आजकल फास्ट फूड और बेकरी उत्पादों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पिज्जा, बर्गर, केक, बिस्किट और समोसे जैसी कई लोकप्रिय चीजें मैदा से बनाई जाती हैं। वहीं भारतीय घरों में सदियों से गेहूं के आटे से बनी रोटियां और पराठे भोजन का अहम हिस्सा रहे हैं। हालांकि दोनों ही गेहूं से बनते हैं, लेकिन पोषण और स्वास्थ्य के लिहाज से आटा और मैदा में बड़ा अंतर माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार मैदा एक रिफाइंड उत्पाद है, जबकि आटा साबुत गेहूं से तैयार किया जाता है। यही वजह है कि आटे को सेहत के लिए बेहतर माना जाता है।
कैसे बनता है आटा और मैदा?
Kamini Sinha, नोएडा स्थित डाइट मंत्रा क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन के अनुसार, आटा साबुत गेहूं को पीसकर बनाया जाता है। इसमें गेहूं का छिलका और अंकुर भी शामिल रहते हैं, जिनमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स मौजूद होते हैं।
वहीं मैदा बनाने के दौरान गेहूं के छिलके और अंकुर को पूरी तरह हटा दिया जाता है। इसके बाद बचे हुए हिस्से को बारीक पीसकर प्रोसेस और ब्लीच किया जाता है, जिससे उसका रंग सफेद हो जाता है।
क्यों नुकसानदायक माना जाता है मैदा?
विशेषज्ञों का कहना है कि मैदा में फाइबर की मात्रा बेहद कम होती है। इसके कारण इसे खाने के बाद जल्दी भूख लग सकती है। मैदा तेजी से पचती है, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है।लगातार अधिक मात्रा में मैदा का सेवन करने से मोटापा, वजन बढ़ना और Type 2 Diabetes जैसी लाइफस्टाइल बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा ज्यादा मैदा खाने से कब्ज, गैस और पेट भारी होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
आटे के क्या हैं फायदे?
साबुत गेहूं के आटे में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। यह पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। आटे में विटामिन, मिनरल्स और जरूरी पोषक तत्व भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा और पोषण देने में मदद करते हैं।
क्या मैदा में पोषण बिल्कुल नहीं होता?
विशेषज्ञों के मुताबिक मैदा में कार्बोहाइड्रेट और ऊर्जा जरूर होती है, लेकिन प्रोसेसिंग के दौरान इसके अधिकांश पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। कई देशों में मैदा में बाद में आयरन और कुछ विटामिन मिलाए जाते हैं, लेकिन फिर भी इसे साबुत आटे जितना पौष्टिक नहीं माना जाता।
बच्चों और युवाओं में बढ़ रहा मैदा का सेवन
फास्ट फूड और पैकेज्ड फूड्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण बच्चे और युवा बड़ी मात्रा में मैदा का सेवन कर रहे हैं। कई पैकेज्ड उत्पादों में भी मैदा का इस्तेमाल होता है, जिसकी जानकारी लोगों को नहीं होती। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए रोजमर्रा के भोजन में साबुत आटे को प्राथमिकता देना और मैदा से बनी चीजों का सीमित सेवन करना जरूरी है।