
नर्मदापुरम | मध्य प्रदेश की सड़कों पर बढ़ते हादसों को लेकर आज संसद में गंभीर चिंता व्यक्त की गई। राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने सदन में आवारा पशुओं के कारण हो रही सड़क दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार के समक्ष एक व्यावहारिक और दूरगामी रोडमैप प्रस्तुत किया।
श्रीमती नारोलिया ने पिछले दो वर्षों के पुलिस रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की एक बड़ी वजह सड़कों पर घूमते आवारा पशु हैं, जिससे न केवल जान-माल की हानि हो रही है बल्कि हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या अब केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा चुनौती बन चुकी है।
सिर्फ समस्या नहीं, समाधान भी रखा
सांसद माया नारोलिया ने सदन में केवल चिंता ही नहीं जताई, बल्कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के समक्ष पांच सूत्रीय समाधान भी प्रस्तुत किए। इनमें प्रमुख रूप से—
आवारा पशुओं से जुड़ी दुर्घटनाओं का राष्ट्रीय स्तर पर डेटा संकलन
हाईवे और स्टेट रोड पर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान
पशु आश्रय स्थलों के निर्माण के लिए केंद्रीय वित्तीय सहयोग
स्थानीय निकायों और पंचायतों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय करना
सड़क सुरक्षा अभियान में पशु नियंत्रण को अनिवार्य घटक बनाना
जैसे अहम सुझाव शामिल हैं।
मोदी सरकार से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद
सदन को संबोधित करते हुए सांसद नारोलिया ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सड़क परिवहन मंत्रालय इस गंभीर विषय पर शीघ्र और ठोस कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी नीति लागू की जाती है, तो सड़क हादसों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है और हजारों निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकती है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सड़क सुरक्षा केवल परिवहन का विषय नहीं, बल्कि जनजीवन और मानव सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान के बिना ‘जीरो एक्सीडेंट जोन’ का लक्ष्य अधूरा रहेगा।
सांसद माया नारोलिया की इस पहल को संसद में सड़क सुरक्षा की दिशा में एक सशक्त और जिम्मेदार आवाज के रूप में देखा जा रहा है, जो मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के लिए सकारात्मक बदलाव का संकेत देती है।