मिशन वात्सल्य के तहत बाल तस्करी पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

नर्मदापुरम | कलेक्टर सोनिया मीना के मार्गदर्शन में मिशन वात्सल्य अंतर्गत बाल दुर्व्यापार (चाइल्ड ट्रैफिकिंग) विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सभा कक्ष में किया गया।


प्रशिक्षण कार्यक्रम में बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम में माननीय सचिव एवं न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तृप्ति त्रिपाठी, अभय सिंह, ललित कुमार डेहरिया, शैलेन्द्र कौरव सहित बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, विशेष किशोर पुलिस इकाई, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, महिला सेल, महिला थाना, सीआरपीएफ, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, बाल देखरेख संस्थाएं, जिला बाल संरक्षण इकाई के पदाधिकारी तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं पर्यवेक्षक उपस्थित रहे।


कानूनी प्रावधानों की दी गई जानकारी
कार्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी ललित कुमार डेहरिया द्वारा दी गई। माननीय सचिव द्वारा बालकों के संरक्षण हेतु बनाए गए विभिन्न कानूनों तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली विधिक सेवाओं पर प्रतिभागियों को विस्तार से अवगत कराया गया।


बाल अधिकार और तस्करी पर विशेषज्ञ सत्र


प्रशिक्षण सत्र में मास्टर ट्रेनर प्रशांत दुबे, निदेशक आवाज संस्था द्वारा बाल अधिकार, बाल दुर्व्यापार एवं बच्चों के संरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता में बच्चों के हित में किए गए प्रावधानों को सरल भाषा में समझाया।


विशेषज्ञ द्वारा भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 एवं 144 के तहत मानव तस्करी के विरुद्ध कड़े प्रावधानों की जानकारी दी गई, वहीं POCSO Act के माध्यम से बच्चों को प्राप्त कानूनी सुरक्षा पर भी प्रकाश डाला गया।


ऑनलाइन ग्रूमिंग पर विशेष चर्चा


प्रशिक्षण कार्यक्रम में सोशल मीडिया एवं डिजिटल माध्यमों से होने वाली ऑनलाइन ग्रूमिंग के बढ़ते खतरों और उससे बच्चों की सुरक्षा के उपायों पर चर्चा की गई। साथ ही पीड़ित बच्चों की पहचान, उनसे संवेदनशीलता के साथ पूछताछ, और समय पर संरक्षण व पुनर्वास की प्रक्रिया पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया गया।


सामुदायिक जागरूकता पर जोर
विशेषज्ञों ने बाल तस्करी की रोकथाम में सामुदायिक जागरूकता, अभिभावकों की शिक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों में सतत निगरानी को अत्यंत आवश्यक बताया। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।


कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने बाल संरक्षण के क्षेत्र में और अधिक प्रभावी कार्य करने का संकल्प लिया।

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