
नर्मदापुरम। पड़ोसी देश पाकिस्तान का प्रसिद्ध ‘लाहौरी नमक’ इन दिनों नर्मदापुरम जिले के नगरों की सड़कों पर खुलेआम बिकता नजर आ रहा है। ट्रॉलियों में क्रिस्टल पत्थर जैसे दिखने वाले इस नमक को देखकर लोग आकर्षित हो रहे हैं और इसे खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। विक्रेता इसे पूरी तरह प्राकृतिक बताते हुए स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होने का दावा कर रहे हैं।
सेहत के दावे और बिक्री का गणित
लाहौरी नमक बेच रहे जोधपुर जिले के निवासी राकेश के अनुसार यह सेंधा नमक राजस्थान बार्डर क्षेत्र से आता है। उनका दावा है कि यह नमक बीपी, शुगर, पाचन तंत्र सहित कई बीमारियों में लाभदायक है। इसे ‘सेंधा रॉक सॉल्ट’ या ‘लाहौरी नमक’ के नाम से पहचाना जाता है और इसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं होती।
हालांकि, सवाल यह भी है कि क्या सड़क किनारे बिक रहे इस नमक की गुणवत्ता और शुद्धता की कोई आधिकारिक जांच हो रही है? स्वास्थ्य संबंधी दावे बिना वैज्ञानिक परीक्षण और प्रमाण के किए जा रहे हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए जोखिम भी बन सकते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: नाम में छिपा इतिहास
ऐतिहासिक रूप से सेंधा या सैन्धव नमक पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में सिंध, पश्चिमी पंजाब, सिंधु नदी से लगे क्षेत्रों और खैबर के कोहाट जिले से आता रहा है। ये सभी क्षेत्र वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित हैं, जहां यह नमक जमीन के भीतर प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।
‘सेंधा’ या ‘सैन्धव’ शब्द का अर्थ ही सिंधु क्षेत्र से आया हुआ है। चूंकि यह नमक लाहौर के रास्ते भारत पहुंचता था, इसलिए इसे ‘लाहौरी नमक’ कहा जाने लगा।
आयुर्वेद, आस्था और बाजार
आयुर्वेद में सेंधा नमक को स्वास्थ्य रक्षक माना गया है। भारतीय भोजन में उपयोग होने वाला काला नमक भी सेंधा नमक का ही एक रूप है, जिसे पाचन में सहायक बताया जाता है। यही कारण है कि आज भी लोग सामान्य नमक की तुलना में इसे अधिक सुरक्षित और लाभकारी मानते हैं।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च रक्तचाप या अन्य बीमारियों में किसी भी प्रकार के नमक का सेवन सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के इसके औषधीय उपयोग के दावे भ्रामक हो सकते हैं।