मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा फैसला लिया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने घोषणा की है कि यह जलमार्ग अब अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद रहेगा। हालांकि भारत और कुछ अन्य देशों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है।

Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने गुरुवार को ईरान के सरकारी प्रसारक Islamic Republic of Iran Broadcasting (IRIB) के माध्यम से यह ऐलान किया। IRGC ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि United States, Israel, यूरोप या उनके समर्थक देशों का कोई भी जहाज इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करता है तो उस पर हमला कर उसे नष्ट कर दिया जाएगा।
हालांकि इस घोषणा के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि India और China जैसे देशों के जहाजों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। इससे भारत के लिए तेल आपूर्ति जारी रहने की संभावना बनी हुई है, जिसे भारत के नजरिए से बड़ी राहत माना जा रहा है।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और युद्धकालीन प्रावधानों के तहत Iran को Strait of Hormuz में आवागमन नियंत्रित करने का अधिकार है। उनका कहना है कि युद्ध की स्थिति में इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखना ईरान का अधिकार है।
यह घोषणा ऐसे समय आई है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस स्थिति के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार Strait of Hormuz दुनिया के समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है। फारस की खाड़ी के देशों के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद अहम है, क्योंकि यहीं से तेल और गैस की बड़ी खेप दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है। इसी मार्ग से Jebel Ali Port जैसे बड़े बंदरगाहों तक भी जहाजों की आवाजाही होती है।
समुद्री ट्रैकिंग वेबसाइटों के अनुसार कुवैत और दुबई के तट के पास सैकड़ों तेल टैंकर और मालवाहक जहाज फिलहाल लंगर डाले खड़े हैं। वहीं ईरान का बेड़ा भी Bandar Abbas Port के आसपास तैनात है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकाबंदी लंबे समय तक जारी रहती है तो खाड़ी क्षेत्र के व्यापार और तेल-गैस आपूर्ति पर भारी दबाव पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि इतिहास में पहली बार वाणिज्यिक जहाजों के लिए इस तरह होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया गया है। यहां तक कि 1980-88 के Iran–Iraq War के दौरान भी जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई थी।