
जैसे-जैसे सर्दियों का मौसम नजदीक आता है, वैसे-वैसे घरों में चाय का सेवन भी बढ़ने लगता है। ठंड से राहत पाने और शरीर को गर्म रखने के लिए लोग दिन में कई बार चाय पीते हैं। कई लोगों के लिए सुबह की शुरुआत और शाम की थकान बिना चाय के अधूरी लगती है। लेकिन आयुर्वेद सिर्फ स्वाद या तात्कालिक गर्माहट के लिए चाय पीने को पूरी तरह सही नहीं मानता। आयुर्वेद के अनुसार खान-पान हमेशा शरीर के दोष, पाचन शक्ति और मौसम के अनुरूप होना चाहिए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सर्दियों में ज्यादा चाय पीना फायदेमंद है या धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।
आयुर्वेद चाय के बारे में क्या कहता है
लोकल 18 से बातचीत में डॉ. राजकुमार (आयुष) ने बताया कि सर्दियों में शरीर में कफ दोष स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। ठंड का असर पाचन अग्नि पर भी पड़ता है। चाय में मौजूद कैफीन, दूध और चीनी का अधिक सेवन पाचन अग्नि को कमजोर कर सकता है। जब पाचन सही ढंग से काम नहीं करता, तो गैस, एसिडिटी, भारीपन और कब्ज जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
आयुर्वेद के अनुसार चाय ऊपर से शरीर को गर्म महसूस कराती है, लेकिन अंदर से कफ को बढ़ाकर शरीर का संतुलन बिगाड़ सकती है।
ज्यादा चाय पीने के नुकसान
अधिक मात्रा में चाय पीने से सर्दी-जुकाम और बलगम की समस्या बढ़ सकती है। खासतौर पर दूध वाली चाय कफ को और ज्यादा बढ़ाती है, जिससे नाक बंद रहना, गले में खराश और खांसी जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
इसके अलावा चाय में मौजूद टैनिन आयरन के अवशोषण को कम करता है। लंबे समय तक ज्यादा चाय पीने से कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। आयुर्वेद यह भी मानता है कि बार-बार चाय पीने से शरीर उस पर निर्भर हो जाता है और बिना चाय के सिरदर्द, चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
सर्दियों में चाय के बेहतर विकल्प
आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में ऐसे पेय ज्यादा फायदेमंद होते हैं, जो हल्की लेकिन स्थायी गर्माहट दें।
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अदरक, तुलसी, दालचीनी या सौंठ से बनी हर्बल चाय
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गुनगुना पानी, जीरा पानी या हल्का काढ़ा
ये न सिर्फ शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं, बल्कि पाचन को मजबूत करते हैं और इम्युनिटी बढ़ाने में भी मददगार होते हैं।
अगर कोई व्यक्ति चाय छोड़ नहीं सकता, तो आयुर्वेद दिन में एक या दो कप से ज्यादा चाय न पीने की सलाह देता है। साथ ही खाली पेट चाय पीने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
सर्दियों में चाय का सीमित सेवन नुकसानदेह नहीं है, लेकिन जरूरत से ज्यादा चाय पीना धीरे-धीरे सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। आयुर्वेद के अनुसार संतुलन ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है, इसलिए चाय के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक और प्राकृतिक विकल्पों को अपनाना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।