सार्थक ऐप पर फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने वाले तीन सहायक पशु चिकित्सक निलंबित
लाखों रुपए के वेतन आहरण का आरोप, एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश

नर्मदापुरम संभाग में शासकीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और अनुशासन को लेकर एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। नर्मदापुरम संभाग आयुक्त श्रीकांत बनोठ ने सार्थक ऐप पर फर्जी उपस्थिति दर्ज कर अवैध रूप से वेतन आहरण करने के मामले में तीन सहायक पशु चिकित्सकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं को संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन पशुपालन एवं डेयरी विभाग मंत्रालय के पत्र के आधार पर की गई है। जांच में सामने आया कि नर्मदापुरम जिले में पदस्थ तीन सहायक पशु चिकित्सकों द्वारा सार्थक ऐप में कथित रूप से फर्जी तरीके से उपस्थिति दर्ज कराई जा रही थी। आरोप है कि चिकित्सक स्वयं कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं रहते थे, बल्कि मोबाइल पर फोटो दिखाकर किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करवाई जाती थी।
इस मामले को गंभीर कदाचार और अनुशासनहीनता मानते हुए संभाग आयुक्त ने पशु चिकित्सा सहायक मुख्य ग्राम खंड केसला में पदस्थ डॉ. गरिमा शुक्ला, पशु चिकित्सालय काला आखर में पदस्थ डॉ. ज्योति नवडे तथा चल विरुजालय केसला में पदस्थ डॉ. अंशु तुमराम को मध्यप्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम 1966 के नियम 9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
आदेश में उल्लेख किया गया है कि उक्त चिकित्सकों द्वारा सार्थक ऐप पर कूट रचना कर फर्जी उपस्थिति दर्ज कराई जा रही थी। जबकि वास्तविक रूप से वे कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं रहते थे। इसके बावजूद उन्होंने शासकीय वेतन का आहरण किया, जिससे शासन को लाखों रुपए की आर्थिक क्षति पहुंची। प्रशासन ने इसे शासकीय राशि का गंभीर प्रभक्षण माना है।
संभाग आयुक्त ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं संभाग नर्मदापुरम को निर्देश दिए हैं कि तीनों चिकित्सकों के खिलाफ विधिसम्मत एफआईआर दर्ज कराना सुनिश्चित किया जाए। प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को बड़ा संदेश माना जा रहा है।
निलंबन आदेश के अनुसार डॉ. ज्योति नवडे, डॉ. गरिमा शुक्ला और डॉ. अंशु तुमराम का मुख्यालय निलंबन अवधि के दौरान उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं नर्मदापुरम नियत किया गया है। साथ ही मूलभूत नियम 53 के अंतर्गत उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी।
इस पूरे मामले ने सरकारी विभागों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली की विश्वसनीयता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सार्थक ऐप जैसी ऑनलाइन मॉनिटरिंग प्रणाली को शासन ने कर्मचारियों की उपस्थिति और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू किया था, लेकिन अब उसी व्यवस्था में कथित फर्जीवाड़ा सामने आने से विभाग में हड़कंप की स्थिति है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह की अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं की जाती, तो शासकीय व्यवस्था में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को बढ़ावा मिलता है। यही कारण है कि संभाग आयुक्त ने केवल निलंबन तक सीमित न रहकर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के भी निर्देश दिए हैं।
इस कार्रवाई के बाद पशुपालन विभाग के कर्मचारियों में भी चर्चा का माहौल है। कई कर्मचारी इसे शासन की सख्ती और जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि डिजिटल सिस्टम में किसी भी प्रकार की हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
फिलहाल मामले में आगे की जांच प्रक्रिया जारी है और एफआईआर दर्ज होने के बाद कई अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं। संभाग आयुक्त का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।