दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित मां पीतांबरा पीठ देश के सबसे शक्तिशाली और रहस्यमयी शक्तिपीठों में गिना जाता है। यह धाम न सिर्फ आम श्रद्धालुओं, बल्कि देश-विदेश के राजनेताओं, नौकरशाहों और नामचीन हस्तियों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
राजसत्ता की देवी के रूप में होती है आराधना
पीतांबरा पीठ में मां बगलामुखी का स्वरूप रक्षात्मक माना जाता है और उन्हें “राजसत्ता की देवी” के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि सत्ता और विजय की कामना रखने वाले भक्त यहां गुप्त रूप से साधना और पूजा-अर्चना करते हैं। मां को शत्रु नाश की अधिष्ठात्री देवी भी माना जाता है।
1962 युद्ध से जुड़ी ऐतिहासिक मान्यता
भारत-चीन युद्ध 1962 के दौरान जब देश संकट में था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को पीतांबरा पीठ में यज्ञ कराने की सलाह दी गई। कहा जाता है कि यहां 51 कुंडीय महायज्ञ आयोजित हुआ, जिसमें सेना और अधिकारियों ने भी आहुति दी। मान्यता है कि यज्ञ के अंतिम दिन चीन ने अपनी सेनाएं पीछे हटा लीं। उस समय की यज्ञशाला आज भी पीठ परिसर में मौजूद है।
इसके बाद भारत-पाक युद्ध 1965 और भारत-पाक युद्ध 1971 सहित कारगिल युद्ध के दौरान भी यहां विशेष अनुष्ठान कराए जाने की मान्यताएं प्रचलित हैं।
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देश-विदेश की हस्तियां करती हैं दर्शन
मां पीतांबरा के दरबार में देश के कई राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आ चुके हैं। वसुंधरा राजे और अभिनेता संजय दत्त जैसे नामचीन लोग भी यहां आकर पूजा-अर्चना कर चुके हैं।
छोटी खिड़की से होते हैं मां के दर्शन
इस सिद्धपीठ की स्थापना 1935 में स्वामीजी महाराज द्वारा की गई थी। यहां मां के दर्शन एक छोटी सी खिड़की से ही होते हैं और मंदिर परिसर में फोटोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित है। मान्यता है कि मां दिन में तीन बार अपना स्वरूप बदलती हैं और उनके दर्शन से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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दतिया स्थित मां पीतांबरा पीठ का मंदिर
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धूमावती माता का देश में एकमात्र मंदिर
पीठ परिसर में ही मां धूमावती का देश का एकमात्र मंदिर भी स्थित है। मान्यता के अनुसार, मां धूमावती का स्वरूप उग्र है, लेकिन वे अपने भक्तों पर अत्यंत कृपालु हैं। इस मंदिर के कपाट शनिवार को सुबह और शाम सीमित समय के लिए खुलते हैं। यहां नमकीन व्यंजनों—मंगोड़े, कचौड़ी और समोसे—का भोग लगाया जाता है।
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इसी खिड़की से किए जाते हैं मां के दर्शन
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आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम
मां पीतांबरा पीठ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह स्थान अपने रहस्यमयी अनुष्ठानों और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण भी विशेष पहचान रखता है। देश में जब-जब संकट आया, इस धाम की ओर श्रद्धा और विश्वास और भी गहरा होता गया।
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मां के दर्शन को लगती हैं कतारें