एक ही फिटनेस सेंटर पर आठ जिलों का दबाव, जबलपुर संभाग के वाहन मालिक परे

जबलपुर। जबलपुर संभाग के हजारों वाहन मालिकों के लिए वाहनों के फिटनेस प्रमाणन की प्रक्रिया अब परेशानी का कारण बनती जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नए आदेश के तहत अब व्यावसायिक और सवारी वाहनों की फिटनेस जांच जिला स्तर पर नहीं होगी। इसके बजाय जबलपुर संभाग के आठ जिलों के सभी वाहनों को फिटनेस प्रमाणन के लिए जबलपुर स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) पहुंचना अनिवार्य कर दिया गया है।

इस आदेश के बाद जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, कटनी, मंडला और डिंडौरी जिलों के वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ गई है। संभाग में फिलहाल सिर्फ एक ही ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन कार्यशील है, जबकि हर माह हजारों वाहनों को फिटनेस प्रमाणन की जरूरत होती है।

बढ़ेगा खर्च, बढ़ेगी मुश्किल

वाहन चालकों का कहना है कि दूर-दराज जिलों से जबलपुर तक वाहन लाना बेहद महंगा सौदा साबित हो रहा है। फिटनेस शुल्क भले ही करीब एक हजार रुपये है, लेकिन ईंधन, चालक-खलासी, आवागमन, ठहराव और अन्य खर्च जोड़ने पर कुल खर्च 10 से 12 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। खासकर छिंदवाड़ा, बालाघाट और मंडला जैसे जिलों से आने वाले ऑटो और छोटे वाहन चालकों के लिए यह प्रक्रिया आर्थिक बोझ बन गई है।

अव्यवस्था और अवैध वसूली की आशंका

परिवहन से जुड़े संगठनों ने आशंका जताई है कि सीमित संसाधनों और अत्यधिक दबाव के चलते ATS में अव्यवस्था बढ़ सकती है। पहले भी जबलपुर के ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन में अनियमितताओं और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में पूरे संभाग की निर्भरता एक ही केंद्र पर होने से स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

200 से बढ़कर 1600 वाहन प्रतिमाह

जानकारों के अनुसार पहले जिला स्तर पर प्रतिमाह औसतन 200 वाहनों की फिटनेस जांच होती थी। नए आदेश के बाद आठ जिलों से मिलाकर हर माह 1600 से अधिक वाहन जबलपुर पहुंच सकते हैं। ऑटो से लेकर कार और ट्रक तक सभी निजी और कमर्शियल वाहनों की फिटनेस इसी एक केंद्र पर होनी है।

एक दिन में जांच न होने पर रुकने की मजबूरी

कई मामलों में एक ही दिन में फिटनेस जांच पूरी नहीं हो पाती, जिससे वाहन चालकों को जबलपुर में रुकना पड़ता है। इससे उनका खर्च और बढ़ जाता है और कामकाज भी प्रभावित होता है।

जिला कार्यालय प्रक्रिया से बाहर

परिवहन विभाग के अनुसार नए आदेश के तहत जिला परिवहन कार्यालयों को फिटनेस जांच की प्रक्रिया से पूरी तरह अलग कर दिया गया है। अब फिटनेस केवल नजदीकी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन में ही होगी और इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य की गई है।

पुराने आरोपों के बीच नया आदेश

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर पूरे संभाग के वाहनों की निर्भरता तय की गई है, वही केंद्र पहले अनियमितताओं के आरोपों के चलते निलंबित रह चुका है। ऐसे में नए आदेश के बाद वाहन मालिकों की परेशानी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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