माखन दादा की सरज़मीं पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन: रात 1 बजे तक कवियों ने बांधा समां

माखननगर (नर्मदापुरम)। राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी की पावन जन्मस्थली माखननगर में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने साहित्यिक वातावरण को देर रात तक जीवंत बनाए रखा। नगर के रामलीला मैदान में आयोजित इस भव्य आयोजन में देशभर से आए ख्याति प्राप्त कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।


देर रात तक चला काव्य का जादू


कार्यक्रम का शुभारंभ 9:30 शुरू हुआ, जो रात करीब 1 बजे तक लगातार चलता रहा। हजारों की संख्या में मौजूद श्रोताओं ने पूरे उत्साह और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कवियों का उत्साहवर्धन किया।मंच पर हास्य, वीर, श्रृंगार और गीत—सभी रसों की अद्भुत प्रस्तुति देखने को मिली, जिसने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।


डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने बिखेरा हास्य का रंग


प्रसिद्ध हास्य कवि डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने अपने चुटीले अंदाज और व्यंग्यपूर्ण कविताओं से दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। उनके मंच पर आते ही माहौल पूरी तरह हास्यमय हो गया और श्रोता देर तक हंसते रहे।


वीर रस और ओज से गूंजा मंच


वीर रस के कवि शशिकांत यादव ने अपनी ओजपूर्ण कविताओं से श्रोताओं में देशभक्ति का जोश भर दिया। उनकी प्रस्तुति पर दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं।


गीत और श्रृंगार ने छुआ दिल


गीतकार नीलोत्वल मृणाल ने अपनी भावपूर्ण रचनाओं से श्रोताओं के दिलों को छू लिया। वहीं श्रृंगार रस की कवयित्री अंकिता ने अपनी मधुर प्रस्तुति से कार्यक्रम में सौंदर्य और संवेदना का रंग घोला।
हास्य और लोक रंग की शानदार प्रस्तुति
कवि रमेश विश्वहार और दिनेश देसी ने अपने अनोखे अंदाज में हास्य और लोक रंग की प्रस्तुति देकर दर्शकों को खूब गुदगुदाया।


रामलीला मैदान में आयोजित इस कवि सम्मेलन में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। देर रात तक कार्यक्रम चलने के बावजूद दर्शकों का उत्साह कम नहीं हुआ।
आयोजन समिति द्वारा मंच, ध्वनि एवं सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था की गई, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।


माखनलाल चतुर्वेदी की जन्मस्थली पर आयोजित यह अखिल भारतीय कवि सम्मेलन न केवल साहित्यिक आयोजन रहा, बल्कि यह ‘दादा’ की विरासत को जीवंत रखने का एक सशक्त प्रयास भी बना।
कवियों की ओजपूर्ण और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने यह साबित कर दिया कि माखन दादा की धरती पर साहित्य आज भी उतना ही जीवंत और प्रभावशाली है।

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