और क्या यह सिर्फ एक और औपचारिकता भर रह जाएगी?
आदेश पहले भी थे, फर्क क्या पड़ा?
यह पहला आदेश नहीं है, न ही पहली चेतावनी। SIR-2026 समाप्त होने के बाद शिक्षकों को शालाओं में उपस्थित होने के स्पष्ट निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके थे। इसके बावजूद सैकड़ों शिक्षक या तो स्कूल पहुंचे ही नहीं, या फिर “SIR का बहाना” बनाकर परीक्षा के समय भी नदारद हैं। प्रशासन के पास सारी जानकारी होने के बाद भी जब तक मीडिया में खबर नहीं बनी और सवाल नहीं उठे, तब तक कोई कार्यवाही नहीं।
अगर आदेश और चेतावनी के बाद भी हालात जस के तस हैं, तो यह मानना पड़ेगा कि समस्या आदेशों की नहीं, बल्कि अमल की है।
कार्रवाई का भरोसा, निगरानी की दरकार
एसडीएम के बयान से यह साफ हो गया है कि प्रशासन को स्थिति की पूरी जानकारी है। अब जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी और शिक्षा विभाग पर आ गई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जिम्मेदारी निभाई जाएगी? अब तक जो हुआ है, उससे जनता का भरोसा नहीं, बल्कि संदेह बढ़ा है।
परीक्षा के समय शिक्षक की गैरहाजिरी केवल अनुशासनहीनता नहीं है, यह सीधा बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है।
जब तक किसी शिक्षक का वेतन नहीं कटता, तब तक यह समस्या खत्म नहीं होगी। जब तक कोई बड़ा अधिकारी खुद फील्ड में उतरकर स्कूलों का निरीक्षण नहीं करता, तब तक यह नाटक चलता रहेगा।
चेतावनी या अंतिम मौका?
एसडीएम प्रियंका भलावी का बयान प्रशासन की ओर से आखिरी चेतावनी माना जाना चाहिए। अगर इसके बाद भी स्कूलों में शिक्षक नहीं पहुंचे, तो यह साफ हो जाएगा कि सिस्टम बच्चों की शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं है और अगर फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भी साफ हो जाएगा कि बयान सिर्फ मीडिया को संतुष्ट करने के लिए थे।