प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,
“लोग सोचते हैं कि नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने हैं, 50 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने और 25 वर्षों से सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। लेकिन इन सबसे ऊपर मेरी पहचान एक बीजेपी कार्यकर्ता की है। यही मेरा सबसे बड़ा गर्व है।”
संगठन, अनुशासन और आत्ममंथन पर जोर
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने बीजेपी के निरंतर विस्तार और चुनावी सफलता का श्रेय संगठनात्मक मजबूती, अनुशासन और कार्यकर्ता संस्कृति को दिया। उन्होंने कांग्रेस के पतन की तुलना करते हुए कहा कि 1984 में 400 से अधिक लोकसभा सीटें और लगभग 50 प्रतिशत वोट पाने वाली पार्टी आज 100 सीटें जीतने के लिए संघर्ष कर रही है।
मोदी ने कहा,
“कांग्रेस अपने पतन पर आत्मनिरीक्षण नहीं कर सकती, क्योंकि ऐसा करने से उस परिवार पर सवाल खड़े होंगे जिसने पार्टी को कब्ज़े में ले रखा है। परिवारवाद लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन है।”
उन्होंने बिना नाम लिए विपक्ष के उस आरोप का भी जवाब दिया, जिसमें चुनावी हार के लिए चुनाव आयोग और बीजेपी की मिलीभगत की बात कही जाती है, और इसे हार से बचने का बहाना करार दिया।
‘बीजेपी अलग सोच के साथ आगे बढ़ी’
प्रधानमंत्री ने 2002 के गुजरात विधानसभा चुनावों का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारी जीत के बावजूद वह हारी हुई सीटों की समीक्षा के लिए बैठक कर रहे थे।
“बीजेपी शुरू से ही आत्ममंथन करने वाली पार्टी रही है। यही वजह है कि आज वह राष्ट्रीय से लेकर स्थानीय स्तर तक शासन की पसंदीदा पार्टी बन चुकी है।”
उन्होंने हाल के विधानसभा और नगर निगम चुनावों में बीजेपी की “अभूतपूर्व स्ट्राइक रेट” का उल्लेख किया।
घुसपैठ, राष्ट्रीय सुरक्षा और ‘शहरी नक्सल’
पीएम मोदी ने अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय असंतुलन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दुनिया के कई शक्तिशाली और समृद्ध देश भी घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कदम उठा रहे हैं।
“कोई भी देश अवैध घुसपैठ को स्वीकार नहीं करता। भारत भी अपनी ज़मीन पर अवैध लोगों को बर्दाश्त नहीं कर सकता। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।”
उन्होंने वोट-बैंक की राजनीति के लिए घुसपैठियों को संरक्षण देने वाली पार्टियों को बेनकाब करने की अपील की। साथ ही ‘शहरी नक्सलियों’ पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साजिश रच रहे हैं, लेकिन देश में माओवाद अब अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है।
नए अध्यक्ष को ‘रिपोर्टिंग’
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा कि वह अपने काम का हिसाब नए पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन को दे रहे हैं, जो उनकी “गोपनीय रिपोर्ट” तैयार करेंगे। इस टिप्पणी पर सभागार तालियों से गूंज उठा।
नितिन नबीन के नेतृत्व में बीजेपी संगठन को और मजबूत करने तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।