
44 साल पुराने ऐतिहासिक पुल की नींव पर खतरा, प्रशासन ने जारी किए आपात निर्देश
नर्मदापुरम। जिले की लाइफलाइन माने जाने वाले ऐतिहासिक तवा पुल पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। वर्ष 1982 में निर्मित यह पुल अब जर्जर स्थिति में पहुंच गया है। पुल के तीन प्रमुख पिलरों के डेक स्लैब में गंभीर दरारें पाए जाने के बाद मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से सुरक्षा उपाय लागू कर दिए हैं।
16 जून शाम 6 बजे तक भारी वाहनों पर रोक
पुल की संरचनात्मक स्थिति को देखते हुए तवा पुल से डंपर, ट्रक और अन्य सभी भारी लोडिंग वाहनों की आवाजाही पर 16 जून की शाम 6 बजे तक पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन और यातायात पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं तथा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि पुल पर बढ़ते दबाव को कम करने और किसी संभावित दुर्घटना से बचाव के लिए यह निर्णय लिया गया है। पुल से केवल सीमित और सुरक्षित श्रेणी के वाहनों को ही गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित
प्रतिबंध के बाद भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। अब डंपर और अन्य लोडिंग वाहन माखननगर, सांगाखेड़ा कला और बांद्राभान मार्ग से होकर अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे। इससे वाहन चालकों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ गई है।
प्रारंभिक जांच में अवैध रेत खनन पर उठे सवाल
मामले की प्रारंभिक जांच में पुल की वर्तमान स्थिति के पीछे अवैध रेत खनन को प्रमुख कारण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार पुल की सुरक्षा के लिए निर्धारित 50 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर रेत का उत्खनन किया गया। नियमों की अनदेखी कर किए गए इस खनन से नदी तल का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया और पुल के पिलरों की नींव कमजोर होती चली गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हुए अवैध खनन के कारण पिलरों के आसपास की मिट्टी और आधार संरचना प्रभावित हुई, जिसके परिणामस्वरूप अब पिलरों और डेक स्लैब में दरारें दिखाई देने लगी हैं।
ऐतिहासिक पुल के भविष्य को लेकर चिंता
करीब 44 वर्षों से क्षेत्र को जोड़ने वाला तवा पुल नर्मदापुरम और आसपास के इलाकों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। पुल की खराब स्थिति सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी मरम्मत और संरक्षण कार्य नहीं किए गए तो पुल की संरचना को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि पुल की मरम्मत संभव है या इसके लिए बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण और संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता होगी।
बड़ा सवाल
यदि पुल के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध रेत खनन हो रहा था, तो जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? और आखिर किसकी लापरवाही ने जिले की इस महत्वपूर्ण लाइफलाइन को खतरे में डाल दिया?