
भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रदेश के करीब 2.5 लाख संविदाकर्मियों को बड़ी राहत देते हुए संविदा नीति-2023 के तहत ऐतिहासिक घोषणा की है। इसके अंतर्गत 10 वर्ष या उससे अधिक सेवा अनुभव रखने वाले संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर संविलियन किया जाएगा। यह प्रक्रिया रिक्त पदों के 50 प्रतिशत तक लागू होगी।
सीएम डॉ. मोहन यादव का बड़ा ऐलान
राजधानी भोपाल के टीटी नगर स्थित दशहरा मैदान में आयोजित मप्र संविदा कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मंच के राज्य स्तरीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि संविदाकर्मी शासन-प्रशासन की रीढ़ हैं।
उन्होंने कहा—
“संविदाकर्मियों की भूमिका हनुमान जी के समान है। उनके श्रम और समर्पण से ही प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है।”
सीएम ने स्पष्ट किया कि 10 साल से अधिक अनुभव रखने वाले संविदाकर्मियों का नियमित पदों पर संविलियन किया जाएगा और इस दिशा में आगे भी सरकार लगातार काम करेगी।
संविदाकर्मियों को मिलेंगे कर्मचारियों जैसे अधिकार
सम्मेलन के दौरान सरकार और संघर्ष मंच के बीच कई अहम सहमतियां बनीं। इसके तहत संविदाकर्मियों को अब—
कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता (DA)
सेवा समाप्ति के मामलों में सीसीए नियम लागू
एनपीएस (राष्ट्रीय पेंशन योजना)
ग्रेच्युटी का लाभ
स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का लाभ
अनुकंपा नियुक्ति में केंद्र व राज्य की योजनाओं का संयुक्त लाभ
दिया जाएगा।
सभी विभागों में लागू होंगे सीसीए नियम
संविदा नीति-2023 के तहत सीसीए नियम 1965 और 1966 को सभी विभागों के संविदाकर्मियों पर पूरी तरह लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे सेवा सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग को मजबूती मिली है।
पहले यह थी व्यवस्था
अब तक नियमित पदों पर कार्यरत संविदा अधिकारी या कर्मचारी, जिन्होंने लगातार 5 वर्ष सेवा पूरी कर ली थी, उन्हें विभागीय सीधी भर्ती में अधिकतम 50 प्रतिशत पदों पर आरक्षण मिलता था।
लेकिन उन्हें अन्य अभ्यर्थियों के साथ प्रतियोगी प्रक्रिया में शामिल होना पड़ता था और 50 प्रतिशत कटऑफ लाना अनिवार्य होता था।
संविदाकर्मियों में खुशी की लहर
सरकार के इस फैसले से प्रदेशभर के संविदाकर्मियों में उत्साह है। लंबे समय से नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए यह निर्णय बड़ा राहत पैकेज माना जा रहा है।