सोहागपुर में आरटीओ की बड़ी कार्रवाई

स्कूली वाहनों की सघन जांच, 22 हजार का चालान, बस की फिटनेस निरस्त

नर्मदापुरम | सोहागपुर क्षेत्र में स्कूली छात्रों द्वारा बिना लाइसेंस वाहन चलाने की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) नर्मदापुरम श्रीमती रिंकु शर्मा ने बुधवार को सेंट पैट्रिक स्कूल, सोहागपुर में विशेष जांच एवं प्रवर्तन कार्रवाई की।


जांच के दौरान आरटीओ टीम ने स्कूल परिसर में खड़े स्कूली वाहनों और छात्रों द्वारा उपयोग किए जा रहे दोपहिया वाहनों की बारीकी से जांच की। इस दौरान स्कूल प्रबंधन को सख्त निर्देश दिए गए कि बिना लाइसेंस एवं बिना हेलमेट दोपहिया वाहन से आने वाले छात्र-छात्राओं को स्कूल परिसर में वाहन खड़ा करने की अनुमति न दी जाए।


किशोर वाहन अपराध में अभिभावक होंगे जिम्मेदार


आरटीओ श्रीमती रिंकु शर्मा ने मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 199A की जानकारी देते हुए बताया कि यदि कोई किशोर वाहन अपराध करता है तो उसके लिए अभिभावकों को उत्तरदायी माना जाएगा। उन्होंने स्कूल प्रबंधन को निर्देशित किया कि इस कानूनी प्रावधान की जानकारी अभिभावकों तक पहुंचाई जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर अभिभावकों से शपथ पत्र (एफिडेविट) भी लिया जाए।


सुरक्षा मानकों में फेल बस की फिटनेस निरस्त


कार्रवाई के दौरान स्कूल परिसर में खड़ी एक बस सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई, जिस पर उसकी फिटनेस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गई। इसके अलावा लंबे समय से बिना परमिट, बिना बीमा एवं बिना फिटनेस संचालित दो स्कूली वाहनों पर कुल 22 हजार रुपए की चालानी कार्रवाई की गई।


अपंजीकृत दोपहिया वाहन पर भी चालान


जांच के दौरान स्कूल परिसर में खड़ा एक अपंजीकृत दोपहिया वाहन भी पकड़ा गया, जिस पर 2 हजार रुपए का चालान किया गया।


अभिभावकों से अपील


आरटीओ श्रीमती रिंकु शर्मा ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस एवं बिना हेलमेट वाहन चलाने की अनुमति न दें। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं और जनहानि का गंभीर कारण भी बन सकता है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग के छात्र-छात्राएं बिना गियर वाले एवं 50 सीसी तक क्षमता वाले वाहनों के लिए लर्निंग लाइसेंस हेतु ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
आरटीओ की इस कार्रवाई को स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था सुधार की दिशा में एक सख्त और जरूरी कदम माना जा रहा है।

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