नेपानगर नागरिक बैंक घोटाला: पीड़ित जमाकर्ताओं ने विधायक मंजू दादू से लगाई गुहार, बोले– ‘इलाज तक के पैसे नहीं’

Burhanpur News :

बुरहानपुर जिले के नेपानगर स्थित बहुचर्चित नागरिक बैंक घोटाले से पीड़ित जमाकर्ताओं ने आखिरकार अपनी पीड़ा लेकर नेपानगर विधायक मंजू राजेंद्र दादू से मुलाकात की। नेपा मिल गेस्ट हाउस में हुई इस मुलाकात के दौरान पीड़ितों ने वर्षों से फंसी अपनी मेहनत की कमाई वापस दिलाने की मांग की।

पीड़ितों ने बताया कि करीब तीन वर्ष पूर्व बैंक कर्मचारियों की आपसी मिलीभगत से करीब 8 करोड़ 85 लाख रुपये का गबन किया गया था। मामले में पुलिस द्वारा 16 नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अब तक जमाकर्ताओं की राशि की वसूली नहीं हो सकी है।

जमाकर्ताओं की आपबीती: न पैसा मिला, न इलाज

पीड़ित रामचरण परमार ने बताया कि उनकी 6 लाख रुपये की राशि 7–8 वर्षों से बैंक में फंसी हुई है। न तो मूलधन मिला और न ही ब्याज का भुगतान हुआ है।
वहीं नौशाद ने बताया कि उनकी 4 लाख और 1 लाख रुपये की एफडी में से आंशिक भुगतान हुआ है, लेकिन शेष राशि अब तक नहीं मिली। उन्होंने कहा कि उनका मोतियाबिंद का ऑपरेशन होना है, लेकिन पैसों के अभाव में इलाज रुक गया है।

देवेंद्र कुमार जैन ने बताया कि उनकी 10 वर्ष पुरानी एफडी में 1 लाख 36 हजार रुपये जमा थे। पहले बैंक की ओर से 500 से 1000 रुपये की आंशिक राशि दी जाती थी, लेकिन अब वह भुगतान भी बंद हो चुका है।

बुजुर्ग कैलाश राजपूत ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2018 में 7 लाख 12 हजार रुपये की एफडी कराई थी, जो 2021 में क्लोज हो गई, लेकिन आज तक पूरी राशि नहीं मिली। उन्होंने बताया कि उनका पुणे में इलाज चल रहा है और सभी जरूरी दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।

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विधायक ने दिया कोर्ट के जरिए समाधान का भरोसा

पीड़ितों की बातें गंभीरता से सुनते हुए विधायक मंजू राजेंद्र दादू ने कहा कि इस मामले का समाधान आंदोलन के बजाय कानूनी और ठोस प्रक्रिया से ही संभव है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोर्ट के माध्यम से आरोपियों की संपत्ति कुर्क कर उसे बेचने की प्रक्रिया तेज करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि पीड़ित जमाकर्ताओं को उनकी राशि वापस मिल सके।

आर्थिक भरोसा टूटा, बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

नागरिक बैंक घोटाले ने केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं किया, बल्कि बुजुर्गों और बीमार जमाकर्ताओं को इलाज के लिए भी मोहताज कर दिया है। वर्षों बीत जाने के बाद भी पीड़ित न्याय की प्रतीक्षा में हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और न्याय व्यवस्था कब तक पीड़ितों को वास्तविक राहत दिला पाती है।

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