श्योपुर में बेमौसम बारिश से किसानों की फसलें तबाह, कलेक्टर अर्पित वर्मा ने खुद किया निरीक्षण

damage-crops

श्योपुर। जिले में रविवार से लगातार हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
श्योपुर, बड़ौदा और कराहल क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की धान, बाजरा और सोयाबीन की खड़ी फसलें (damage-crops) बारिश और जलभराव के कारण पूरी तरह नष्ट हो गई हैं।
कई किसानों ने धान की कटाई कर ली थी, लेकिन बारिश ने खुले में रखी फसलों को भी नुकसान पहुंचाया।
खेतों में पानी भर जाने से कई जगह अनाज सड़ने (damage-crops) की स्थिति बन गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

कलेक्टर अर्पित वर्मा ने किया प्रभावित इलाकों का दौरा

लगातार बढ़ते नुकसान (damage-crops) की सूचना मिलने पर कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने सोमवार को बड़ौदा, कराहल और ग्रामीण इलाकों का दौरा किया। उन्होंने राजस्व विभाग के एसडीएम, तहसीलदार और पटवारियों को निर्देश दिया कि तुरंत सर्वे कर किसानों की वास्तविक फसल क्षति का सटीक आंकलन कर रिपोर्ट कलेक्ट्रेट भेजी जाए।

कलेक्टर ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि — “किसी भी तरह की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रिपोर्ट गलत पाई गई या फर्जीवाड़ा हुआ तो संबंधित पटवारियों और राजस्व अधिकारियों को निलंबित किया जाएगा।”

कलेक्टर वर्मा के इस निर्देश के बाद जिला प्रशासन में हलचल मच गई है और राजस्व अमला फसलों का मूल्यांकन तेजी से कर रहा है।

बारिश से खेतों में खड़ी फसलें और कटाई के बाद रखा अनाज दोनों बर्बाद

रविवार से जारी भारी बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। जहां खेतों में धान और सोयाबीन की फसलें पानी में डूबी हुई हैं, वहीं कई किसानों की कटी हुई फसलें भी अब खराब (damage-crops) हो रही हैं।कई ग्रामीण इलाकों में किसानों ने बताया कि खेतों में पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।

बड़ौदा क्षेत्र के किसान रामपाल गुर्जर ने कहा —“हमने फसल काटकर घर के पास रख दी थी, लेकिन लगातार हो रही बारिश ने सब खराब (damage-crops) कर दिया। अब कुछ भी नहीं बचा।”

ऐसे में किसान न तो फसल बेच पा रहे हैं, न ही बीमा क्लेम की प्रक्रिया शुरू कर पा रहे हैं।

राजनीतिक दौरा और फोटो सेशन पर विवाद

फसल नुकसान के बाद किसानों से मिलने पहुंचे मुरैना-श्योपुर सांसद शिवमंगल सिंह तोमर, पूर्व मंत्री रामनिवास रावत और भाजपा जिला अध्यक्ष सहित कई नेता किसानों से मुलाकात करने गए। लेकिन इनका दौरा विवादों में घिर गया।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो वीडियो में देखा जा सकता है कि सांसद और अन्य नेता किसानों के खेतों में पहुंचकर फोटो खिंचवाने में व्यस्त हैं, जबकि किसान अपनी परेशानी बता रहे हैं।
वीडियो में ग्रामीणों ने नेताओं को घेरकर खरी-खोटी सुनाई और कहा कि —“फोटो खिंचवाने से किसानों का नुकसान पूरा नहीं होगा।”

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग नेताओं की आलोचना कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि “यह जनता के दुख पर फोटोशूट है, संवेदनहीन राजनीति की मिसाल।”

कलेक्टर का सख्त एक्शन, अधिकारी कर्मचारियों के अवकाश निरस्त

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अर्पित वर्मा ने जिले के सभी अधिकारी-कर्मचारियों के अवकाश रद्द कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस समय किसानों की मदद करना सबसे पहली प्राथमिकता है।
कलेक्टर ने किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।

📞 कंट्रोल रूम नंबर: 07530-222631, 07530-221459

उन्होंने बताया कि किसान किसी भी प्रकार की समस्या होने पर सीधे संपर्क कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने कृषि और राजस्व विभाग को किसानों की फसल बीमा क्लेम प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

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किसानों ने सांसद और अपर कलेक्टर को घेरा

सोशल मीडिया पर वायरल एक अन्य वीडियो में देखा गया कि जब सांसद शिवमंगल सिंह तोमर, अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय और अन्य अधिकारी किसानों से बात करने पहुंचे, तो किसानों ने उन्हें घेर लिया और अपनी शिकायतें रखीं।

किसानों ने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारी खेतों में नहीं पहुंचते और सर्वे केवल कागजों पर किया जाता है।
इस पर सांसद और अधिकारी जवाब देने के बजाय वहां से चले गए। वीडियो में दिखा कि जैसे ही किसानों ने सवाल शुरू किए, सांसद समेत कई नेता मौके से निकलने लगे, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई।

कलेक्टर के एक्शन की जनता ने की सराहना

वहीं दूसरी ओर कलेक्टर अर्पित वर्मा द्वारा प्रभावित इलाकों का लगातार निरीक्षण करने और तुरंत एक्शन लेने की जनता के बीच प्रशंसा हो रही है।
सोशल मीडिया पर लोग कलेक्टर की तारीफ करते हुए लिख रहे हैं —“ऐसे ही अफसरों की जरूरत है जो फाइलों से नहीं, खेतों से काम करते हैं।”

कलेक्टर वर्मा ने मौके पर राजस्व और कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए कि फसल नुकसान का मूल्यांकन पूरी पारदर्शिता से किया जाए और प्रभावित किसानों को त्वरित राहत राशि दिलाई जाए।

प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती: राहत पहुंचाना और विश्वास बनाए रखना

श्योपुर जिले में यह लगातार दूसरी बार है जब किसानों को मौसम की मार झेलनी पड़ी है। पिछले साल भी बेमौसम बारिश से सोयाबीन और बाजरा फसलों को भारी नुकसान हुआ था। इस बार नुकसान और व्यापक है।

प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा मिले और सर्वे में पारदर्शिता बनी रहे। कई बार ऐसी शिकायतें आती हैं कि जिनकी फसलें नहीं गिरीं, उन्हें भी राहत राशि मिल जाती है, जबकि वास्तविक पीड़ित किसान वंचित रह जाते हैं।

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