इंदौर। वर्ष 2016 में शहर के चर्चित होटल लेमन ट्री में हुए शिल्पू भदौरिया हत्याकांड में आखिरकार न्यायालय का फैसला आ गया है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस बहुचर्चित मामले में तीन आरोपियों—आशुतोष जोहरे, शैलेंद्र सारस्वत और नीरज दंडोतिया—को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही साक्ष्य मिटाने के अपराध में प्रत्येक को 7-7 वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा भी दी गई है।
आत्महत्या से हत्या तक की जांच की कहानी
घटना 7 अगस्त 2016 की है, जब ग्वालियर निवासी शिल्पू भदौरिया इंदौर के होटल लेमन ट्री की चौथी मंजिल पर ठहरी हुई थी। देर रात उसका शव होटल के ग्राउंड फ्लोर पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या मान लिया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को पलट दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले राज
शरीर पर चोट के निशान और गला दबाए जाने के स्पष्ट संकेत मिलने के बाद पुलिस ने हत्या की आशंका पर जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि घटना के समय होटल में तीन युवक भी मौजूद थे और शिल्पू के साथ उनका विवाद हुआ था।
आरोपियों ने कबूला जुर्म
पुलिस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि पहले शिल्पू को शराब पिलाई गई, फिर उसका गला दबाकर हत्या की गई। बाद में इसे आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया गया।
नाखूनों में मिले अहम सबूत
मामले में सबसे अहम सबूत शिल्पू के नाखूनों में मिले आरोपियों की त्वचा के अंश रहे, जिससे यह साबित हुआ कि उसने हमले के दौरान जोरदार संघर्ष किया था। इस वैज्ञानिक साक्ष्य ने अदालत में अभियोजन पक्ष को मजबूती दी।
9 साल चली कानूनी लड़ाई
पुलिस ने घटना के करीब छह माह बाद चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद लगभग 9 वर्षों तक मामला अदालत में चला। पीड़िता के परिजनों ने लगातार न्याय के लिए संघर्ष किया और आखिरकार अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई।
बहुचर्चित मामला, अब मिला न्याय
यह हत्याकांड उस समय काफी चर्चा में रहा था। शुरुआत में आत्महत्या मानकर बंद किए जा रहे मामले का खुलासा जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर हुआ, जिसने इसे एक जघन्य हत्या के रूप में स्थापित किया।