मध्य प्रदेश में पिछले तीन दिनों से सक्रिय तेज मौसम प्रणाली ने अब अपना रुख पूर्वी इलाकों की ओर कर लिया है। राज्य के कई हिस्सों में तबाही मचाने के बाद शनिवार को रीवा–सिंगरौली बेल्ट समेत 14 जिलों में बारिश और ओलावृष्टि का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग ने तेज हवाओं की गति 70 किमी प्रति घंटे से अधिक रहने की चेतावनी दी है।
72 घंटे में 42 जिलों में असर
पिछले 24 घंटे में ही प्रदेश के 42 जिलों के 100 से अधिक शहरों और कस्बों में बारिश दर्ज की गई। धार के बदनावर और बैतूल के घोड़ाडोंगरी में सबसे अधिक करीब पौन इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई। कई स्थानों पर आधा इंच से ज्यादा बारिश हुई।
अलीराजपुर, झाबुआ, खंडवा, छिंदवाड़ा और जबलपुर सहित कई जिलों में ओलावृष्टि दर्ज की गई। तेज आंधी और ओलों के कारण गेहूं, केला, पपीता और संतरे की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बिछ गईं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
तापमान में भारी गिरावट, ग्वालियर सबसे ठंडा
लगातार बारिश और घने बादलों के कारण प्रदेश के अधिकतर शहरों में दिन के तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 23.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से काफी कम है। खास बात यह रही कि यहां दिन और रात के तापमान में मात्र 4.7 डिग्री का अंतर रहा।
दतिया, सतना, खजुराहो, भोपाल और जबलपुर सहित कई शहरों में तापमान 30 डिग्री से नीचे पहुंच गया। खजुराहो में सबसे ज्यादा 10 डिग्री से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
26 मार्च के बाद फिर बदल सकता है मौसम
मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान सिस्टम 21 मार्च तक सक्रिय रहेगा। इसके बाद 22 मार्च से एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा, हालांकि इसका प्रभाव कमजोर रहने की संभावना है। वहीं 26 मार्च के आसपास एक और नया सिस्टम प्रदेश में फिर से बारिश का दौर शुरू कर सकता है।
प्रदेश में अचानक बदले मौसम ने जहां गर्मी से राहत दी है, वहीं किसानों के लिए यह संकट बनकर सामने आया है। प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की है।